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सीएम को राखी भेज चयनित पटवारियों ने नियुक्ती की लगाई गुहार
पटवारी चयन परीक्षा में भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद चयनित पटवारियों (Patwari Result) की नियुक्ति पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी थी। चयनित पटवारियों का आरोप है कि उन्हे राजनीति की भेंट चढ़ाया जा रहा है। इस बीच चयनित पटवारियों ने हर दरवाजे पर गुहार लगाई,सीएम हाउस की बात हो अथवा भोपाल के नीलम पार्क में विरोध प्रदर्शन सबकुछ किया लेकिन राज्य सरकार का दिल नहीं पसीजा। सालों से मेहनत कर रहे चयनित पटवारियों ने जब किसी तरह से परीक्षा उत्तीर्ण की तो उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी गई। अब चयनित पटवारी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सभी तरह के उपाय करने के बाद अब चयनित पटवारियों ने सीएम (Shivraj Singh Chouhan) तक अपनी बात पहुंचाने के अलग-अलग रास्ते तैयार किए हैं। चयनित पटावरियों ने ट्विटर पर पोस्ट डाल कर मामा से नियुक्ति की गुहार लगाई थी और अब उन्ही चयनित पटवारियों ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सीएम शिवराज को राखी भेज कर उन्हे नियुक्ति देने की मांग उठाई है। सभी चयनित पटवारी शांति तरीके से मर्यादाओं में रह कर अपना विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं और अपनी बात सीएम शिवराज सिंह तक पहुंचाने का भी प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी अब तक सरकार का दिल नहीं पसीजा है। चयनित पटवारी इस बात को लेकर भी परेशान हैं कि कभी भी चुनाव आचार सहिंता लग जाएगी जिसके बाद उनकी नियुक्ति अधर में लटक जाएगी। अगली सरकार किसकी बनेगी पटवारी इस बात को लेकर भी संशय में हैं और यही कारण है कि चयनित पटवारी अपनी बात सीएम तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और अब उन्होने सीएम शिवराज को रक्षा सूत्र भेज कर भांजे होने का फर्ज निभा दिया है अब देखना यह दिलचश्प होगा कि मामा को भांजों की याद कब तक आती है।

'मामा जी एमपी पटवारी नियुक्ति दो' चयनित पटवारियों का सोशल वॉर
पटवारी चयन परीक्षा में घोटाले की खबर मिलने के बाद मप्र सरकार ने पटवारियों की नियुक्त पर रोक लगा दी है (MP Patwari)। सरकार के रोक लगाने के बाद चयनित पटवारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। न्याय की गुहार के लिए चयनित पटवारियों ने सरकार को मनाने का हर तरह का प्रयास किया है। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) से मुलाकात से लेकर सीएम हाउस(Shivraj Singh Chouhan) के घेराव की बात हो अथवा भोपाल के नीलम पार्क में नियुक्ति की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन ही क्यों ना हो चयनित पटवारियों ने वो सब किया जो कर सकते थे लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से पटवारियों को न्याय नहीं मिला। एक तरफ राज्य सरकार अलग-अलग विभागों में भर्तियां निकाल रही है वहीं दूसरी तरफ पटवारी अपनी नियुक्ति को लेकर परेशान हैं। कुछ चयनित पटवारियों का कहना है कि उन्होने ब्यावसायिक परीक्षाओं को छोड़ कर पटवारी की परीक्षा दी थी जिससे उन्हे नौकरी मिल जाए,पास होने के लिए रात दिन एक कर दिया और जब पास हुए तो उसमें भ्राष्टाचार का आरोप लगा कर नियुक्ति पर रोक लगा दी गई। कुछ चयनित पटवारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए यहां तक कहा है कि सरकार उनको नियुक्ति नहीं देती है तो वो खुदकुशी करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। अब चयनित पटवारियों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का एक अनोखा तरीका अपनाया है। पटवारियों ने सोशल वार करते हुए ट्विटर पर करीब डेढ़ लाख ट्वीट किए और उसमें लिखा है 'मामा जी एमपी पटवारी नियुक्ति दो' चयनित पटवारियों ने इतनी बड़ी संख्या में ट्वीट किया है जिसके चलते ट्विट पर वो ट्रेंड कर रहे हैं। लेकिन मूल बात यह है कि नियुक्ति को लेकर पटवारी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं लेकिन अभी तक सियासी उलझनों में फंसे पटवारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं दिख रहा। ऐसे ही हखलात चलते रहे तो आने वाले समय में चुनाव आचार संहिता लग जाएगी और पटवारियों की नियुक्ति पूरी तरह से अधर में लटक जाएगी।

