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पीढ़ी परिवर्तन से 'नमो शिव' को नहीं पड़ेगा फर्क अंत में 'कमल' को ही थामेंगे युवा!
भोपाल

पीढ़ी परिवर्तन से 'नमो शिव' को नहीं पड़ेगा फर्क अंत में 'कमल' को ही थामेंगे युवा!

मिशन 2023 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी को 'नमो शिव' का ही सहारा है। दरअसल जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी चुनाव में पिछड़ रही थी उसको देखते हुए केन्द्रीय नेतृत्व ने ऐसी योजना तैयार की जिसमें कांग्रेस के सारे आरोप धराशाही हो गए। कांग्रेस ने जो भी प्लान तैयार किया उसको पीएम मोदी और सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) ने ध्वस्त करके रख दिया। लगातार भाजपा में और आम जनता के बीच सीएम चेहरे को लेकर बात उठती रही है लेकिन हकीकत यही है कि केन्द्र में मोदी और एमपी में शिवराज सिंह चौहान के चेहरे का अभी तक भाजपा के पास कोई विकल्प नहीं है। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व खुल कर नहीं लेकिन दबी जुवान यह स्वीकार करता है कि एमपी का चुनाव जिस लेवल पर पहुंच गया है वहां पर शिवराज सिंह चौहान के अलावा भाजपा की सरकार को कोई दूसरा नहीं चला सकता। हाल ही में भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav) ने पत्रकारों से अनौपचारिक बात करते हुए इस बात के संकेत दिए कि विकल्प क्या है। दरअसल भूपेन्द्र यादव से पूछा गया था कि जब शिवराज जी सीएम बने थे उस दौरान जो बच्चे चार या पांच साल के थे आज वही बच्चे बीस 22 साल के हो चुके हैं लिहाजा प्रदेश में पीढ़ी परिवर्तन के चलते चेहरा बदलने की मांग उठ रही है। इस मामले में प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव ने सहमति जताते हुए बड़ा सधा हुआ जवाब दिया। भूपेन्द्र यादव ने कहा कि पीढ़ी परिवर्तन हुआ है लेकिन आज की पीढ़ी 60 साल और 80 साल के नेता में फर्क करना नहीं जानती क्या? भूपेन्द्र यादव ने राज्य सरकार की कुछ योजनाओं के भी नाम गिनाए जिसमें उन्होने कहा कि प्रदेश में शिवराज सरकार ने जिस प्रकार से युवाओं के लिए अलग-अलग योजनाएं शुरु की है जिसमें 'सीखो-कमाओ' जैसी योजना चल रही है बच्चे सीख भी सकते हैं और उस दौरान कमा भी सकते हैं। साथ में अन्य और योजनाएं हैं जो प्रदेश की शिवराज सरकार ने लांच की है इसके अलावा युवाओं को शासकीय नौकरी के लिए वैकेंसी भी निकाली जा रही है ऐसी स्थिति में कोई युवा क्यों कमलनाथ का साथ देगा। बीजेपी के प्रदेश चुनाव प्रभारी ने एक और बड़ी बात कही जिसके अंतर्गत उन्होने कहा कि कर्नाटक चुनाव में भाजपा की हार पर काफी बात हो रही है लेकिन गुजरात और यूपी में भाजपा जीती उसकी बात कोई नहीं कर रहा है। गुजरात भी एमपी की सीमा से लगा है और यूपी भी एमपी की सीमा से लगा है। इन राज्यों में भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की उसके लिए कोई बात नहीं कर रहा है। कर्नाटक की भाषा अलग है कल्चर अलग है सभी चीजें एमपी से अलग हैं लिहाजा कर्नाटक की तुलना एमपी से करना ठीक नहीं है। इस बीच बीजेपी प्रदेश चुनाव प्रभारी ने अच्छा करफॉर्मेंस नहीं करने वाले विधायकों के टिकट खुल कर प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन उनकी बातों में यह इशारा था कि नाराजगी स्थानीय विधायकों को लेकर है लिहाजा दूसरे कार्यकर्ताओं को टिकट देकर उस नाराजगी को खत्म कर दिया जाएगा। ऐसी कोई वजह ही नहीं छोड़ी जाएगी जिससे भाजपा को चुनाव जीतने में दिक्कत आए। फिलहाल भारतीय जनता पार्टी बूथ सम्मेलनों में ब्यस्त है और भाजपा का मानना है कि पार्टी का कार्यकर्ता खुश रहेगा तो पार्टी की जीत को कोई नहीं रोक सकता। भूपेन्द्र यादव साफ कहते हैं कि भाजपा एमपी में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। ऐसा कोई ठोस कारण बता दे जिसमें यह स्पष्ट हो रहा हो कि जनता भाजपा को वोट नहीं देगी। जिस प्रकार से शिवराज जी के नेतृत्व में एमपी ने विकास की गति पकड़ा है जनता उसको कभी अनदेखा नहीं कर सकती है लिहाजा एमपी में 'नमो शिव' का जादू कायम रहेगा और सरकार भाजपा की ही बनेगी।

