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डीए में केन्द्रीय कर्मचारियों से 8% पीछे हुए राज्य के शासकीय कर्मचारी
केन्द्रीय कर्मचारियों (central government employees) को एक जनवरी 2024 से 50 प्रतिशत की दर से मंहगाई भत्ता मिलेगा। गुरुवार को केन्द्र सरकार ने चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया है। वहीं प्रदेश के सात लाख नियमित कर्मचारियों को अभी 42 प्रतिशत की दर से मंहगाई भत्ता मिल रहा है। इस प्रकार अब केन्द्रीय कर्मचारियों की तुलना में प्रदेश के शासकीय (mp government employees) मंहगाई भत्ते के मामले में आठ प्रतिशत पीछे हो गए हैं। मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की वृद्धि विस चुनाव के समय से लंबित है। केन्द्र ने जुलाई 2023 से अपने कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता और पेंशनरों की मंहगाई राहत में चार प्रतिशत की वृद्धि कर 46 प्रतिशत कर दी थी। तत्कालीन शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग को मंहगाई भत्ते में वृद्धि का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन मतदान के प्रभावित होने की संभावना से अनुमति नहीं मिली थी। चुनाव के बाद से इसकी फाइल चल रही है पर सरकार अंतिम निर्णय अब तक नहीं ले पाई है। इस बीच मोहन सरकार ने परिपाटी तोड़ते हुए अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों का मंहगाई भत्ता जनवरी 2024 से केन्द्रीय कर्मचारियों के समान चार प्रतिशत बढ़ा कर 46 प्रतिशत कर दिया था। इस मामले में वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हमारी तैयारी हो चुकी है। सरकार के स्तर पर जैसे ही अंतिम निर्णय होगा,कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते में वृद्धि कर दी जाएगी।

भक्ति,मुदित और हर्षवर्धन के नेत्रृत्व में भाजपा ने बनाई पांच सदस्यीय डिजिटल टीम
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (mp bjp) ने पांच सदस्यीय डिजिटल टीम का गठन कर दिया है। भाजपा की इस डिजिटल टीम का नेत्रृत्व युवा नेत्री भक्ति शर्मा (bhakti sharm), मुदित शेजवार (mudit shejwar) और हर्षवर्धन जोशी (harshavardhan joshi) करेंगे। इनके सहयोग के लिए दो अन्य सदस्य भी दिए गए हैं। यह डिजिटल टीम डिजिटल ऐड के बारे में डिकसन कर पार्टी नेत्रृत्व को देगी और जब वो फायनल होगा तो फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म में प्रसारित किया जाएगा। गौरतलब है कि भक्ति और मुदित शेजवार को लेकर लंबे समय से भाजपा में कोई जिम्मेदारी देने की योजना चल रही थी लेकिन पार्टी नेत्रृत्व तय नहीं कर पा रहा था कि इन युवा नेताओं को उनकी क्षमता के हिसाब से कौन सी जिम्मेदारी दी जाए। आखिरकार चुनाव करीब आया तो पार्टी नेत्रृत्व ने इन युवा नेताओं को गंभीर जिम्मेदारी देकर यह बता दिया है कि पार्टी में चेहरों के हिसाब से उन्हे कार्य वितरित किए जाते हैं। भाजपा की यह युवा डिजिटल टीम सोशल मीडिया में प्रसारित होने वाली सभी प्रकार की सामग्री पर नजर रखने के अलावा कांग्रेस के कार्यकर्ता अथवा आईटी सेल के लोग किस प्रकार मोदी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं उस पर भी नजर रखेंगे। साथ में यह प्लान भी तैयार करेंगे कि कांग्रेस के आरोपों का काउंटर कैसे करना है। भक्ति और मुदित के नेत्रृत्व में बनाई गई टीम को बारीकी से कांग्रेस के भ्रामक प्रचार पर नजर रखने के लिए भी कहा गया है।

