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छिंदवाड़ा को 'छिन्न भिन्न बाड़ा' बनाने के बाद नकुलनाथ को बीजेपी से 'बी' फार्म जारी करने की तैयारी
सियासत में असंभव कुछ नहीं सबकुछ संभव माना जाता है। और बीजेपी में जिस प्रकार से भर्ती अभियान जारी है उससे स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीतिक पार्टियों को 'छिन्न भिन्न' करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। करीब ढाई महीने में 16 हजार से ज्यादा कांग्रेसियों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। गुरुवार को पहले रीवा के पूर्व सांसद देवराज सिंह (devraj singh) और नागौद से कांग्रेस के पूर्व विधायक यादवेन्द्र भाजपा में शामिल हो गए। इनके बाद शाम को छिंदवाड़ा के कई नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया। पिछले एक हफ्ते के अंदर जिस प्रकार से कमलनाथ (kamal nath) के बेहद करीबी नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है उससे स्पष्ट हो गया है कि दाल में कुछ काला है। पर्दे के पीछे सियासत का ऐसा खेल खेला जा रहा है जिसे लोग देख नहीं पा रहे हैं। कमलनाथ के करीबियों का भाजपा में शामिल होना कोई सामान्य घटना नहीं है। कांग्रेस से बीजेपी में आए कमलनाथ के एक करीबी से जब Mukhbirmp.com की टीम ने संपर्क किया और उसके बाद जब उससे सवाल किया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आप सभी की ज्वाइनिंग के बाद भाजपा की तरफ से नकुलनाथ के नाम से 'बी' फाम जारी कर दिया जाए। जिसके बाद कमलनाथ के करीबी ने मुस्कुराते हुए कहा कि ऐसा हुआ तो वो सबसे ज्यादा खुश होंगे। मतलब साफ है बीजेपी और कमलनाथ के बीच कुछ तो ऐसी खिचड़ी पक रही है जिसके तहत पहले कमलनाथ के सभी समर्थकों को बीजेपी में शामिल कराया जा रहा है और अंत में नकुलनाथ के नाम पर पार्टी 'बी' फाम जारी कर सकती है। क्योंकि राजनीति में असंभव तो कुछ है नहीं सबकुछ संभव है। और जिस प्रकार से कमलनाथ के कट्टर समर्थक थोक में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं उससे तो यही संकेत मिल रहे हैं और कांग्रेस से भाजपा में आए कमलनाथ के समर्थकों के चेहरों की मुस्कान भी कुछ ऐसा ही बयां कर रही है।

रीवा,सतना,अनूपपुर,जबलपुर और छिंदवाड़ा के हजारों कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) से पहले कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर लगातार जारी है। गुरुवार को हजारों की संख्या में रीवा,सतना,अनूपपुर जबलपुर और छिंदवाड़ा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। भाजपा में ज्वाइन करने वाले नेताओं में पूर्व विधायक और जिला पंचायत अध्यक्षों सहित अलग- अलग तरह के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली है। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 15 हजार कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। और यह आंकड़ा ठीक इसके डबल होने की उम्मीद जताई जा रही है। होली के बाद एक बार फिर ज्वाइनिंग का दौर शुरु होगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी (jitu patwari) के पीसीसी चीफ बनने के बाद ऐसा पहला मौका है जब कांग्रेस के कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में बीजेपी का रुख कर रहे हैं। इस पलायन का कारण भी जीतू पटवारी ही बताए जा रहे हैं क्योंकि उनके पीसीसी चीफ बनने के बाद कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है इसके अलावा पार्टी का सत्ता में नहीं आना भी कांग्रेस से पलायन बड़ा कारण बताया जा रहा है।

विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...
विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव विंध्य (vindhya) हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए अबूझ पहेली रहा है। अब बात लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) की करते हैं बीजेपी ने अपने सभी 29 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जिसमें संसदीय सीट और जातिगत आधार को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। बुधवार को सीधी में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. राजेश मिश्रा को पार्टी ने चुनाव मैदान पर उतार दिया है। लेकिन राजेश मिश्रा को भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पसंद नहीं कर रहे हैं यही कारण है कि बुधवार को उनके नामांकन के लिए सीएम मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला खुद पहुंचे। इस दौरान रोड शो और एक बड़ी जनसभा का आयोजन कर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने का जमकर प्रयास किया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भी भाजपा हाई कमान ने विंध्य में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। पीएम मोदी की जनसभाएं हों अथवा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विंध्य में दौरे हों। भाजपा के इन दोनों बड़े नेताओं ने विंध्य की कमान खुद अपने हाथ में ली जिसका परिणाम ये निकला की विंध्य की जनता ने बीजेपी के खाते में 30 में से 25 सीटें देकर बीजेपी को मालामाल कर दिया। और अब लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही बीजेपी के नेताओं के केन्द्रबिंदु में एक बार फिर विंध्य और वहां की जनता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने अंदर खाने से कई तरह की रणनीति तैयार कर रखी है। इस बात में कोई शक नहीं है कि विंध्य की राजनीति हमेशा कठिन मानी जाती रही है क्योंकि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आवादी विंध्य में ही निवास करती है और भारतीय जनता पार्टी जो ब्राम्हण,बनिया की पार्टी जानी जाती थी वही पार्टी आज पिछड़ा वर्ग समर्थित पार्टी मानी जाने लगी है जिसके कारण सवर्ण वर्ग अब भाजपा से दूर होने लगा है लिहाजा विंध्य में बीजेपी को सीटें जीतने के लिए अपने सभी प्रकार के अस्त्र और शस्त्र इस्तेमाल करने कड़ेंगे।

छिंदवाड़ा में बीजेपी का 'शंखनाद' अभियान,जीत का तैयार हुआ ब्ल्यू प्रिंट
बीजेपी सोशल मीडिया विभाग ने छिंदवाड़ा में 'शंखनाद' (shankhanad) अभियान का आगाज कर दिया है। इस अभियान के अंतर्गत 33 मंडलों के आईटी और सोशल मीडिया संयोजक,सह संयोजक और प्रभारी जुटे। कार्यक्रम में बीजेपी सोशल मीडिया के प्रदेश संयोजक अभिषेक शर्मा (Abhishekh Sharma) ने मौजूद पदाधिकारियों को बताया कि छिंदवाड़ा की जीत भाजपा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। अभिषेक शर्मा ने कहा कि इस सीट पर ना सिर्फ बीजेपी के संगठन की नजर है बल्कि पूरे प्रदेश और देश की भी नजर टिकी है इसलिए यह सीट बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शंखनाद अभियान के माध्यम से बीजेपी सोशल मीडिया विभाग प्रदेश के हर युवा वोटर को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इसी प्रकार का कार्यक्रम बीजेपी सोशल मीडिया विभाग जबलपुर में भी आयोजित कर चुका है और आने वाले समय में प्रदेश के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में भी भीजेपी सोशल मीडिया विभाग की टीम करने जा रही है। बीजेपी सोशल मीडिया टीम के प्रदेश संयोजक अभिषेक शर्मा ने विधानसभा चचुनाव में भी इसी प्रकार से कई अभियान संचालित किया था जिसके तहत महिलाओं तक लाड़ली बहना योजना सहित महिलाओं के लिए किए जा रहे कामों को पहुंचाने का काम किया था और उसका नतीजा यह निकला कि जिस चुनाव में बीजेपी की सरकार जाने का दावा किया जा रहा था उसी चुनाव में बीजेपी ने 163 सीट जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। और अब एक बार फिर बीजेपी का सोशल मीडिया विभाग ऐक्शन में आ गया है। युवाओं को लगातार जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कमलनाथ के सबसे करीबी ब्यक्ति ने छोड़ा हाथ,हजारों कार्यकर्ताओं ने ली बीजेपी की सदस्यता
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग अभियान जारी है। सोमवार को हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इन सभी में जो सबसे अहम बात रही कि कमलनाथ (kamal nath) के सबसे करीबी माने जा रहे कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सय्यद जाफर (syed zafar) ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है। इनके अलावा पथरिया के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिनेश श्रीधर, कांग्रेस महामंत्री डॉ. मनीषा दुबे, रतलाम जिला पंचायत सदस्य संतोष पालीवाल, बसपा के प्रदेश प्रभारी व प्रदेश महासचिव डॉ. रामसखा वर्मा, पूर्व प्रचारक अभयराज सिंह, रतलाम के मध्यप्रदेश आई.टी.सेल महामंत्री अंकित पोरवाल, जिला कांग्रेस कमेटी महामंत्री विरेन्द्र नायमा, आलोट विधानसभा युवक कांग्रेस के अध्यक्ष सुरेश डागी, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश मैनूखेड़ी, ब्लॉक अध्यक्ष दुर्गालाल अटोलिया, एनएसयूआई के जिला प्रभारी गोपाल सिसोदिया सहित 64 से अधिक जनपद सदस्य, सरपंच, पूर्व सरपंच, कांग्रेस पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। मुख्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष ने अंगवस्त्र पहनाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष चिंतामणि मालवीय, प्रदेश महामंत्री व विधायक भगवानदास सबनानी, प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल एवं छिदंवाड़ा लोकसभा प्रत्याशी विवेक बंटी साहू उपस्थित रहे।

कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक,18 सीटों पर अब तक तय नहीं हो पाए उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी से चुनावी तैयारियों में पिछड़ी कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति (congress working committee) की बैठक दिल्ली में आयोजित होने जा रही है जिसमें एमपी के लिए 18 उम्मीदवारों का ऐलान किया जाना है। कांग्रेस अब तक दस उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है 18 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन किया जाना है। एक सीट खजुराहो कांग्रेस पार्टी ने अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी को दिया है। अब तक हुई बैठकों में कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशी नहीं मिले जिसके कारण पार्टी 18 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन करने में नाकाम रही है। कांग्रेस पार्टी को विंध्य में भी उम्मीदवारों को लेकर काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है। सतना छोड़ अन्य सीटों पर कांग्रेस अब भी उम्मीदवारों की खोज करने में लगी हुई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी रीवा से विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को टिकट दे सकती है। ऐसी स्थिति में रीवा का मुकाबला का त्रिकोणीय होने वाला है। सतना में भी मुकाबला त्रिकोणीय होने की बात सामने आ रही है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में बड़े बदलाव,अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में हुआ फैसला
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में बड़ा बदलाव हुआ है। स्वप्निल कुलकर्णी (swapnil kulkarni) को मध्य क्षेत्र का नया क्षेत्र प्रचारक नियुक्त किया गया है तो वहीं राजमोहन मालवा प्रांत के नए प्रांत प्रचारक बने हैं। मध्य क्षेत्र के वर्तमान क्षेत्र विचारक दीपक विस्पुते, अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख बनाए गए हैं।मालवा प्रांत के वर्तमान प्रांत प्रचारक बालिराम पटेल - अखिल भारतीय सामाजिक सद्भाव प्रमुख, इंदौर में विभाग प्रचारक रहे विमल गुप्ता - मध्य भारत प्रांत के नए प्रांत प्रचारक होंगे और वर्तमान में मालवा प्रांत के प्रांत प्रचार प्रमुख विनय दीक्षित अब प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक बनाए गए हैं। लोकसभा चुनाव से पहले संघ ने बड़ा दांव खेला है। जिस प्रकार से भाजपा ने 370 और 400 प्लस का नारा दिया है उसको ध्यान में रखते हुए इस प्रकार से कार्यकारिणी में बदलाव किए गए हैं।