15/8/202392
कांग्रेस छोड़ने के बाद सिंधिया समर्थक सिंधिया का छोड़ रहे साथ
भोपाल

कांग्रेस छोड़ने के बाद सिंधिया समर्थक सिंधिया का छोड़ रहे साथ

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी नेताओं का बीजेपी से पलायन जारी है. शुक्रवार को नीमच के वरिष्ठ नेता और सिंधिया के करीबी समंदर पटेल ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. पिछले 2 महीने में मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से सिंधिया के 7 करीबी नेताओं ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया है। सिंधिया के जिन समर्थकों ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस का दामन थामा है, उनमें अधिकांश ग्वालियर-चंबल संभाग के हैं. ग्वालियर-चंबल संभाग सिंधिया राजघराने का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है. सिंधिया के सभी करीबियों को सीधे कमलनाथ ने कांग्रेस में शामिल कराया है। चुनावी साल में सिंधिया समर्थकों के बीजेपी से रुखसती ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सियासी गलियारों में सवाल पूछा जा रहा है कि सिंधिया अपने लोगों को क्यों नहीं रोक पा रहे हैं? वहीं सिंधिया गुट का कहना है कि जो नेता बाहर जा रहे हैं, उनका कोई अपना जनाधार नहीं है। सिंधिया के किन-किन करीबियों ने छोड़ा बीजेपी का साथ? समंदर पटेल- नीमच जावद से 2018 में निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं. पटेल चुनाव तो नहीं जीत पाए, लेकिन 33 हजार वोट लाकर कांग्रेस का खेल खराब करने में कामयाब रहे. सिंधिया ने बीजेपी का दामन थामा, तो उनके साथ हो लिए। बैजनाथ सिंह यादव– गुना-शिवपुरी में सिंधिया के करीबी रहे बैजनाथ यादव ने भी जून में कांग्रेस का दामन थाम लिया था. बैजनाथ यादव की पत्नी कमला यादव शिवपुरी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं. यादव जब कांग्रेस में शामिल हुए तो 400 गाड़ियों के काफिले के साथ भोपाल पहुंचे थे। जयपाल सिंह यादव- सिंधिया समर्थक जयपाल सिंह यादव चंदेरी से चुनाव लड़ चुके हैं. यादव की गिनती भी सिंधिया के खास लोगों में थी. हाल ही में अपने समर्थकों के साथ यादव ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। यदुराज सिंह यादव– चंदेरी में मजबूत पकड़ है. संगठन के आदमी माने जाते हैं. सिंधिया चुनाव लड़ते थे, तो अशोकनगर में बड़ी भूमिका निभाते थे. जयपाल सिंह के साथ इन्होंने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया है। रघुराज धाकड़– कोलारस से आते हैं और करीब 20 सालों से राजनीति में हैं. धाकड़ समाज के कद्दावर नेताओं में रघराज की गिनती होती है. कोलारस में धाकड़ समुदाय के करीब 25 हजार वोटर्स हैं। राकेश गुप्ता- शिवपुर में बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष पद पर थे. सिंधिया जब कांग्रेस में थे, तो गुप्ता को जिले का कार्यकारी अध्यक्ष बनवाया था. शिवपुरी में सिंधिया के लोकसभा चुनाव मैनेजमेंट का काम गुप्ता ही देखते थे। गगन दीक्षित- सिंधिया फैंस क्लब के जिलाध्यक्ष पद पर थे. दीक्षित के साथ सांची जनपद पंचायत के अध्यक्ष अर्चना पोर्ते ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया था. रायसेन से सिंधिया के करीबी और शिवराज सरकार में मंत्री प्रभुराम चौधरी आते हैं। इन बड़े नेताओं के वापसी की अटकलें पूर्व विधायक एंदल सिंह कंसाना के भी कांग्रेस में वापसी की अटकलें हैं. कंसाना दर्जा प्राप्त मंत्री हैं. 2020 में सिंधिया के बगावत में शामिल थे, लेकिन उपचुनाव हार गए. सिंधिया के कहने पर कंसाना को मप्र राज्य कृषि उद्योग विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया। हाल ही में कांग्रेस के विधायक बैजनाथ कुशवाहा ने दावा किया कि कंसाना पार्टी में वापस आना चाहते हैं, इसलिए सिंधिया और दिग्विजय के द्वार का चक्कर लगा रहे हैं. हालांकि, कंसाना ने सफाई दी और सिंधिया के साथ ही रहने की बात कही। कंसाना के अलावा ग्वालियर-गुना के कई संगठन नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा है. कहा जा रहा है कि ये नेता टिकट को लेकर कांग्रेस हाईकमान से आश्वासन चाहते हैं. टिकट की हरी झंडी अगर मिल गई, तो तुरंत कांग्रेस का दामन थाम लेंगे। समर्थकों को बीजेपी में क्यों नहीं रोक पा रहे हैं ज्योतिरादित्य? 2020 में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में आए, तो अपने साथ पूरे लाव-लश्कर लेकर आए. ग्वालियर-चंबल संभाग में कई जगहों से पूरी की पूरी कांग्रेस ही उस वक्त बीजेपी में शामिल हो गई. इसके बाद कयास लगने लगा कि 2023 के चुनाव में इन इलाकों से कांग्रेस का सफाया हो जाएगा। हालांकि, चुनाव से पहले जिस तरह सिंधिया के करीबियों की वापसी हो रही है, उसमें सवाल उठ रहा है कि आखिर सिंधिया अपने समर्थकों को बीजेपी में क्यों नहीं रोक पा रहे हैं?सिंधिया के करीबी और संगठन के नेता राकेश गुप्ता ने जब शिवपुरी बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, तो उन्होंने एक पत्र जारी किया था.गुप्ता ने अपने पत्र में लिखा था- भारतीय जनता पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा एवं सम्मान न मिलने से मैं भाजपा के कल्चर को नहीं समझ पा रहा हूं। जानकारों का कहना है कि बीजेपी से आए कांग्रेस के संगठन नेताओं को यहां का कामकाज समझ नहीं आया. कुछ तो सत्ता के लालच में खुद को फिट कर लिया, लेकिन बहुत सारे अनफिट हो गए. यही अनफिट नेता अब घर वापसी कर रहे हैं। सिर्फ किचन कैबिनेट के लोगों को दिलाया पद- सिंधिया के साथ बीजेपी में गए एक बड़े धड़ा का आरोप है कि सिंधिया जब बीजेपी में जा रहे थे, तो सबको उचित सम्मान और पद देने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐसा करने में असफल रहे. सिंधिया सिर्फ अपने किचन कैबिनेट के लोगों को पद दिलाने में कामयाब हो पाए। बैजनाथ यादव ने सिंधिया का साथ छोड़ते हुए कहा था कि वे खुद पद पर चले गए, लेकिन उनकी कोई सुनता नहीं है. हम राजनीति करने आए हैं, जब लोगों की समस्याओं का हल नहीं कर पाएंगे तो फिर किस बात की राजनीति? भविष्य की चिंता भी साथ छोड़ने की वजह- सिंधिया समर्थक नेताओं को भविष्य की चिंता भी सता रही है. सिंधिया का दामन छोड़ने वाले समंदर पटेल जावद सीट से टिकट चाहते थे, लेकिन वहां से मंत्री ओम प्रकाश सकलेचा का पलड़ा भारी होने की वजह से सिंधिया ने समंदर को कोई आश्वासन नहीं दिया। इसी तरह धाकड़ की भी इच्छा कोलारस सीट से चुनाव लड़ने की थी, लेकिन उन्हें भी कोई आश्वासन नहीं मिला. सिंधिया खेमे के अधिकांश नेताओं के

