Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
Topic & Tag Archive

#MP

Total published stories tagged under #MP: 1884

ADVERTISEMENT
भाजपा वालों को कुछ मिल नहीं रहा कांग्रेस से आने वालों को क्या मिलेगा,भूपेन्द्र सिंह का बयान
भोपाल

भाजपा वालों को कुछ मिल नहीं रहा कांग्रेस से आने वालों को क्या मिलेगा,भूपेन्द्र सिंह का बयान

पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेन्द्र सिंह (bhupendra singh) का बड़ा बयान आया है। उन्होने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग भाजपा में पिछले 15 साल से काम कर रहे हैं तो उन्हे कुछ नहीं मिला। और जिन कांग्रेस कार्रकर्ताओं ने 15 दिन पहले बीजेपी की सदस्यता ली है उनको क्या मिलने वाला है। गौरतलब है कि विधानसभा का चुनाव समाप्त होते ही एमपी बीजेपी में सदस्यता अभियान शुरु किया गया है जिसके तहत अब तक करीब 16 हजार कांग्रेस कार्रकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। और आने वाले समय में और बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता लेने वाले हैं। दरअसल पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह को मोहन कैबिनेट में स्थान नहीं दिया गया है। वो शिवराज सरकार में करीब 18 साल तक मंत्री रहे हैं। और इस बार उन्हे मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के कारण उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर होती चली जा रही है। भूपेन्द्र सिंह पर महाकाल लोक के घोटाले का आरोप भी लगा था जिसे जांच के बाद क्लीनचिट दे दी गई। लेकिन मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो पाने के कारण भूपेन्द्र सिंह काफी आहत नजर आ रहे हैं और मंच पर सार्वजनिक रुप से उनका बयान आना इस बात का परिचायक है कि जिस प्रकार से उन्हे राजनीतिक रुप से साइडलाइन करने का प्रयास किया गया है उसी की टीस भूपेन्द्र सिंह के बयान में देखने को मिलती है।

27/3/2024211
Mukhbir की बात पहुंची अजय सिंह के पास,मंच से कहा कमलेश्वर से ज्यादा पैसे प्रीती भाभी के पास हैं
भोपाल

Mukhbir की बात पहुंची अजय सिंह के पास,मंच से कहा कमलेश्वर से ज्यादा पैसे प्रीती भाभी के पास हैं

अब चुनाव सेवा नहीं बल्कि पैसों के बल पर लड़े जाते हैं कौन सा उम्मीदवार कितना पैसे खर्च कर सकता है उसी के हिसाब से राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवार को अपना प्रत्याशी घोषित करती हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) (ajay singh) ने कहा कि पैसों की कांग्रेस के खाते भले सीज किए गए हैं लेकिन उम्मीदवारों के पास पैसों की कमी नहीं है। आपके सामने जो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है वो पैसे वाला है। अजय सिंह यहीं नहीं रुके उन्होने कहा कि कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) से ज्यादा पैसे तो प्रीती भाभी कमलेश्वर की पत्नी के पास हैं। इस बात में कोई सक नहीं कि अजय सिंह (राहुल) भैया और कमलेश्वर पटेल भले एक ही पार्टी और एक ही क्षेत्र से आते हैं लेकिन दोनों की आपसी प्रतिद्वंदिता किसी से छिपी नहीं है। अब सवाल इस बात का उठता है कि मंच से पैसों की बात कबूली जा रही है। इसके बाद भी ईडी जैसी संस्थाएं क्या कर रही हैं। क्या कमलेश्वर पटेल कोई स्पेशल ब्यक्ति हैं अथवा उन्हे बीजेपी का संरक्षण प्राप्त है। Mukhbirmp.com ने पहले भी एक खबर प्रकाशित की थी जिसमें ये बताया गया था कि कमलेश्वर पटेल ने किस प्रकार से मुआबजे के रुप में छह करोड़ रुपये वसूले हैं अलग-अलग गांव में कमलेश्वर पटेल ने अपने घर दिखाए हैं। इस मामले में बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेश केशवानी ने कहा कि कांग्रेस गुटों और कबीलों में बंटी हुई पार्टी है जहां नेता अलग-अलग गुटों में बंटे हैं। अजय सिंह (राहुल) का मंच से इस बात को स्वीकरना जांच का विषय है।

