#MP
Total published stories tagged under #MP: 1884

नियुक्ति की मांग के लिए चयनित पटवारी करेंगे सीएम हाउस का घेराव फिर आमरण अंशन
नियुक्ति की मांग कर रहे चयनित पटवारियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम ने चयनित पटवारी अभ्यर्थियों से कहा है कि डरना मत और थकना मत आपको आपके हक की लड़ाई में कोई नहीं हरा सकता। यह बात डिजिटल महापंचायत के दौरान कही गई। महापंचायत का नेतृत्व कर रहे अरुणोदय सिंह परमार ने शिवराज सरकार (Shivraj Government) को चेतावनी देते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि मध्यप्रदेश के चयनित पटवारियों ( mp selected patwaris) की नियुक्ति पर 19 सितंबर तक सरकार फैसला ले नहीं तो हजारों चयनित अभ्यर्थियों के साथ CM हाउस का घेराव किया जाएगा।गौरतलब है कि 15 सितंबर को मध्यप्रदेश के चयनित पटवारियों ने युवा हल्ला बोल के फेसबुक पेज पर हजारों की तादात में फेसबुक लाईव के माध्यम से जुड़ कर महापंचायत की। जिसमें चयनित पटवारियों ने प्रस्ताव पेश किया की मध्यप्रदेश सरकार 19 सितंबर तक चयनित पटवारियों की नियुक्ति के लिए निर्णायक कदम उठाए और 3 सितम्बर के आंदोलन में दर्ज हुए मुकदमे वापस ले (MP Patwari)। यदि 19 सितंबर तक चयनित पटवारियों की मांगों को लेकर सरकार द्वारा कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया जाता है तो सभी चयनित पटवारी भोपाल में एकत्रित होकर आमरण अनशन करेंगे। इसी के साथ कई चयनित पटवारियों ने अपनी दर्द भरी दास्तां इस महापंचायत (patwari mahapanchayat) में रखी और सरकार से उन्हें नियुक्ति देने की गुहार लगाई। सभी चयनित पटवारियों का कहना है कि उन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा पास (patwari exam)की है। सरकार चाहे तो शपथ पत्र लेले लेकिन हमारी नियुक्ति रोक के हमारे भविष्य से ना खेले। इस महापंचायत को युवा हल्ला बोल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम ने सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत देश में आज हर भर्ती का भरता बना दिया जाता है। मध्यप्रदेश के चयनित पटवारियों से अनुपम ने कहा कि अन्याय के खिलाफ लड़ाई में या तो व्यक्ति डर जाता है, या थक जाता है या जीत जाता है। आप डरना मत और थकना मत, अगर आप डरे नहीं और थके नहीं तो अपने हक की लड़ाई जरूर जीतेंगे। युवा हल्ला बोल देश के हर युवा के हक की लड़ाई लड़ रहा है हम आपकी लड़ाई में भी आपके साथ पूरी ताकत से खड़े हैं। डिजिटल महापंचायत के दौरान चयनित पटवारियों ने कहा कि ग्रुप 2 सब ग्रुप 4 और पटवारी भर्ती परीक्षा की नियम पुस्तिका के बिंदु 13(3) के अनुसार परिणाम के प्रकाशन से लेकर 90 दिनों की अवधि में नियुक्ति देने के प्रावधान पर विचार करते हुए सितंबर माह में नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण की जाए।

19 सितंबर से 'आक्रोश' में आएगी कांग्रेस,प्रदेश भर में निकाली जाएगी जन आक्रोश यात्रा
भारतीय जनता पार्टी को करारा जवाब देने के लिए कांग्रेस पार्टी 19 सितंबर से प्रदेश भर में जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) निकालने जा रही है। भाजपा के जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Aashirwad Yatra) की तर्ज पर कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा प्रदेश के सात स्थान से प्रारंभ होगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी सभा और छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाएं होंगी। इसकी तैयारियों को लेकर शुक्रवार को भोपाल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने यात्रा के प्रभारी,जिला अध्यक्ष, प्रभारी और संगठन मंत्रियों के साथ बैठक की। यात्रा के दौरान घर-घर भाजपा सरकार के विरुद्ध जारी पार्टी का आरोप पत्र जारी किया जाएगा। यात्रा के दौरान मंहगाई,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार,महिलाओं