#MP
Total published stories tagged under #MP: 1884

बीमार 'अस्पताल की सर्जरी' में जुटे डॉ. मोहन यादव
प्रदेश के शासकीय अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है। इस बात के सबूत आए दिन न्यूज चैनल और अखबारों में प्रकाशित होती रहती है। प्रदेश के सभी अस्पताल चिकित्सकों और सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं और मरीज परेशान हो रहे हैं। अब प्रदेश की कमान डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) के हाथ है लिहाजा अब वो प्रदेश के शासकीय अस्पतालों की सर्जरी कर उन्हे एक बार फिर चलने योग्य बनाने की योजना तैयार कर रहे हैं। यही कारण है कि 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 18 दिसंबर को मुख्यमंत्री राजधानी के सबसे प्रमुख अस्पताल हमीदिया में औचक निरीक्षण पर निकले। यह बात और है कि यह निरीक्षण महज एक औपचारिकता मात्र निकला लेकिन इस दौरान मरीजों के परिजनों से मुख्यमंत्री मिले उन्हे गले लगा कर जिस प्रकार से मुख्यमंत्री ने उन्हें संवाल दिया वो जरुर काबिले तखरीफ है। सीएम बनने के बाद डॉ. मोहन यादव पहले कॉलेज गए उसके बाद उनका दौरा अस्पताल में हुआ उससे यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री बीमार पड़े अस्पताल और शिक्षा के मंदिरों का इलाज करने का मूड बना रहे हैं। डॉ. यादव इससे पहले उच्च शिक्षा मंत्री थे और नई शिक्षा नीति (new education policy) को सबसे पहले एमपी में लागू कर उन्होने रिकार्ड भी बनाया था।

मप्र सरकार पर वित्तीय संकट,कई योजनाओं पर लगा ब्रेक
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 जीतने के लिए शिवराज सरकार (shivraj government) ने सरकारी खजाना खोल दिया था। अब खजाना खाली हो गया है। मध्य प्रदेश पर 3.31 लाख करोड़ का लोन है और अब केवल 15000 करोड़ की लिमिट बची है। नतीजा सरकार ने मध्य प्रदेश के 38 विभागों द्वारा संचालित योजनाओं पर रोक लगा दिए। मध्य प्रदेश शासन (mp government) के वित्त विभाग ने 38 विभागों की योजनाओं पर रोक लगाते हुए, निर्देशित किया है कि सभी विभाग राजस्व संग्रहण के काम को प्राथमिकता पर रखें। जिन योजनाओं पर रोक लगाई गई है, उनमें नगरीय प्रशासन विभाग की महाकाल परिसर विकास योजना, मेट्रो ट्रेन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित तीर्थ दर्शन योजना भी शामिल है। इसके अलावा अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि देने की योजना भी समाप्त कर दी गई है। गृह विभाग के अंतर्गत थानों के सुदृढ़ीकरण, परिवहन विभाग की ग्रामीण परिवहन नीति के क्रियान्वयन, खेल विभाग के खेलो इंडिया एमपी, सहकारिता विभाग की मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना, लोक निर्माण विभाग की विभागीय संपत्तियों के संधारण, स्कूल शिक्षा विभाग की निशुल्क पाठ्य सामग्री के प्रदाय, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लेपटाप प्रदाय, एनसीसी के विकास एवं सुदृढीकरण, जनजातीय कार्य विभाग टंट्या भील मंदिर के जीणोद्धार, उच्च शिक्षा विभाग की योजना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नए आईटी पार्क की स्थापना, विमानन विभाग की भू-अर्जन के लिए मुआवजा, ग्रामीण विकास विभाग की पीएम सड़क योजना में निर्मित सड़कों का नवीनीकरण और महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भवन निर्माण सहित अन्य योजनाओं में व्यय बिना वित्त विभाग की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंतिम संस्कार हेतु मदद वाली योजना भी बंद मध्य प्रदेश के अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि नहीं दी जाएगी। नई राज्य सरकार ने नौ साल पहले शिवराज सरकार के समय बनाई योजना, जिसमें अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उनकी दुर्घटना में मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता एवं एक लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था, इसे भी बंद कर दिया है। मध्य प्रदेश श्रम विभाग के अंतर्गत कार्यरत भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल ने चार दिसंबर 2014 को मंडल में अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा देने की योजना जारी की थी जिसमें निर्माण श्रमिकों को उनकी मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता, निर्माण कार्य के दौरान घटित दुर्घटना में मृत्यु होने पर एक लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर 75 हजार रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था। 13 जनवरी 2017 में इस योजना में बदलाव कर प्रविधान किया गया था कि दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर दो लाख रुपये अनुग्रह राशि दी जाएगी। अब यह योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है।