विंध्य में बीजेपी को बड़ा झटका,ठाकुरों ने किया किनारा,भेदभाव के चलते सांसद अजय प्रताप ने छोड़ी पार्टी
राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह (ajay pratap singh) ने पार्टी की प्रथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की एक प्रति अजय प्रताप ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और दूसरी प्रति प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भेजा है। अजय प्रताप सिंह सीधी लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव की दावेदारी कर रहे थे लेकिन पार्टी ने यहां से उनको अनदेखा कर राजेश मिश्रा को टिकट दे दिया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अजय प्रताप का पार्टी के एक वरिष्ठ और जिम्मेदार नेता से काफी विवाद हुआ था। अजय प्रताप ने अपनी तरफ से कई तरह की दलीलें दी लेकिन उनकी दलीलों को शिरे से खारिज कर दिया गया। अजय सिंह का ऐसे समय पर पार्टी छोड़ने का सीधा मतलब है कि भाजपा के अंदर ही अंदर बहुत द्वंद चल रहा है। पार्टी में अन्य दलों से नेताओं को ज्वाइन कराया जा रहा है लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अजय प्रताप सिंह के मामले में भी ऐसा ही सुनने में आया है। उन्होने पार्टी नेत्रृत्व के सामने अपनी बातें रखने का प्रयास किया लेकिन पार्टी के हमत्वपूर्ण पद पर बैठे नेता ने अजय प्रताप की एक नहीं सुनी। उल्टे जब अजय प्रताप के इस्तीफे की खबर आग की तरह फैली तो भाजपा के नेता यही कहते नजर आए की महत्वकांक्षाएं इतनी भी नहीं होनी चाहिए कि पार्टी छोड़ने की नौवत आ जाए। भाजपा की तरफ से अब ये भी कहा जा रहा है कि पार्टी ने एक ऐसे नेता को राज्यसभा भेजा जो विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज नहीं कर पाया। इस मामले में पूर्व सांसद रीति पाठक ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन अजय प्रताप के करीबियों को खुला आरोप है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता से उन्हे अपमानित होना पड़ा है और मजबूर होकर ही अजय प्रताप ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दिया है। विंध्य में ठाकुर वर्ग का बड़ा वोटबैंक है और माना जा रहा है कि अजय प्रताप सिंह के अपमान का बदला ठाकुर वर्ग के लोग लोकसभा चुनाव में जरुर लेंगे।

गोलवलकर महाविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान विषय पर हुआ सेमिनार
शहर के शासकीय गोलवलकर महाविद्यालय (golvalkar university) में एकदिवसीय व्याख्यान कंप्यूटर विज्ञान विषय में आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस एम शुक्ल ने की। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर आर के तिवारी एवं डॉ. अंजली सिंह मौजूद रहीं।मुख्य वक्ता डॉ. सुनील तिवारी अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय कंप्यूटर विज्ञान विभाग रहे। कार्यक्रम में प्रथम सत्र में वक्ता डॉ. सुनील ने टॉपिक "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन सोसाइटी" पर विस्तृत जानकारी दी जिसके तहत मशीन लर्निंग,ह्यूमन इंटेलिजेंस एवं प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की जानकारी छात्र छात्राओं को दी। इसके बाद डॉ. अंजली सिंह एवं डॉ सैलजा सचान ने महाविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में बताया और छात्र छात्राओं को नई शिक्षा नीति के विषय मे महत्वपूर्ण जानकारी दी। भौतिक विज्ञान,गणित एवं कंप्यूटर में समानता को बताते हुए प्रोफ़ेसर आर के तिवारी ने कहा कि ये तीनों आपस मे ही एक दूसरे के पूरक हैं।

धर्म से बात न बने तो जातियों को अलग कर सत्ता तक पहुंचा जा सकता है,ऐसा सोचते हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता
मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी भाजपा और कांग्रेस में इन दिनों जनता के दिल तक उतरने के लिए मुद्दों की तलाश है। भाजपा का स्टैंड तो क्लियर है राम मंदिर और हिंदुत्व लेकिन कांग्रेस अब तक अपना चुनावी एजेंडा तय नहीं कर पाई कि चुनाव में जाकर वो भाजपा का काउंटर कैसे करेगी। ऐसे में शुक्रवार को कांग्रेस का एक कार्यकर्ता पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) के पास टिकट की चाहत लिए पहुंचता है। जीतू पटवारी कहते हैं कि युवा वर्ग चुनाव लड़ने का इच्छुक है अच्छी बात है लेकिन चुनावी समर में जब उतरोगे तो भाजपा के बड़े मुद्दों का काउंटर कैसे करोगे। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ता का जवाब आता है कि भाजपा धर्म की और भगवा की बात करती है जो जनता को पसंद आती है। इसकी काट यही है कि हम लगातार जातियों की बात करें। जाति आधारित जनगणना की बात करे। अलग-अलग वर्गों के पास जाएं बार-बार उनके पिछड़े होने का अहसास दिलाएं और बताएं की जातियों की जनगणना होने से सभी जातियों की संख्या क्लियर हो जाएगी और उससे विकास के नए दरवाजे खुलेंगे। मतलब साफ है कि कांग्रेस के पास भाजपा का काउंटर करने के लिए कुछ नहीं बचा तो डिवाइड एंड रुल की पॉलिसी पर कांग्रेस काम करने लगी मतलब फूट डालो और शासन करो की रणनीति पर कगंग्रेस पार्टी आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी भी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान हर जगह अपने संबोधन में जाति आधारित जनगणना कराने की बात करते हैं। सत्ता पाने के लिए जब धर्म का मुद्दा काम नहीं आया तो कांग्रेस ने जातियों का सहारा लेना शुरु कर दिया है।