शासकीय कर्मचारियों के वोट की भाजपा को नहीं जरुरत,इसी लिए डीए पर नहीं किया विचार
प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने लोकसभा चुनाव में वोट लेने के लिए अलग-अलग वर्गों को साधने का प्लान तैयार कर लिया है। यही कारण है कि मोहन सरकार ने शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को चार फीसदी लंबित डीए देने के मामले में चुप्पी साध ली है। प्रदेश की भाजपा सरकार का सोचना है कि जिस प्रकार से लाड़ली बहनों ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर माला माल किया है ठीक उसी प्रकार से लोकसभा चुनाव में भी लाड़ली बहनें भाजपा के उम्मीदवारों को मोदी के नाम पर वोट देंगी। हाल ही में इसकी झलक पीएम मोदी के भाषण में भी सुनने को मिली जब उन्होने एक बड़ी सभा में कहा कि देश की सभी महिलाएं उनकी बहन और परिवार हैं। मतलब साफ है कि भाजपा को शासकीय कर्मचारियों से ज्यादा देश और प्रदेश की महिलाओं पर विश्वास है। महिलाओं के अलावा भाजपा ने किसानों को भी अपने वोट बैंक का हिस्सा माना है। फरवरी की अंतिम तारीख को पीएम मोदी ने किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि की राशि डाली थी और उसके बाद Mukhbirmp.com ने शिवराज सरकार द्वारा संचालित किसान कल्याण योजना को मोहन सरकार को याद दिलाया तब मोहन सरकार ने भी छह मार्च को किसानों के खाते में डाल दिया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की तरफ से संचालित किसान कल्याण योजना को प्रदेश की मोहन सरकार भूल गई थी जब इस मामले में Mukhbirmp.com ने खबर प्रकाशित की तो उसके अगले दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राशि डालने की घोषणा की और फिर छह मार्च को यह राशि किसानों के खाते में डाल दी गई है। अब भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि प्रदेश की महिलाओं,किसानों और युवाओं को साध लिया जाएगा तो शासकीय कर्मचारियों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। यही कारण है कि प्रदेश की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों के चार फीसदी डीए पर किसी भी प्रकार का फैसला नहीं कर रही है जबकि विधानसभा के बजट सत्र में कर्मचारियों के डीए को लेकर प्राविधान किया गया था लेकिन मोहन सरकार यह मान कर चल रही है कि कर्मचारियों को डीए देने का मतलब सीधे तौर पर फिजूल खर्ची है उससे ज्यादा कुछ नहीं।

बीजेपी में पांच सीटों पर अब तक नहीं हुआ फैसला,चार में महिला उम्मीदवार की उम्मीद,कांग्रेस की बैठक आज
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए एमपी की 29 लोकसभा सीटों में 24 की घोषणा कर दी है (bjp lok sabha candidate list) । अब पांच सीटों पर संशय की स्थिति बन गई है। केन्द्रीय हाई कमान का मानना है कि कमजोर सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मौका दिया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि इसी लिए भाजपा में बची हुई पांच सीटों के लिए फैसला नहीं हो पार रहा है। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा छोड़ कर बांकी की चार सीटों पर बीजेपी महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतार सकती है (mo bjp)। अभी तक 24 सीटों में चार महिला उम्मीदवारों को भाजपा ने मौका दिया है। पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी और बढ़नी चाहिए इसलिए पांच में चार सीटें महिलाओं के खाते में जाने की संभावना बढ़ गई है। उधर कांग्रेस की बात करें तो अभी तक एक भी प्रत्याशी की घोषणा कांग्रेस पार्टी नहीं कर पाई है। आज दिल्ली में कांग्रेस ने केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक आयोजित की है। जिसमें स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचार कर उसे अंतिम रुप दिया जाएगा। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी,विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम भाग लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के लिए सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में रायशुमारी कराई थी। समन्वयकों ने जिला,ब्लाक इकाइयों के पदाधिकारी,विधायक,विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी,पार्टी के सभी संगठनों के पदाधिकारियों से संभावित दावेदारों से जानकारी ली है।

