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सीएम मोहन यादव ने शासकीय सेवकों के डीए की मंगाई फाइल,मिल सकती है खुशखबरी
भोपाल

सीएम मोहन यादव ने शासकीय सेवकों के डीए की मंगाई फाइल,मिल सकती है खुशखबरी

केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों (central government employees) का चार फीसदी डीए एक बार फिर बढ़ा दिया है। अब केन्द्रीय कर्मचारियों को कुल 50% डीए मिल रहा है लेकिन मप्र के शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को अब भी 42% प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है। केन्द्र सरकार की तरफ से चार फीसदी फिर डीए बढ़ाए जाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कर्मचारियों के डीए की फाइल को फिर मंगवा लिया है। कैबिनेट में इस बात पर फैसला लेना है कि, महंगाई भत्ता का भुगतान किस तारीख से किया जाना है और एरियर की राशि किस प्रकार देना है। इसके अलावा लगभग 5.47 लाख पेंशनर्स को महंगाई राहत भी दी जानी है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले पेमेंट नहीं करना पड़ेगा क्योंकि एक सरकारी कागज के माध्यम से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकार, पेंशनर्स को परेशान करती रहती है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता इसी महीने के दूसरे सप्ताह में लग सकती है। इसके पहले सरकार कर्मचारियों का डीए और पेंशनर्स का डीआर देने की तैयारी में है। मप्र में कर्मचारियों का 1 जुलाई 2023 से 4% डीए बकाया है। उनका हिसाब बराबर करने डीए का 9 महीने का एरियर देना होगा। इस मामले में 4% डीए देने का प्रस्ताव तो वित्त विभाग ने तैयार कर भेजा हुआ है, जिस पर मुख्यमंत्री से चर्चा कर अंतिम फैसला लिया जाना है। प्रस्ताव के अनुसार कर्मचारियों का 4% डीए का भुगतान करने पर हर महीने 180 से 190 करोड़ रुपए हर महीने का अतिरिक्त खर्च आना है। एरियर का भुगतान करने पर यह खर्च 1700 करोड़ रुपए होगा। वहीं आगामी 1 अप्रैल से 31 मार्च 2025 तक बढ़े हुए डीए का अतिरिक्त खर्चा 2280 करोड़ रुपए होगा। पेंशनर्स को 4 प्रतिशत महंगाई राहत दिए जाने पर हर महीने 80 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्चा आना है। हालाकि इसके लिए सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव पारित कर प्रति छत्तीसगढ़ को भेजना होगा, वहां से सहमति मिलने के बाद पेंशनर्स को डीआर दिए जाने के आदेश जारी किए जा सकेंगे।

9/3/202421335
डीए में केन्द्रीय कर्मचारियों से 8% पीछे हुए राज्य के शासकीय कर्मचारी
भोपाल

डीए में केन्द्रीय कर्मचारियों से 8% पीछे हुए राज्य के शासकीय कर्मचारी

केन्द्रीय कर्मचारियों (central government employees) को एक जनवरी 2024 से 50 प्रतिशत की दर से मंहगाई भत्ता मिलेगा। गुरुवार को केन्द्र सरकार ने चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया है। वहीं प्रदेश के सात लाख नियमित कर्मचारियों को अभी 42 प्रतिशत की दर से मंहगाई भत्ता मिल रहा है। इस प्रकार अब केन्द्रीय कर्मचारियों की तुलना में प्रदेश के शासकीय (mp government employees) मंहगाई भत्ते के मामले में आठ प्रतिशत पीछे हो गए हैं। मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की वृद्धि विस चुनाव के समय से लंबित है। केन्द्र ने जुलाई 2023 से अपने कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता और पेंशनरों की मंहगाई राहत में चार प्रतिशत की वृद्धि कर 46 प्रतिशत कर दी थी। तत्कालीन शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग को मंहगाई भत्ते में वृद्धि का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन मतदान के प्रभावित होने की संभावना से अनुमति नहीं मिली थी। चुनाव के बाद से इसकी फाइल चल रही है पर सरकार अंतिम निर्णय अब तक नहीं ले पाई है। इस बीच मोहन सरकार ने परिपाटी तोड़ते हुए अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों का मंहगाई भत्ता जनवरी 2024 से केन्द्रीय कर्मचारियों के समान चार प्रतिशत बढ़ा कर 46 प्रतिशत कर दिया था। इस मामले में वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हमारी तैयारी हो चुकी है। सरकार के स्तर पर जैसे ही अंतिम निर्णय होगा,कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते में वृद्धि कर दी जाएगी।