शासकीय कर्मचारियों को चार फीसदी डीए देने का आदेश जारी,तीन किस्तों में मिलेगा एरियर
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार (mohan cabinet) ने होली से पहले सरकारी कर्मचारियों (mp government employees) को बड़ा तोहफा दिया है। मोहन सरकार ने शुक्रवार को कर्मचारियों का 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए है। बता दें कि गुरूवार को मोहन कैबिनेट की बैठक के बाद शुक्रवार को यह आदेश जारी किया गया है। इस महंगाई भत्ता का फायदा प्रदेश के 7.5 लाख कर्मचारियों को मिलेगा।आदेश को जारी करते हुए वित्त विभाग ने कहा कि कर्मचारियों को एक जुलाई 2023 से 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता स्वीकृत किया जाता है। इसके बाद महंगाई भत्ते की राशि बढ़कर 42 से 46 प्रतिशत हो गई है। महंगाई भत्ते में वृद्धि का लाभ मार्च माह के वेतन के साथ अप्रेल में होने वाले भुगतान में किया जाएगा। एक जुलाई से 29 फरवरी तक की राशि का भुगतान 3 समान किस्तों में किया जाएगा। यह राशि जुलाई, अगस्त, सितम्बर 2024 में एरियर के रूप में जमा की जाएगी।

सुरेश पचौरी के बीजेपी में शामिल होते ही एमपी कांग्रेस में 'दिग्विजय' बाद हावी
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कांग्रेस नेता आधारित पार्टी है। जहां नेताओं के जयकारे लगाए जाते हैं न कि पार्टी के समर्थन में जयकारे लगाए जाते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने अपने कई समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सुरेश पचौरी के कांग्रेस छोड़ने पर पार्टी के नेताओं को पछतावा तो दूर की बात है बल्कि कांग्रेस पार्टी में जश्न का माहौल है। क्योंकि सुरेश पचौरी के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस में मैदान खाली हो गया। एक के बाद एक कांटे कांग्रेस के खुद निकलते चले गए ऐसे में मैदान खाली देख कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) के समर्थकों ने अपना आधिपत्य स्थापित करना शुरु कर दिया। इन दिनों एमपी कांग्रेस में पूर्व सीएम दिग्विजय खेमे का बोलबाला देखने को मिल रहा है। ऐसे में जो दिग्विजय समर्थक नहीं हैं अथवा उनके खेमे के नहीं हैं वो अपनी ही पार्टी में बेगाना सा महसूस करने लगे हैं। पार्टी में अब भी ऐसे कई प्रतिभाशाली और मेहनती वर्कर हैं जो पार्टी के लिए काम तो करना चाहते हैं लेकिन दिग्विजय वाद हावी होने के कारण वो पार्टी में काम नहीं कर पा रहे हैं। कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता आते हैं तो उन्हे बैठने के लिए स्थान भी नहीं मिलता जिसके कारण वो पार्टी कार्यालय के बाहर चाय की दुकान में भटकते हुए अक्शर देखे जाते हैं। जीतू पटवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। जिस दिन से जीतू पटवारी को पार्टी की कमान मिली है उस दिन से कांग्रेस में लगातार पलायन का दौर जारी है। एक के बाद एक बड़े नेता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूल का दामन थामते चले जा रहे हैं। कुल मिला कर कांग्रेस पार्टी इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। पार्टी की स्थिति सुधरना तो दूर लगातार नए-नए खेमे पनपते चले जा रहे हैं और जो नेता खेमेबाजी करने में सक्षम नहीं हैं वो दिग्विजय सिंह के सामने माथा टेकने के लिए मजबूर हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है और कांग्रेस कार्यालय में किसी प्रकार की चुनावी रौनक देखने को अब तक नहीं मिल रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि टीवी डिवेट में बैठने के लिए कांग्रेस में प्रवक्ता तक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बीजेपी प्रवक्ताओं को भी डिबेट करने में मजा नहीं आ रहा है।