कांग्रेस मीडिया विभाग की लंका लगा चुके आखिर आपस में बात क्या कर रहे हैं?
मप्र में कांग्रेस (mp congress) की करारी हार के बाद बड़ा बदलाव किया गया है। आमतौर पर किसी भी राजनीतिक पार्टी का चेहरा उसका मीडिया विभाग माना जाता है (congress media department)। भाजपा के मीडिया विभाग ने तो बगैर आत्म विश्वास में आए बढ़िया काम किया लेकिन कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग की हालत तो ऐसी हो गई कि वो मंत्रिमंडल से लेकर निगम मंडल तक बनाने लगे थे। इतना ज्यादा आत्म विश्वास बढ़ गया था कि किसी को फोन पर बात करते थे तो यही कहते थे कि कांग्रेस की सरकार आ रही है हमारे हिसाब से काम करो। कांग्रेस का मीडिया विभाग ही था जो कमलनाथ से जाकर कहता था कि इस बार 180 से ज्यादा सीटें कांग्रेस जीत कर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। ये ऐसे लोग हैं जो अति आत्म विश्वास में आकर पत्रकारों की लिष्ट तैयार कर रहे थे। बहुत सारे पत्रकारों को इन्होने ब्लैकलिष्ट किया था। कांग्रेस मुडिया विभाग की कमान पूर्व पत्रकार पीयूस बबेले और केके मिश्रा के हाथ में थी। जिन्होने अति आत्म विश्वास के चलते पार्टी के कार्यकर्ताओं से लेकर पत्रकारों तक को कुछ नहीं समझा। कांग्रेस मीडिया विभाग को लग रहा था कि 'गोल्डन' गैंग को अपने पक्ष में कर लेंगे तो सबकुछ ठीक हो जाएगा। हुआ भी वैसा ही। इन्होने खुद का तो ठीक कर लिया लेकिन दूसरों को बरबाद कर दिया। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की करारी हार के बाद इनके चेहरे में सिकन नहीं बल्कि और ज्यादा चमक दिखाई पड़ रही है। तस्वीर से ऐसा लग रहा है कि जैसे दोनों एक दूसरे को कान में कह रहे हों कि कांग्रेस का काम तो ठिकाने लगा दिया अब अगे क्या करना है।

जीतू पटवारी बने पीसीसी चीफ,उमंग सिंघार होंगे नेता प्रतिपक्ष
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद एआईसीसी ने एमपी कांग्रेस में बड़ा फेर बदल किया है (mpcc)। अब मध्य प्रदेश कांग्रेस की कमान युवा नेता जीतू पटवारी (jitu patwari) के हाथों में होगी जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। वही आदिवासी नेता उमंग सिंघार (umang singhar) विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाएंगे। हेमंत कटारे (hemant katare) को उप नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। विधानसभा चुनाव में हर के बाद लगातार इस बात के प्रयास लगाए जा रहे थे कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में अब फेरबदल होगा और आज वह फिर बदल व्यापक स्तर पर देखने को मिला है। माना यह जा रहा है कि जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस पार्टी की स्थिति सुधरेगी और उसमें युवाओं को मौका मिलेगा।