8/3/2024161
शासकीय कर्मचारियों के वोट की भाजपा को नहीं जरुरत,इसी लिए डीए पर नहीं किया विचार
भोपाल

शासकीय कर्मचारियों के वोट की भाजपा को नहीं जरुरत,इसी लिए डीए पर नहीं किया विचार

प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने लोकसभा चुनाव में वोट लेने के लिए अलग-अलग वर्गों को साधने का प्लान तैयार कर लिया है। यही कारण है कि मोहन सरकार ने शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को चार फीसदी लंबित डीए देने के मामले में चुप्पी साध ली है। प्रदेश की भाजपा सरकार का सोचना है कि जिस प्रकार से लाड़ली बहनों ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर माला माल किया है ठीक उसी प्रकार से लोकसभा चुनाव में भी लाड़ली बहनें भाजपा के उम्मीदवारों को मोदी के नाम पर वोट देंगी। हाल ही में इसकी झलक पीएम मोदी के भाषण में भी सुनने को मिली जब उन्होने एक बड़ी सभा में कहा कि देश की सभी महिलाएं उनकी बहन और परिवार हैं। मतलब साफ है कि भाजपा को शासकीय कर्मचारियों से ज्यादा देश और प्रदेश की महिलाओं पर विश्वास है। महिलाओं के अलावा भाजपा ने किसानों को भी अपने वोट बैंक का हिस्सा माना है। फरवरी की अंतिम तारीख को पीएम मोदी ने किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि की राशि डाली थी और उसके बाद Mukhbirmp.com ने शिवराज सरकार द्वारा संचालित किसान कल्याण योजना को मोहन सरकार को याद दिलाया तब मोहन सरकार ने भी छह मार्च को किसानों के खाते में डाल दिया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की तरफ से संचालित किसान कल्याण योजना को प्रदेश की मोहन सरकार भूल गई थी जब इस मामले में Mukhbirmp.com ने खबर प्रकाशित की तो उसके अगले दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राशि डालने की घोषणा की और फिर छह मार्च को यह राशि किसानों के खाते में डाल दी गई है। अब भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि प्रदेश की महिलाओं,किसानों और युवाओं को साध लिया जाएगा तो शासकीय कर्मचारियों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। यही कारण है कि प्रदेश की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों के चार फीसदी डीए पर किसी भी प्रकार का फैसला नहीं कर रही है जबकि विधानसभा के बजट सत्र में कर्मचारियों के डीए को लेकर प्राविधान किया गया था लेकिन मोहन सरकार यह मान कर चल रही है कि कर्मचारियों को डीए देने का मतलब सीधे तौर पर फिजूल खर्ची है उससे ज्यादा कुछ नहीं।

7/3/20243182
शासकीय कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही 'मोदी की गारंटी' डीए के प्रस्ताव पर अब तक मंजूरी नहीं
भोपाल

शासकीय कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही 'मोदी की गारंटी' डीए के प्रस्ताव पर अब तक मंजूरी नहीं