पर अत्याचार,अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के उत्पीड़न की घटनाओं को मुद्दा बना कर भाजपा सरकार को घेरा जाएगा। साथ ही शिवराज सरकार (Shivraj Government) द्वारा की जा रही घोषणाओं की स्थिति भी जनता के बीच रखी जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस सरकार बनने पर विभिन्न वर्गों के हित में जो कदम उठाए जाएंगे,उसे भी प्रचारित किया जाएगा। यात्रा की पूरी रुपरेखा आज पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) और प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला सार्वजनिक करेंगे।

सहकारी समितियों के कर्मचारी होंगे नियमित,चुनाव से पहले सीएम शिवराज का बड़ा दांव
विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) एक और बड़ा दांव खेलने जा रहे हैं जिसके तहत प्रदेश की साढ़े चार हजार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के 45 हजार कर्मचारियों को सरकार नियमित करेगी। इन्हे सरकारी कर्मचारियों की तरह सुविधा मिलेगी। वेतन का आधा हिस्सा शासन द्वारा संचालित उचित मूल्य की राशन दुकानों के सेल्समैन का मानदेय भी बढ़ाया जाएगा। सहकारिता विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इस संबंध में 23 सितंबर को भोपाल के लाल परेड मैदान पर होने वाली सहकारी समितियों (cooperative society) की पंचायत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा घोषणा की जा सकती है। प्रदेश में साढे चार हजार प्राथमिक कृषि साखा सहकारी समितियां हैं। इनमें 45 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। समितियों की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण नियमित वेतन का भुगतान नहीं हो पाता है। छठा वेतनमान देने (6th pay commission) का निर्णय के बाद भी वह क्रियान्वित नहीं हो पा रहा है। इससे नाराज कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जिस तरह से सरकार ने अन्य कर्मचारी संवर्ग की समस्याओं का निराकरण किया है,उसी तरह सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार सेल्समैन को जो वर्तमान में पांच से लेकर साढ़े सात हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं,उसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया जाएगा। समिति प्रबंधन के रिक्त पदों को 60 प्रतिशत सहायक समिति प्रबंधक का चयन करके किया जाएगा, 40 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती होगी।

विपक्षी दलों पर गृह मंत्री ने किया करारा प्रहार,कहा गठबंधन के ताजिए भोपाल के तालाब में ठंडे पड़ जाएंगे
देश की सियासत में पीएम मोदी और प्रदेश की सियासत में गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अलग पहचान है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अमित शाह (Amit Shah) हों अथवा पीएम मोदी (PM Narendra Modi)जब दोनों नेताओं का एमपी दौरा होता है तो गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra)को उनकी अगवानी का मौका मिलता है। गुरुवार को जब एक बार फिर एमपी दौरे पर पीएम मोदी (PM Modi in MP) आए तो उनकी अगवानी के लिए गृह मंत्री मौजूद थे। इस बीच जब गृह मंत्री ने देश के प्रधानमंत्री का स्वागत किया तो वो पल और वो तस्वीर देखने लायक ही थी। पीएम मोदी के रवाना होने के बाद गृह मंत्री ने विपक्षी दलों पर हमला बोल दिया। गृह मंत्री ने आई एन डी आई ए गठबंधन की पहली रैली पर तंज कसा और कहा कि भोपाल में होने वाली इस रैली के ताजिए भोपाल के बड़े तालाब में ही ठंडे पड़ जाएंगे। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि घमंडिया गठबंधन का कोई भविष्य नही है और उसके ताजिए भोपाल ताल में ही ठंडे हो जाएंगे।