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एमपी बीजेपी में संभालेंगे गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार के विधायक मोर्चा, 17 अगस्त से दमन-दीप में ट्रेनिंग
मध्यप्रदेश में भाजपा मिशन 2023 के लिए कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। भाजपा ने अब नया प्लान तैयार किया है। भाजपा सभी 230 विधानसभा सीटों में एक-एक विधायक तैनात करेगी। विधायकों की ड्यूटी लगाने के लिए 4 क्लस्टर बनाए जाएंगे। भाजपा शासित राज्यों के विधायकों की ड्यूटी मध्यप्रदेश में लगाई जाएगी। उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र के भाजपा विधायकों को मप्र भेजा जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार 15 अगस्त के बाद इन विधायकों को प्रभार की विधानसभा आवंटित कर दी जाएगी। जिन राज्यों में फिलहाल चुनाव नहीं हैं, उन राज्यों के विधायकों को मप्र की जिम्मेदारी दी जाएगी। लोकल फैक्टर की स्क्रीनिंग और डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटी भाजपा दूसरे राज्य के विधायक को फिलहाल इसी महीने सात दिनों के लिए एमपी भेज सकती है। वो प्रभार वाले विधानसभा क्षेत्र में जाकर स्थानीय पदाधिकारियों और समाज के प्रभावशाली लोगों से मिलकर जानकारी जुटाएंगे। कार्यकर्ताओं के बीच से मिले फीडबैक की रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व को देंगे। जो फैक्टर ऐसे हैं, जिनकी वजह से चुनाव में असर पड़ सकता है। इसकी भी रिपोर्ट बनाकर पार्टी को देंगे। दूसरी तरफ जिले की सरकार की दमन-दीप में ट्रेनिंग दी जाएगी। इस साल के विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के तमाम वर्गों के साथ ही भाजपा समर्थित गांव और नगर के जनप्रतिनिधियों को खुश करने में जुटी है। अब दमन-दीप में मप्र के भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की अगले हफ्ते में ट्रेनिंग होगी। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय ने देश भर के जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के लिए राज्यों के अलग-अलग क्लस्टर बनाए हैं। और सभी को ट्रेनिंग खुद जेपी नड्डा देंगे। जानकारी के मुताबिक 17 और 18 अगस्त को दमन-दीप के देवका बीच रिसॉर्ट में दो दिवसीय क्षेत्रीय पंचायत परिषद का आयोजन किया जाएगा। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और टेक्निकल एक्सपर्ट जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को केन्द्र सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए चलाई गई योजनाओं और भविष्य की रणनीति के बारे में बताएंगे।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की रणनीति के आगे क्लीन बोल्ड हुए कमलनाथ
गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को एमपी की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है और इसकी बानगी उस वक्त को देखने को मिली जब पूर्व विधायक अभय मिश्रा और उनकी पत्नी नीलम मिश्रा को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की सदस्यता दिला दी। अभय मिश्रा रीवा के सेमरिया से विधायक रह चुके हैं और साल 2018 में भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस से राजेन्द्र शुक्ला के खिलाफ चुनाव लड़े थे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में सेमरिया विधानसभा सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा था वहां वर्तमान में केपी त्रिपाठी विधायक हैं और उनसे स्थानीय जनता काफी नाराज है उसी का लाभ उठाते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने अभय मिश्रा को सेमरिया से टिकट देने का ऐलान कर दिया था। लेकिन ऐन मौके पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ऐसी गुगली फेंकी कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह एकसाथ क्लीन बोल्ड हो गए। गृह मत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा की ओर से ब्राम्हण चेहरा माना जाता है और विंध्य वो काफी लोकप्रिय हैं। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा रीवा के प्रभारी रहे हैं इस दौरान वहां की स्थानीय जनता से उनके करीबी संबंध रहे हैं यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को विंध्य की जनता ब्राम्हण चेहरे के रुप में देखती है। भारतीय जनता पार्टी ने भी गृह मंत्री की लोकप्रियता को देखते हुए ब्राम्हण के रुप में उनके चेहरे को इस्तेमाल करने की योजना तैयार कर ली है। पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी का गृह मंत्री हमेशा पालन करते हैं और यही कारण है कि सरकार बनाने से लेकर हर फैसले में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका रहती है। इस चुनाव मे माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। जहां भी ब्राम्हण चेहरे को उतारने की अथवा डैमेज कंट्रोल करने की जरुरत होती है वहां पर संगठन और सरकार की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आगे कर दिया जाता है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष का भी नाम आता है और वो भी विंध्य की तासीर से काफी परिचित हैं क्योंकि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि विंध्य से ही शुरु हुई थी यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की भी विंध्य में स्वीकार्यता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के कई ऐसे नेता गृह मंत्री के संपर्क में हैं जो आने वाले समय में बीजेपी का दामन थामने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी अपने कुनवे को संभालने में लगी रहेगी और भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों को परवान चढ़ाने में लगी रहेगी। भाजपा के प्लान के मुताबिक कांग्रेस को चुनावी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलना चाहिए इसी लिए इस प्रकार की रणनीति भारतीय जनता पार्टी ने अपनाई है।

संविदा कर्मियों के वेतन पर शासकीय अधिकारी लगा रहे पलीता,1500 आयुष चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी
चार जुलाई को भोपाल में संविदा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण का तोहफा दिया । 22 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए लेकिन पता चला है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार संविदा कर्मचारियों को नियमित के समकक्ष कर्मचारियों के पद के न्यूनतम वेतनमान का सत प्रतिशत वेतन एवं महंगाई भत्ता महंगाई दर के अनुसार दिया जाने का आदेश जारी किया गया है। विभागीय सेटअप मे समकक्ष पद ना होने पर एक अप्रैल 2018 की स्थिति में कर्मचारी की सैलरी अथवा समकक्ष पद निर्धारण के उपरांत पद के वेतनमान के शत प्रतिशत में से जो भी अधिक हो उसे वेतन मानते हुए महंगाई दर दिए जाने का निर्णय एवं दिशा निर्देश जारी किए गए थे । संविदा आयुष चिकित्सक संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले 15 से 20 वर्षों से काम कर रहे आयुष चिकित्सा अधिकारियों जो ओपीडी एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं उन सभी आयुष चिकित्सकों को मेडिकल सोशल वर्कर की श्रेणी में डालकर उनके मान सम्मान एवं वेतनमान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जो कतई बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब राज्य सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एवं विभागीय सेटअप में आयुष चिकित्सा अधिकारियों (आयुर्वेदिक चिकित्सा/ होम्योपैथिक चिकित्सा /यूनानी चिकित्सा )के समकक्ष 5400 ग्रेड पे एवं ₹56100 न्यूनतम वेतनमान पूर्व में 2018 में भी निर्धारित किया जा चुका था फिर वर्तमान पॉलिसी में संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार अधिकारियों को किसने दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेट्री मध्य प्रदेश शासन, स्वास्थ्य मंत्री और अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई संविदा नियमितीकरण पॉलिसी के अनुसार संविदा आयुष चिकित्सकों के भविष्य का निर्धारण करें अन्यथा की स्थिति में मुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत काम होने पर दुखी मन से प्रदेश में कार्यरत सभी आयुष चिकित्सा अधिकारी सामूहिक निर्णय लेंगे, जिसके जिम्मेदार विभागीय अधिकारी होंगे।

Mukhbir की खबर का असर,भगवा को बलात्कारी कहने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पद मुक्त
एक स्थानीय न्यूज चैनल में शब्दों की मर्यादा लांघने वाले कांग्रेस प्रवक्ता को पार्टी ने प्रदेश प्रवक्ता पद से मुक्त कर दिया है। दरअसल टीटी नगर में एक निजी चैनल द्वारा ओपन डिवेट का आयोजन किया गया था। जिसमें भाजपा और कांग्रेस के प्रवक्ताओं सहित स्थानीय नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम शुरु हुआ और 'बहस इतनी गरम' हुई की कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत खुद से आपा खो बैठे और भगवा को बलात्कारी कह डाला। कांग्रेस प्रवक्ता के इतना कहते ही डिवेट में पहुंचे स्थानीय लोगों ने हंगामा कर दिया। स्थिति मारपीट तक पहुंच गई इस बीच बीजेपी के प्रवक्ता बीच बचाव के लिए आए और कांग्रेस के प्रवक्ता को उन्होने बचाया। कुछ देर डिबेट को रोका भी गया और फिर बाद में डिबेट को फिर शुरु किया गया। शब्दों की मर्यादा लांघने वाले प्रवक्ता की खबर को 'Mukhbirmp.com' ने प्रमुखता से प्रसारित की थी जिसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत को कांग्रेस संगठन की ओर से पद मुक्त कर दिया गया। सिद्धार्त रजावत ग्वालियर अंचल से आते हैं और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल हुए थे। कांग्रेस के आक्रामक प्रवक्ताओं में शुमार सिद्धार्त रजावत आम तौर पर विपक्षी पार्टी के प्रवक्ताओं पर हावी होने के लिए अलग-अलग तरह से रणनीति तैयार करते रहते हैं। वो कई न्यूज चैनलों में डिवेट के दौरान खुद से आपा खो चुके हैं जिसकी शिकायत कई लोगों के माध्यम से पीसीसी चीफ कमलनाथ से की जा चुकी थी लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष उनकी गलतियों को लगातार अनदेखा करते रहे लेकिन इस बार पानी सिर से ऊपर चला गया था। क्योंकि पीसीसी चीफ कमलनाथ छिंदवाड़ा में राम कथा का आयोजन कर रहे हैं और इसी दौरान कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा भगवा को बलात्कारी कहना कांग्रेस की सारी तैयारियों पर पानी फेर सकता है यही कारण है कि इस बार कांग्रेस नेतृत्व ने बगैर देरी किए कड़ा ऐक्शन लेकर पार्टी के अन्य प्रवक्ताओं को कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का काम किया है कि कोई भी शब्दों की मर्यादा ना लांघें नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना तय है।

पीसीसी चीफ कमलनाथ का फिर जागा आदिवासी प्रेम बताया कांग्रेस का परिवार
आदिवासी दिवस के मौके पर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने एक बीडियो जारी कर आदिवासियों को लेकर कई घोषणाएं करते हुए उन्हे कांग्रेस का परिवार बताया है। पीसीसी चीफ ने कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासियों के हित में किए गए कामों को भी गिनाया है। कमलनाथ ने कहा कि पेसा ऐक्ट,वन अधिकार सहित पूजा स्थलों पर आदिवासियों को कांग्रेस ने पूजा का अधिकार गिनाया है। इस दौरान पीसीसी चीफ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मप्र आदिवासियों के अपराध की राजधानी बन गया है। कमलनाथ ने सीधी पेशाब कांड का जिक्र करते हुए सरकार को आदिवासी विरोधी बताया है। पीसीसी चीफ ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर असली पेसा ऐक्ट लागू किया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर फिर अवकाश घोषित कर उत्सव मनाया जाएगा और मध्यप्रदेश को आदिवासियों के लिए देश का सबसे सुरक्षित राज्य बनाया जाएगा। दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की खासी अहमियत मानी जाती है. यहां आदिवासी वोट बैंक को सत्ता की चाबी माना जाता है. यानी जिस पार्टी को आदिवासी समुदाय का समर्थन मिलता है, उसे सत्ता मिलना भी तय माना जाता है. इसकी वजह भी है चूंकि, राज्य की 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जबलपुर संभाग के आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी. जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने ओपन डिवेट पर भगवा को कहा बलात्कारी,जमकर हुआ हंगामा
एक प्रतिष्ठित स्थानीय न्यूज चैनल ने भोपाल के टीटी नगर में ओपन चुनावी डिवेट का आयोजन मंगलवार शाम को किया था। डिबेट के दौरान कांग्रेस और भाजपा के प्रवक्ताओं सहित स्थानीय जनता को भी आमंत्रित किया गया था। लेकिन इस ओपन डिवेट में कांग्रेस के एक प्रवक्ता खुद से आपा खो बैठे और उन्होने शब्दों की मर्यादा को लांघते हुए भगवा को बलात्कारी कह डाला। फिर क्या था ओपन डिवेट देखने पहुंची स्थानीय जनता ने भी खुद से आपा खो दिया और हंगामा शुरु हो गया। स्थिति मारपीट तक पहुंच गई। लेकिन समय रहते भाजपा के प्रवक्ताओं ने कांग्रेस के प्रवक्ताओं को बचाया और स्थानीय नागरिकों के गुस्से को शांत किया। इस बीच मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आनन फानन में मौके पर पुलिस भी पहुंची उसके बाद ही पूरा मामला शांत हो पाया। कांग्रेस के जिन प्रवक्ता ने शब्दों की मर्यादा लांघी वो ग्वालियर अंचल से आते हैं और खुद को सही साबित करने के लिए वो जब भी किसी न्यूज चैनल में डिबेट पर बैठते हैं तो हमेशा खुद से आपा खो देते हैं और आए दिन न्यूज चैनल में वो विवादों के केन्द्रबिंदु बनते रहते हैं।

तेजस्वी का चमका 'सूर्य' भाजपा युवा मोर्चा को मिली शक्ति
भोपाल के एक दिवसीय दौरे पर आए भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्य ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को संबेधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को “सुविधा, सुरक्षा, सम्मान“ प्रदान किया है। गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला, महिला शौचालयों के लिए स्वच्छता और घरों में नल के पानी के लिए जल-जीवन जैसी योजनाओं ने न केवल महिलाओं के जीवन को सरल बनाया, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान के साथ आत्मविश्वास की भावना भी प्रदान की। यह बात भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में नव मतदाता नारी शक्ति सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि महिला सशक्तिकरण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर निर्भर है। मुद्रा योजना कार्यक्रम के अंतर्गत 27 करोड़ से अधिक महिलाओं को 68 प्रतिशत ऋण प्रदान किये गए हैं। इसने देश भर में करोड़ों महिलाओं को उद्यमी बनाकर वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने में सक्षम किया है। देश में 3.18 करोड़ सुकन्या समृद्धि योजना खाते खोले गए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम आवास योजना के अंतर्गत, महिलाओं को परिवार का स्वामित्व दिया जा रहा है, इस प्रकार वो घरेलू निर्णय लेने में सक्रिय रूप से भागीदार बन रही हैं। मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल में महिलाएं सुदृढ़ रूप से आगे बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बहनों, बेटियों, महिलाओं के हित में जितनी योजनाएं चलायीं हैं देश के किसी अन्य प्रदेश में इतनी नहीं हैं। लाडली लक्ष्मी योजना