'कांग्रेस करप्शन की दुकान है' बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का बड़ा आरोप
कांग्रेस और भाजपा के बीच आर-पार की लड़ाई शुरु हो गई है (MP Elections 2023)। पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने प्रेसवार्ता का आयोजन कर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर ताबड़ तोड़ आरोप लगाए। आरोपों का असर इतना तेज हुआ कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने कमलनाथ को 1983 दगों का माडल बता डाला। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के घोटालों का जखीरा खोलते हुए 15 महीने की सरकार में किए घोटालों की लंबी लिस्ट पेस की। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि कमलनाथ की सरकार को दिग्विजय सिंह चला रहे थे। उन्ही के इशारों पर प्रदेश में घोटाले हुए। बीजेपी अध्यक्ष ने ग्वालियर में हुई प्रियंका गांधी की सभा का जिक्र करते हुए कहा कि वो भाजपा के घोटालों की लिष्ट लेकर आई थी और मंच पर उनकी लिष्ट गायब हो गई। वीडी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस भाजपा की सरकार पर 50% कमीशन का आरोप लगाती है वो ये क्यों नहीं बताते कि रतुलपुरी कौन है रतुलपुरी के घर पर छापा क्यों पड़ा था। मृगलानी का जिक्र करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि रतुलपुरी के साथ मृगलानी का नाम क्यों जोड़ा जाता है। सिंचाई परियोजनाओं में हुए घोटाले को लेकर अध्यक्ष ने कहा कि बिना काम शुरु हुए 877 करोड़ का पेमेंट किसने करवाया था। मोबाइल घोटाले का जिक्र करते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि बगैर मोबाइल खरीदे 63 करोड़ का पेमेंट किसने किया था। आइफा अवार्ड अवार्ड का जिक्र करते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि उद्योगपतियों पर दबाव डाल कर बृजक्राफ्ट कंपनी को किसने फायदा पहुंचाया है। इसी प्रकार के बहुत सारे घोटालों की लिष्ट बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने जारी की और कहा कि भाजपा पहले से ही कहती रही है कि वल्लभ भवन को कांग्रेस ने दलाली का अड्डा बना दिया था। यही कारण था कि 15 महीने में जितने तबादले हुए उतना कभी किसी सरकार में तबादले नहीं हुए हैं। पीसीसी चीफ कमलनाथ की प्रेसवार्ता के बाद जिस प्रकार से बीजेपी अध्यक्ष ने हड़बड़ाहट में प्रेसवार्ता आयोजित कर उनके आरोपों के बदले जवाब नहीं दिया बल्कि कांग्रेस सरकार पर आरोपों और घोटालों की जमकर बारिश की है। मतलब साफ है कि अब विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है और आने वाले समय में जहां कांग्रेस 18 महीने की भाजपा सरकार का पोस्टमार्टम करेगी तो वहीं भाजपा ने भी जमकर तैयारी कर रखी है और कांग्रेस के हर आरोप पर कटाक्ष करने के लिए भाजपा के नेता तत्काल अटैक करेगी।

लगातार हारने वाली 50 सीटों पर भाजपा जल्द तय करेगी प्रत्याशी
पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक बुधवार को दिल्ली में हुई। इसमें मप्र से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,प्रदेश ध्यक्ष वीडी शर्मा,संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ प्रदेश चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी अश्वनी वैष्णव शामिल हुए। केन्द्रीय नेताओं के सामने मप्र (MP BJP) ने हारी हुई सीटों का ब्योरा रखा। इसके बाद तय हुआ कि प्रदेश नेतृत्व जल्द ही इन 40 से 50 सीटों पर दो से तीन नाम का पैनल बनाएगा। भाजपा इस बार सितंबर में ही हारी सीटों के प्रत्याशी तय कर देगी,ताकि उन उम्मीदवारों को पर्याप्त समय मिल सके। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक ऐसी विधानसभा सीटें चुनी गई हैं जिनमें पिछले तीन-चार या इससे अधिक चुनावों में हार रही भाजपा मजबूत तैयारियों के साथ जाना चाहती है। उदाहरण के तौर पर भोपाल उत्तर और मध्य सीटों की सूची में रखा गया है। दक्षिण-पश्चिम को बाहर रखा गया है। क्योंकि भाजपा इसे जीती सीट मान कर चल रही है। जानकारी के मुताबिक जल्द ही भोपाल में प्रदेश चुनाव प्रभारी-सह प्रभारी संगठन के प्रमुख लोगों के साथ बैठक लेंगे। बुधवार को दिल्ली में हुई भाजपा की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मप्र के एक मात्र सदस्य सत्यनारायण जटिया शामिल हुए। पहली बार मप्र के साथ समिति की आधे घंटे बैठक हुई। बीच में अन्य राज्यों पर मंथन किया गया फिर करीब डेढ़ घंटे बाद मप्र को फिर बुलाया गया। जानकारी मिली है कि कुछ और घोषणाएं करने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने केन्द्रीय नेतृत्व से अनुमति मांगी है। बात स्पष्ट है भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश चुनाव के लिए सक्रिय है और केन्द्रीय नेतृत्व कांग्रेस को ऐसा कोई मौका नहीं देना चाहता जिससे एकबार फिर से एमपी में कांग्रेस को मौका मिल पाए।

प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का जारी होगा रिपोर्ट कार्ड
प्रदेश की शिवराज सरकार (Shivraj Singh Chouhan) अब जनता के बीच अपने काम का लेखा-जोखा लेकर जाएगी और फिर उसी के हिसाब से जनता से वोट मांगेगी। दरअसल Mukhbirmp.com को मिली जानकारी मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने योजना तैयार की है जिसके तहत भाजपा ना सिर्फ अपने कार्यकाल की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाएगी बल्कि साल 2003 के पहले वाले मध्यप्रदेश की तस्वीर भी जनता के सामने पेश करेगी। इतने सालों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जिस प्रकार से प्रदेश के विकास की गति को तेज किया है उसका फल लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी को फ्लैशबैक में जाकर साल 2003 से पहले की तस्वीर से युवा पीढ़ी को अवगत कराएगी। भाजपा के नेताओं का मानना है कि जब भाजपा की सरकार बनी उस वक्त जो बच्चा था वो आज युवा है लिहाजा उसे दिग्विजय सरकार के कार्यकाल की ज्यादा जानकारी नहीं है इस लिए उन युवाओं को यह बताया जाएगा कि दिग्विजय सरकार में प्रदेश की क्या स्थिति थी। यही कारण है कि प्रदेश की सरकार केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के हाथों अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच रख कर फिर कांग्रेस के जमाने की बात करेगी। रिपोर्ट कार्ड में सड़क,पुल-पुलिया सहित बिजली की आपूर्ति,सिंचाई का रकवा बढ़ा उसकी जानकारी दी जाएगी,युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराए गए और फिर संविदा कल्चर समाप्त कर उन्हे नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं दी गई इतना ही नहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना से लेकर लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की शुरुआत की गई जिसके कारण आज प्रदेश में सेक्स रेसियो भी बढ़ा यही कारण है कि अब सरकार चाहती है कि उसने जनता के हित में इतने फैसले लिए हैं तो उसका लाभ भी पार्टी को मिलना चाहिए इसी लिए अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड जारी कर जनता को बताएगी कि इतने सालों में भाजपा की सरकार ने उनके लिए क्या किया। बांकी जो काम रह गए हैं उसके लिए सरकार ने अभी से कमर कस ली है। इसी लिए भारतीय जनता पार्टी अपने घोषणा पत्र को तैयार करने में जुट गई है। 20 अगस्त को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित साह भोपाल और ग्वालियर दौरे पर रहेंगे इसी दौरान अमित शाह के हाथों मुख्यमंत्री अपना रिपोर्ट कार्ड जारी कर एकबार फिर भाजपा सरकार बनाने की नींव रखेंगे।

AICC ने बनाई EVM जांच कमेटी,दिग्विजय सिंह बने चेयरमैन