27/3/2024412
मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक
भोपाल

मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक

भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने नामांकन भरना शुरु कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं कर पाई है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 22 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर पाई है (congress lok sabha list)। खजुराहो सीट समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस ने छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि आज होने वाली कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में मुरैना,ग्वालियर,गुना समेत छह सीटों के नाम को आज तय कर लिया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शामिल होंगे। बालाघाट सीट से प्रत्याशी बनाए गए सरस्वार को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विरोध शुरु हो गया है जिससे पार्टी की टेंशन बढ़ गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार गुना लोकसभा सीट से जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले अरुण यादव ने भी गुना से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी लेकिन पार्टी वहां से स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देना चाहती है। इधर मजे की बात यह है कि अब तक कांग्रेस के मजबूत नेता कहे जाने वाले सुरेश पचौरी ने जिस दिन से बीजेपी का दामन थामा है उस दिन से उन्होने कांग्रेस में लगातार तोड़-फोड़ मचा रखी है। वो हर दूसरे-तीसरे दिन कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिला रहे हैं। जिसके फलस्वरुप सुरेश पचौरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में उन्हे स्थान दिया है। अब सुरेश पचौरी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर हमला बैलते नजर आएंगे।

27/3/2024172
कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने 'जीतू पटवारी' पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे कांग्रेस
भोपाल

कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने 'जीतू पटवारी' पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे कांग्रेस

देश भर की राजनीतिक पार्टिया लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) जीतने की रणनीति बनाने में जुटी हैं। लेकिन एमपी कांग्रेस (mp congress) के अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) कांग्रेस को खाली करने में लगे हैं। जिस दिन से कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है उसी दिन से कांग्रेस में पलायन का दौर शुरु हुआ जो अब तक निरंतर जारी है। जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद से अब तक करीब 16 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता पार्टी छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। इन दिनों एक और बात भी निकल कर सामने आ रही है कि एमपी कांग्रेस को पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे हैं। वो पत्रकार अक्सर जीतू पटवारी के निवास पर पाए जाते हैं। इनके अलावा जो भी पत्रकार जीतू पटवारी से मिलने जाता है कुछ देर बैठ कर बात करना चाहता है उसको जीतू पटवारी बड़े ही आदर भाव से चलता करते हैं। जीतू पटवारी पहले पत्रकार के कंधे पर हाथ रखते हैं कुछ देर इधर-उधर घुमा कर कुछ बातें करते हुए कहते हैं कि तू तो मेरा भाई है और फिर बड़े प्यार से गेट के बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने पर लोगों को लगा था कि युवा चेहरे को मौका मिला है कुछ नया और अच्छा बदलाव देखने को मिलेगा। लेकिन जीतू पटवारी की अकड़ ने कुछ नया करने की बजाय पार्टी को और गर्त में डालने का काम किया है। पार्टी के कितने कार्यकर्ता छोड़ कर भाजपा में जा चुके हैं उन्हे तो ये भी नहीं मालूम मीडिया कर्मियों से जीतू पटवारी पूछते नजर आते हैं कौन छोड़ कर चला गया।

26/3/2024231
चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता
भोपाल

चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव (vidhansabha elections) खत्म होते ही लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) का शंखनाद कर दिया था। एमपी बीजेपी की ही बात करें तो कांग्रेस अब भी अपने सभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पाई है। उधर बीजेपी ने न सिर्फ उम्मीदवारों का ऐलान किया है बल्कि शक्ति केन्द्रों पर पथ सम्मेलन,होली के मौके पर 'मोदी की राम-राम' लेकर भाजपा के कार्यकर्ता घर-घर पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के सातों मोर्चे और जितने भी अनुशांगिक संगठन हैं सभी घर-घर जाकर लगातार वोटरों से संवाद कर रहे हैं और इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस के कुछ नेताओं को लग रहा है कि वो चुनाव में भाजपा को न सिर्फ टक्कर देंगे बल्कि वो जीत कर आएंगे। जबकि हकीकत यही है कि उन्हे इस बात का पूरी तरह से अहसास है कि चुनाव में उनकी करारी हार होने जा रही है। उन्ही नेताओं में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,कांतीलाल भूरिया सहित कई ऐसे कांग्रेस नेता हैं जिन्हें मालूम है कि चुनाव में उनकी क्या दशा होने वाली है लेकिन पार्टी ने उम्मीदवारों के अभाव में इन बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने का आदेश दिया है तो वो भी अपनी सियासी जमीन बचाए रखने के लिए ना-ना करते-करते चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस ईवीएम मशीन का दिग्विजय सिंह अब तक विरोध करते रहे हैं और उसमें फर्जी मतदान पड़ने का मीडिया के सामने डेमो भी देते रहे हैं अब उसी ईवीएम मशीन से दिग्विजय सिंह के लिए भी जनता वोट करेगी। दिग्विजय सिंह के ईवीएम को लेकर समय-समय पर लगाए गए आरोपों से यह सिद्ध होता है कि वो चुनाव में पहले से ही हारने का मन बना कर चुनाव मैदान में उतरे हैं। क्योंकि दिग्विजय सिंह को ईवीएम मशीन पर विश्वास नहीं है और उन्हे उसी ईवीएम की शरण में जाना पड़ेगा और चुनाव जीतना है तो उसी ईवीएम की आरती भी उतारनी पड़ेगी। कांग्रेस के कुछ अन्य उम्मीदवार भी हैं जो यह दम भर रहे हैं कि वो चुनाव में खुद के दम पर जीत दर्ज कर लेंगे। बाद में कहते हैं ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कुछ भी हो सकता है। वहीं कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे भी हैं जो पार्टी से नाराज चल रहे हैं और कहते हैं की पूरी पार्टी को भगवान राम का श्राप लगा है कांग्रेस के लोगों ने भगवान राम के प्रकोष्टव का आमंत्रण ठुकराया था उसके बाद से ही पार्टी की दुर्दशा होनी शुरु हो गई है।

