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मोहन कैबिनेट में शासकीय कर्मचारियों के डीए पर फिर नहीं हुआ फैसला,बढ़ा इंतजार
लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले मोहन यादव कैबिनेट की बैठक मंत्रालय में आयोजित की गई (cabinet meeting)। जिसमें उम्मीद थी कि शासकीय कर्मचारियों (government employees) के चार फीसदी डीए देने का फैसला ले लिया जाएगा। करीब आधा दर्जन निर्णय मोहन कैबिनेट में लिए गए लेकिन शासकीय कर्मचारियों के डीए पर सरकार ने चर्चा करना भी उचित नहीं समझा। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता बढ़ाने के बाद अब केन्द्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच अंतर आठ प्रतिशत का हो गया है। मंहगाई भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ ने बुधवार को मुख्य सचिव कार्यालय में ज्ञापन दिया था। केन्द्रीय कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता जुलाई 2023 में चार प्रतिशत बढ़ाकर 46 और एक जनवरी 2024 से फिर चार प्रतिशत की वृद्धि के साथ 50 प्रतिशत कर दिया गया है। जबकि राज्य के कर्मचारियों को 42 प्रतिशत की दर से कर्मचारियों को मंहगाई भत्ता दिया जा रहा था। सूत्रों से पता चल रहा है कि 15 मार्च तक चुनाव आचार संहिता लागू होने जा रही है। मतलब साफ है कि शासकीय कर्मचारियों को अपना अधिकार पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

रीवा और सतना में जातीय समीकरण के आगे फेल हो सकती है मोदी की 'गारंटी'
विंध्य क्षेत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से हमेशा कठिन माना जाता रहा है। और बात जब चुनाव की आती है तो विंध्य में जातीय समीकरण पूरे शबाब पर आ जाते हैं। बात सतना और रीवा की हो तो कुछ अलग ही समीकरण सामने आते हैं। सतना से भाजपा ने चार बार के सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) को पांचवीं बार चुनाव मैदान में उतार दिया है जो विधानसभा चुनाव में शिकस्त खा चुके हैं फिर भी भाजपा ने उनके नाम पर ही विश्वास दिखाया है। उनके खिलाफ कांग्रेस ने शिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) को चुनाव मैदान में उतारा है दोनों नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं। गणेश सिंह को कट्टर कुर्मी और जातिवादी नेता माना जाता है इसी लिए सतना में अन्य वर्ग के वोटर गणेश सिंह को पसंद नहीं करते। अब पता चल रहा है कि मैहर विधानसभा से कई बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी फिर से चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बना रहे हैं। नारायण त्रिपाठी एक ब्राम्हण नेता हैं और भाजपा कांग्रेस दोनों दलों से ओबीसी नेताओं के चुनाव लड़ने के कारण नारायण त्रिपाठी को ब्राम्हण वोट मिलना तय है। कुछ इसी प्रकार रीवा में भी समीकरण देखने को मिल रहे हैं जहां भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को फिर चुनाव मैदान में उतार दिया है। जनार्दन मिश्रा सरल और सौम्य ब्यक्तित्व के धनी हैं लेकिन उनकी क्षेत्र में उपस्थिति न के बराबर रहती है इसलिए रीवा की जनता उनसे नाराज है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस भी ब्राम्हण उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारने की योजना बना रही है। अगर यहां से कांग्रेस ने किसी DMT वर्ग के नेता यानि मिश्रा,तिवारी अथवा दुबे पर दांव लगाया तो मुकाबला दिलचश्प हो जाएगा। और इनसे हट कर बीएसपी ने अगर किसी कुर्मी वर्ग (पटेल) नेता को चुनाव मैदान में उतार दिया तो मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा और बीएसपी के जीतने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। रीवा और सतना में जिस प्रकार से जातीय समीकरण देखने को मिल रहे हैं उसमें मोदी की 'गारंटी' भी कुछ ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाएगी।

पूरी कांग्रेस खाली हुई जा रही है और राहुल गांधी चने के झाड़ में बैठ कर गिनती कर रहे हैं
कांग्रेस मुक्त अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग का कारवां बढ़ता चला जा रहा है। बुधवार को मुरैना जिले के करीब 500 और छिंदवाड़ा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ले ली (bjp membership)। इन सभी कार्यकर्ताओं को ज्वाइनिंग कमेंटी (bjp joining committee) के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर बीजेपी की सदस्यता दिलाई है। विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के सफर में कांग्रेस के 15 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं बीजेपी का दामन थाम लिया है। मजे की बात ये है कि रोजाना सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं यहां तक की कांग्रेस के पास इस वक्त मजबूत उम्मीदवार तक नहीं हैं इसके वाबजूद कांग्रेस के नेता पार्टी में चल रहे पलायन को रोकने का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी (rahul gandhi) भारत न्याय यात्र निकाल कर चने के झाड़ में चढ़े बैठे हैं उन्हे लग रहा है कि जनता कांग्रेस को जिताएगी और भारतीय जनता पार्टी है कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को भाजपा की सदस्यता दिलाती चली जा रही है।

कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल,पूछ रही सवाल क्या गारंटी है टिकट मिला तो आप अंत तक टिके रहेंगे
कांग्रेस पार्टी जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। मंगलवार को कांग्रेस के दस नामों की जारी सूची में स्पष्ट नजर आया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पास आज उम्मीदवारों का अकाल पड़ चुका है (congress lok sabha candidate list) । कांग्रेस पार्टी ने दस उम्मीदवारों में तीन वर्तमान विधायकों को चुनावी मैदान में उतारा है उससे यह तस्वीर साफ हो गई कि कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल पड़ गया है। हार के डर से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह,विवेक तन्खा सहित कई नेताओं ने चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया है। ऊपर से कांग्रेस जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता अगले दिन भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। इसी प्रकार कांग्रेस नेत्रृत्व ने जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह और सागर से अरुणोदय को भी लोकसभा में उतारने की रणनीति बनाई थी लेकिन इन दोनों नेताओं ने ऐन मौके पर कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया। दिल्ली में जब कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक हुई तो सबसे पहले यही सवाल उठा कि जिन नेताओं को वो टिकट देंगे उनकी मैदान में टिके रहने की क्या गारंटी है। पिछले एक हफ्ते से कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार अपने नेताओं को फोन करके सवाल कर रहा है कि चुनाव लड़ने की इच्छा है क्या? और अगर पार्टी आपको टिकट देती है तो क्या आप चुनाव मैदान में डटे रहेंगे। इस प्रकार के कई सवाल कांग्रेस नेत्रृत्व द्वारा संभावित दावेदारों से किए जा रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस की कमर तोड़ने का पूरी तरह से मन बना लिया है। वो लगातार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल कराते जा रहे हैं इसी लिए पूरी कांग्रेस में खलबली मची हुई है। कांग्रेस पार्टी में बचे खुचे नेताओं को सक की नजर से देखा जा रहा है। कोई भी नेता एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर रहा है।

चयनित शिक्षकों ने बीजेपी कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन,सुंदरकांड का किया पाठ
मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन पात्रता परीक्षा 2020 वर्ग 3 के हजारों चयनित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने राज्य सरकार के खिलाफ फिर आंदोलन छेड़ दिया है (madhya pradesh teachers protest)।मंगलवार को पदों में वृद्धि की मांग को लेकर चयनित शिक्षकों ने अपनी अपनी मांगों को लेकर बीजेपी कार्यालय (bjp office) का घेराव किया। इस दौरान चयनित शिक्षकों ने बीजेपी और सरकार को उनके वादे याद दिलाए। इनका कहना है कि अगर मांग पूरी नहीं की गई तो आंदोलन और तीव्र किया जाएगा। सरकार को अपना वादा पूरा करना ही होगा। चयनित शिक्षकों ने सरकार को बुद्धि देने के लिए भगवान राम से प्रार्थना की। हाथों में रामायण लिए शिक्षक सड़क पर ही सुंदरकांड करने लगे। बीजेपी कार्यालय का घेराव करते हुए धरना देना शुरू कर दिया। इनका कहना है की पदवृद्धि की मांग को लेकर वो बीजेपी कार्यालय में गुहार लगाने आए हैं। प्रदर्शन में कई जिलों के बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भाजपा कार्यालय में जमा हुए। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी गई। चयनित शक्षकों को बीजेपी कार्यालय के बाहर ही रोक दिया गया। चयनित शक्षकों की मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक वर्ग-1 चयन परीक्षा 2023 में पद वृद्धि की जाए. शिक्षा विभाग ने परीक्षा ली और नौकरी के नाम पर छलावा किया है। शिक्षकों ने जय श्री राम के जयकारे लगाकर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। गौरतलब है कि ये शिक्षक अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय के बाहर भी धरना-प्रदर्शन भी किया था। इनकी अहम है कि मांग है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती वर्ग तीन में 51 हजार पदों की वृद्धि सरकार करे। शिक्षक भर्ती 2018 में प्रथम द्वितीय काउंसलिंग के रिक्त पदों पर नियोजन प्रक्रिया जल्द की जाए।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज
पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (govind singh) पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब बीस मिनट तक बंद कमरे में बात की जिसके बाद डॉ. गोविंद सिंह की भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। हांलाकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इस मुलाकात को सौजन्य मुलाकात बताते हुए भाजपा में शामिल होने की अटकलों को विराम लगाने का प्रयास किया है। लेकिन जिस वक्त कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है उस वक्त डॉ. गोविंद सिंह का पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिलना कई तरह के राजनीतिक कयासों को हवा दे रहा है। डॉ. गोविंद सिंह ने ये भी कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा रहे हैं उन्हे उनके कद के हिसाब से पार्टी में सम्मान नहीं मिल पाया जिसके कारण उन्होने भाजपा की सदस्यता ली है। लोकसभा चुनाव लड़ने के विषय पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुरैना लोकसभा सीट से वो चुनाव लड़ना चाहते थे और पार्टी भी तैयार थी लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होने अपना मन बदल लिया और अब वो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। साथ ही डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा की ज्वाइनिंग को लेकर कहा है कि अभी वो भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहे हैं लेकिन जब भी भाजपा ज्वाइन करेंगे मीडिया को सबसे पहले बुला कर जरुर बताएंगे। गौरतलब है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक हैं और जिस प्रकार से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने काम को अंजाम दिया है उससे पूरी कांग्रेस में उथल पुथल सी स्थिति बन गई है। और ऐसी स्थिति में दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात ने कांग्रेसी खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