विधायकी और प्रदेश महामंत्री पद के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे भगवानदास सबनानी
भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान पदाधिकारी कहे जाने वाले भाजपा नेता भगवानदास सबनानी (bhagwandas sabnani) अब भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से विधायक बन गए हैं। यहां तो ठीक है लेकिन उनके पास पार्टी का प्रदेश महामंत्री का पद पहले से है जिसको वो पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। लेकिन पार्टी ने उन्हे विधायक बनने का भी मौका दिया जिसमें वो फतह हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन अब भगवानदास सबनानी प्रदेश महामंत्री और विधायक पद के बीच संतुलन बनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम का विधायक होने के नाते भगवानदास सबनानी के पास रोजाना सैकड़ों कार्यकर्ता अपना काम लेकर आते हैं लेकिन भगवानदास सबनानी पहले ही पार्टी के कामों में इतना ब्यस्त रहते हैं कि वो कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे पाते हैं जिसके कारण दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के पार्टी कार्यकर्ता और आम नागरिक खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। हमेशा शांत और मुस्कुराते रहने वाले भगवानदास सबनानी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के काफी करीबी माने जाते हैं जिसके कारण कार्यकर्ता उनसे कुछ कहने का साहस भी नहीं जुटा पाते हैं। भगवानदास सबनानी इन दिनों चिड़चिड़े भी होने लगे हैं। पार्टी का काम और फिर विधायकी का काम दोनों एक ब्यक्ति पर आने के कारण ब्यस्तताएं बढ़ गई हैं। और यही उनके चिड़चिड़े होने का कारण भी बताया जा रहा है। इस बात में कोई सक नहीं कि भगवानदास सबनानी एक मेहनती वर्कर हैं लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अब वो सिर्फ प्रदेश महामंत्री नहीं बल्कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के जनप्रतिनिधि भी हैं और उस क्षेत्र की जनता के साथ कार्यकर्ताओं की कुछ जरुरतें होती हैं जिनको पूरा करना जनप्रतिनिधि का ही काम होता है। कई कार्यकर्ता तो बीजेपी कार्यालय में सबनानी से मिलने के दिन भर खड़े रहते हैं लेकिन उनकी मुलाकात सबनानी से नहीं हो पाती। और यही करण है कि भगवानदास सबनानी के दोनों पदों से संतुलन नहीं बना पाने के कारण स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं में निराशा और नाराजगी का माहौल बनने लगा है।

शासकीय कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही 'मोदी की गारंटी' डीए के प्रस्ताव पर अब तक मंजूरी नहीं
मध्यप्रदेश की करीब साढ़े सात लाख कर्मचारियों का डीए पिछले छह महीने से लंबित है जिसके चलते प्रति माह शासकीय सेवकों को चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। विधानसभा चुनाव में आचार संहिता के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डीए को लेकर पैरवी की थी लेकिन निर्वाचन आयोग की तरफ से उसकी अनुमति नहीं मिली थी। कर्मचारियों को लगा था कि चुनाव समाप्त होने के बाद उनका अधिकार उन्हे मिल जाएगा लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि शासकीय सेवकों के डीए का प्रस्ताव सरकार के पास नहीं पहुंचा है। अब तक नई सरकार बनने के बाद तीन से अधिक बार शासकीय सेवकों (mp government employees) के डीए का प्रस्ताव मुख्यसचिव के टेबल पर गया और उसी तरह सीएम मोहन यादव के टेबल पर भी प्रस्ताव गया लेकिन हर बार मुख्यमंत्री ने यह कह कर प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि अभी बजट नहीं है आगे देखेंगे। अब लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने वाली है। अभी तक राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों का चार फीसदी डीए देने पर किसी प्रकार का विचार नहीं किया है। मंत्रालय में मौजूद Mukhbir का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के एक या दो दिन पहले मुख्यमंत्री डीए देने की घोषणा कर सकते हैं जिससे लोकसभा चुनाव में शासकीय सेवकों का वोट लिया जा सके। जबकि सोमवार को मोहन कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी जिसमें धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा अन्य प्रस्तावों पर चर्चा हुई और उनमें सहमति भी बनी लेकिन इस कैबिनेट में भी शासकीय कर्मचारियों के डीए पर सरकार ने मुहर नहीं लगाई है। सरकार का मानना है कि 'मोदी की गारंटी' पर जनता को विश्वास है लिहाजा जनता भाजपा के प्रत्याशियों को ही चुनाव जिताएगी शासकीय सेवकों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। वहीं कर्मचारी संगठनों की नाराजगी अब धीरे-धीरे सतह पर आने लगी है। कर्मचारी नेताओं का साफ कहना है सरकार ने उनको सिर्फ ठगने का काम किया है सिर्फ आश्वासन देने का काम किया जा रहा है जिसे अब कर्मचारी भी समझ चुके हैं।