26/3/2024134
बीजेपी में 28 मार्च को बड़ी बैठक,हारे बूथों पर बनाई जाएगी जीतने की रणनीति
भोपाल

बीजेपी में 28 मार्च को बड़ी बैठक,हारे बूथों पर बनाई जाएगी जीतने की रणनीति

भारतीय जनता पार्टी अपनी कमजोरियों पर हमेशा काम करती है। और यही कारण है कि भाजपा अक्सर चुनाव जीतती है। अब लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता जुट गए हैं। खासकर विधानसभा चुनाव के दौरान जिन बूथों पर भारतीय जनता पार्टी को करारी हार मिली थी उन बूथों पर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मंथन करना शुरु कर दिया है। विधानसभा चुनाव में हारने वाले बूथों की भाजपा ने लिष्ट तैयार कर ली है और 28 मार्च को बीजेपी प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठक (bjp meeting) में उसी पर मंथन किया जाएगा। बैठक प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेतृत्व में होगी,सीएम मोहन यादव सहित पार्टी के अन्य सभी पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में करीब दस ऐसी सीटें हैं जहां भाजपा,कांग्रेस और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की नौवत बन रही है। खास कर विंध्य की सतना और रीवा की सीट फंसती नजर आ रही है। बुंदेलखंड की भी कुछ सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की बात सामने आई है तो वहीं ग्वालियर-चंबल से भी कुछ सीटों के फंसने की बात सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय टीम ने सभी 29 लोकसभा सीटों का आंतरिक सर्वे भी करा लिया है। सर्वे में कुछ सीटें फंसने की बात सामने आई है। और अब उन्ही उलझी सीटों को सुलझाने के लिए 28 मार्च को पार्टी के वरिष्ठ मंथन करेंगे। इसके अलावा खजुराहो संसदीय क्षेत्र के एक बड़े कांग्रेस नेता को भी बीजेपी में शामिल कराया जाएगा। जिस नेता की बयान बीजेपी में ज्वाइनिंग होने जा रही है उन्हे हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए शुरेश पचौरी के माध्यम से बीजेपी में एंट्री दी जा रही है।