गठबंधन द्वारा मीडिया को लेकर लिए फैसले को भी उन्होंने इसे एमरजेंसी वाली मानसिकता बताया। गृह मंत्री डॉ मिश्रा ने कहा कि घमंडिया गठबंधन का कोई भविष्य नही है। यह गठबंधन बोलता कुछ है,करता कुछ है और होता कुछ और ही है। पहले गठबंधन के लोग सनातन धर्म के खिलाफ बोले,विरोध हुआ तो अब फिर नही बोलने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि इन्होंने गठबंधन जरूर बना लिया है मगर रहने वाले यह अलग अलग ही हैं।यह खुद भ्रम में हैं और इसी भ्रम में यह समाप्त भी हो जाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि यह गठबंधन अपनीं पहली रैली भोपाल में करने वाला है । आप तय मानिए कि इस गठबंधन के ताज़िये का विसर्जन भोपाल तालाब में हो जायेगा। गठबंधन द्वारा चुनिंदा एंकरों और पत्रकारों के बहिष्कार के फैसले पर गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि जैसे इंदिरा जी ने एमरजेंसी लगा कर प्रेस को कुचला था उसका दमन किया था उसी दिशा में यह गठबंधन भी जा रहा है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के इस फैसले से उसकी एमरजेंसी वाली मानसिकता भी सामने आ गयी है।

भाजपा 'जनता का आशीर्वाद' लेने के चक्कर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का 'आशीर्वाद' लेना भूली
भारतीय जनता पार्टी इन दिनों प्रदेश भर में जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रही है (Jan Ashirwad Yatra)। लेकिन भाजपा की इस यात्रा के दौरान भाजपा यह भूल गई कि पार्टी के नेताओं का आशीर्वाद भी जरुरी होता है क्योंकि उनके एक मत हुए बगैर चुनाव जीतना संभव नहीं है। जबकि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home minister Amit Shah) ने सबसे पहले पार्टी की एकजुटता पर ही सभी नेताओं का ध्यान आकर्षित किया था लेकिन एमपी बीजेपी (mp bjp) के नेताओं ने जब जन आशीर्वाद यात्रा का रोडमैम तैयार किया तो उसमें कई वरिष्ठ नेताओं को उन्होने अनदेखा करते हुए ऐसे नेताओं को आगे किया जो वरिष्ठता की सूची में काफी पीछे आते हैं। जब जन आशीर्वाद यात्रा का रोडमैप तैयार हुआ तो केन्द्रीय नेतृत्व ने क्षेत्रीय और प्रभावशाली नेताओं को महत्व देने के लिए कहा था लेकिन पार्टी ने सबसे पहले महाकौशल क्षेत्र से राकेश सिंह (Rakesh Singh) की ही उपेक्षा कर दी जिनको प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav)के हस्तक्षेप के बाद टीम में शामिल किया गया। लेकिन बुंदेलखंड से वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव (Gopal Bhargava) एमपी बीजेपी संगठन ने अपने किसी प्लान में शामिल नहीं किया जिसके चलते उन्होने खुद को अपनी विधानसभा तक सीमित कर लिया। जबकि अमित शाह ने भोपाल दौरे पर सभी नेताओं को स्पष्ट तौर पर बोल दिया ता कि सभी अपने गिले सिकवे दूर कर लें फिर भी उनकी बात को नजरअंदाज कर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और मंत्री गोपाल भार्गव को उपेक्षित कर दिया गया। यात्रा के बैकड्राप में भी गोपाल भार्गव और राकेश सिंह के चेहरे गायब हैं जबकि महिला होने के नाते राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार (Kavita Patidar) को बैकड्राप में स्थान दिया गया है। पाटीदार के चेहरे पर भी नेताओं को आपत्ति है,दबी जुबान में वो कह रहे हैं कि ओबीसी से कृष्णा गौर से लेकर सांसर रीति पाठक और एससी वर्ग से संध्या राय का अधिकार वरिष्ठता के चलते बनता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन ने अपने तरीके से अपने पसंदीदा लोगों को यात्रा के बैकड्राप में शामिल कर एक बार फिर पार्टी के अंदर गुटवाजी को हवा दे दिया है। एक तरफ भाजपा चुनाव जीतने और पार्टी में किसी प्रकार के गुटबाजी होने के दावे को शिरे से खारिज करती है दूसरी तरफ पार्टी के नेता अंदर ही अंदर गुटबाजी की बात को भी स्वीकार कर रहे हैं। सालों से सत्ता और संगठन के लिए काम करने वाले कई नेता हर तीसरे दिन प्रदेश कार्यालय दस्तक देने पहुंचते हैं जिन्हे ऐसे नजरअंदाज किया जाता है जैसे वो किसी अन्य ग्रह के प्राणी हों। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के ऐसे बर्ताव से बहुत से पदाधिकारी काफी नाराज हैं। बहुत से नेता कांग्रेस के दरवाजे झांक रहे हैं।