EVM को लेकर कांग्रेस पार्टी अब भी संशय में है यही कारण है कि AICC ने EVM का परीक्षण करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया है। गौरतलब है कि देश में जब से सत्ता परिवर्तन हुआ है और केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी है तभी से कांग्रेस पार्टी EVM से होने वाली वोटिंग का विरोध करती रही है। लेकिन मजे की बात उस वक्त देखने को मिलती है जब EVM से वोटिंग होती है और कांग्रेस की सरकार बनती है तब कांग्रेस के नेता EVM का विरोध नहीं करते हैं। अब एमपी,राजस्थान सहित अन्य राज्यों में इसी साल विदानसभा चुनाव होने जा रहे हैं ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी ने EVM मशीन पर अविश्वास जाहिर करते हुए उसकी जांच के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कमेटी का गठन कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी EVM में गड़बड़ी करके चुनाव जीतती है इसी लिए भाजपा की सरकारें बनती हैं। लिहाजा अब आरोपों का पटाक्षेप करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने कमेटी का गठन कर दिया है। अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली टीम ईवीएम की जांच पड़ताल करेगी और अगर कांग्रेस पार्टी को ईवीएम में किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलती है तो उसका विरोध कर ईवीएम से होने वाली वोटिंग बंद करने के लिए कहा जाएगा। इस पूरे मामले में बीजेपी का मानना है कि कांग्रेस पार्टी को जब खुद की पार्टी का हार वाला फीडबैक मिलने लगता है तो इस प्रकार की हरकतें कांग्रेस पार्टी पहले से ही करने लगती है। जिससे चुनाव के बाद जब नतीजे आएं और कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़े तो वो पहले से ही ईवीएम से हार का प्रारुप तैयार कर लेती है। और इस बार कांग्रेस पार्टी ने ईवीएम की जांच के लिए कमेटी का गठन कर पहले ही साबित कर दिया है कि उसके फीडबैक पार्टी की हार सुनिश्चित है इसी लिए मतगणना के बाद की तैयारी कांग्रेस पार्टी अभी से करने लगी है।

सीएम की तरकश में अभी और कई तीर बांकी...
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनते चले जा रहे हैं। उनकी सभाओं में बढ़ रही महिलाओं की भीड़ ने कमलनाथ की नींद उड़ा दी है। कांग्रेस का कोई कार्ड मुख्यमंत्री के सामने नहीं चल पा रहा है। इसी फस्ट्रेशन में कांग्रेस ने फर्जी लेटर कांड गढ़ डाला। मुख्यमंत्री ना केवल महिलाओं के लिए बल्कि सभी समुदायों के लिए कोई ना कोई घोषणा कर रहे हैं। और सिर्फ घोषणाएं ही नहीं कर रहे उनका तत्काल क्रियान्वयन भी सीएम करवाते जा रहे हैं। इसी कारण कमलनाथ का कोई पत्ता नहीं चल पा रहा है। रीवा में लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत तीसरी किस्त देने के बाद मुख्यमंत्री राखी के पहले 27 तारीख को कोई बड़ी घोषणा करने जा रहे हैं जिसका केन्द्रबिंदु भी लाड़ली बहने ही रहेंगी। मुख्यमंत्री ने पहले ही घोषणा कर रखा है कि लाड़ली बहना योजना की राशि धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये तक की जाएगी। प्रदेश में सवा करोड़ लाभार्थी महिलाओं का वोट बैंक बनाने का मतलब है कि मुख्यमंत्री ने इतने ही परिवारों को अपने साथ जोड़ लिया है। क्योंकि महिलाएं परिवार की धुरी होती हैं उनको अपने तरफ करने का मतलब है कि मुख्यमंत्री ने एक बड़ा वोटबैंक भाजपा की तरफ मोड़ लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मोदी के लाभार्थी वोटबैंक की तर्ज पर मध्यप्रदेश में महिलाओं का वोटबैंक तैयार कर लिया है। जाहिर है कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री जैसा महिलाओं में लोकप्रिय नेता नहीं है। इस मामले में कमलनाथ उनके समक्ष खड़े भी नहीं हो सकते। मुख्यमंत्री ने 12वीं में प्रथम श्रेणी में आने वाली बच्चियों को स्कूटी देने की घोषणा भी की है। इस घोषणा से भी भाजपा का वोटबैंक मजबूत होगा क्योंकि स्कूटी पूरे परिवार के काम आएगी। खास बात यह है कि यह स्कूटी इलेक्ट्रिकल होगी यानि पेट्रोल का टेंशन नहीं होगा। इस योजना को भी सीएम शिवराज का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। बीस अक्टूबर तक सीएम शिवराज लाड़ली बहनों के खाते में करीब छह किस्त डाल चुके होंगे और फिर नवंबर में चुनाव होना है इसलिए माना जा रहा है कि लाड़ली बहना योजना सीएम शिवराज के लिए और सरकार के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाली है। अब कांग्रेस पार्टी यह योजना तैयार कर रही है कि सीएम की घोषणाओं का तोड़ कैसे निकाला जाए।