अबकी बार 'गणेश विसर्जन' पर ध्यान,सतना रीवा की जनता भाजपा के 'थोपे' उम्मीदवारों से नाराज
लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने देश के 16 राज्यों की 195वे लोकसभा सीटों के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसमें एमपी की 29 सीटों के 24 उम्मीदवार भी शामिल हैं। भाजपा ने इस बार कोई भी चौकाने वाला निर्णय नहीं लिया जो जनता के गले से नहीं उतर रहा है। विंध्य की बात करें तो सतना लोकसभा सीट से सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर भाजपा ने एक बार फिर भरोसा कर स्थानीय जनता को नाराज कर दिया है। सतना एक ब्राम्हण बाहुल सीट मानी जाती है और गणेश सिंह कुर्मी समाज से आते हैं। और गणेश सिंह एक कट्टर जातिवादी नेता माने जाते हैं जिसके चलते अन्य वर्ग के लोग उनसे नाराज रहते हैं। दो बार सतना की जनता ने मोदी के नाम पर सांसद बना दिया लेकिन इस बार सतना की जनता गणेश सिंह को फिर सांसद नहीं बनाना चाहती है। जनता मोदी को तो चाहती है लेकिन गणेश सिंह को नहीं चाहती जिसका उदाहरण विधानसभा चुनाव में देखने को मिल चुका है। सतना की जनता गणेश सिंह को विधानसभा चुनाव में हरा चुकी है। कुछ ऐसा ही हाल रीवा का भी देखने को मिल रहा है जहां भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है। जनार्दन मिश्रा को राजेन्द्र शुक्ला का डमी कैंडीडेट के रुप में माना जाता है। जनार्दन मिश्रा एक सरल और सौम्य सांसद की छवि रखते हैं लेकिन उनकी समस्या ये है कि वो क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहते हैं। दस साल तक सांसद रहने के बाद भी जनार्दन मिश्रा आज तक पूरे रीवा का भ्रमण नहीं कर पाए हैं। रीवा की जनता बहुत जागरुक मानी जाती है। थोपे गए नेताओं को रीवा की जनता ज्यादा बर्दास्त नहीं करती है। लिहाजा इस बार के लोकसभा चुनाव में रीवा और सतना की लोकसभा सीटें भाजपा के लाए कठिनाई पैदा कर सकती हैं। देखना दिलचश्प यही होगा कि जनता की नाराजगी जीतती है अथवा मोदी की गारंटी के आगे जनता नतमस्तक होती है।

