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अधिकारियों कर्मचारियों को डीए देने से पहले रिटायरमेंट के बाद राहत देने के मूड में मोहन सरकार
प्रदेश के कर्मचारियों को डीए का तोहफा नहीं मिला लेकिन मोहन सरकार (mohan government) ने रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राहत का निर्णय जरुर लिया गया है। पता चला है कि शासकीय सेवा में रहते आर्थिक गड़बड़ी या पद के दुरुपयोग की शिकायतों पर चलने वाली विभागीय जांच अब सेवानिवृत्ति के पहले पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया तय करने वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में मुख्य सचिव वीरा राणा को रिपोर्ट देगी। यह कदम सेवानिवृत्ति के बाद तक चलने वाली जांच को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव (mohan yadav) की आपत्ति जताने के बाद उठाया गया है। दरअसल, हर कैबिनेट बैठक में पांच-सात प्रकरण अधिकारियों-कर्मचारियों की विभागीय जांच पर निर्णय के लिए आते हैं। कमल नाथ सरकार में ऐसे प्रकरणों को कैबिनेट में लाने के स्थान पर निर्णय के लिए सामान्य प्रशासन मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बना दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई और फिर कैबिनेट में प्रकरण भेजे जाने लगे। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जब यह पता होता कि जिसकी जांच चल रही है, वह कब सेवानिवृत्त हो रहा है तो फिर प्रकरण का निराकरण सेवा में रहते ही हो जाना चाहिए। यदि वह दोषी है तो सेवा में रहते ही वसूली आदि की कार्रवाई आसानी से की जा सकती है। कर्मचारी को भी बार-बार दूरदराज से आना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की मंशा को देखते हुए मुख्य सचिव के निर्देश पर समिति बनाई गई है जो सेवानिवृत्ति के बाद लंबित विभागीय जांच से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और सेवानिवृत्ति से पहले ही जांच प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट देगी। समिति में अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार, डा.राजेश कुमार राजौरा, प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव और सचिव उमेश पांडव को शामिल किया है।

कर्मचारी हितैषी नहीं है प्रदेश की मोहन सरकार,कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही लाड़ली बहना योजना
प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री बदला तो लोगों को लगा था कि अब कुछ नया देखने को मिलेगा। सिर्फ बात नहीं बल्कि काम भी होगा। लेकिन लोगों की उन उम्मीदों पर अब पानी फिरना शुरु हो गया है। दरअसल लंबे समय से शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को उम्मीद थी कि उनका डीए मोहन सरकार (mohan government) जरुर देगी लेकिन नई सरकार का गठन होने के बाद कई कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन एक भी कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार में शासकीय कर्मचारियों के डीए पर चर्चा नहीं हुई। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों की मानें तो निकट भविष्य में फिलहाल कर्मचारियों को डीए मिलने की किसी प्रकार की कोई संभावना नहीं है। ऐसा नहीं है कि इस विषय की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) को नहीं है लेकिन वो कर्मचारियों के विषय पर बात करने के लिए किसी प्रकार से तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों की बात आती है तो सरकार मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार के पास फिलहाल बजट नहीं है जिसके कारण वो डीए नहीं दे पाएंगे। दरअसल कर्मचारियों के डीए के आड़े लाड़ली बहना योजना आ रही है। राज्य सरकार पर लाड़ली बहना योजना की हर महीने मिलने वाली किस्त इतनी भारी पड़ रही है कि अन्य विकास के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव सोच ही नहीं पा रहे हैं। इसके उलट बात करें तो केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों को 46 फीसदी मंहगाई भत्ता दे रही है और प्रदेश के शासकीय कर्मचारी सिर्फ 42 फीसदी ही मंहगाई भत्ता पा रहे हैं। खबर ये भी है कि केन्द्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केन्द्रीय कर्मचारियों का चार फीसदी मंहगाई भत्ता बढ़ाने वाली है। मतलब साफ है कि केन्द्र सरकार मप्र के शासकीय कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। मोहन सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लेकिन कर्मचारी सरकार के खिलाफ जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