14/8/2023102
'दादा' के दिल में दतिया,शिवकथा में नरोत्तम मिश्रा ने जनता के सामने प्रगट किया उद्गार
भोपाल

'दादा' के दिल में दतिया,शिवकथा में नरोत्तम मिश्रा ने जनता के सामने प्रगट किया उद्गार

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) के माध्यम से दतिया में पांच दिवसीय शिव कथा का आयोजन किया गया है। इन पांच दिनों के दौरान दतिया में शिवलिंग निर्माण का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है जिसमें लाखों की संख्या में पहुंचे भक्त शिवलिंग निर्माण कर रहे हैं। कथा के दौरान कथावाचक प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra) ने गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सनातन धर्म का रक्षक कहा तो साथ में यह भी कहा कि गृह मंत्री रहते अगर किसी ने सनातन धर्म के लिए खुल कर काम किया है तो वो डॉ. नरोत्तम मिश्रा हैं। गृह मंत्री ने कथा वाचक प्रदीप मिश्रा का आभार ब्यक्त करते हुए कहा कि इस दतिया में मेरे प्राण बसते हैं प्राण भगवान भोलेनाथ से अर्जी लगा देना कि इस दतिया में मेरे प्राण बसते हैं। इन दतिया वालों नें मुझे अंगीकार किया है इस लिए इस दतिया में कोई दुख ना आए यहां पर सिर्फ सुखों का बारिश हो सुख और समृद्धि की यहां पर बारिश होती रहे। सभी संत जन यहां पर अपना आशीर्वाद दें कि दतिया धन धान्य से समृद्ध हो जाए। गौरतलब है कि गृह मत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा हर श्रावण मास के दौरान दतिया में शिवलिंग का निर्माण करवाते हैं और किसी कथा वाचक के माध्यम से कथा का भी आयोजन करते हैं पिछले साल गृह मंत्री ने बाबा बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र सास्त्री से श्री राम कथा का आयोजन करवाया था और इस साल उन्होने भगवान शिव की कथा का आयोजन किया है। इस कथा के दौरान ना सिर्फ दतिया की जनता रोजाना कथा सुनने के लिए पहुंच रही है बल्कि देश भर से भगवान शिव के भक्त दतिया पहुंच रहे हैं। करीब तीस एकड़ के मैदान में आयोजित कथा में लोगों के बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही है। सबसे बड़ी बात यह देखने को मिल रही है कि एक-एक ब्यक्ति के पास खुद गृह मंत्री मिलने जाते हैं उनसे मिल कर उनकी समस्याएं समझने का प्रयास करते हैं। अगर किसी भक्त को कोई समस्या है तो उसे तत्काल प्रभाव से दूर करने का प्रयास भी किया जाता है।