25/3/2024139
बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व
भोपाल

बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व

पिछले कुछ सालों से एमपी बीजेपी में ग्वालियर-चंबल के नेताओं का लगातार प्रभुत्व रहा है। जबकि उसके उलट विंध्य की जनता ने जिस प्रकार से बीजेपी पर विश्वास दिखाया उस हिसाब से एमपी बीजेपी (mp bjp) के नेताओं ने कभी भी विंध्य में किसी भी नेता को पनपने नहीं दिया। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य की कमान खुद हाथ में लेनी पड़ी जिसका नतीया यह निकला कि विंध्य की जनता ने बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रित्व को मायूस नहीं किया और झोली भर कर सीटें दी। राजेन्द्र शुक्ला को छोड़ दिया जाए तो एमपी बीजेपी में जिस प्रकार ग्वालियर-चंबल वाद हावी है उसी का नतीजा है कि विंध्य की जनता को सिर्फ वोटबैंक के रुप में ग्वालियर-चंबल के नेता इस्तेमाल करते रहे हैं। विंध्य क्षेत्र आज भी विकास के मामले में एमपी के अन्य क्षेत्रों से काफी पीछे है। जबकि राजश्व का 30% हिस्सा अकेले विंध्य से राज्य सरकार को मिलता है। ग्वालियर-चंबल की बात करें तो वहां से कद्वार नेताओं में नरेन्द्र सिंह तोमर,डॉ. नरोत्तम मिश्रा,वीडी शर्मा,ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अनेक नाम हैं जो एमपी बीजेपी को चला रहे हैं लेकिन विंध्य में बात करें तो अकेले राजेन्द्र शुक्ला के अलावा ऐसा एक भी चेहरा नहीं है जो बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी में आता हो। जबकि गिरीश गौतम,दिब्यराज सिंह,गणेश सिंह,रीती पाठक जैसे अनेक नेता हैं जो लगातार जीत का पर्चम लहरा रहे हैं लेकिन बीजेपी में इन सभी की हालत क्या है ये किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूभि भी एमपी से रही है। आज जहां सै वो सांसद हैं उस संसदीय क्षेत्र का आधा हिस्सा विंध्य का ही है फिर भी विंध्य को लगातार अनदेखा कर अन्य क्षेत्र के नेताओं को ही बीजेपी में आगे बढ़ाया जाता है। विंध्य में बीजेपी के नेता राजनीतिक पर्यटन में जाते हैं। बड़े-बड़े लच्छेदार भाषण देते हैं और चले आते हैं। क्षेत्र की जनता उन पर विश्वास करके हर बार बीजेपी को झोली भर कर वोट देती है और बाद में उस विंध्य की जनता के हाथ मायूसी ही लगती है। बीजेपी ने विंध्य में जिस राजेन्द्र शुक्ला को आगे बढ़ाया है वो विंध्य के होकर भी नहीं हैं क्योंकि उनको विंध्य की जनता से गंध आती है। वो रीवा की जनता को देखना और मिलना पसंद नहीं करते हैं। मतलब साफ है कि एमपी बीजेपी के नेता चाहते ही नहीं हैं कि विंध्य से कोई मजबूत नेत्रृत्व तैयार हो क्योंकि ऐसा हुआ तो ग्वालियर-चंबल के नेताओं का प्रभुत्व पार्टी में घटने लगेगा।

24/3/2024147
रीवा,सतना और सीधी में बढ़ी बीजेपी की मुस्किलें,अब मोदी की गारंटी से उम्मीद
भोपाल

रीवा,सतना और सीधी में बढ़ी बीजेपी की मुस्किलें,अब मोदी की गारंटी से उम्मीद

भारतीय जनता पार्टी ने विकास को जीत का आधार बनाया है और इसी लिए जनता के बीच मोदी की गारंटी दी जा रही है। लेकिन विंध्य की बात करें तो वहां पर मोदी की गारंटी पर अलग-अलग वर्गों का समीकरण भारी पड़ता नजर आ रहा है (vindhya news)। सबसे पहले सतना की बात करें तो बीजेपी ने गणेश सिंह को पांचवीं बार चुनाव मैदान में उतार कर यह बताने का प्रयास किया कि मोदी की गारंटी है तो सबकुछ मुमकिन है। लेकिन भाजपा ये भूल गई कि उनके खिलाफ कांग्रेस से वही उम्मीदवार चुनाव मैदान मे हैं जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी शिकस्त दी थी। उसके इतर बात करें तो ब्राम्हण चेहरा नारायण त्रिपाठी सतना लोकसभा सीट से इस बार सभी को चौकाने वाले हैं क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ओबीसी वर्ग को अपना उम्मीदवार बनाया है। सतना में बीएसपी का जक बड़ा वोटबैंक है जो आज भी बसपा पर विश्वास रखता है। नारायण त्रिपाठी के बीएसपी से चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि उन्हे हरिजनों का वोट मिलेगा और ब्राम्हण वर्ग के लोगों का भी वोट मिलेगा। मतलब साफ है कि सतना की सीट पूरी तरह से भाजपा के हाथ से खिसकती नजर आ रही है। सीधी की बात करें तो वहां बीजेपी की तरफ से राजेश मिश्रा तो कांग्रेस से कमलेश्वर पटेल चुनाव मैदान पर हैं इन दोनों का गणित बिगाड़ने के लिए पूर्व राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह ने गोंडवाना पार्टी से चुनाव मैदान में उतर कर बीजेपी को कठिनाई में डाल दिया है। वहीं रीवा की बात करें तो भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को फिर चुनाव मैदान में उतारा है और उनके खिलाफ कांग्रेस ने अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतार कर खलबली मचा दी है। इस सीट पर अगर बीएसपी ने कुर्मी को अपना उम्मीदवार बनाया तो रीवा की सीट बीजेपी के हाथ से खिसकने की पूरी उम्मीद है। कुल मिला कर विंध्य के राजनीति की बात करें तो यहां पर सामान्य वर्ग का प्रभुत्व रहा है। जब भी रीवा,सीधी और सतना में भाजपा और कांग्रेस ने एक ही वर्ग के लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है तब-तब बीएसपी ने इन सीटों पर पटखनी देने का काम किया है।