मध्यप्रदेश की करीब साढ़े सात लाख कर्मचारियों का डीए पिछले छह महीने से लंबित है जिसके चलते प्रति माह शासकीय सेवकों को चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। विधानसभा चुनाव में आचार संहिता के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डीए को लेकर पैरवी की थी लेकिन निर्वाचन आयोग की तरफ से उसकी अनुमति नहीं मिली थी। कर्मचारियों को लगा था कि चुनाव समाप्त होने के बाद उनका अधिकार उन्हे मिल जाएगा लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि शासकीय सेवकों के डीए का प्रस्ताव सरकार के पास नहीं पहुंचा है। अब तक नई सरकार बनने के बाद तीन से अधिक बार शासकीय सेवकों (mp government employees) के डीए का प्रस्ताव मुख्यसचिव के टेबल पर गया और उसी तरह सीएम मोहन यादव के टेबल पर भी प्रस्ताव गया लेकिन हर बार मुख्यमंत्री ने यह कह कर प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि अभी बजट नहीं है आगे देखेंगे। अब लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने वाली है। अभी तक राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों का चार फीसदी डीए देने पर किसी प्रकार का विचार नहीं किया है। मंत्रालय में मौजूद Mukhbir का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के एक या दो दिन पहले मुख्यमंत्री डीए देने की घोषणा कर सकते हैं जिससे लोकसभा चुनाव में शासकीय सेवकों का वोट लिया जा सके। जबकि सोमवार को मोहन कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी जिसमें धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा अन्य प्रस्तावों पर चर्चा हुई और उनमें सहमति भी बनी लेकिन इस कैबिनेट में भी शासकीय कर्मचारियों के डीए पर सरकार ने मुहर नहीं लगाई है। सरकार का मानना है कि 'मोदी की गारंटी' पर जनता को विश्वास है लिहाजा जनता भाजपा के प्रत्याशियों को ही चुनाव जिताएगी शासकीय सेवकों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। वहीं कर्मचारी संगठनों की नाराजगी अब धीरे-धीरे सतह पर आने लगी है। कर्मचारी नेताओं का साफ कहना है सरकार ने उनको सिर्फ ठगने का काम किया है सिर्फ आश्वासन देने का काम किया जा रहा है जिसे अब कर्मचारी भी समझ चुके हैं।

5/3/2024354
प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को अचार संहिता लगने से पहले मिलेगा डीए,सरकार ने बनाई कार्ययोजना
भोपाल

प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को अचार संहिता लगने से पहले मिलेगा डीए,सरकार ने बनाई कार्ययोजना

मध्य प्रदेश के सात लाख से अधिक शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को आठ माह से चार प्रतिशत महंगाई भत्ते की वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं (mp government employees)। विधानसभा चुनाव के समय शिवराज सरकार ने राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 42 से बढ़ाकर 46 प्रतिशत करने का प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजा था, लेकिन तब मतदान के प्रभावित होने की संभावना के चलते अनुमति नहीं मिली। कर्मचारियों को आशंका है कि यदि मार्च के पहले पखवाड़े तक इस पर निर्णय नहीं हुआ तो मामला जून तक अटक जाएगा। हालांकि मोहन सरकार डीए बढ़ाने का मन बना रही है, इसके लिए सरकार ने अर्ध बजट में प्राविधान भी किया है लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री ने चार फीसदी डीए बढ़ाने की घोषणा नहीं की है। जिसके चलते शासकीय सेवकों में राज्य सरकार के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। जबकि केंद्र सरकार जुलाई 2023 से अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को 46 प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ता और राहत दे रही है। अभी तक जब भी केंद्र सरकार महंगाई भत्ते में वृद्धि करती थी तो मध्य प्रदेश शसरकार भी इसका लाभ अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को देती थी लेकिन इस बार मामला लंबा अटक गया। विधानसभा चुनाव के मतदान से पहले शिवराज सरकार ने चुनाव आयोग को महंगाई भत्ते व राहत में वृद्धि का प्रस्ताव भेजा था, जिसे अनुमति नहीं मिली। आचार संहिता के कारण और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि, इस बीच सरकार ने आइएएस, आइपीएस और आइएफएस अधिकारियों का चार प्रतिशत महंगाई भत्ता जुलाई 2023 से बढ़ा दिया। राज्य के कर्मचारी और पेंशनर भी मांग कर रहे हैं कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की तरह उनका भी महंगाई भत्ता और राहत बढ़ाया जाए। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार वित्त विभाग भी इसके लिए सभी तैयारी कर चुका है और सरकार के स्तर से निर्णय की प्रतीक्षा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा मार्च के पहले पखवाड़े में संभावित है। यदि इसके पहले सरकार ने निर्णय लेकर कर्मचारियों को लाभांवित नहीं किया तो फिर जून तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। मंत्रालय में पदस्थ सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव चुनाव आचार संहिता लगने से पहले कर्मचारियों को चार फीसदी डीए देने की घोषणा कर देंगे। जिससे कर्मचारियों की नाराजगी को दूर किया जा सके।