से समाज में ऐतिहासिक परिवर्तन सामने आए हैं और हाल ही में लागू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से बहनों का न केवल आत्मसम्मान बल्कि आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सूर्या ने ककहा कि नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद ’बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसी ढ़ेरों योजनाओं से पूरे देश में बेटियों को गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में अपनाने की अपील की, जिसके परिणामस्वरूप ये जन अभियान में बदला और लिंगानुपात में क्रांतिकारी सुधार आए। पीएम मोदी ने वूमेन डेवलपमेंट की सोच को वूमेन लीड डेवलपमेंट के संकल्प में बदला और अवसरों के द्वार खोले। आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में भारत का नाम रोशन कर रही हैं।

खुद की उपेक्षाओं से आहत कांग्रेस मीडिया विभाग की पूर्व अध्यक्ष थाम सकती हैं भाजपा का दामन
कांग्रेस मीडिया विभाग की बात निराली है। किसी जमाने में कांग्रेस का पूरा मीडिया विभाग और जनसंपर्क चलाने वाली कांग्रेस नेत्री इन दिनों खुद की उपेक्षाओं से काफी आहत नजर आ रही हैं। खुद की क्षमता साबित करने के लिए उन्होने भोपाल से दिल्ली तक सफर किया लेकिन नतीजा शिफर ही रहा। एक दौर हुआ करता था जब वो कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हुआ करती थीं उनकी इसी काबिलियत को देखते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने उन्हे साल 2018 में कांग्रेस मीडिया विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया था उसके बाद तो उन्होने जो किया वो सारी मीडिया को पता है साथ में कांग्रेस मीडिया विभाग का हर प्रवक्ता उनसे खार खाए बैठा है। कुछ प्रवक्ता बस मुंह नहीं खोल पा रहे हैं कि कहीं वक्त फिर ना बदल जाए। इस वक्त कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा हैं उन पर सीधे कमलनाथ के एक सिपेसालार का हाथ है यही कारण है कि वो मीडिया विभाग में अपनी चला रहे हैं लेकिन पीसीसी चीफ कमलनाथ की ओर से तैनात सिपेसालार से वो हमेशा सजग रहते हैं जब तक वो कांग्रेस कार्यालय में रहते हैं तब तक मिश्रा जी उनके इर्द-गिर्द मौजूद रहने का कोई ना कोई बहाना बनाए रहते हैं। एक और बात देखने को मिली कि कांग्रेस मीडिया विभाग में अब तक सारी नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष करते थे लेकिन हाल में एक पत्र एआईसीसी मीडिया विभाग से जारी हुआ इसमें यशोमति ठाकुर,अनंत पटेल,अभय दुबे और अनुमा आचार्य को मीडिया समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है। अब फिर से बात करते हैं कांग्रेस के उन नेत्री की जो खुद को उपेक्षित महसूस कर अब दूसरे विकल्प की तलाश में चल रही हैं। पता चला है कि वो केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में हैं। करीब महीने भर पहले उन्होने ज्योतिरादित्य सिंधिया से दिल्ली में मुलाकात भी की थी। उस वक्त बात नहीं बन पाई थी क्योंकि वो चाहती हैं कि जब भाजपा में आएं तो उकी एंट्री जोरदार तरीके से होनी चाहिए और उनको पद भी मिलना चाहिए लेकिन भाजपा तो एक कैडर वेस पार्टी है भाजपा में किसी की ज्वाइनिंग होती है तो उसके पहले सभी प्रकार के समीकरण देखे जाते हैं कि किसको ज्वाइन कराने से पार्टी को क्या लाभ होगा। लेकिन पता चला है कि अब बात बनने वाली है और भाजपा के कुछ नेताओं ने मामले में सहमति दे दी है उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में ज्वाइनिंग कराई जाएगी।

ना खाट पर ना चौपाल पर अब तो घर-घर भाजपा करेगी अबकी बार फिर भाजपा सरकार