24/3/2024214
आखिर चर्चा में क्यों है मध्यप्रदेश कैडर की 2 महिला आईएएस
मुखबिर विशेष

आखिर चर्चा में क्यों है मध्यप्रदेश कैडर की 2 महिला आईएएस

मध्य प्रदेश कैडर की 2 महिला आईएएस (mp women ias) इन दिनों अपने रौबदार अंदाज के लिए चर्चा में हैं । आईएएस की नौकरी को उन्होंने शासकीय तंत्र के दुरुपयोग का साधन बना लिया है। जानकारी के मुताबिक यह महिला अधिकारी जिस विभाग में पदस्थ रहती हैं उसके संसाधनों पर अपना स्थाई कब्जा जमा लेती हैं। जिसकी वजह से वे इन दिनों प्रशानिक गलियारों के अलावा राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। बता दें कि दोनों महिला आईएएस अधिकारी राज्य शासन के एक निगम में एमडी रह चुकी है। एमडी रहते हुए उन्होंने निगम में अटैच एक कार को अपने आधीन रख लिया। जिसका 40 हजार रुपए महीना किराया एवं पेट्रोल–डीजल का खर्च हर महीने निगम द्वारा वहन किया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि इनके बाद निगम में जितने भी एमडी आए किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। और पिछले 2 साल से लगातार भुगतान किया जा रहा है। इनके अलावा एक और महिला आईएएस निगम की एमडी बनकर आई। उन्होंने निगम के 4 भृत्य को अपने बंगले पर रख लिया। कर्मचारी और गाड़ी बार बार बुलाने के बाद भी डर के कारण नहीं आ रहे है। पिछले करीब डेढ़ साल से चारों भृत्या की सैलरी भी निगम दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक इसकी वजह से निगम को हर साल लाखों रुपए का नुकसान भी हो रहा है। एक तरफ तो जहां मोहन सरकार कर्ज लेकर सरकार चला रही है वहीं दूसरी ओर सरकार मे बैठे अधिकारी जमकर अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश की मोहन सरकार को सभी निगम मंडल में अटैच गाड़ी और बंगलों पर ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों जानकारी मांगकर फिजूलखर्ची पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। हृदेश धारवार

23/3/2024392
भाजपा की जीत का नया फॉर्मूला,शक्ति केन्द्रों पर भाजपा करेगी पथ सभाओं का आयोजन
भोपाल

भाजपा की जीत का नया फॉर्मूला,शक्ति केन्द्रों पर भाजपा करेगी पथ सभाओं का आयोजन

भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतने और कार्यकर्ताओं को ब्यस्त रखने के लिए कोई न कोई नया फॉर्मूला इजात करती रहती है। लिहाजा अब भाजपा ने कार्यकर्ताओं को नया काम देने की रणनीति तैयार कर ली है। जिसके तहत भारतीय जनता पार्टी के नेता शक्ति केन्द्रों (shakti kendra) पर पथ सभाएं (bjp path sammelan) आयोजित कर केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए जन हितैषी कार्यों की जानकारी शक्ति केन्द्रों तक पहुंचाएंगे। मतलब साफ है कि भारतीय जनता पार्टी अपने हर कार्यकर्ता के लिए काम का निर्धारण करना चाहती है साथ ही भाजपा का यह मक्शद भी है कि भाजपा के कार्यकर्ता जिस प्रकार से मोदी के नाम पर जीत के लिए आश्वस्त हैं उस मुगालते को भी भाजपा खत्म करना चाहती है। वोटिंग से पहले भाजपा का लक्ष्य हर शक्ति केन्द्र में पथ सभा आयोजित करना है। इस अभियान को अमली जामा पहनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के क्लस्टर प्रभारी जुट गए हैं। क्लस्टर प्रभारियों की मॉनीटरिंग में ही शक्ति केन्द्रों में पथ सभाएं आयोजित की जाएंगी। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने हर बूथ पर 370 से अधिक वोट पाने का लक्ष्य रखा है लिहाजा उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी अब शक्ति केन्द्रों के माध्यम से जनता तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। और इस अभियान के माध्यम से भाजपा के नेताओं का जक बार फिर जनता से सीधा संवाद स्थापित हो जाएगा।