'एमपी में विवाद का रास्ता ढूढ़ रही सरकार' पीसीसी चीफ कमल नाथ ने लगाया आरोप
मध्य प्रदेश के पीसीसी चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath) ने डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) सरकार पर निशाना साधा है। लाउडस्पीकर और खुले में मांस बेचने के सरकार के फैसले पर कहा है कि मोहन सरकार विवाद के लिए बहाना ढूंढ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कोई भी निर्णय ले लेकिन विवाद नहीं होना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि हमारी संस्कृति जोड़ने की है और प्यार मोहब्बत से रहने की है। लाउडस्पीकर और खुले में मांस बेचने पर रोक लगाकर प्रदेश सरकार विवाद के लिए बहाना ढूंढ रही है। पीसीसी चीफ ने कहा कि सरकार कोई भी फैसला ले लेकिन विवाद नहीं होना चाहिए। आपको बता दें कि एमपी की मोहन सरकार ने निर्णय लिया है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल अथवा अन्य स्थान में निर्धारित मापदण्ड के अनुरूप ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउड स्पीकर/डीजे) आदि का उपयोग किया जा सकेगा। राज्य शासन ने ध्वनि प्रदूषण और लाउड स्पीकर आदि के अवैधानिक उपयोग की जांच के लिये सभी जिलों में उड़नदस्ते गठित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में प्रभार ग्रहण करने के बाद इससे संबंधित प्रथम नस्ती पर हस्ताक्षर किए। मध्यप्रदेश में धार्मिक स्थल और अन्य स्थानों पर मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के प्रावधानों, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुक्रम में राज्य शासन ने यह निर्णय लिया है।

लगातार चुनाव जीतने वाले भाजपा नेताओं की केस स्टडी करवाएगी भाजपा
मप्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल कर यह बता दिया है कि भाजपा को चुनाव लड़ना और जीतना आता है (madhya pradesh elections)। लेकिन भाजपा की खूबी यह है कि भाजपा सिर्फ इतने में ही सीमित नहीं है। इस जीत को अजेय बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी कुछ अलग-अलग पहलुओं पर काम करने की योजना तैयार कर रही है जिससे इस प्रकार की जीत को लगातार कायम रखा जा सके। जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी की बड़ी प्रयोगशाला मध्यप्रदेश माना जाता है ठीक उसी प्रकार प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अलग-अलग तरह के प्रयोग करने से किसी प्रकार का गुरेज नहीं करते हैं। उनकी चुनाव जीत की भूख और संगठन को लगातार मजबूत करने की इच्छा शक्ति पार्टी को और मजबूत करने में अक्शर कारगर साबित होती है। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा अब कुछ और नया प्रयोग करने की योजना तैयार कर रहे हैं। भाजपा अब अपने ही उन नेताओं की केस स्टडी करवाएगी जो लगातार चुनाव जीत रहे हैं। भाजपा में कुछ ऐसे विधायक हैं जो एक लाख से अधिक मतों से चुनाव जीत रहे हैं। लगातार चुनाव जीतने वालों में सबसे पहला नाम आता है गोपाल भार्गव का उसके बाद एक लाख से अधिक मतों से लगातार चुनाव जीतने वाले हैं रमेश मेंदोला,ठीक इसी प्रकार भाजपा अन्य नेताओं की लिष्ट तैयार कर रही है जो लगातार ज्यादा से ज्यादा मतों से चुनाव जीत रहे हैं। इन सभी नेताओं के चुनाव प्रबंधन और चुनाव जीतने के तरीके पर पार्टी की एक विशेश टीम स्टडी करेगी और उस फॉर्मूले को भाजपा लोकसभा चुनाव के अलावा अन्य चुनावों में इस्तेमाल करेगी।