13/8/2023230
देशभक्ति की अलख जगा कर भाजपा जनता के दिल में करेगी राज
भोपाल

देशभक्ति की अलख जगा कर भाजपा जनता के दिल में करेगी राज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ना सिर्फ पार्टी के लिए काम करना चाहती है बल्कि देश के बलिदानियों को याद करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ती। यही कारण है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 13 से 15 अगस्त के बीच भाजपा प्रदेश भर में तिरंगा यात्रा निकालने जा रही है। और 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भी भाजपा मना रही है। इस दौरान भाजपा की ओर से मेरी माटी-मेरा देश अभियान के लिए भाजपा की ओर से टोलिया गठित की गई हैं। दरअसल पीएम मोदी ने मन की बात के दौरान मेरी माटी-मेरा देश अभियान मनाने के लिए देश की जनता से आह्वान किया था। इसके अंतर्गत तिरंगा यात्राएं और हर घर तिरंगा अभियान चला कर भारतीय जनता पार्टी देश के युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाना चाहती है। इस दौरान भाजपा के कार्यकर्ता महापुरुषों की मूर्तियों और स्मारकों पर माल्यार्पण करेंगे। 14 अगस्त को प्रदेश भर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस पूरे अभियान में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा खुद रुचि ले रहे हैं और इसी लिए उन्होने मेरी मेटी-मेरा देश अभियान के लिए टोलियों का गठन किया है। इस अभियान के माध्यम से भाजपा एक बार फिर प्रदेश (BJP MP) की जनता के बीच पहुंचना चाहती है। भाजपा एक तीर से दो शिकार कर रही है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से प्रदेश के युवाओं के दिलों में देश भक्ति की अलख तो जगाएगी ही साथ ही जनता के बीच पहुंच कर भाजपा और कांग्रेस के बीच का फर्क भी बताएगी। भाजपा के कार्यकर्ता लोगों से संपर्क और संवाद करेंगे और उन्हे बताएंगे कि प्रदेश की शिवराज सरकार और देश की मोदी सरकार ने पिछले कुछ सालों में देश की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम किया है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि राजनीति अपनी जगह होती है लेकिन देश के प्रति भक्ति अपनी जगह होती है और आने वाली पीढियों को देश भक्ति के प्रति जागरुक करना जरुरी है इसी लिए भाजपा की ओर से इस प्रकार से नवाचार किए जा रहे हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि सिर्फ तिरंगा लहरा देना ही देश भक्ति नहीं अथवा आजादी का सम्मान नहीं है बल्कि देश के लिए जिन असंख्य लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दे दिया उनको याद करना और फिर उसे युवा पीढ़ी तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है तभी आज की नई पीढ़ी चन्द्रशेखर आजाद,मेता जी सुभाष चन्द्रबोष सहित अन्य बलिदानियों के बलिदान को समझेगी और आजादी की कीमत को पहचानेगी। क्योंकि इस आजादी के लिए देश के महापुरुषों ने बहुत कुछ किया है लिहाजा उके बलिदान को बताना देश के हर नागरिक का फर्ज है।

12/8/2023122
एमपी बीजेपी में संभालेंगे गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार के विधायक मोर्चा, 17 अगस्त से दमन-दीप में ट्रेनिंग
भोपाल

एमपी बीजेपी में संभालेंगे गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार के विधायक मोर्चा, 17 अगस्त से दमन-दीप में ट्रेनिंग