कांग्रेस टिकट देने से पहले पूछ रही पार्टी तो नहीं छोड़ोगे,आज 14 उम्मीदवारों की घोषणा करेगी कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने केन्द्रीय चुनाव समिति (congress cec meeting) की बैठक में एमपी की 14 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर लिया है (congress candidate list)। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक में सोनिया गांधी की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया गया। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर भी शामिल हुए। बैठक के बाद जानकारी देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि 70% सीटों पर नाम तय कर लिए गए हैं। सर्वे के आधार पर जो नाम सर्वश्रेष्ठ थे उन्ही नामों पर सहमति बनी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा से नकुलनाथ एक बार फिर चुनाव मैदान में होंगे। जिन सीटों पर सिंगल नाम थे उन सीटों को भी फायनल कर दिया गया है। कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की कमी का मुद्दा भी इस बैठक में जमकर गर्माया है। कांग्रेस के कई ऐसे दावेदार थे जिन्हे पार्टी लोकसभा में उतारने जा रही थी लेकिन उन्होने नाम की घोषणा से पहले ही कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूर थाम लिया जिसके कारण कांग्रेस पार्टी को उम्मीदवारों की घोषणा करने पर दिक्कत हो रही है। कांग्रेस के नेता एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। टिकट देने से पहले कांग्रेस अपने संभावित दावेदारों से पूछ रही है कि ऐन मौके पर पार्टी छोड़ कर तो नहीं जाओगे। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने मिशन कांग्रेस मुक्त अभियान चला कर कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करने का अभियान चलाया है उससे कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी सहमा हुआ है। कांग्रेस के नेता पूरे दम-खम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने की बात तो कर रहे हैं लेकिन उन्हे यही विश्वास नहीं हो रहा कि जिन्हे वो टिकट दे रहे हैं क्या वास्तव में वो नामांकन के आखिरी दिन तक कांग्रेस पार्टी में रहेंगे अथवा मौके पर पार्टी का दामन छोड़ कर हाथ में फूल तो नहीं थाम लेंगे।

पूर्व मंत्री का आरोप डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला और उनका स्टाफ नहीं उठाता फोन
अभी तक रीवा की जनता डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) के निजी सचिव आनंद भट्ट से परेशान थी लेकिन अब तो भाजपा के नेता भी उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला और उनके स्टाफ से परेशान हो चुके हैं। ताजा मामला भाजपा की वरिष्ठ नेत्री कुसुम मंहदेले (kusum mahdele) का है जिन्होने सार्वजनिक रुप से ट्वीट कर इस बात का खुलासा किया है कि उन्होने राजेन्द्र शुक्ला सहित उनके स्टाफ के लोगों को एक नहीं बल्कि दस बार फोन लगाया लेकिन राजेन्द्र शुक्ला तो दूर उनके किसी स्टाफ ने उनका फोन उठाने की जहमत तक नहीं उठाई । राजेन्द्र शुक्ला और उनके स्टाफ ने पूर्व मंत्री कुसुम मंहदेले का जब फोन नहीं उठाया तो उन्होने इस बात से आहत होकर सार्वजनिक रुप से ट्वीट कर दिया। गौरतलब है कि इस वक्त भाजपा कार्यकर्ताओं ने 'मोदी मेरा परिवार' नामक एक अभियान चला रखा है जिसके तहत भाजपा के सभी नेता और कार्यकर्ता अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर खुद को मोदी का परिवार कहते नजर आ रहे हैं। अब स्थिति ये है कि मोदी का परिवार ही मोदी के परिवार का फोन उठाने से कतरा रहा है। बात जब उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला की आती है तो अलग ही हो जाती है। रीवा की जनता ने उनको कामयाबी के शिखर तक पहुंचाया और आज वो रीवा की जनता से मिलना पसंद नहीं करते हैं। इतना ही नहीं उनके निजी सचिव आनंद भट्ट सहित अन्य स्टाफ भी रीवा की जनता को महत्व नहीं देते हैं। यहां तक तो ठीक है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला को तो यहां तक कहते सुना गया है कि वो रीवा की जनता से परेशान हो चुके हैं। जहां भी जाते हैं रीवा की जनता उनका पीछा करते हुए पहुंच जाती है।