सीएम शिवराज की 'लाड़ली बहनों' को सौगात,450 रुपये में मिलेगी रसोई गैस
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहनों (Ladli behna yojana) को एक और बड़ी सौगात देते हुए उन्हे घरेलू गैस 450 रुपये में देने का ऐलान कर दिया है। उज्वला योजना (ujjwala yojana) में पंजीकृत 82 लाख उपभोक्ताओं के अलावा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पंजीकृत लगभग 15 लाख महिलाएं भी गैस सब्सिडी (gas cylinder subsidy) के लिए पात्र होंगी। कुल 97 लाख लाड़ली बहनों को 450 रुपये में रसोई गैस योजना का लाभ मिलेगा। प्रदेश में एक करोड़ 97 वे लाख घरेलू गैस कनेक्शन हैं। केन्द्र सरकार के अनुदान और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित विक्रय दर 450 रुपये को कम करने के बाद जो राशि बचेगी,उसे हितग्राही के आधार लिंक खाते में बतौर अनुदान अंतरित कर दी जाएगी। योजना का लाभ उन्ही महिलाओं को मिलेगा,जिनके नाम गैस कनेक्शन होगा। सीएम शिवराज ने पहले यह घोषणा की थी कि सावन के महीने में जिन लाड़ली बहनों ने रसोई गैस सिलेंडर भरवाए हैं,उन्हे 450 रुपये अनुदान दिया जाएगा। अब उसी योजना को विस्तार देते हुए इस ब्यवस्था को परमानेंट कर दिया गया है। एक सितंबर से प्रधानमंत्री उज्वला योजना और लाड़ली बहना योजना में पंजीकृत वे महिलाएं,जिनके नाम घरेलू गैस सिलेंडर के कनेक्शन हैं, उन्हे अब 450 रुपये में रसोई गैस उपलब्ध कराई जाएगी। उज्वला योजना में 200 रुपये का अनुदान केन्द्र सरकार पहले से दे रही है। प्रतिमाह एक सिलेंडर पर अनुदान मिलेगा।

युवाओं और महिलाओं को आगे कर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रुप देने में जुटी कांग्रेस पार्टी युवाओं पर ज्यादा दांव लगाने की कोशिश में जुटी है (Congress Meeting)। कांग्रेस की ओर से ना सिर्फ युवाओं को ही आगे रखा जाएगा बल्कि महिलाओं को भी काफी मौके दिए जाएंगे। लगातार दो चुनाव हार चुके उन्ही नेताओं को टिकट मिलेगा जिनके नाम सर्वे के साथ पर्यवेक्षक की रिपोर्ट में जीतने की संभावना वाले दावेदार के रुप में आएंगे। प्रत्याशी चयन को लेकर दिल्ली में मध्य प्रदेश कांग्रेस (MP Congress)की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई थी (Congress Screening Committee)। इसमें समिति अध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह(Jitendra Singh),प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) पिछले दिनों भोपाल में जिला,ब्लाक, प्रदेश पदादिकारी, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व विधायकों से दावेदारों को लेकर जो रायशुमारी की थी,उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने प्रत्याशी चयन को लेकर अपनी भी बात रखी। दिल्ली में कांग्रेस के वार रुम में आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव,सुरेश पचौरी,नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह,अजय सिंह,अजय कुमार लल्लू,सप्तगिरी उल्का,कमलेश्वर पटेल,प्रदेश प्रभारी सहित अन्य नेता शामिल हुए। देर रात तक चली बैठक में वर्तमान विधायकों और लगातार हारने वाली 66 सीटों की स्थिति को लेकर प्रारंभिक चर्चा की गई। Mukhbirmp.com के अनुसार बैठक में एक बात साफ कर दी गई कि प्रत्याशी कोई भी हो उसे जिताने की जिम्मेदारी सामूहिक होगी। यह चुनाव पार्टी के लिए अहम है। इसका असर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की सभाओं पर पड़ेगा (Loksabha Elections 2024)। इसलिए प्रत्याशी चयन में जातिगत और स्थानीय समीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। प्रत्याशी चयन के लिए तीन सूचियां तैयार होंगी। इसमें कमलनाथ और कांग्रेस द्वारा कराए गए सर्वे, पर्यवेक्षक के साथ प्रभारी और पदाधिकारियों की रिपोर्ट में जिन सीटों के लिए एक ही नाम होगा उसकी सूची अलग बनेगी। वर्तमान विधायकों की एक सूची रहेगी और एक सूची उन सीटों की होगी,जहां दो या उससे अधिक दावेदार होंगे। आज एक बार फिर बैठक होगी जिसमें वर्तमान विधायक और लगातार हारने वाली सीटों के प्रत्याशियों को लेकर चर्चा होगी।