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने एक साथ पांच हजार श्रद्धालुओं को महाकाल भेजा
प्रदेश में धार्मिक कम चुनावी यात्राएं इस वक्त जम कर हो रही हैं। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा (PC Sharma) ने करीब 85 बसों को महाकाल (उज्जैन) के लिए रवाना किया है जिसमें करीब पांच हजार यात्री उज्जैन के लिए रवाना हुए हैं। दर्शनार्थियों को रवाना करने के दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा। कि जो लोग खुद के पैसों से बाबा महाकाल का दर्शन करने के लिए नहीं पहुंच पाचे हैं उनके लिए उन्होने ये निशुल्क ब्यवस्था की है जिससे वो बाबा महाकाल के दर्शन का लाभ प्राप्त करें और अपने घरों में सुख समृद्धि ला सकें। पूर्व मंत्री ने यात्रियों के लिए ना सिर्फ बसों की ब्यवस्था की है बल्कि उन्होने सभी यात्रियों के लिए बस में भोजन की भी ब्यवस्था कराई है जिससे किसी भी यात्री को किसी प्रकार की असुविधा ना होने पाए। इससे पहले दो जत्थे को पीसी शर्मा और यात्रा करवा चुके हैं। वहीं सावन का महीना शुरु होने से पहले पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने श्रीमद भागवत कथा का भी आयोजन किया था जिसमें कथा सुनने वालों के लिए पारिवारिक माहौल तैयार किया गया था। जिससे यह साफ दिखे कि कथा का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं बल्कि धार्मिक है। पीसी शर्मा ने बसों को हरी झंडी दिखाने के बाद कहा भी है कि वो लोगों के सुख समृद्दि के लिए ये सब कर रहे हैं जब सभी लोग खुश होंगे तो उनका आशीर्वाद और महाकाल की कृपा जरुर मिलेगी।

एमपी बीजेपी में संभालेंगे गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार के विधायक मोर्चा, 17 अगस्त से दमन-दीप में ट्रेनिंग
मध्यप्रदेश में भाजपा मिशन 2023 के लिए कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। भाजपा ने अब नया प्लान तैयार किया है। भाजपा सभी 230 विधानसभा सीटों में एक-एक विधायक तैनात करेगी। विधायकों की ड्यूटी लगाने के लिए 4 क्लस्टर बनाए जाएंगे। भाजपा शासित राज्यों के विधायकों की ड्यूटी मध्यप्रदेश में लगाई जाएगी। उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र के भाजपा विधायकों को मप्र भेजा जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार 15 अगस्त के बाद इन विधायकों को प्रभार की विधानसभा आवंटित कर दी जाएगी। जिन राज्यों में फिलहाल चुनाव नहीं हैं, उन राज्यों के विधायकों को मप्र की जिम्मेदारी दी जाएगी। लोकल फैक्टर की स्क्रीनिंग और डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटी भाजपा दूसरे राज्य के विधायक को फिलहाल इसी महीने सात दिनों के लिए एमपी भेज सकती है। वो प्रभार वाले विधानसभा क्षेत्र में जाकर स्थानीय पदाधिकारियों और समाज के प्रभावशाली लोगों से मिलकर जानकारी जुटाएंगे। कार्यकर्ताओं के बीच से मिले फीडबैक की रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व को देंगे। जो फैक्टर ऐसे हैं, जिनकी वजह से चुनाव में असर पड़ सकता है। इसकी भी रिपोर्ट बनाकर पार्टी को देंगे। दूसरी तरफ जिले की सरकार की दमन-दीप में ट्रेनिंग दी जाएगी। इस साल के विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के तमाम वर्गों के साथ ही भाजपा समर्थित गांव और नगर के जनप्रतिनिधियों को खुश करने में जुटी है। अब दमन-दीप में मप्र के भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की अगले हफ्ते में ट्रेनिंग होगी। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय ने देश भर के जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के लिए राज्यों के अलग-अलग क्लस्टर बनाए हैं। और सभी को ट्रेनिंग खुद जेपी नड्डा देंगे। जानकारी के मुताबिक 17 और 18 अगस्त को दमन-दीप के देवका बीच रिसॉर्ट में दो दिवसीय क्षेत्रीय पंचायत परिषद का आयोजन किया जाएगा। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और टेक्निकल एक्सपर्ट जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को केन्द्र सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए चलाई गई योजनाओं और भविष्य की रणनीति के बारे में बताएंगे।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की रणनीति के आगे क्लीन बोल्ड हुए कमलनाथ
गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को एमपी की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है और इसकी बानगी उस वक्त को देखने को मिली जब पूर्व विधायक अभय मिश्रा और उनकी पत्नी नीलम मिश्रा को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की सदस्यता दिला दी। अभय मिश्रा रीवा के सेमरिया से विधायक रह चुके हैं और साल 2018 में भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस से राजेन्द्र शुक्ला के खिलाफ चुनाव लड़े थे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में सेमरिया विधानसभा सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा था वहां वर्तमान में केपी त्रिपाठी विधायक हैं और उनसे स्थानीय जनता काफी नाराज है उसी का लाभ उठाते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने अभय मिश्रा को सेमरिया से टिकट देने का ऐलान कर दिया था। लेकिन ऐन मौके पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ऐसी गुगली फेंकी कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह एकसाथ क्लीन बोल्ड हो गए। गृह मत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा की ओर से ब्राम्हण चेहरा माना जाता है और विंध्य वो काफी लोकप्रिय हैं। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा रीवा के प्रभारी रहे हैं इस दौरान वहां की स्थानीय जनता से उनके करीबी संबंध रहे हैं यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को विंध्य की जनता ब्राम्हण चेहरे के रुप में देखती है। भारतीय जनता पार्टी ने भी गृह मंत्री की लोकप्रियता को देखते हुए ब्राम्हण के रुप में उनके चेहरे को इस्तेमाल करने की योजना तैयार कर ली है। पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी का गृह मंत्री हमेशा पालन करते हैं और यही कारण है कि सरकार बनाने से लेकर हर फैसले में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका रहती है। इस चुनाव मे माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। जहां भी ब्राम्हण चेहरे को उतारने की अथवा डैमेज कंट्रोल करने की जरुरत होती है वहां पर संगठन और सरकार की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आगे कर दिया जाता है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष का भी नाम आता है और वो भी विंध्य की तासीर से काफी परिचित हैं क्योंकि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि विंध्य से ही शुरु हुई थी यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की भी विंध्य में स्वीकार्यता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के कई ऐसे नेता गृह मंत्री के संपर्क में हैं जो आने वाले समय में बीजेपी का दामन थामने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी अपने कुनवे को संभालने में लगी रहेगी और भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों को परवान चढ़ाने में लगी रहेगी। भाजपा के प्लान के मुताबिक कांग्रेस को चुनावी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलना चाहिए इसी लिए इस प्रकार की रणनीति भारतीय जनता पार्टी ने अपनाई है।

संविदा कर्मियों के वेतन पर शासकीय अधिकारी लगा रहे पलीता,1500 आयुष चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी
चार जुलाई को भोपाल में संविदा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण का तोहफा दिया । 22 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए लेकिन पता चला है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार संविदा कर्मचारियों को नियमित के समकक्ष कर्मचारियों के पद के न्यूनतम वेतनमान का सत प्रतिशत वेतन एवं महंगाई भत्ता महंगाई दर के अनुसार दिया जाने का आदेश जारी किया गया है। विभागीय सेटअप मे समकक्ष पद ना होने पर एक अप्रैल 2018 की स्थिति में कर्मचारी की सैलरी अथवा समकक्ष पद निर्धारण के उपरांत पद के वेतनमान के शत प्रतिशत में से जो भी अधिक हो उसे वेतन मानते हुए महंगाई दर दिए जाने का निर्णय एवं दिशा निर्देश जारी किए गए थे । संविदा आयुष चिकित्सक संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले 15 से 20 वर्षों से काम कर रहे आयुष चिकित्सा अधिकारियों जो ओपीडी एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं उन सभी आयुष चिकित्सकों को मेडिकल सोशल वर्कर की श्रेणी में डालकर उनके मान सम्मान एवं वेतनमान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जो कतई बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब राज्य सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एवं विभागीय सेटअप में आयुष चिकित्सा अधिकारियों (आयुर्वेदिक चिकित्सा/ होम्योपैथिक चिकित्सा /यूनानी चिकित्सा )के समकक्ष 5400 ग्रेड पे एवं ₹56100 न्यूनतम वेतनमान पूर्व में 2018 में भी निर्धारित किया जा चुका था फिर वर्तमान पॉलिसी में संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार अधिकारियों को किसने दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेट्री मध्य प्रदेश शासन, स्वास्थ्य मंत्री और अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई संविदा नियमितीकरण पॉलिसी के अनुसार संविदा आयुष चिकित्सकों के भविष्य का निर्धारण करें अन्यथा की स्थिति में मुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत काम होने पर दुखी मन से प्रदेश में कार्यरत सभी आयुष चिकित्सा अधिकारी सामूहिक निर्णय लेंगे, जिसके जिम्मेदार विभागीय अधिकारी होंगे।

Mukhbir की खबर का असर,भगवा को बलात्कारी कहने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पद मुक्त
एक स्थानीय न्यूज चैनल में शब्दों की मर्यादा लांघने वाले कांग्रेस प्रवक्ता को पार्टी ने प्रदेश प्रवक्ता पद से मुक्त कर दिया है। दरअसल टीटी नगर में एक निजी चैनल द्वारा ओपन डिवेट का आयोजन किया गया था। जिसमें भाजपा और कांग्रेस के प्रवक्ताओं सहित स्थानीय नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम शुरु हुआ और 'बहस इतनी गरम' हुई की कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत खुद से आपा खो बैठे और भगवा को बलात्कारी कह डाला। कांग्रेस प्रवक्ता के इतना कहते ही डिवेट में पहुंचे स्थानीय लोगों ने हंगामा कर दिया। स्थिति मारपीट तक पहुंच गई इस बीच बीजेपी के प्रवक्ता बीच बचाव के लिए आए और कांग्रेस के प्रवक्ता को उन्होने बचाया। कुछ देर डिबेट को रोका भी गया और फिर बाद में डिबेट को फिर शुरु किया गया। शब्दों की मर्यादा लांघने वाले प्रवक्ता की खबर को 'Mukhbirmp.com' ने प्रमुखता से प्रसारित की थी जिसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत को कांग्रेस संगठन की ओर से पद मुक्त कर दिया गया। सिद्धार्त रजावत ग्वालियर अंचल से आते हैं और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल हुए थे। कांग्रेस के आक्रामक प्रवक्ताओं में शुमार सिद्धार्त रजावत आम तौर पर विपक्षी पार्टी के प्रवक्ताओं पर हावी होने के लिए अलग-अलग तरह से रणनीति तैयार करते रहते हैं। वो कई न्यूज चैनलों में डिवेट के दौरान खुद से आपा खो चुके हैं जिसकी शिकायत कई लोगों के माध्यम से पीसीसी चीफ कमलनाथ से की जा चुकी थी लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष उनकी गलतियों को लगातार अनदेखा करते रहे लेकिन इस बार पानी सिर से ऊपर चला गया था। क्योंकि पीसीसी चीफ कमलनाथ छिंदवाड़ा में राम कथा का आयोजन कर रहे हैं और इसी दौरान कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा भगवा को बलात्कारी कहना कांग्रेस की सारी तैयारियों पर पानी फेर सकता है यही कारण है कि इस बार कांग्रेस नेतृत्व ने बगैर देरी किए कड़ा ऐक्शन लेकर पार्टी के अन्य प्रवक्ताओं को कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का काम किया है कि कोई भी शब्दों की मर्यादा ना लांघें नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना तय है।