सुरेश पचौरी की चार साल पहले भाजपा ज्वाइन करने की लिखी गई पटकथा,बहुत देर कर दी सनम आते-आते
राजधानी की नगर निगम में एल्डरमैन से राजनीति की शुरुआत करने वाले सुरेश पचौरी (suresh pachouri) केंद्र में दो बार राज्य मंत्री और 24 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। सुरेश पचौरी गांधी नेहरू परिवार से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार रहे अहमद पटेल के मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा करीबी रहे हैं। उन्होंने शनिवार सुबह कांग्रेस को बाय-बाय कह दिया। हालांकि पचौरी और इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला मार्च 2020 में ऑपरेशन लोटस के वक्त भी कुछ शर्तों के कारण भाजपा में जाते-जाते रह गए थे। उनके भाजपा में जाने की पटकथा 4 साल पहले लिखी गई थी। बात मार्च 2020 की है।तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनबन होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी थी। उस वक्त कांग्रेस के 22 विधायकों को पहले हरियाणा के मानेसर और उसके बाद भाजपा शासित कर्नाटक के बेंगलुरु ले जाया गया था। कांग्रेस सरकार के दौरान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी से सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया ही नहीं पचोरी भी परेशान थे और वह कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। सिंधिया की बगावत के बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया था। भाजपा में मौजूद Mukhbir बताते हैं कि उस वक्त सिंधिया और पचौरी की आपस में बात नहीं हो पाई थी। कांग्रेस के महाकौशल के एक नेता के जरिए सुरेश पचौरी की भाजपा में बात हुई लेकिन महाकौशल के नेता वही पद चाहते थे जिस पद पर वह कांग्रेस सरकार में थे। उस वक्त सुरेश पचौरी खेमे की तरफ से उन्हें राज्यसभा में भेजने की भी शर्त रखी गई थी। तब बात नहीं बन पाई और सुरेश पचौरी कांग्रेस में ही रह गए।

भोज परीक्षाओं में खुलेआम फर्जीवाड़ा, प्रायोगिक परीक्षा में डमी कैंडिडेट को किया जा रहा शामिल
अनूपपुर (anuppur) के जैतहरी शासकीय महाविद्यालय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। Mukhbrimp.com को मिली जानकारी के अनुसार जैतहरी शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर रमेश कुमार वाटे हों या फिर कंपयूटर आपरेटर अशोक राठौर हों अभी तक यह पता था कि इन दोनों कि जुगल बंदी बड़ी जोरों शोरों से चलती थी ,लेकिन खबरों के प्रकाशन के बाद जैतहरी शासकीय महाविद्यालय में भोज मुक्त परीक्षाओं में एक और महाशय का भी नाम सामने आ गया है ,जिनका नाम है जितेंद्र सिंह धुर्वे यह भी जैतहरी शासकीय महाविद्यालय में वसूली करने में बड़ी जोर लगे हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि जितेंद्र सिंह धुर्वे भी बड़े किरदार में रहते हैं इनका साफ कहना रहता है कि रूपया है तो सब कुछ है ,आइये परीक्षा दीजिए दिल खोलकर नकल कीजिए हम है न ,सब संभाल लेंगे और अगर मन नहीं कर रहा है कि पढ़ाई करें ,परीक्षा कापी में लिखने की भी दिक्कत होती है तो भी आप लोगों को सुविधा दी जाएगी। जुगाड़ कीजिए और घर बैठे आपकी जगह किसी दूसरे को बैठा देगें ,किसी को पता भी नहीं चलेगा ,प्राचार्य हमारे और हमारे साथी अशोक राठौर सब संभाल लेते हैं चिंता मत करें आज तक कोई भी नहीं पकड़ाया तो टेंशन मत लें यह कारोबार हमारा काफी दिनों से चल रहा है हमारी पहचान बड़े बड़े लोगों से है ,आपके ऊपर और आपकी डिग्रियों पर कोई आंच नहीं आयेगी। गौरतलब है कि जैतहरी शासकीय महाविद्यालय पहले भी सुर्खियां बटोरता रहा है लेकिन कुछ और मामलों पर मोटी रकम और डमी कैंडिडेट को बैठाने का राज किसी को भी पता नहीं था। लेकिन इनकी अवैध वसूली और जुगल बंदियों का सफर ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और इनके बीच मोटी रकम को लेकर बहस बाजी और रूपयों को लेकर सामंजस्य न बैठ पाने से विवाद सामने आने लगा और जैतहरी महाविद्यालय की पोल खुलने लगी।