मोहन यादव की कैबिनेट में राजगढ़ जिले से मिल सकता है मंत्री पद
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी के मनोनीत मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मोहन यादव के साथ जगदीश देवड़ा (jagdish dewda) और राजेश शुक्ला (rajesh shukla) ने भी राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बता दें, बीजेपी ने मुरैना से विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (narendra singh tmar) को विधानसभा स्पीकर नियुक्त किया है। वहीं, आज वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव (gopal bhargava) को प्रोटेम स्पीकर की शपथ दिलाई गई। अब सबके मन में सवाल उठ रहा है कि मध्य प्रदेश की नई सरकार में कौन-कौन विधायक होंगे, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि 30 से 35 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में मंत्री पद पर उनका हक ज्यादा बताया जा रहा है जहां वोट प्रतिशत अधिक रहा है। वोट प्रतिशत अधिक, इसलिए मंत्री पद पर हक ज्यादा राजगढ़ जिले की पांचों सीटों पर भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की है। राजगढ़ जिले में वोट प्रतिशत 80 रहा है। ऐसे में इस जिले से नई सरकार में मंत्री पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। जिले की ब्यावरा विधानसभा सीट से नारायण सिंह पंवार, राजगढ़ सीट से अमर सिंह यादव और नरसिंहगढ़ से मोहन शर्मा का नाम शामिल है। बता दें कि पिछली 15 वीं विधानसभा में इस जिले से कोई मंत्री नहीं था। वहीं, 18 महीने की कांग्रेस सरकार में खिलचीपुर सीट से विधायक प्रियव्रत सिंह को ऊर्जा मंत्री बनाया गया था। ऐसे में नई सरकार इस जिले से किसी एक विधायक को मंत्रीमंडल में शामिल कर सकती है। बता दें कि शिवराज सरकार में शिक्षा मंत्री रहे मोहन यादव राजगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री रह चुके हैं। जिसका फायदा जीतकर आए विधायकों को मिल सकता है। इन सीटों पर 80 प्रतिशत वोट राजगढ़, आगर-मालवा, नीमच, शाजापुर, सिवनी, राजगढ़ और रतलाम इनका हक ज्यादा राजगढ़ और सिवनी इन सीटों पर 75 से फीसदी तक बालाघाट, डिंडौरी, मंदसौर, श्योपुर, निवाड़ी, नर्मदापुरम, देवास, विदिशा, खरगोन और शहडोल इनका हक ज्यादा श्योपुर, निवाड़ी और शहडोल

बीजेपी प्रदेश कार्यालय में लिखे अटल जी के विचार से कानाफूसी का दौर तेज
मप्र में पिछले कुछ दिनों में काफी सियासी उलटफेर देखने को मिले हैं (madhya pradesh bjp)। सोच से परे फैसले हुए बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों का गणित फैल हो गया। और प्रदेश की सियासत में 18 साल से खड़ा वटवृक्ष एक झटके में धराशाही हो गया। जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार फिर बनाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी लेकिन जिस प्रकार से शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) को सीएम पद से हटाया गया वो किसी के गले से नहीं उतर रहा है। लोग अब भी यही सोच रहे हैं कि आखिर उनके राजनीतिक गणित में कहां चूक रह गई। प्रदेश का सीएम बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि वो दिल्ली जाकर अपने अधिकार की मांग करने से बेहतर मरना पसंद करेंगे। बात यहीं खत्म नहीं हुई, डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) के शपथ लेने के तुरंत बाद लाल परेड ग्राउंड के बाहर जिस प्रकार का परिदृष्य देखने को मिला वह साफ बता रहा था कि यह पूर्व नियोजित है। मीडिया के सामने दुखड़ा रोना और फिर यह कहना कि यह अंत नहीं है मै लौट कर आउंगा यही दर्शाता है कि रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया। इन सब बातों को ध्यान में रखें और फिर बीजेपी प्रदेश कार्यालय में लिखे अटल (atal bihari vajpayee) जी के विचार को पढ़े तो ऐसा लगता है कि किसी ब्यक्ति को ध्यान में रख कर यह लाइनें लिखी गई हैं। 'मनुष्य को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लड़े एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े' आज की राजनीति को देखकर ऐसा लगता है कि यह लाइनें ठीक उसी वट वृक्ष के लिए हैं जो पिछले 18 साल से अनवरत खड़ा था कई आंधी और तूफान आए लेकिन कोई उस वट बृक्ष को हिला नहीं पाया लेकिन इस बार की सुनामी से वो वट वृक्ष जमीन से उखड़ कर धराशाही हो गया।