1/3/202419025
शासकीय कर्मचारियों को मोहन सरकार का तोहफा,होली के चलते एक मार्च को मिलेगा वेतन
भोपाल

शासकीय कर्मचारियों को मोहन सरकार का तोहफा,होली के चलते एक मार्च को मिलेगा वेतन

एमपी के शासकीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है (mp government employees)। प्रदेश की मोहन सरकार इस बार मार्च महीने की सैलिरी पहले ही कर्मचारियों के खाते में जनरेट कर देगी (mohan government)। गौरतलब है कि मार्च महीने में आठ तारीख को महाशिवरात्रि है और होली सहित अन्य पर्व भी हैं। जिसको देखते हुए लाड़ली बहना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी कर्मचारियों को भी सैलिरी का बड़ा तोहफा देने का काम करने जा रही है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर बड़ा निर्देश दिया गया है। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी आरडी चौधरी ने जिले के सभी आहरण संवितरण अधिकारियों से 27 फरवरी तक वेतन देयक जनरेट करने का अनुरोध किया है। कोषालय अधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी निर्धारित तारीख तक अनिवार्य रुप से वेतन देयक जनरेट कर दें। जिससे एक मार्च को शत प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जा सके। समय पर वेतन जनरेट न करने से मार्च की प्रथम तारीख को वेतन दिया जाना संभव नहीं हो पाएगा। जिन अधिकारी कर्मचारियों का वेतन किसी कारण वश रोका गया है उन्हे छोड़ कर शेष सभी के वेतन देयक जनरेट करने के निर्देश सख्ती से जारी किए गए हैं।

24/2/202416845
अब 65 वर्ष नहीं होगी शासकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की आयु,वित्त विभाग ने किया क्लियर
भोपाल

अब 65 वर्ष नहीं होगी शासकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की आयु,वित्त विभाग ने किया क्लियर

मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) की सेवानिवृत्ति की आयु अब 65 वर्ष नहीं होगी। पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि शासकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की सीमा बढ़ने वाली है। इस मामले में जहां युवाओं में सरकार के प्रति विरोध के स्वर निकलने लगे थे वहीं शासकीय कर्मचारी भी इस फैसले पर हैरान थे। कुछ कर्मचारी तो रिटायरमेंट आयु की सीमा बढ़ाए जाने से नाराज थे कुछ इसका समर्थन कर रहे थे। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मंत्रालय ने रिटायरमेंट एज लिमिट बढ़ाने से इनकार कर दिया है। यह मध्य प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए गुड न्यूज़ है लेकिन सरकार के लिए चिंता की बात है क्योंकि सरकार के पास रिटायर होने वाले कर्मचारियों को देने के लिए GPF और दूसरा फंड नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र-2023 में मप्र सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु में एकरूपता लाने का बिंदु शामिल था। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बीती 11 जनवरी को राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के पूर्व अध्यक्ष रमेश शर्मा ने मप्र के शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में एकरूपता लाने के लिए नोटशीट लिखी। जिसमें कहा गया कि शासकीय सेवकों की सेवानिवत्ति की आयु सीमा 62 से बढ़ाकर 65 करने पर शासन को विचार करना चाहिए। उन्होंने पदोन्नति नहीं होने की वजह से सरकारी विभागों में कैडर गड़बड़ाने और खाली पदों को लेकर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की फाइल मंत्रालय में दौड़ पड़ी थी। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने वित्त विभाग से खजाने पर पड़ने वाले भार के लिए अभिमत मांगा था। इसी बीच कई कर्मचारी संगठन व युवा सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का विरोध करने लगे। वहीं, अब वित्त विभाग ने सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का आईडिया ड्रॉप कर देने के लिए कहा है। विद्युत विभाग का कहना है कि अब इन कर्मचारियों को देने के लिए वेतन भी नहीं है।

