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मासूम बच्ची को देख सीएम शिवराज ने गोदी पर उठाया,कहा हम 'सरकार नहीं परिवार चलाते हैं'
इंदौर के राऊ क्षेत्र में एक वाकये ने सबको भावविभोर कर दिया। मामला उस वक्त का है जब रात के 11.30 बज चुके थे, मुख्यमंत्री शिवराज चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मंच से जनता से संवाद कर रहे थे। सामने हज़ारों की संख्या में जनता मौजूद थी, बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें (Ladli Behna Yojana) मौजूद थीं। तभी मंच के सामने भीड़ में से एक 3-4 वर्ष की मासूम बालिका मुख्यमंत्री जी की तरफ़ देख 'मामा,मामा,मामा' ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी और उनसे मिलने के लिये मंच की तरफ़ आगे बढ़ी। मामा शिवराज ने भी मासूम बिटिया को देख उसी समय अपना संबोधन रोका , बेटी को मंच पर बुलवाया , उसे गोदी में उठाया , दुलार और स्नेह दिया,मासूम भांजी , मामा से मिलकर बेहद खुश हुई जैसे उसकी कोई कामना पूरी हो गयी हो। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता से कहा " मैं इसीलिये तो कहता हूं कि हम सरकार नहीं परिवार चलाते हैं। निश्चित तौर पर यह दृश्य वहां उपस्थित हज़ारों लोगों को भावविभोर कर देने वाला था। यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसी मासूम को अपनी गोद में लिया है इससे पहले सीएम शिवराज का यह रुप पहले भी देखने को मिलता रहा है जिसको लेकर उनके विरोधी उन पर तंज कसते रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्वभाव में अभी बदलाव नहीं आया उनको प्रदेश के बच्चों का 'मामा' ऐसे ही नहीं कहा जाता अब तो स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि छोटे-छोटे बच्चों से उनके मामा का नाम पूछो तो वो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ही नाम लेने लगे हैं और मामा से मिलने की जिद भी करने लगे हैं।

भाजपा की दूसरी सूची जारी होने के बाद नेता खुद पत्र लिख कर चुनाव नहीं लड़ने की जता रहे इच्छा
जब तक भारतीय जनता पार्टी की दूसरी सूची (BJP Second List) जारी नहीं हुई थी तब तक तो सब ठीक था लेकिन सूची जारी होते ही जिस प्रकार वरिष्ठ नेताओं को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है उसके बीजेपी में कानाफूसी का दौर तेज हो गया है। दरअसल प्रदेश सरकार (Shivraj Government) के खिलाफ एंटीइंकबेंसी का आलम मे है कि अब सभी नेताओं को खुद का भविष्य अंधकार में दिखने लगा है। दूसरी सूची में सात सांसदों सहित तीन केन्द्रीय मंत्रियों को टिकट मिलने के बाद अब अन्य सांसदों के दिमांग में यही चल रहा है कि अगली सूची में उनका नाम तो नहीं। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कुछ नेता खुद पत्र लिख कर संगठन से कह रहे हैं कि वो चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। उन्ही में एक बड़ा नाम है मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया (yashodhara raje scindia) का जिन्होने पत्र लिख कर स्वास्थ कारणों से चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। यशोधरा के चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब उसी सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को चुनाव लड़ाया जा सकता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अभी दस और सांसद ऐसे हैं जिन्हे जिन्हे संगठन चुनाव मैदान में उतारने की योजना बना रहा है। सांसदों और मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद भाजपा में ही कानाफूसी का दौर चल रहा है। भाजपा के कार्यकर्ता दबी जुवान कह रहे हैं कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व एक तीर से कई शिकार कर रहा है। कुछ का कहना है कि जिन नेताओं को केन्द्रीय राजनीति से बाहर करना है उन्ही नेताओं को विधानसभा का चुनाव दिया जा रहा है। कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि विधानसभा में अगर इन दिग्गज नेताओं को हार मिलती है तो चनका यह आखिरी चुनाव होगा। मतलब साफ है जिस प्रकार से भाजपा की दूसरी सूची जारी हुई है उसको देखते हुए कई नेताओं की धड़कनें तेज हो गई हैं। भाजपा की सूची पर इस वक्त कांग्रेस के नेता जमकर चुटकी ले रहे हैं। कांग्रेस में साफ कहा जा रहा है कि इन सभी नेताओं को निपटाया गया है।