मोहन यादव की पहली शॉर्ट कैबिनेट में दिखा संघ का एजेंडा
मध्यप्रदेश के नए सीएम के तौर पर पदभार ग्रहण करने के बाद सीएम मोहन यादव (mohan yadav) पूरी तरह से एक्टिव हो गए हैं। शपथ ग्रहण के बाद सीएम मोहन यादव उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने बाबा महाकाल (mahakaleshwar) का आशीर्वाद लिया और फिर भोपाल लौटकर सीधे मंत्रालय पहुंचकर सीएम के तौर पर पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के बाद सीएम मोहन यादव ने डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और अधिकारियों के साथ पहली शॉर्ट कैबिनेट बैठक की जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सीएम का पदभार संभालते ही सीएम डॉ. मोहन यादव ने ली शॉर्ट कैबिनेट की बैठक। पदभार ग्रहण करने के बाद सीएम मोहन यादव ने डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा व मुख्य सचिव वीरा राणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शॉर्ट कैबिनेट की बैठक की । शॉर्ट कैबिनेट के अहम फैसले लिए गए। बैठक के बाद खुद सीएम मोहन यादव ने मीडिया से बात करते हुए इन फैसलों के बारे में जानकारी दी। शॉर्ट कैबिनेट में जो अहम फैसले लिए गए हैं वो इस प्रकार हैं.. - मध्यप्रदेश में खुले में मांस की दुकानें नहीं चलेंगी - खुले में चलने वाली अंडे-मांस की दुकानों पर होगी कार्रवाई - प्रदेश के हर जिले में युवाओं के लिए बनेंगे एक्सिलेंस कॉलेज, प्रधानमंत्री एक्सिलेंस कॉलेज होगा नाम - धार्मिक स्थलों (मंदिर/मस्जिद) में तय सीमा से ज्यादा आवाज में नहीं बजाए जा सकेंगे लाउड स्पीकर - जमीन और मकान की रजिस्ट्री के बाद लोगों को नहीं होना पड़ेगा परेशान - रजिस्ट्री के साथ ही पूरी की जाएगी नामांतरण की प्रक्रिया - तेंदुपत्ता प्रति मानक बोरा 4000 रुपए के आदेश जारी - आदतन अपराधियों द्वारा अपराध करने पर पूर्व में सक्षम न्यायालय से प्राप्त ज़मानत को निरस्त करने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437, 438 और 438 के प्रावधानों अनुसार सक्षम न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करने के दिशा निर्देश जारी किए गये । यह प्रदेश में अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