बीजेपी का अभियान 'मोदी का परिवार' प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने X पर बदली प्रोफाइल
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने एक्स पर अपनी प्रोफाइल बदल दी है। इसके साथ ही बीजेपी ने 'मोदी का परिवार' नाम को अभियान भी बना लिया है (modi ka parivar)। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा अपनी प्रोफाइल में लिखा है 'मोदी का परिवार' गौरतलब है कि पीएम मोदी ने पूरे देश की जनता को अपना परिवार बताया था। जिसके बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने मोदी के परिवार पर निशाना साधा था। लालू के तंज कसने के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी प्रोफाइल को बदला है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को युवाओं का प्रेरणाश्रोत माना जाता हैं और जिस प्रकार से उन्होने अपनी प्रोफाइल बदली है उससे यह साफ है कि अब बीजेपी के अन्य नेता भी अपनी प्रोफाइल बदलेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव और अन्य मंत्रियों ने भी प्रदेश अध्यक्ष के बाद अपनी प्रोफाइल को बदल दिया है। माना जा रहा है कि अब बीजेपी का हर कार्यकर्ता अपनी प्रोफाइल बदलने वाला है।

मोहन यादव ने चुपके से बंद की 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना'
तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) में प्रदेश के किसानों को राहत देने के लिए 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' (mukhyamantri kisan kalyan yojana) शुरु की गई थी जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) साल में तीन बार दो-दो हजार की तीन किस्त किसानों के खाते में डालते थे जो साल में कुल छह हजार रुपये किसानों को मिलती थी। केन्द्र सरकार की तरफ से भी किसान सम्मान निधि संचालित की जा रही है उस योजना में भी दो-दो हजार रुपये की साल में कुल तीन किस्ते ट्रांसफर की जाती हैं। इस प्रकार केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को साल में 12 हजार रुपये खेती के लिए दिए जाते थे। लेकिन प्रदेश में सीएम बदलने के बाद एमपी सरकार की ओर से संचालित की जा रही 'किसान कल्याण' योजना को चुपके से बंद कर दिया गया। किसानों को इस बात की भनक तक नहीं लगी और प्रदेश की राज्य सरकार ने इतनी बड़ी योजना को बंद कर दिया है। इस बात से साफ दिखता है कि लाड़ली बहना योजना (ladli behna yojana) को संचालित करने के लिए अलग-अलग योजनाओं को बंद किया जा रहा है। और को इसकी भनक तक नहीं लग पा रही है। इतना ही नहीं कर्मचारियों का चार फीसदी डीए छह महीने से लंबित है लेकिन राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना के कारण उसका भुगतान भी नहीं कर पा रही है।

'ऐसा लगा जैसे बम फूटा हो' बीजेपी से नाम की घोषणा होने पर बोली अनीता नागर
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए 194वे उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है जिसमें एमपी की 24 सीटें शामिल हैं (bjp lok sabha candidate list)। एमपी की जैसे ही घोषणा हुई तो कुछ उम्मीदवारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रतलाम से अनीता नागर (anita nagar chouhan) को लोकसभा उम्मीदवार बनाया गया है उन्होने उम्मीद ही नहीं की थी कि उनका नाम भी लोकसभा प्रत्याशियों में हो सकता है। अनीता नागर ने कहा कि जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई 'ऐसा लगा जैसे बम फूट गया हो' अनीता नागर एक युवा नेत्री हैं उन्होने खुले तौर पर कहा कि पार्टी उन्हे भी मौका दे सकती है ऐसी उम्मीद उन्होने नहीं की थी। कुछ ऐसा ही हाल भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष दर्शन सिंह चौधरी के साथ भी हुआ। हांलाकि वो टिकट को लेकर काफी समय से कोशिश कर रहे थे। विधानसभा चुनाव में भी दर्शन सिंह ने प्रयास किया था लेकिन बात नहीं बनी और बात बनी तो लोकसभा चुनाव में। दर्शन सिंह का कहना है कि उन्होने अपने जीवन में पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया है कभी फल की उम्मीद नहीं की और उन्हे उम्मीद नहीं थी कि उनके जैसे छोटे कार्यकर्ता को मौका मिलेगा लेकिन भारतीय जनता पार्टी में मोदी हैं तो सबकुछ मुमकिन है। दर्शन सिंह ने कहा कि पार्टी के केन्द्रीय और प्रदेश के नेतृत्व ने उन पर जो विश्वास जताया है उस पर वो पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि भाजपा ने एमपी की 29 में से 24 सीटों की घोषणा की है जिसमें छह सांसदों के टिकट काटे गए हैं। और जिन छह नए लोगों को मौका मिला है वो अभी तक इस बात का विश्वास नहीं कर पा रहे कि पार्टी ने उन्हे लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है।