एमपी कांग्रेस के 95 वे विधायकों में 76 के पक्ष में सर्वे रिपोर्ट,हारी हुई 66 सीटों पर मंथन जारी
मप्र की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 95 वे विधायक हैं (MP Congress)। इनमें से 76 विधायकों के पक्ष में सर्वे रिपोर्ट आई है। इसके अलावा संगठन पदाधिकारियों का लगातार फीडबैक ले रहा है। इसके साथ ही उन 66 सीटों पर भी विचार मंथन किया जा रहा है जहां पार्टी लगातार तीन चुनाव हार चुकी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार पहली सूची में विधायकों के साथ लगातार हारने वाली सीटों के प्रत्याशी घोषित किए जा सकते हैं (congress candidate list)। पांच अक्टूबर को धार के मोहनखेड़ा में पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी की जनसभा के बाद प्रत्याशियों की घोषणा हो सकती हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा प्रत्याशियों की तीन सूची जारी करने के बाद अब कांग्रेस ने भी पहली सूची घोषित करने की तैयारी कर ली है। शुक्रवार को दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित वरिष्ठ नेताओं ने विधायक और लगातार हारने वाली 66 सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर विचार किया। अब 3 अक्टूबर को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में केंद्रीय चुनाव समिति को भेजने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। 5 अक्टूबर के बाद पार्टी 100 से अधिक प्रत्याशियों की पहली सूची घोषित कर सकती है। कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम पर विचार करने के लिए 11,12 और 13 सितंबर को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी (congress screening committee)की पहली बैठक हुई थी। सर्वे रिपोर्ट और संगठन के फीडबैक के आधार पर पहले उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर विचार किया गया,जहां अभी पार्टी के विधायक हैं।

हड़ताल कर रहे पटवारियों के लिए सरकार हुई सख्त,कार्रवाई के लिए जारी हुआ आदेश
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हड़ताल कर रहे पटवारियों पर प्रदेश सरकार (MP Government) सख्त हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा है कि 28 अगस्त से हड़ताल कर रहे पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए (Patwari Strike)। आदेश में कहा गया है कि प्रतिदिन 12 बजे तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले पटवारियों (Patwari MP) की सूची तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि प्रदेश में हड़ताल कर रहे यह पटवारी, 25 साल से प्रमोशन न मिलने, ग्रेड-पे न बढ़ने, समयमान वेतनमान न दिए जाने, खाली पदों पर भर्ती न कर अतिरिक्त काम कराने और उसका वेतन न देने, यात्रा-मकान भत्ता जैसे सुविधाएं नहीं बढ़ाने की वजह से खासा नाराज हैं। उनकी इन मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है।

कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने किया शक्ति प्रदर्शन
बीजेपी की दूसरी सूची जारी होते ही प्रदेश की सियासत एकाएक गर्मा गई है (BJP Second List)। कांग्रेस के साथ- साथ खुद बीजेपी में भी हलचल मच गई है। सबसे ज्यादा शोर इंदौर की राजनीति को लेकर हो रहा है (Indore Politics)। कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) को इंदौर एक से बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है। जबकि कैलाश विजयवर्गीय खुद पार्टी के इस फैसले से खुश नहीं हैं। अब कैलाश विजयवर्गीय और उनके समर्थकों को उनके बेटे वर्तमान में इंदौर 3 से बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय (Akash Vijayvargiya) के टिकट कटने की आशंका लग रही है। इसी आशंका से अब विजयवर्गीय समर्थक पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने लगे हैं (MP BJP)। इसी कड़ी में आकाश विजयवर्गीय को टिकट दिलाने का दबाव बनाने के लिए उनके समर्थक बड़ी संख्या में भोपाल बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचे (BJP office)। इंदौर से पांच बसों और अन्य गाड़ियों से यह समर्थक भोपाल पहुंचे थे। प्रदेश कार्यालय में समर्थकों की चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव (Bhupendra Yadav) से बंद कमरे में मुलाकात हुई। मुलाकात में हुई चर्चा को लेकर सभी खामोश हैं। समर्थक भी अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। मगर इशारा जरूर कर रहे हैं कि, आकाश विजयवर्गीय को भी टिकट मिलना चाहिए। अब इस मामले में माना जा रहा है कि अगर आकाश विजयवर्गीय का टिकट कटा तो, समर्थक खामोश नही रहेंगे। जिसका नुकसान पार्टी को हो सकता है। गौरतलब है कि कैलाश विजयवर्गीय पिछले कुछ समय से चुनावी पिच से दूर हैं और वो लगातार संगठन के लिए काम कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्हे पश्चिम बंगाल का प्रभारी भी बनाया गया था जिसमें कुछ हद तक उन्हे सफलता भी मिली है। लेकिन इस चुनाव में जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा और राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर संगठन के लिए काम कर रहे कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर वन से टिकट देकर सबको हैरान कर दिया है। भाजपा के इस फैसले के बाद अब राजनीतिक पंडित अपने-अपने सियासी गड़ित लगाने में जुट गए हैं। कुछ लोगों का यह मानना है कि भाजपा की दूसरी सूची की तर्ज पर ही चौथी सूची में भी चौकाने वाले नाम आ सकते हैं। माना यह भी जा रहा है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी केन्द्रीय नेतृत्व पन्ना से विधानसभा के चुनावी रण में उतार सकता है।