मध्यप्रदेश में भाजपा मिशन 2023 के लिए कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। भाजपा ने अब नया प्लान तैयार किया है। भाजपा सभी 230 विधानसभा सीटों में एक-एक विधायक तैनात करेगी। विधायकों की ड्यूटी लगाने के लिए 4 क्लस्टर बनाए जाएंगे। भाजपा शासित राज्यों के विधायकों की ड्यूटी मध्यप्रदेश में लगाई जाएगी। उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र के भाजपा विधायकों को मप्र भेजा जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार 15 अगस्त के बाद इन विधायकों को प्रभार की विधानसभा आवंटित कर दी जाएगी। जिन राज्यों में फिलहाल चुनाव नहीं हैं, उन राज्यों के विधायकों को मप्र की जिम्मेदारी दी जाएगी। लोकल फैक्टर की स्क्रीनिंग और डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटी भाजपा दूसरे राज्य के विधायक को फिलहाल इसी महीने सात दिनों के लिए एमपी भेज सकती है। वो प्रभार वाले विधानसभा क्षेत्र में जाकर स्थानीय पदाधिकारियों और समाज के प्रभावशाली लोगों से मिलकर जानकारी जुटाएंगे। कार्यकर्ताओं के बीच से मिले फीडबैक की रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व को देंगे। जो फैक्टर ऐसे हैं, जिनकी वजह से चुनाव में असर पड़ सकता है। इसकी भी रिपोर्ट बनाकर पार्टी को देंगे। दूसरी तरफ जिले की सरकार की दमन-दीप में ट्रेनिंग दी जाएगी। इस साल के विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के तमाम वर्गों के साथ ही भाजपा समर्थित गांव और नगर के जनप्रतिनिधियों को खुश करने में जुटी है। अब दमन-दीप में मप्र के भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की अगले हफ्ते में ट्रेनिंग होगी। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय ने देश भर के जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के लिए राज्यों के अलग-अलग क्लस्टर बनाए हैं। और सभी को ट्रेनिंग खुद जेपी नड्डा देंगे। जानकारी के मुताबिक 17 और 18 अगस्त को दमन-दीप के देवका बीच रिसॉर्ट में दो दिवसीय क्षेत्रीय पंचायत परिषद का आयोजन किया जाएगा। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और टेक्निकल एक्सपर्ट जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को केन्द्र सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए चलाई गई योजनाओं और भविष्य की रणनीति के बारे में बताएंगे।

11/8/2023135
गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की रणनीति के आगे क्लीन बोल्ड हुए कमलनाथ
भोपाल

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की रणनीति के आगे क्लीन बोल्ड हुए कमलनाथ

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को एमपी की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है और इसकी बानगी उस वक्त को देखने को मिली जब पूर्व विधायक अभय मिश्रा और उनकी पत्नी नीलम मिश्रा को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की सदस्यता दिला दी। अभय मिश्रा रीवा के सेमरिया से विधायक रह चुके हैं और साल 2018 में भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस से राजेन्द्र शुक्ला के खिलाफ चुनाव लड़े थे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में सेमरिया विधानसभा सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा था वहां वर्तमान में केपी त्रिपाठी विधायक हैं और उनसे स्थानीय जनता काफी नाराज है उसी का लाभ उठाते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने अभय मिश्रा को सेमरिया से टिकट देने का ऐलान कर दिया था। लेकिन ऐन मौके पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ऐसी गुगली फेंकी कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह एकसाथ क्लीन बोल्ड हो गए। गृह मत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा की ओर से ब्राम्हण चेहरा माना जाता है और विंध्य वो काफी लोकप्रिय हैं। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा रीवा के प्रभारी रहे हैं इस दौरान वहां की स्थानीय जनता से उनके करीबी संबंध रहे हैं यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को विंध्य की जनता ब्राम्हण चेहरे के रुप में देखती है। भारतीय जनता पार्टी ने भी गृह मंत्री की लोकप्रियता को देखते हुए ब्राम्हण के रुप में उनके चेहरे को इस्तेमाल करने की योजना तैयार कर ली है। पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी का गृह मंत्री हमेशा पालन करते हैं और यही कारण है कि सरकार बनाने से लेकर हर फैसले में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका रहती है। इस चुनाव मे माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। जहां भी ब्राम्हण चेहरे को उतारने की अथवा डैमेज कंट्रोल करने की जरुरत होती है वहां पर संगठन और सरकार की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आगे कर दिया जाता है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष का भी नाम आता है और वो भी विंध्य की तासीर से काफी परिचित हैं क्योंकि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि विंध्य से ही शुरु हुई थी यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की भी विंध्य में स्वीकार्यता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के कई ऐसे नेता गृह मंत्री के संपर्क में हैं जो आने वाले समय में बीजेपी का दामन थामने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी अपने कुनवे को संभालने में लगी रहेगी और भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों को परवान चढ़ाने में लगी रहेगी। भाजपा के प्लान के मुताबिक कांग्रेस को चुनावी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलना चाहिए इसी लिए इस प्रकार की रणनीति भारतीय जनता पार्टी ने अपनाई है।

11/8/2023251
संविदा कर्मियों के वेतन पर शासकीय अधिकारी लगा रहे पलीता,1500 आयुष चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी
भोपाल

संविदा कर्मियों के वेतन पर शासकीय अधिकारी लगा रहे पलीता,1500 आयुष चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी

चार जुलाई को भोपाल में संविदा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण का तोहफा दिया । 22 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए लेकिन पता चला है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार संविदा कर्मचारियों को नियमित के समकक्ष कर्मचारियों के पद के न्यूनतम वेतनमान का सत प्रतिशत वेतन एवं महंगाई भत्ता महंगाई दर के अनुसार दिया जाने का आदेश जारी किया गया है। विभागीय सेटअप मे समकक्ष पद ना होने पर एक अप्रैल 2018 की स्थिति में कर्मचारी की सैलरी अथवा समकक्ष पद निर्धारण के उपरांत पद के वेतनमान के शत प्रतिशत में से जो भी अधिक हो उसे वेतन मानते हुए महंगाई दर दिए जाने का निर्णय एवं दिशा निर्देश जारी किए गए थे । संविदा आयुष चिकित्सक संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले 15 से 20 वर्षों से काम कर रहे आयुष चिकित्सा अधिकारियों जो ओपीडी एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं उन सभी आयुष चिकित्सकों को मेडिकल सोशल वर्कर की श्रेणी में डालकर उनके मान सम्मान एवं वेतनमान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जो कतई बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब राज्य सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एवं विभागीय सेटअप में आयुष चिकित्सा अधिकारियों (आयुर्वेदिक चिकित्सा/ होम्योपैथिक चिकित्सा /यूनानी चिकित्सा )के समकक्ष 5400 ग्रेड पे एवं ₹56100 न्यूनतम वेतनमान पूर्व में 2018 में भी निर्धारित किया जा चुका था फिर वर्तमान पॉलिसी में संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार अधिकारियों को किसने दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेट्री मध्य प्रदेश शासन, स्वास्थ्य मंत्री और अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई संविदा नियमितीकरण पॉलिसी के अनुसार संविदा आयुष चिकित्सकों के भविष्य का निर्धारण करें अन्यथा की स्थिति में मुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत काम होने पर दुखी मन से प्रदेश में कार्यरत सभी आयुष चिकित्सा अधिकारी सामूहिक निर्णय लेंगे, जिसके जिम्मेदार विभागीय अधिकारी होंगे।

10/8/2023520
Mukhbir की खबर का असर,भगवा को बलात्कारी कहने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पद मुक्त
भोपाल

Mukhbir की खबर का असर,भगवा को बलात्कारी कहने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पद मुक्त

एक स्थानीय न्यूज चैनल में शब्दों की मर्यादा लांघने वाले कांग्रेस प्रवक्ता को पार्टी ने प्रदेश प्रवक्ता पद से मुक्त कर दिया है। दरअसल टीटी नगर में एक निजी चैनल द्वारा ओपन डिवेट का आयोजन किया गया था। जिसमें भाजपा और कांग्रेस के प्रवक्ताओं सहित स्थानीय नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम शुरु हुआ और 'बहस इतनी गरम' हुई की कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत खुद से आपा खो बैठे और भगवा को बलात्कारी कह डाला। कांग्रेस प्रवक्ता के इतना कहते ही डिवेट में पहुंचे स्थानीय लोगों ने हंगामा कर दिया। स्थिति मारपीट तक पहुंच गई इस बीच बीजेपी के प्रवक्ता बीच बचाव के लिए आए और कांग्रेस के प्रवक्ता को उन्होने बचाया। कुछ देर डिबेट को रोका भी गया और फिर बाद में डिबेट को फिर शुरु किया गया। शब्दों की मर्यादा लांघने वाले प्रवक्ता की खबर को 'Mukhbirmp.com' ने प्रमुखता से प्रसारित की थी जिसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत को कांग्रेस संगठन की ओर से पद मुक्त कर दिया गया। सिद्धार्त रजावत ग्वालियर अंचल से आते हैं और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल हुए थे। कांग्रेस के आक्रामक प्रवक्ताओं में शुमार सिद्धार्त रजावत आम तौर पर विपक्षी पार्टी के प्रवक्ताओं पर हावी होने के लिए अलग-अलग तरह से रणनीति तैयार करते रहते हैं। वो कई न्यूज चैनलों में डिवेट के दौरान खुद से आपा खो चुके हैं जिसकी शिकायत कई लोगों के माध्यम से पीसीसी चीफ कमलनाथ से की जा चुकी थी लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष उनकी गलतियों को लगातार अनदेखा करते रहे लेकिन इस बार पानी सिर से ऊपर चला गया था। क्योंकि पीसीसी चीफ कमलनाथ छिंदवाड़ा में राम कथा का आयोजन कर रहे हैं और इसी दौरान कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा भगवा को बलात्कारी कहना कांग्रेस की सारी तैयारियों पर पानी फेर सकता है यही कारण है कि इस बार कांग्रेस नेतृत्व ने बगैर देरी किए कड़ा ऐक्शन लेकर पार्टी के अन्य प्रवक्ताओं को कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का काम किया है कि कोई भी शब्दों की मर्यादा ना लांघें नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना तय है।