शासकीय कर्मचारियों को अभी नहीं मिलेगा 4% डीए का लाभ,केन्द्र फिर देगा मंहगाई भत्ता
मप्र के 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को राज्य सरकार फिलहाल बढ़ा हुआ चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के मूड में नहीं है (mp government employees)। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस बारे में सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव से अब तक दो बाह मंहगाई भत्ते की फाइल चली,लेकिन मुख्य सचिव वीरा राणा के दफ्तर से लौटा दी गई। वहीं Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार जल्द ही मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की और पढ़ोत्तरी करने की योजना बना रही है। इस जानकारी के बाद प्रदेश के कर्मचारी संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। गौरतलब है कि मतदान से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्मचारियों को चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी। वोटिंग से चार दिन पहले धनतेरस के दिन 12 नवंबर को राज्य सरकार की ओक से भेजे गए प्रस्ताव पर तब आयोग ने ये कह कर रोक लगाई थी कि मतदान 17 दिसंबर को है तब तक इस निर्णय को स्थगित रखा जाए। मतदान खत्म होने के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार ने निर्वाचन आयोग के पास प्रस्ताव नहीं भेजा। मतलब साफ है कि वो चुनाव में फायदा लेने के लिए चार फीसदी मंहगाई भत्ता जोड़ना चाहते थे। नई सरकार बनने के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उन्हे अब चार फीसदी मंहगाई भत्ता मिलेगा लेकिन दो बार फाइल चलने के बाद भी उस पर अंतिम मुहर नहीं लगी जिसके चलते अब राज्य के कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऊपर से केन्द्र सरकार एक बार फिर चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता देकर राज्य कर्मचारियों के जले में नमक छिड़कने का काम करने जा रहा है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने जुलाई 2023 में चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता और मंहगाई राहत दी थी। जिसके कारण केन्द्र के कर्मचारियों को कुल 46 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है और राज्य के कर्मचारियों को सिर्फ 42 फीसदी मंहगाई भत्ते पर ही संतोष करना पड़ रहा है। जबकि राज्य में भी केन्द्र के समान ही मंहगाई भत्ता देने की परंपरा रही है। राज्य सरकार के इस फैसले के कारण कर्मचारियों को दो से दस हजार रुपये तक का प्रतिमाह नुकसान उठाना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के इस रवैए के कारण प्रदेश के शासकीय कर्मचारी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ जाकर वोटिंग कर सकते हैं।

संविदा और आंगनबाड़ी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर,सरकार ने बनाया खास प्लान
मप्र में संविदा कर्मचारियों (samvida workers) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं (anganwadi workers) समेत कई वर्ग के कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश के आयुष्मान भारत “निरामयम” में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, अन्य संविदा कर्मियों को शामिल करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यों की एक समिति गठित की गई है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ स्वीकृत करने के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी करेगी। इसके तहत हर परिवार को इलाज के लिए हर साल पांच लाख रुपये तक दिए जाएंगे। राज्य शासन ने प्रदेश के शासकीय कर्मचारी/कार्यकर्ता, संविदा कर्मियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत “निरामयम” में शामिल किये जाने के संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति के सदस्य सचिव मुख्य कार्यपालन अधिकारी, आयुष्मान भारत निरामयम मध्यप्रदेश होंगे। समिति में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, अपर मुख्य सचिव वित्त विभाग, प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सदस्य होंगे। समिति प्रदेश के शासकीय कर्मचारी/कार्यकर्ता / संविदा कर्मियों को आयुष्मान भारत “निरामयम” प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत, पूर्व में स्वीकृत पात्र श्रेणियों में सम्मिलित हितग्राहियों के अतिरिक्त, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, आँगनवाड़ी सहायिका, मिनी आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं ऊषा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर, कोटवार एवं संविदा कर्मियों को प्रतिवर्ष, प्रति परिवार, 5 लाख रूपये का स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ स्वीकृत करने के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी करेगी।दरअसल, हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने संविदा कर्मचारियों, आंगनबाड़ी, आशा-ऊषा कार्यकर्ता, सहायिका, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, कोटवार सहित अन्य कर्मचारियों के संवर्ग को भी आयुष्मान कार्ड का लाभ देने का फैसला किया है , इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आदेश भी जारी किए जा चुके है। इसके तहत इन सभी कर्मियों को प्रतिवर्ष प्रति परिवार 5 लाख रूपये का स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ स्वीकृत किया गया है।खास बात ये है कि आयुष्मान भारत निरामयम योजना में पूर्व में स्वीकृत पात्र श्रेणियों में इन नई श्रेणियों को भी शामिल किया गया है।आयुष्मान योजना में कुछ परिवारों को अपात्र भी घोषित किया गया है। योजना का लाभ उन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा, जिनके परिवार का कोई भी सदस्य गत तीन वर्षों में से किसी भी वर्ष में आयकर दाता हो। परिवार का कोई सदस्य किसी अन्य शासकीय योजना से नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकता हो या जिस परिवार का कोई सदस्य शासकीय कर्मचारी होने के साथ-साथ राज्य या केंद्र सरकार की किसी अन्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त करने के लिए पात्र हो वह इसका लाभ नहीं ले सकता है। शासकीय कर्मचारी के उपचार पर होने वाले संभावित व्यय की प्रतिपूर्ति स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत प्रविधानित कर की जाएगी।