मोहन की 'अग्नि परीक्षा' चार दिग्गज परीक्षा लेने के लिए सदन में हमेशा रहेंगे मौजूद
डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) प्रदेश के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। काफी समय बाद एमपी को नया मुख्यमंत्री मिला है लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने जिस प्रकार से चार वरिष्ठ नेताओं को मोहन यादव का जूनियर बनने के लिए उन्हे मजबूर कर दिया है तो क्या वो चारों दिग्गज अपनी सिकस्त को ऐसे ही स्वीकार कर लेंगे या फिर डॉ. मोहन यादव के लिए समस्या भी खड़ी करेंगे। इस बात में कोई शक नहीं है कि डॉ. मोहन यादव एक सुलझे हुए खिलाड़ी हैं लेकिन जिन सीनियरों को उनका जूनियर बनने के लिए मजबूर कर दिया गया है तो क्या वो अपमान के आंसू पी कर ऐसे ही अपनी सियासी जमीन खिसकते हुए देखते रहेंगे। कहते हैं दुस्मन का दुस्मन दोस्त होता है ठीक वैसा ही जैसा मोहब्बत और जंग में सबकुछ जायज होता है। लिहाजा राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न ही कोई दुस्मन। मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे चल रहे नरेन्द्र सिंह तोमर (narendra singh tomar) को पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष बना कर उन्हे उनके राजनीतिक कद का अहसास करवा दिया है तो वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा की जमीन तैयार करने वाले कैलाश विजयवर्गीय (kailash Vijayvargiya) को भी भाजपा ने उनका कद और पार्टी में क्या हैसियत है वो बता दिया है। प्रलाद पटेल भी भाजपा के कद्दावर नेता हैं उम्र के अंतिम पड़ाव में वो भी अपना डेजिग्नेशन बदलना चाहते थे लेकिन केन्द्रीय नेत्रृत्व ने यह बता दिया कि आप विश्वास के लायक नहीं हो पहले पल्टी मार चुके हो। अब बात करते हैं एक ऐसे नेता कि जो पिछले 18 साल से एमपी बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा था। लाड़ली बहनों का भाई और लाड़ली लक्ष्मियों का मामा। प्रदेश में जब सब कह रहे थे कि सीएम विरोधी लहर है तब उन्होने सभी के समीकरण को धता बताते हुए 163 सीटें लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आखिर में नतीजा यह निकला कि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उन्हे भी दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर बाहर कर दिया। और तीसरी बार चुनाव जीत कर आए डॉ. मोहन यादव को मप्र का अगला मुख्यमंत्री बना दिया। फिलहाल भाजपा के सभी नेताओं के होंठों पर मुस्कान तो दिख रही है लेकिन मुस्कान कुटिलता की भी निशानी होती है किसी को यह नहीं भूलना चाहिए। आने वाले समय में प्रदेश के नए मुखिया को अपने घर के अंदर ही जूझने के लाए तैयार रहना पड़ेगा।

महाकाल को 'मोहने' निकले डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) भोपाल में शपथ लेते ही महाकाल की नगरी के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने भगवान महाकाल (mahakaleshwar) का पूरे विधि विधान के साथ पूजन किया और प्रदेश के सुख समृद्धि की कामना की। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन के ही रहने वाले हैं और वो अक्शर भगवान महाकाल का दर्शन करने के लिए जाते हैं। मुख्यमंत्री के पिता भी महाकाल के भक्त हैं। मोहन यादव के सीएम बनने के बाद उनके पिता का बयान भी आया था कि वो भगवान महाकाल के सेवक हैं और उसी सेवा के फल स्वरुप उनके बेटे को प्रदेश का सीएम बनने का मौका मिला है।

मोहन यादव सहित दो उप मुख्यमंत्रियों ने ली शपथ
मप्र के 19वें मुख्यमंत्री के रुप में डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने भोपाल के लाल परेढ ग्राउंड में पद और गोपनीयता की शपथ ली। मोहन यादव के साथ दो उप मुख्यमंत्रियों ने भी शपथ ली है जिसमें राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) और जगदीश देवड़ा (jagdish dewda) शामिल हैं। शपद ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह,भाजपा के राष्ट्रीय जेपी नड्डा,पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रदेश भर से साधु संतों को भी आमंत्रित किया गया था जिनसे शपथ के बाद मुख्यमंत्री ने चरण छू कर उनका आशीर्वाद लिया। भारतीय जनता पार्टी ने लंबे समय बाद प्रदेश में सीएम के चेहरे में बदलाव किया है। और उस बदलाव को लेकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। वहीं प्रदेश की जनता के बीच भी यह मैसेज है कि अब कुछ नया देखने को मिलेगा। फिलहाल इस शपथ ग्रहण में किसी मंत्री को शपथ नहीं दिलाई गई है माना जा रहा है कि पीएम मोदी के पास ज्यादा समय नहीं था जिसके कारण मंत्रियों को शपथ नही दिलाई गई है। आने वाले एक दो दिन के अंदर कुछ मंत्रियों को राजभवन में शपथ दिलाई जाएगी।