9/8/2023241
पीसीसी चीफ कमलनाथ का फिर जागा आदिवासी प्रेम बताया कांग्रेस का परिवार
भोपाल

पीसीसी चीफ कमलनाथ का फिर जागा आदिवासी प्रेम बताया कांग्रेस का परिवार

आदिवासी दिवस के मौके पर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने एक बीडियो जारी कर आदिवासियों को लेकर कई घोषणाएं करते हुए उन्हे कांग्रेस का परिवार बताया है। पीसीसी चीफ ने कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासियों के हित में किए गए कामों को भी गिनाया है। कमलनाथ ने कहा कि पेसा ऐक्ट,वन अधिकार सहित पूजा स्थलों पर आदिवासियों को कांग्रेस ने पूजा का अधिकार गिनाया है। इस दौरान पीसीसी चीफ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मप्र आदिवासियों के अपराध की राजधानी बन गया है। कमलनाथ ने सीधी पेशाब कांड का जिक्र करते हुए सरकार को आदिवासी विरोधी बताया है। पीसीसी चीफ ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर असली पेसा ऐक्ट लागू किया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर फिर अवकाश घोषित कर उत्सव मनाया जाएगा और मध्यप्रदेश को आदिवासियों के लिए देश का सबसे सुरक्षित राज्य बनाया जाएगा। दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की खासी अहमियत मानी जाती है. यहां आदिवासी वोट बैंक को सत्ता की चाबी माना जाता है. यानी जिस पार्टी को आदिवासी समुदाय का समर्थन मिलता है, उसे सत्ता मिलना भी तय माना जाता है. इसकी वजह भी है चूंकि, राज्य की 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जबलपुर संभाग के आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी. जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी।

9/8/2023106
कांग्रेस प्रवक्ता ने ओपन डिवेट पर भगवा को कहा बलात्कारी,जमकर हुआ हंगामा
भोपाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने ओपन डिवेट पर भगवा को कहा बलात्कारी,जमकर हुआ हंगामा

एक प्रतिष्ठित स्थानीय न्यूज चैनल ने भोपाल के टीटी नगर में ओपन चुनावी डिवेट का आयोजन मंगलवार शाम को किया था। डिबेट के दौरान कांग्रेस और भाजपा के प्रवक्ताओं सहित स्थानीय जनता को भी आमंत्रित किया गया था। लेकिन इस ओपन डिवेट में कांग्रेस के एक प्रवक्ता खुद से आपा खो बैठे और उन्होने शब्दों की मर्यादा को लांघते हुए भगवा को बलात्कारी कह डाला। फिर क्या था ओपन डिवेट देखने पहुंची स्थानीय जनता ने भी खुद से आपा खो दिया और हंगामा शुरु हो गया। स्थिति मारपीट तक पहुंच गई। लेकिन समय रहते भाजपा के प्रवक्ताओं ने कांग्रेस के प्रवक्ताओं को बचाया और स्थानीय नागरिकों के गुस्से को शांत किया। इस बीच मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आनन फानन में मौके पर पुलिस भी पहुंची उसके बाद ही पूरा मामला शांत हो पाया। कांग्रेस के जिन प्रवक्ता ने शब्दों की मर्यादा लांघी वो ग्वालियर अंचल से आते हैं और खुद को सही साबित करने के लिए वो जब भी किसी न्यूज चैनल में डिबेट पर बैठते हैं तो हमेशा खुद से आपा खो देते हैं और आए दिन न्यूज चैनल में वो विवादों के केन्द्रबिंदु बनते रहते हैं।

8/8/2023157
ना खाट पर ना चौपाल पर अब तो घर-घर भाजपा करेगी अबकी बार फिर भाजपा सरकार
भोपाल