ई-बाइक से अब भाजपा प्रदेश की पगडंडियों में करेगी पार्टी का प्रचार
भारतीय जनता पार्टी ने प्रचार का नया तरीका इजात किया है। यह नया तरीका लोगों को कितना पसंद आएगा ये तो बाद की बात है लेकिन जिस प्रकार से भाजपा के प्रचार का यह तरीका गांव की पगडंडियों में उतरेगा तो उसको देखने के लिए ग्रामीण लोग उस वाहन तक जरुर पहुंचेंगे। दरअसल भाजपा की तरफ से ई-बाइक को चुनाव प्रचार का जरिया बनाया गया है (BJP E bike)। यह तरीका एमपी के लिए नया है लेकिन इससे पहले इस तरीके को भाजपा गुजरात में अपना चुकी है जो सफल भी रहा है। जिस निजी एजेंसी ने इस ई-बाइक को तैयार किया है उसी एजेंसी ने गुजरात भाजपा संगठन को 180 ई-बाइक तैयार करके दिया था। इस ई-बाइक के माध्यम से भाजपा का मक्शद उन सुदूर अंचलों तक पहुंचने का इरादा है जहां चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाते हैं। यानि मतलब साफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खराब सड़कों में इन ई-बाइक के माध्यम से भाजपा प्रचार करेगी (MP Elctions 2023)। ई-बाइक की खासियत यह है कि इनमें पेट्रोल की आवश्यकता नहीं पड़ेगी इस बाइक में पीछे एक टीवी स्क्रीन लगाई गई है जिसमें केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार किया जाएगा। आवाज तेज आए इसलिए ई-बाइक में दो स्पीकर भी लगाए गए हैं जिसमें 200 मीटर से ज्यादा दूरी तक आवाज आती है। निजी कंपनी के संचालक ने बताया कि इसकी कीमत एक लाख 15 हजार रुपये है। अभी डेमो के तौर पर एक बाइक मंगाई गई है पार्टी की ओर से आर्डर मिला तो बड़ी संख्या में ई-बाइक पर्चेस की जाएंगी। मतलब साफ है कि सरकार बनाने के लिए भाजपा कोई भी तरीका अपनाने के लिए तैयार है। अब देखना यही दिलचश्प होगा कि भाजपा के इस तरीके को प्रदेश की जनता कितना पसंद करती है।

जमीनी कार्यकर्ताओं पर भाजपा का फोकस,कल दिल्ली में हो सकती है बैठक,दूसरी सूची जल्द होगी जारी
भारतीय जनता पार्टी दूसरी सूची जारी करने की तैयारियों में जुट गई है। बुधवार को दिल्ली में केन्द्रीय नेतृत्व की बैठक (BJP Meeting) के दौरान सूची को अंतिम रूप दिया जा सकता है। कांग्रेस जहां भाजपा के बड़े नेताओं को शामिल कर रही है तो भाजपा का फोकस जमीनी नेताओं पर है। जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) में ऐसे तीन हजार से अधिक नेता और कार्यकर्ताओं को अब तक की सदस्यता दिलाई जा चुकी है। दरअसल केन्द्रीय मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि बड़े नेताओं के स्थान पर उन लोगों को पार्टी के साथ जोड़ा जाए जो जमीनी स्तर पर पकड़ रखते हैं। 25 सितंबर को होने वाले कार्यकर्ता महाकुंभ (Karyakarta Mahakumbh) से पहले 50 हजार कार्यकर्ता भाजपा की ओर से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कांग्रेस सहित सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हैं। भाजपा इन दिनों पंचामत से लेकर मंडल स्तर पर सक्रिय दूसरे दलों के प्रभावी कार्यकर्ताओं को जोड़ रही है। पिछले महीने जब गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक ली थी तब उन्होने पार्टी नेताओं को जमीन पर आधार को मजबूत करने के लिए कुछ रणनीतिक नुस्खे दिए थे। इस बार पार्टी बड़े चेहरों से ज्यादा फोकस निचले स्तर पर बूथों पर सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपने पाले में खींचने पर काम कर रही है। सतना के रैगांव विधानसभा में चार सितंबर