23/3/2024173
चुनाव ड्यूटी में लगे शासकीय कर्मचारी कहां डालेंगे वोट,निर्वाचन आयोग ने दी बड़ी सुविधा
भोपाल

चुनाव ड्यूटी में लगे शासकीय कर्मचारी कहां डालेंगे वोट,निर्वाचन आयोग ने दी बड़ी सुविधा

लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) में मतदान केन्द्रों पर ड्यूटी में तैनात अधिकारी-कर्मचारी उसी केन्द्र पर मतदान कर सकेंगे। उनको विधानसभा चुनाव की तरह डाक मतपत्र से मतदान करने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार चुनाव में तैनात लगभग 15 हजार अधिकारी-कर्मचारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह इलेक्शन ड्यूटी सर्टिफिकेट (सीडीसी) जारी करेंगे। चुनाव आयोग ने डाक मतपत्र की जगह ईवीएम से मतदान कराने की व्यवस्था लागू की है। इससे अधिकारी और कर्मचारियों को लाभ होगा। पिछले विधानसभा चुनाव में 2049 मतदान केन्द्रों के हिसाब से आठ हजार 196 कर्मचारियों का मतदान कराने की जिम्मेदारी दी गई थी,जबकि 20 प्रतिशत अतिरिक्त कर्मचारियों को भी रखा गया था। इस बार मतदान केन्द्रों की तादात बढ़कर 2363 हो गई है। जिसको देखते हुए पुलिसकर्मियों को मिला कर करीब 15 हजार कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाया जाएगा। गौरतलब है कि भोपाल जिले की सातों विधानसभा क्षेत्र सहित सीहोर का एक विधानसभा क्षेत्र मिलाकर भोपाल लोकसभा सीट बनाई है।

23/3/2024157
अबकी बार 'गणेश' विसर्जन पर ध्यान,फंसी सतना और अब रीवा की बारी
भोपाल

अबकी बार 'गणेश' विसर्जन पर ध्यान,फंसी सतना और अब रीवा की बारी

लोकसभा का चुनाव जितना आसान दिख रहा है उतना है नहीं। एमपी में करीब दस ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां पर जीत किसी की भी हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। विंध्य की बात करें तो यहां पर बीजेपी के लिए विधानसभा से ज्यादा कठिन लोकसभा का चुनाव होता चला जा रहा है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर बीजेपी ने एक बार फिर दांव लगाया है और उनके खिलाफ कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। ये वही सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) है जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी पटखनी दी थी। और अब वही दोनों प्रतिद्वंदी एक बार फिर चुनाव मैदान में दो हाथ करने के लाए तैयार हैं। लेकिन इसके ठीक उलट मैहर से चार बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी (narayan tripathi) ने बीएसपी से टिकट लेकर चुनाव में उतने का ऐलान कर दिया है। मतलब साफ है ब्राम्हण बाहुल सीट में दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों ने ओबीसी उम्मीदवार पर दांव लगाया है। ऐसा माना जा रहा है कि सतना के ब्राम्हणों का पूरा वोट नारायण त्रिपाठी के पक्ष में जाएगा। उसके अलावा एससी वर्ग का वोट बीएसपी के नाते नारायण त्रिपाठी के खाते में जाएगा। और अगर ऐसा होता है तो अबकी बार गणेश विसर्जन तय है। गणेश सिंह से स्थानीय जनता काफी नाराज भी है। गणेश सिंह को कट्टर कुर्मी नेता माना जाता है। हांलाकि भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेता संभावित हार को मानने के लिए तैयार नहीं हैं बल्कि उनका यह मानना है कि नारायण त्रिपाठी का चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि गणेश सिंह एक बार फिर सतना से भाजपा का पर्चम लहराने वाले हैं।

22/3/2024222
Page 123 of 157