ना खाट पर ना चौपाल पर अब तो घर-घर भाजपा करेगी अबकी बार फिर भाजपा सरकार

भारतीय जनता पार्टी ने मेगा प्लान तैयार करते हुए जनता का मूड भाजपा की ओर डायवर्ट करने की योजना पर काम शुरु कर दिया है। जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश भर की जनता के मन मस्तिस्क में यह बैठा दिया था कि कांग्रेस की सरकार आने वाली है और परसेप्शन को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने खत्म करने की योजना तैयार कर ली है। भाजपा ने मेगा प्लान तैयार करते हुए घर-घर चाय पीने की योजना तैयार की है। भाजपा की इस योजना के तहत पार्टी के एक कार्यकर्ता को पांच घरों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जिसके तहत भाजपा का कार्यकर्ता एक दो दिन अंतर में अलग-अलग लोगों के घर पर चाय पीने जाएंगे। इस दौरान भाजपा के कार्यकर्ता सरकार के कामों का बखान कर जनता का ना सिर्फ मूड परखने का काम करेंगे बल्कि उन्हे भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए भी प्रेरित करेंगे। इतना ही नहीं भाजपा के हर कार्यकर्ता से साफ कहा जा रहा है कि वो रोजाना करीब दस लोगों को फोन लगाएं और उन्हे भाजपा सरकार के योजनाओं की जानकारी दें। भारतीय जनता पार्टी को इस बात का अहसास है कि उन्होने जनता की मांग को करीब-करीब पूरा कर दिया है अब जनता के बीच के मूड को बदलने की जरुरत है। इस बात में कोई शक नहीं कि प्रदेश की शिवराज सरकार ने पंचायतों में पदस्थ रोजगार सहायकों की नौ से 18 हजार वेतन किया तो पंचायत सचिवों को शासकीय सेवकों की तर्ज पर कर दिया है संविदा कर्मियों को भी सरकार ने नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं कर दी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का भी सरकार ने मानदेय बढ़ा दिया है। आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं का भी मानदेय बढ़ाया गया है लाडली बहना योजना के तहत हर घरेलू महिलाओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं लिहाजा सरकार ने हर वर्ग को संतुष्ठ करने का प्रयास किया है और अब भाजपा की योजना है कि जनता की सरकार से जिन बातों को लेकर नाराजगी थी उन्हे खत्म कर दिया गया है और इसी लिए अब जनता का मूड बदलने की जरुरत है जिसके लिए हर घर में भाजपा के कार्यकर्ताओं को भेजने की योजना है ताकि वो अम जनता के घर पर जाएं चाय पियें और यह बताएं की सरकार ने उनके लिए क्या-क्या किया है और अबकी बार फिर भाजपा की सरकार बनाना क्यों जरुरी है।

8/8/202396
फिर उठा चेहरे पर सवाल,'उमंग' में सिंघार
भोपाल

फिर उठा चेहरे पर सवाल,'उमंग' में सिंघार

पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने एकबार फिर बगावती तेवर अपनाते हुए मध्यप्रदेश में आदिवासी सीएम की आवाज को बुलंद किया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि एमपी में जिस प्रकार से आदिवासियों के ऊपर अपराध और अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं ऐसी स्थिति में प्रदेश में आदिवासी को ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह वही उमंग सिंघार हैं जिन्होने तत्कालीन कमलनाथ सरकार के दौरान कहा था कि पर्दे के पीछे से दिग्विजय सिंह सरकार को चलाते हैं उन्होने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर अवैध रेत उत्खनन का भी आरोप लगाया था हांलाकि इस पूरे मामले में दिग्विजय सिंह की ओर से आज तक किसी प्रकार की सफाई अथवा बयान नहीं आया है कि उमंग सिंघार के आरोप निराधार हैं अथवा उनमें किसी प्रकार की सत्यता भी है। इस बात में कोई सक नहीं है कि उमंग सिंघार एक राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं और जिस प्रकार से उनके पूरे परिवार ने कांग्रेस पार्टी की सेवा की है उसके हिंसाब से उन्हे पार्टी में महत्व नहीं दिया गया है। जब कांग्रेस की सरकार बनी थी तब भी उन्हे वन मंत्रालय दिया गया था लेकिन पार्टी कभी उनके साथ खड़ी नजर नहीं आई। लेकिन उमंग सिंघार ने जिस प्रकार से आदिवासी सीएम की मांग खुलेआम उठाई है इससे यह स्पष्ट हो गया है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने जिस प्रकार से आदिवासियों पर फोकस किया है तो इस मांग के बाद आदिवासी वोट कांग्रेस पार्टी से छिटक सकता है। इतिहास की ओर नजर डालें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा कांग्रेस पार्टी का ही राज रहा है जिसमें एक भी आदिवासी सीएम नहीं बन पाया है उसके उलट भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो आदिवासी को राष्ट्रपति बना कर उन्होने यह साबित कर दिया है कि वो आदिवासियों के कितने हितैषी हैं साथ में एमपी में भी भाजपा ने आदिवासियों के हित में कई सारी योजनाएं शुरु की है जिसमें पेसा ऐक्ट योजना सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण योजनाओं में हैं। हवीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर रानी कमला पति रेलवे स्टेशन किया गया। शंकर और रघुनाथ शाह की मुर्ण्यतिथि से लेकर टंट्यामामा भील को लेकर भाजपा की ओर से लगातार कोई ना कोई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से आदिवासी नेता तो कई तैयार हुए जिसमें कांतीलाल भूरिया हों अथवा ओमकार मरकाम लेकिन उन्हे ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है जब आदिवासियों को साधने की बात आती है तब जरुर इन नेताओं को कांग्रेस पार्टी आगे करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने लगती है। उमंग सिंघार के बयान के बाद प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भी खुलेतौर पर चुटकी ली और कहा कि वो उमंग सिंघार के कायल हैं जिस प्रकार से वो कांग्रेस में रह कर खुल कर बोलते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि सरकार को पर्दे के पीछे से कोई और चला रहा है ऐसा बयान सिर्फ उमंग सिंघार ही दे सकते हैं।

7/8/2023122