शासकीय कर्मचारियों को एक से पांच तारीख तक वेतन नहीं मिला तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारायों (government employees) को एक से पांच तारीख के अंदर वेतन नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। समस्त आहरण संवितरण कार्यालयों के प्रत्येक शासकीय सेवक का मासिक वेतन आगामी माह की 05 तारीख तक न होने की स्थिति में, विलंब के लिये संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी की जबावदेही होगी। शासन स्तर पर स्पष्ट निर्देश के बावजूद यह देखने में आ रहा है कि कुछ कार्यालयों द्वारा संदर्भित पत्र में दिये गये निर्देशों की अवहेलना की जाकर जा रही है। मासिक वेतन का नियत समत पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप शासकीय सेवकों के वेतन में अनावश्यक विलंब की स्थिति निर्मित हो रही है। इसके अतिरिक्त अधिकाशं कार्यालय उनके अधीनस्थ अधिकारियों / कर्मचारियों का मासिक वेतन स्टॉप सैलरी पेमेंट के माध्यम अथवा विलंब से आहरित करते हैं, किन्तु स्टॉप सैलरी पेमेंट एवं विलंब से भुगतान के संबंध में, उसका कारण एवं सक्षम स्वीकृति संलग्न नही की जाती है, जिससे त्रुटिपूर्ण भुगतान एवं वित्तीय अनियमितता / गबन की स्थिति बन रही है। स्पष्ट किया गया है कि, प्रत्येक माह के अंतिम कार्य दिवस के 02 दिवस पूर्व समस्त प्रकार के वेतन देयक पारित किये जाने हेतु कोषालय में ऑनलाईन प्रेषित किया जाना है।

एमपी के संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, कर्मचारियों के वेतनमान में 8% की वृद्धि
मप्र के संविदा कर्मचारियों (samvida workers) के लिए बड़ी खबर है, Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कर्मचारियों के वेतनमान में 8% की वेतन वृद्धि होने जा रही है। प्रदेश सरकार अब शासकीय कर्मचारियों और संविदा कर्मचारियों (samvida) के वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते में वृद्धि कर रही है। ताकि प्रदेश में शासकीय और संविदा कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का लाभ मिल सके। मध्य प्रदेश में शासकीय और संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके लिए कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और एरियर भी दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने अब शासकीय और संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि महंगाई भत्ते में भी वृद्धि की जाएगी और कर्मचारियों को एरियर भी दिया जाएगा।प्रदेश में 750000 शासकीय कर्मचारी हैं और 250000 संविदा कर्मचारी हैं। अब उनके वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते की कैलकुलेशन की जा रही है। वित्त विभाग ने बताया कि इन कर्मचारियों को पिछला महंगाई भत्ता और एरियर भी देना होगा। बता दे की कर्मचारियों की महंगाई भत्ते में 8% की वृद्धि की जाने के लिए कहा गया है। मध्य प्रदेश सरकार में अभी कर्मचारियों को 42% महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। और केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2024 से 50% महंगाई भत्ता दिया जाएगा। आपको जानकारी लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और केंद्र के कर्मचारियों के बीच 8% महंगाई भत्ते का अंतर देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश में प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों को 4% महंगाई भत्ता देने की बात कही थी। लेकिन कर्मचारियों को इसका भुगतान नहीं किया गया।