को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) की उपस्थिति में कई पंचायतों के 130 लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली थी। पंधाना विस क्षेत्र में कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) ने 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा की सदस्यता दिलाई थी। इसी प्रकार प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) और सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) कई सरपंचों और अन्य प्रभावशाली लोगों को भाजपा की सदस्यता दिला चुके हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार 25 सितंबर को भाजपा के कार्यकर्ता महाकुंभ में पीएम मोदी की मौजूदगी में हजारों लोगों को भाजपा की सदस्यता दिलाई जा सकती है जिसमें कांग्रेस के कुछ बड़े चेहरे भी शामिल हैं।

कांग्रेस में टिकट के लिए स्थानीय नेताओं की सहमति होगी जरुरी
मिशन 2023 फतह करने में जुटी कांग्रेस पार्टी (mp congress) में इन दिनों बड़ी संख्या में बाहरी नेताओं का दाखिला हो रहा है। लेकिन उन्हे चुनाव लड़ने के लिए टिकट तभी मिलेगा जब स्थानीय स्तर पर सहमति बनेगी। दरअसल अलग-अलग क्षेत्रों से कांग्रेस में शामिल हो रहे नेताओं को लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में नाराजगी का आलम देखने को मिल रहा है यही कारण है कि कांग्रेस ने स्थानीय महत्व देते हुए कहा है कि टिकट उसी को दिया जाएगा जिसको लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में सहमति होगी। पार्टी की सदस्यता दिलाने के लिए जिला इकाई के पदाधिकारियों के साथ पहले बैठक की जाती है,फिर उनकी उपस्थिति में ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई जाती है,ताकि विरोध जैसी स्थिति ना बने। प्रत्याशी चयन में भी इसी तरह सावधानी बरती जा रही है। यही कारण है कि संभावित दावेदारों की जानकारी ब्लॉक इकाई तक से लग गई है। कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के साथ भाजपा में जाने वाले नेताओं की बड़ी संख्या में वापसी हो चुकी है। इसमें ग्वालियर,दतिय,शिवपुरी,गुना,अशोकनगर,निवाड़ी,टीकमगढ़,धार,देवास सहित अन्य जिलों के भाजपा से जुड़े नेता अधिक हैं। कोलारस से भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इनके पार्टी में आने से अंदरखाने में चर्चा प्रारंभ हो गई है कि इन नेताओं को कुछ विधानसभा में प्रत्याशी भी बनाया जा सकता है। ऐसे में चुनाव के दौरान इनका विरोध न हो,इसलिए यह तय किया गया है कि स्थानीय स्तर पर सहमति के बिना टिकट नहीं दिया जाएगा। दरअसल जब सिंधिया के साथ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भाजपा में गए थे,तब स्थानीय स्तर पर समीकरण गड़बड़ाए और इसका नुकसान पार्टी को नगरीय निकाय चुनाव में भी उठाना पड़ा। अब तो पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी कह दिया है कि किसी को भी पार्टी में तब तक नहीं लिया जाएगा,जब तक स्थानीय इकाई सहमति नहीं देती है।

जनआशीर्वाद यात्रा में भाजपा के ट्रंप कार्ड बने गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा
भारतीय जनता पार्टी की इस समय प्रदेश भर में जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) चल रही है। इस यात्रा में भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश इकाई के सभी नेता अपने स्तर पर भूमिका निभा रहे हैं लेकिन इन सभी नेताओं में जिस प्रकार की भूमिका गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) निभा रहे हैं उससे स्पष्ट हो गया है कि नरोत्तम मिश्रा ना सिर्फ संकट मोचक की भूमिका में होते हैं बल्कि भाजपा के ट्रंप कार्ड भी नरोत्तम मिश्रा साबित हो रहे हैं। गिनती के लिए भाजपा में बहुत सारे ब्राम्हण नेता हैं लेकिन वो सारे नेता सरनेम के ब्राम्हण नेता साबित हुए हैं। वहीं गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की