16/2/202417121
शासकीय कर्मचारियों के लिए अंतरिम बजट में मोहन की सौगात,4% डीए और मंहगाई राहत देने का लिया संकल्प
भोपाल

शासकीय कर्मचारियों के लिए अंतरिम बजट में मोहन की सौगात,4% डीए और मंहगाई राहत देने का लिया संकल्प

लगभग दो महीने पुरानी डा. मोहन यादव की सरकार ने 1,45, 229 करोड़ रुपये का पहला अंतरिम बजट (interim budget) यानी लेखानुदान विधानसभा में प्रस्तुत किया। भाजपा के मिशन 370 को केंद्र में रखकर तैयार किए गए इस अंतरिम बजट में ' मोदी की गारंटी और विकसित मध्य प्रदेश' की झलक दिखाई दे रही है, जिसमें समाज के सभी वर्गो के विकास और कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूल मंत्र को अमलीजामा पहनाने का प्रयास अंतरिम बजट में किया गया है। मोदी की चार जाति गरीब, महिला, किसान और युवा वर्ग के कल्याण के लिए भरसक प्रयत्न किए गए हैं। कर्मचारियों और पेंशनर के लिए चार प्रतिशत डीए और महंगाई राहत का प्रविधान किया गया है। एक अप्रैल से 31 जुलाई तक के लिए महिलाओं की लाड़ली बहना (ladli behna) और अन्य योजनाओं के लिए 9438 करोड़ का प्रविधान किया गया है। किसानों को ब्याजरहित ऋण देने और स्थाई विद्युत पंप पर अनुदान देने के लिए कृषक मित्र योजना को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए 9593 करोड़ रुपये किसान कल्याण विभाग को दिए गए हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्वादन पर प्रतिलीटर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सड़क, औद्योगिक कारिडोर निर्माण और एक्सप्रेस वे को गति देने के लिए पीडब्ल्यूडी को 4098 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि ठेकेदारों के लंबित भुगतान पूरा कर नई परियोजनाओं के काम को तेज किया जा सके। स्वस्थ मध्य प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए एयर एंबूलेंस सेवा आरंभ की जाएगी। युवा वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पीएम एक्सीलेंस कालेज का निर्माण सभी जिलों में किया जाएगा। केरल की तरह पर्यटन क्षेत्र से रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने के लिए पांच पर्यटन केंद्रो तक हेलीकाप्टर चलाने की तैयारी मोहन सरकार ने अंतरिम बजट में की है। आदिवासी विकास के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने के लिए 23 जिलों में प्रधानमंत्री जनमन योजना को जमीन पर उतारने के लिए अनुसूचित जनजाति कल्याण के बजट में 7500 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। गरीब परिवार की महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मिलने वाली प्रसूति सहायता योजना के लिए 2024-25 के अंतरिम बजट (लेखानुदान) में 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।श्रमिकों के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अंतरिम बजट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी सरकार ने समान प्राथमिकता दी है। शहरी विकास के लिए 6143 और गांव के विकास के लिए 6314 करोड़ रुपये चार महीने में खर्च किए जाएंगे।

12/2/20249399
बेरोजगार जनसेवा मित्रों ने दिया धरना,न्याय के लिए सीएम हाउस गए तो पुलिस ने लाठियां बरसाई
भोपाल