भारतीय जनता पार्टी ने मेगा प्लान तैयार करते हुए जनता का मूड भाजपा की ओर डायवर्ट करने की योजना पर काम शुरु कर दिया है। जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश भर की जनता के मन मस्तिस्क में यह बैठा दिया था कि कांग्रेस की सरकार आने वाली है और परसेप्शन को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने खत्म करने की योजना तैयार कर ली है। भाजपा ने मेगा प्लान तैयार करते हुए घर-घर चाय पीने की योजना तैयार की है। भाजपा की इस योजना के तहत पार्टी के एक कार्यकर्ता को पांच घरों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जिसके तहत भाजपा का कार्यकर्ता एक दो दिन अंतर में अलग-अलग लोगों के घर पर चाय पीने जाएंगे। इस दौरान भाजपा के कार्यकर्ता सरकार के कामों का बखान कर जनता का ना सिर्फ मूड परखने का काम करेंगे बल्कि उन्हे भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए भी प्रेरित करेंगे। इतना ही नहीं भाजपा के हर कार्यकर्ता से साफ कहा जा रहा है कि वो रोजाना करीब दस लोगों को फोन लगाएं और उन्हे भाजपा सरकार के योजनाओं की जानकारी दें। भारतीय जनता पार्टी को इस बात का अहसास है कि उन्होने जनता की मांग को करीब-करीब पूरा कर दिया है अब जनता के बीच के मूड को बदलने की जरुरत है। इस बात में कोई शक नहीं कि प्रदेश की शिवराज सरकार ने पंचायतों में पदस्थ रोजगार सहायकों की नौ से 18 हजार वेतन किया तो पंचायत सचिवों को शासकीय सेवकों की तर्ज पर कर दिया है संविदा कर्मियों को भी सरकार ने नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं कर दी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का भी सरकार ने मानदेय बढ़ा दिया है। आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं का भी मानदेय बढ़ाया गया है लाडली बहना योजना के तहत हर घरेलू महिलाओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं लिहाजा सरकार ने हर वर्ग को संतुष्ठ करने का प्रयास किया है और अब भाजपा की योजना है कि जनता की सरकार से जिन बातों को लेकर नाराजगी थी उन्हे खत्म कर दिया गया है और इसी लिए अब जनता का मूड बदलने की जरुरत है जिसके लिए हर घर में भाजपा के कार्यकर्ताओं को भेजने की योजना है ताकि वो अम जनता के घर पर जाएं चाय पियें और यह बताएं की सरकार ने उनके लिए क्या-क्या किया है और अबकी बार फिर भाजपा की सरकार बनाना क्यों जरुरी है।

फिर उठा चेहरे पर सवाल,'उमंग' में सिंघार
पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने एकबार फिर बगावती तेवर अपनाते हुए मध्यप्रदेश में आदिवासी सीएम की आवाज को बुलंद किया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि एमपी में जिस प्रकार से आदिवासियों के ऊपर अपराध और अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं ऐसी स्थिति में प्रदेश में आदिवासी को ही मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह वही उमंग सिंघार हैं जिन्होने तत्कालीन कमलनाथ सरकार के दौरान कहा था कि पर्दे के पीछे से दिग्विजय सिंह सरकार को चलाते हैं उन्होने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर अवैध रेत उत्खनन का भी आरोप लगाया था हांलाकि इस पूरे मामले में दिग्विजय सिंह की ओर से आज तक किसी प्रकार की सफाई अथवा बयान नहीं आया है कि उमंग सिंघार के आरोप निराधार हैं अथवा उनमें किसी प्रकार की सत्यता भी है। इस बात में कोई सक नहीं है कि उमंग सिंघार एक राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं और जिस प्रकार से उनके पूरे परिवार ने कांग्रेस पार्टी की सेवा की है उसके हिंसाब से उन्हे पार्टी में महत्व नहीं दिया गया है। जब कांग्रेस की सरकार बनी थी तब भी उन्हे वन मंत्रालय दिया गया था लेकिन पार्टी कभी उनके साथ खड़ी नजर नहीं आई। लेकिन उमंग सिंघार ने जिस प्रकार से आदिवासी सीएम की मांग खुलेआम उठाई है इससे यह स्पष्ट हो गया है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने जिस प्रकार से आदिवासियों पर फोकस किया है तो इस मांग के बाद आदिवासी वोट कांग्रेस