सीएम मोहन यादव ने शासकीय सेवकों के डीए की मंगाई फाइल,मिल सकती है खुशखबरी
केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों (central government employees) का चार फीसदी डीए एक बार फिर बढ़ा दिया है। अब केन्द्रीय कर्मचारियों को कुल 50% डीए मिल रहा है लेकिन मप्र के शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को अब भी 42% प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है। केन्द्र सरकार की तरफ से चार फीसदी फिर डीए बढ़ाए जाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कर्मचारियों के डीए की फाइल को फिर मंगवा लिया है। कैबिनेट में इस बात पर फैसला लेना है कि, महंगाई भत्ता का भुगतान किस तारीख से किया जाना है और एरियर की राशि किस प्रकार देना है। इसके अलावा लगभग 5.47 लाख पेंशनर्स को महंगाई राहत भी दी जानी है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले पेमेंट नहीं करना पड़ेगा क्योंकि एक सरकारी कागज के माध्यम से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकार, पेंशनर्स को परेशान करती रहती है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता इसी महीने के दूसरे सप्ताह में लग सकती है। इसके पहले सरकार कर्मचारियों का डीए और पेंशनर्स का डीआर देने की तैयारी में है। मप्र में कर्मचारियों का 1 जुलाई 2023 से 4% डीए बकाया है। उनका हिसाब बराबर करने डीए का 9 महीने का एरियर देना होगा। इस मामले में 4% डीए देने का प्रस्ताव तो वित्त विभाग ने तैयार कर भेजा हुआ है, जिस पर मुख्यमंत्री से चर्चा कर अंतिम फैसला लिया जाना है। प्रस्ताव के अनुसार कर्मचारियों का 4% डीए का भुगतान करने पर हर महीने 180 से 190 करोड़ रुपए हर महीने का अतिरिक्त खर्च आना है। एरियर का भुगतान करने पर यह खर्च 1700 करोड़ रुपए होगा। वहीं आगामी 1 अप्रैल से 31 मार्च 2025 तक बढ़े हुए डीए का अतिरिक्त खर्चा 2280 करोड़ रुपए होगा। पेंशनर्स को 4 प्रतिशत महंगाई राहत दिए जाने पर हर महीने 80 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्चा आना है। हालाकि इसके लिए सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव पारित कर प्रति छत्तीसगढ़ को भेजना होगा, वहां से सहमति मिलने के बाद पेंशनर्स को डीआर दिए जाने के आदेश जारी किए जा सकेंगे।

कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका,सुरेश पचौरी सहित आधा दर्जन नेता बीजेपी में हुए शामिल
मप्र में राहुल गांधी के जाते ही कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस नेताओं में चार बार राज्यसभा सांसद रहे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी के साथ, विशाल पटेल,गजेंद्र सिंह राजू खेड़ी,संजय शुक्ला,अर्जुन पलिया,आलोक चंसोरिया,कैलाश मिश्रा,योगेश शर्मा,अतुल शर्मा,सुभाष यादव,दिनेश ढिमोले ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन सभी नेताओं को जॉइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) भाजपा में लेकर आए हैं। ज्वानिंग के दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,सीएम मोहन यादव,पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान,मंत्री कैलाश विजय वर्गीय मौजूद रहे। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा कि जिस प्रकार से भगवान राम के स्थापना दिवस के निमंत्रण को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया था उसके बाद से ही वो आहत चल रहे थे। साथ में सुरेश पचौरी ने ये भी कहा कि पहले वाली कांग्रेस अब नहीं रही। और यही कारण है कि उन्होने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी ने कहा कि यूं ही कोई वेबफा नहीं होता। कुछ तो कारण रहे होंगे वेवफा होने के।