एमपी के शासकीय कर्मचारियों के लिए सरकार का खुलेगा खजाना,जल्द मिलेगा डीए
राज्य सरकार फरवरी में आने वाले वोट एंड अकाउंट (लेखानुदान) में कर्मचारियों को 7 से 8 प्रतिशत तक डीए (mp government employees DA) बढ़ाए जाने का वित्तीय प्रावधान करने जा रही है। दरअसल, मार्च 2025 तक कर्मचारियों का डीए 14% तक बढ़ाए जाने का की व्यवस्था की जा रही है। इसके बाद यह 56% हो जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024,25 में 6000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है। अभी राज्य के 7.50 लाख कर्मचारियों को 42% डीए मिल रहा है। जो केंद्रीय कर्मचारियों को मिल रहे 46% से 04% कम है। हालांकि इस भुगतान के लिए की विश्व विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री और सचिवालय को भेज दिया है। जिस पर मंजूरी मिलना बाकी है। गौरतलब है कि मप्र विधानसभा चुनाव होने की वजह से चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो गई थी। इसलिए एक जुलाई 2023 से लंबित 4% प्रतिशत लंबित डीए का भुगतान नहीं किया जा सका है। इस बड़े हुए दिए का भुगतान किया जाता है तो यह खर्च 1280 करोड़ रुपये होगी। इसराज को फिलहाल अभी वोट एंड अकाउंट में शामिल नहीं किया गया है।

सरकारी कर्मचारियों की CM से DA में बढ़ोतरी की मांग,DA नहीं बढ़ने से नाराज कर्मचारी
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी न होने को लेकर राज्य के कर्मचारी संघ में नाराजगी देखने को मिल रही है (dearness allowance), राज्य के कर्मचारियों को प्रदेश सरकार की तरफ से लगातार यह आश्वासन दिया जा रहा था कि उनके DA में नए साल तक बढ़ोतरी की जाएगी लेकिन साल 2024 भी शुरू हो गया और लगभग 5-6 दिन बीत चुके हैं और शासकीय कर्मचारियों को अभी तक मोहन यादव (mohan yadav) सरकार की तरफ से महंगाई भत्ते को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई है। कर्मचारी संगठन के महंगाई भत्ते में हो रही देरी के कारण राजकीय कर्मचारियों की CM डॉ मोहन यादव के प्रति नाराजगी बहुत तेजी से बढ़ रही है। महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर पिछले दिनों वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्ताव मुख्यमंत्री ऑफिस भेजा गया था जिस पर आखिरी फैसला नवनियुक्त CM डॉ मोहन यादव को लेना है। महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर राज्य कर्मचारियों के साथ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से DA को 4% बढ़ाने की डिमांड रख रहे हैं। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने DA और अन्य भत्तों को बढ़ाने की मांग राज्य सरकार के समक्ष रखी है। राज्य कर्मचारी सहित तृतीय वर्ग के कर्मचारियों को लंबे समय से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार है। तृतीय वर्ग के कर्मचारी संघ ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से महंगाई भत्ते में 4 फीसदी बढ़ोतरी के साथ पदोन्नति, मकान किराया और वाहन भत्ते को बढ़ाने की मांग की है। कर्मचारियों को अंतिम महंगाई भत्ता जुलाई माह में मिला था जिसके अब 6 महीने बाद तक कर्मचारियों को महंगाई भत्ते सहित अन्य भत्तों में वृद्धि का इंतजार है। अभी पिछले दिनों तृतीय वर्ग के कर्मचारी संघ द्वारा CM डॉ मोहन यादव और मुख्य सचिव वीराना को पत्र लिखा गया था जिसमें महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ DR में बढ़ोतरी करने वाली घोषणाओं को पूरा करने की मांग की है। वर्तमान में कर्मचारियों को 7वे वेतन आयोग के अनुसार 42% महंगाई भत्ता मिलता है जिसको जुलाई 2023 से नहीं बढ़ाया गया। कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की बढ़ोतरी की जानी है।