पार्टी से छिटक सकता है। इतिहास की ओर नजर डालें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा कांग्रेस पार्टी का ही राज रहा है जिसमें एक भी आदिवासी सीएम नहीं बन पाया है उसके उलट भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो आदिवासी को राष्ट्रपति बना कर उन्होने यह साबित कर दिया है कि वो आदिवासियों के कितने हितैषी हैं साथ में एमपी में भी भाजपा ने आदिवासियों के हित में कई सारी योजनाएं शुरु की है जिसमें पेसा ऐक्ट योजना सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण योजनाओं में हैं। हवीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर रानी कमला पति रेलवे स्टेशन किया गया। शंकर और रघुनाथ शाह की मुर्ण्यतिथि से लेकर टंट्यामामा भील को लेकर भाजपा की ओर से लगातार कोई ना कोई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से आदिवासी नेता तो कई तैयार हुए जिसमें कांतीलाल भूरिया हों अथवा ओमकार मरकाम लेकिन उन्हे ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है जब आदिवासियों को साधने की बात आती है तब जरुर इन नेताओं को कांग्रेस पार्टी आगे करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने लगती है। उमंग सिंघार के बयान के बाद प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भी खुलेतौर पर चुटकी ली और कहा कि वो उमंग सिंघार के कायल हैं जिस प्रकार से वो कांग्रेस में रह कर खुल कर बोलते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि सरकार को पर्दे के पीछे से कोई और चला रहा है ऐसा बयान सिर्फ उमंग सिंघार ही दे सकते हैं।

अब भाजपा क्रियान्वयन समिति का करेगी गठन,दिए गए टास्क की निगरानी करेगी समिति
दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हुई भाजपा की हाई लेवल मीटिंग कर गई बिंदुओं पर चर्चा हुई है। सबसे पहले भाजपा ने हारी हुई सीटों पर जीत को लेकर मंथन किया है। ऐसी सीटें जहां पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा और और उन सीटों पर भी फोकस किया गया है जहां साल 2018 में भाजपा 500 से एक हजार वोट से चुनाव जीती थी अथला इतने ही वोटों से चुनाव हारी थी। भाजपा की इस बैठक में प्रत्येक नेताओं को 50 बूथों का लक्ष्य दिया गया है। इसके अलावा प्रतिनिदियों को 15 सूत्रीय कार्यक्रम सौंपे गए हैं। भाजपा के बूथ प्रबंधन की कार्ययोजना के अनुरुप संभागीय सम्मेलनों के बाथ अब विधानसभावार कार्यकर्ता सम्मेलनों पर अब भाजपा फोकस कर रही है। दिल्ली की बैठक में ढाई महीने की कार्ययोजना तय की गई है। इस दौरान जो टास्क दिए जाएंगे उसका पालन हुआ या नहीं उसके लिए क्रियान्वयन कमेटी गठित करने पर भी फैसला लिया गया है। गौरतलब है कि रविवार शाम को दिल्ली में अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में एमपी भाजपा की हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई थी जिसमें सीएम शिवराज सिंह चौहान,प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा सहित अन्य नेता भी इस बैठक में शामिल हुए। 12 अगस्त को पीएम मोदी भी सागर आ रहे हैं जहां वो संत रविदास के मंदिर की आधारशिला रखेंगे। भाजपा की हाई लेवल में पूर्व में निर्धारित की गई कार्ययोजना के तहत मोर्चा प्रकोष्ठ,विधायक-सांसद या कोई अन्य प्रतिनिधि,नगर निगम-नगर पालिका,पंचायत मंडी सहित 50 प्रतिनिधियों को 15 सूत्रीय कार्यक्रम सौंपे गए हैं। इसके तहत वो पंचायत सचिव,आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं से लेकर बूथ में रहने वाले गणमान्य लोगों से मुलाकात करेंगे और उन्हे भाजपा सरकार के रहने और न रहने के मायने समझाएंगे। अगर कोई स्थानीय नेता से नाराज है तो उससे संवाद स्थापित कर नाराजगी दूर की जाएगी। दीवार लेखन कर मोदी-शिवराज सरकार की योजनाओं को जनता को बताने के निर्देश भी दिए गए हैं।