बात की जाए तो वो मन और कर्म दोनों से ब्राम्हण हैं। यह बात प्रदेश में किसी से छुपी नहीं हैं। हांलाकि उनका ब्योहार जिस स्तर का है तो हर वर्ग उनसे जुड़ा है और वो हर वर्ग को महत्व देते हैं लेकिन हर समाज का ब्यक्ति अपने समाज के किसी ब्यक्ति को ही अपना नेता मानता है यही कारण है कि सवर्ण बाहुल विंध्य में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की लोकप्रियता को देखते हुए उनकी ड्यूटी लगाई गई और अब ग्वालियर-चंबल में भी गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को जनता का आशीर्वाद लेने के लिए मैदान में उतार दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि गृह मंत्री की भाजपा में किस प्रकार की स्वीकार्यता है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ना सिर्फ सदन के अंदर विपक्षी दलों को करारा जवाब देने में माहिर माने जाते हैं बल्कि चुनावी मैदान में वो एक बब्बर शेर की तरह हो जाते हैं। जिनको पार्टी कठिन लक्ष्य देती है और वो हर लक्ष्य को आसानी से हासिल भी कर लेते हैं। रविवार को गृह मंत्री भिंड जिले में जनआशीर्वाद यात्रा में निकले जहां स्थानीय जनता ने उनका जमकर समर्थन किया। सबसे बड़ी बात यह है कि जनता उनके पास अपनी आस्था के अनुरुप हार लेकर आती है तो वो खुद अपना सम्मान कराने के बजाय जनता का ही सम्मान करने लगते हैं। उनकी यही सहजता और सरलता उनको अन्य नेताओं से अलग बना देती है।

कमलनाथ की सोशल इंजीनियरिंग ने दावेदारों की बढ़ाई मुश्किलें,अब तक जारी नहीं हुई पहली सूची
मप्र में समाज के सभी वर्गों को साधने के लिए कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला लागू करेगी। कांग्रेस ने इसके लिए विभिन्न समाजों के अलग-अलग प्रकोष्ठ भी गठित किए हैं। कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के तहत हर समाज के प्रतिनिधि को टिकट देने का प्रयास कर रही है। अब तक हुए मंथन में कांग्रेस ने समाज और जातियों के आधार पर सभी को प्रतिनिधित्व यानि टिकट देने का रोडमैप तैयार किया है। पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने विभिन्न समाज और जातियों के लोगों की जनसंख्या का अनुमान लगाने एजेंसी के जरिए सर्वे भी कराया है। इसे टिकट का आधार बनाया जाएगा। 12 सितंबर को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी। गौरतलब है कि साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद कांग्रेस ने सामाजिक संगठनों,जाति आधारित संगठनों और उनके नेताओं को जोड़ने का काम किया है। कांग्रेस ने पूर्व आईएएस देवेन्द्र कुमार राय (Devendra Kumar Rai) को जिम्मेदारी सौंपी कि वो विलुप्त हो रही जनजातियों का अध्ययन कर उन्हे कांग्रेस के मंच पर लाएं। इसके बाद कांग्रेस ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया, कोरकू भील, भिलाला, गौंड,कोल सहित कई जातियों के सम्मेलन किए। उनके लिए पार्टी संगठन में अलग प्रकोष्ठ भी गठित किया। दूसरे चरण में प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने का एक सर्वे भी कराया है। पार्टी की रणनीति है कि जिस जाति से प्रदेश में दस लाख से अधिक मतदाता हैं,उस वर्ग के व्यक्ति को अनिवार्य रुट से टिकट दिया जाए। पीसीसी चीफ कमलनाथ द्वारा व्यक्तिगत रुप से कराए गए सर्वे से पार्टी को अंदाज लग गया है कि किस विधानसभख क्षेत्र में किस जाति के मतदाताओं की कितनी संख्या है। इस आधार को अब पार्टी टिकट वितरण का आधार बनाएगी। लेकिन कमलनाथ का यह सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला पार्टी के अन्य दावेदारों के गले की फांस बन गया है। जो नेता खुद को बाहुबली मानते थे और उन्हे लगता था कि पार्टी उन्हे टिकट भर दे दे। उसके बाद वो धन-बल के दम पर चुनाव जीत लेंगे लेकिन अब कमलनाथ ने सोशल इंजीनियरिंग का पेंच फंसा कर बाहुबली नेताओं के गले में पट्टा डालने की तैयारी कर ली है।