बेरोजगार जनसेवा मित्रों ने दिया धरना,न्याय के लिए सीएम हाउस गए तो पुलिस ने लाठियां बरसाई

शनिवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में हजारों की संख्या में जनसेवा मित्र (janseva mitra) न्याय की आस लेकर धरने पर बैठे। दरअसल जनसेवा मित्रों की तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) के द्वारा ज्वाइनिंग कराई गई थी। प्रदेश के हर जिलों में पदस्थ जनसेवा मित्रों से सरकार जनहित की योजनाओं को कराने का काम करती थी। लेकिन जनवरी के महीने में जनसेवा मित्रों का अनुबंध खत्म हो गया और वो बेरोजगार हो गए। बेरोजगारी से आर्थिक तंगी की मार झेल रहे जनसेवा मित्रों ने राजधानी के जंबूरी मैदान में दिन भर धरना दिया। और जब वहां उनकी खोई खोज खबर लेने नहीं पहुंचा तो हजारों की संख्या में मौजूद जनसेवा मित्रों ने सीएम हाउस की तरफ कूंच कर दिया।सीएम हाउस की तरफ जा रहे सभी कर्मचारियों को रास्ते में पुलिस ने पहले रोकने का प्रयास किया जब वो नहीं माने तो पुलिस ने उन जनसेवकों पर हल्का बल प्रयोग भी किया जिसके कारण उन्हे खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। गौरतलब है की जनसेवा मित्र के रुप में काम कर रहे इन कर्मचारियों से लाड़ली बहन योजना के साथ-साथ अन्य योजनाओं के लाभ दिलाना एवं उसकी जानकारी लोगों को प्रदान करना उनके डॉक्यूमेंट की केवाईसी करना जैसे काम दिया जाता था। राज्य सरकार के दमनकारी नीति के कारण फिलहाल जनसेवा मित्रों ने अपने कदम पीछे कर लिया है लेकिन वो जल्द भी एक बड़ा जन आंदोलन सरकार के खिलाफ करने की योजना बना रहे हैं।

11/2/2024198
मोहन के बजट में शासकीय कर्मचारियों के लिए नहीं स्थान,नहीं मिलेगा कर्मचारियों को डीए
भोपाल

मोहन के बजट में शासकीय कर्मचारियों के लिए नहीं स्थान,नहीं मिलेगा कर्मचारियों को डीए

मप्र में शासकीय सेवकों का चार फीसदी डीए लंबे समय से लंबित है। जबकि केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को कई महीने से 46 फीसदी डीए मिल रहा है। एमपी सरकार (mp government) सोमवार को अपना अर्ध बजट पेश करने है। लेकिन पता चल रहा है कि इस बजट में शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) के डीए के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के मुताबिक जो बजट तैयार किया गया है उसमें फिलहाल एमपी के साढ़े सात लाख कर्मचारियों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिलने वाली है। ऐसा नहीं है कि सरकार को कर्मचारियों के लंबित डीए की जानकारी नहीं है। पिछली कैबिनेट में इस मामले पर चर्चा भी हुई थी लेकिन वहां पर मौजूद प्रमुख सचिव वीरा रामा का तर्क था कि अगर शासकीय सेवकों को चार फीसदी डीए की राशि दी जाएगी तो सरकार के खजाने पर अतिरिक्त भार आएगा। पहले से ही लाड़ली बहना योजना के कारण सरकार को हर महीने कर्ज लेना पड़ रहा है। ऊपर से कर्मचारियों का डीए दिया जाता है तो उसकी राशि की ब्यवस्था करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर हो जाएगा। इसी लिए फिलहाल जो बजट पेश होने वाला है उसमें राज्य के शासकीय सेवकों को डीए के लिए किसी प्रकार का प्राविधान नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि कर्मचारियों को डीए देना भी जरुरी है नहीं तो उनमें नारागी बढ़ जाएगी। इन सभी बातों के बाद यह भी फैसला लिया गया है कि लोकसभा चुनाव के बाद शासकीय सेवकों के डीए पर विचार किया जाएगा।