टिकट वितरण में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का रहा जलवा,जो नाम दिये वो हुए कुबूल
लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने एमपी की 29 सीटों में 24 सीटों की घोषणा कर दी है (mp lok sabha candidate list)। हालाकि इस सूची की बात करें तो भाजपा ने एक बार फिर चौका दिया है। जिस प्रकार से लोगों ने सूची में बदलाव की उम्मीद की थी वैसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। जिन 24 सीटों की घोषणा हुई है उसमें सिर्फ छह सांसदों के टिकट काटे गए हैं। मतलब साफ है कि भाजपा ने सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हुए किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं और प्रदेश की आम जनता को उम्मीद थी कि भाजपा इस चुनाव में काफी कुछ चौकाएगी। लेकिन सभी की उम्मीदों पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने पानी फेर दिया। जिन सांसदों के टिकट कटने का लोग इंतजार कर रहे थे उन सांसदों का टिकट नहीं कटा। हांलाकि एमपी बीजेपी (mp bjp) इस सूची को सर्वश्रेष्ठ बताने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने जिस प्रकार से सीटों का आंकलन किया और अपनी अंतिम सहमति दी उसे केन्द्रीय नेतृत्व ने सहर्स स्वीकार किया। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भोपाल से जरुर उम्मीद की जा रही थी लेकिन उन्हे खजुराहो से ही रिपीट किया गया है। एक बड़ा नाम है जिसकी सभी उम्मीद लगा रहे थे कि उनको भाजपा लोकसभा चुनाव में मौका देगी डॉ. नरोत्तम मिश्रा लेकिन अभी तक घोषित 24 नामों की सूची में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नाम पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने किसी प्रकार से दिलचश्पी नहीं दिखाई है। अभी पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होनी बांकी है अब सभी की नजरें पांच सीटों पर टिकी हैं कि किसका भाग्य उन सीटों पर पलटने वाला है।

बीजेपी ने पहली सूची में किये 195 नाम घोषित,विदिशा से मैदान में होंगे शिवराज
मप्र की 29 में से 24 लोकसभा सीटों पर नामों की घोषणा मुरैना - शिवमंगल सिंह तोमर भिंड - संध्या राय ग्वालियर - भारत सिंह कुशवाहा गुना - ज्योतिरादित्य सिंधिया सागर - लता वानखेड़े टीकमगढ़ - वीरेंद्र खटीक दमोह राहुल लोधी खजुराहो - वीडी शर्मा सतना - गणेश सिंह रीवा - जनार्दन मिश्रा सीधी - डॉक्टर राजेश मिश्रा शहडोल - हिमाद्री सिंह जबलपुर - आशीष दुबे मंडला - फगन सिंह कुलस्ते होशंगाबाद - दर्शन सिंह चौधरी विदिशा - शिवराज सिंह चौहान भोपाल - आलोक शर्मा राजगढ़ - रोडमल नागर देवास - महेंद्र सिंह सोलंकी मंदसौर - सुधीर गुप्ता रतलाम - अनीता नगर सिंह चौहान खरगोन - गजेंद्र पटेल खंडवा - ज्ञानेश्वर पाटिल बैतूल - दुर्गादास उईके