शासकीय कर्मचारियों को 4% डीए की जल्द मिलेगी सौगात,सीएम यादव जल्द करेंगे घोषणा
मोहन सरकार ने सरकारी खजाना खोलने का मन बना लिया है और अब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी कर उनको नए साल का उपहार देने वाले हैं (madhya pradesh government)। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने मध्य प्रदेश के तकरीबन 7.5 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में इजाफा करने का फैसला कर लिया है। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर वित्त विभाग द्वारा प्रस्ताव भी तैयार कर दिया गया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक CM डॉ. मोहन यादव द्वारा कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी करने से राज्य सरकार को भारी बजट तैयार करना पड़ सकता है (mp government employees)। नए साल के शुभ अवसर पर राज्य के 7.5 लाख कर्मचारियों को CM डॉ. मोहन यादव द्वारा महंगाई भत्ते में 4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी करने की कभी भी घोषणा की जा सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि कर्मचारियों को वर्तमान में 42 फ़ीसदी महंगाई भत्ता मिलता है। आने वाले नए साल के शुभ अवसर पर राज्य के 7.5 लाख कर्मचारियों को CM डॉ. मोहन यादव द्वारा महंगाई भत्ते में 4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी करने की घोषणा की जा सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि कर्मचारियों को वर्तमान में 42 फ़ीसदी महंगाई भत्ता मिलता है। और साल 2024 में CM डॉ. मोहन यादव राज्य के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का उपहार देने वाले हैं। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को प्रतिवर्ष जनवरी और जुलाई के महीने में ही बढ़ाया जाता है। राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का प्रस्ताव वित्त विभाग में मुख्यमंत्री कार्यालय में भेज दिया है अब इंतजार है तो बस CM मोहन यादव की घोषणा का। मध्य प्रदेश राज्य के सरकारी कर्मचारियों को वर्तमान में 42% महँगाई भत्ता राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी यानी की 42 फ़ीसदी से बढ़ाकर 4 फ़ीसदी करने की घोषणा सीएम यादव करने वाले हैं। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में पहले ही 4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 46 फ़ीसदी कर दिया गया है इसके बाद राज्य में भी DA में बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य सरकार ने मुख्य निर्वाचन के समक्ष रखा था पर विधानसभा चुनाव की निकटता के कारण प्रस्ताव को मंजूरी देने में देरी हुई इसलिए अब इस प्रस्ताव को पुनः वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा है। 7.5 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 4 फीसदी बढ़ोतरी करने पर राज्य सरकार को 480 करोड़ो रुपए का बोझ झेलना पड़ सकता है।

नए साल में शासकीय कर्मचारियों को सीएम मोहन यादव की सौगात,पहली तारीख को मिलेगा वेतन
मध्य प्रदेश के समस्त कर्मचारियों (mp government officers) के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने सभी कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को नए साल के पहले दिन ही सैलिरी दी जाए। भोपाल के कलेक्टर आशीष सिंह ने जिला अधिकारी को निर्देश दिया है कि प्रत्येक माह की एक तारीख को सभी शासकीय सेवकों को वेतन का भुगतान किया जाएगा। सभी कार्यालय को प्रत्येक शासकीय सेवकों का मासिक वेतन आगामी माह की 5 तारीख तक ना होने की स्थिति में विलंब के लिए संबधित अधिकारियों की जवाबदेही होगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को नए साल के पहले ही दिन सैलरी मिलनी चाहिए। निर्देश में यह भी बताया गया है कि सही तारीख पर सही प्रकार के वेतन को पारित करने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। कलेक्टर ने आधिकांश कार्यालयों के अधिकारियों को वेतन विलंब और स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी दी है, ताकि स्थिति में सुधार किया जा सके और कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके। मध्यप्रदेश में वेतन को लेकर कर्मचारियों ने अपने नाराजगी को जाहिर किया है। इसको लेकर राजधानी भोपाल के कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी किए हैं। नए साल के शुभ अवसर पर कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी खुश खुशखबरी दी है कि अब कर्मचारियों को समय पर उनका वेतन मिलेगा। विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अपनी जिम्मेदारियां को बहुत अच्छे से निभा रहे हैं और वह एक-एक करके सभी पहलुओं को सुलझा भी रहे हैं।