8/2/2024460
शासकीय कर्मचारियों के दबाव में मोहन सरकार,रिटायरमेंट सीमा 65 करने पर फंसी सरकार,शिक्षकों ने दी धमकी
भोपाल

शासकीय कर्मचारियों के दबाव में मोहन सरकार,रिटायरमेंट सीमा 65 करने पर फंसी सरकार,शिक्षकों ने दी धमकी

शासकीय सेवकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष करने के मामले में अब प्रदेश की मोहन सरकार (mohan government) फंसती नजर आ रही है। दरअसल शासकीय सेवकों (mp government employees) की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष की जाती है तो चयनित शिक्षकों की नियुक्ति पर असर पड़ेगा। एक तरफ सरकारी नौकरी नहीं निकल रही है, युवा बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में राज्य की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की आयु 62 से बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी कर रही है। इधर, इस फैसले से चयनित शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि चार सालों से हम नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में यदि सरकार ऐसा कुछ फैसला लेती है तो चयन के बावजूद हम बाहर हो जाएंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवार इस कवायद से चिंतित हैं। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के अनुसार सरकार रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने जा रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित शिक्षकों का कहना है कि चयनित होने के बावजूद हम नियुक्ति-पत्र का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में पुराने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ने से उनके हाथ में आया यह अवसर भी खत्म हो जाएगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा है कि सरकार ने कुछ साल पहले ही सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 की थी। इस प्रकार से सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से शिक्षित युवाओं को मौका नहीं मिल रहा है, वहीं बेरोजगारों की लिस्ट बढ़ती जा रही है। इससे चयनित शिक्षक जिन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है, वो बेहद चिंतित है। उनका कहना है कि यदि सरकार ऐसा करती है तो चयन के बावजूद हमारे हाथ से सरकारी नौकरी का मौका निकल जाएगा। हजारों चयनित शिक्षकों में से कई ओवरएज हो जाएंगे। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार बार-बार आयु ही बढ़ाती रहेगी तो युवाओं का भविष्य अंधकार में आ जाएगा। सेवानिवृत्ति की आयु पहले की तरह 60 साल करना चाहिए। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी. 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था. अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है. आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा. दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि सरकार अब अपने फैसले पर ही विचार कर रही है क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव है और अगर प्रदेश का युवा सरकार के फैसले से नाराज हुआ तो लोकसभा चुनाव में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।

6/2/2024973
युवाओं को रोजगार देने के बजाय एमपी सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 65 करने की तैयारी में, सरकार के पास नहीं पैसे
भोपाल

युवाओं को रोजगार देने के बजाय एमपी सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 65 करने की तैयारी में, सरकार के पास नहीं पैसे

आर्थिक तंगी से जूझ रही मध्य प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने युवाओं को रोजगार देने के बजाय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने का प्लान तैयार किया है। बताया जा रहा है कि मोहन यादव (mohan yadav) सरकार इस बार प्रदेश के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 3 साल बढ़ाकर 65 साल कर सकती है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने पर शासन विचार करे। (mp government employees) मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा लाए गए संकल्प पत्र 2023 में मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र में एकरूपता लाने का भी बिंदु शामिल था। राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने अपने पत्र में इस बिंदु का भी हवाला दिया है। उन्होंने लिखा है कि मध्य प्रदेश के शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाई जाए। उन्होंने लिखा है कि सरकार को शासकीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ानी चाहिए क्योंकि पदोन्नति नहीं होने की वजह से सरकारी विभागों में कैडर गड़बड़ा गया है और कई विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी। 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था। अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है। आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा। दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि रिटायरमेंट आयु बढ़ाने पर कर्मचारी दो खेमे में बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि युवाओं को मौका मिलना चाहिए 60 वर्ष की आयु के बाद काम करना और रोज आफिस जाना मुस्किल होता है।

5/2/20241590