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कांग्रेस में टिकट के लिए स्थानीय नेताओं की सहमति होगी जरुरी
मिशन 2023 फतह करने में जुटी कांग्रेस पार्टी (mp congress) में इन दिनों बड़ी संख्या में बाहरी नेताओं का दाखिला हो रहा है। लेकिन उन्हे चुनाव लड़ने के लिए टिकट तभी मिलेगा जब स्थानीय स्तर पर सहमति बनेगी। दरअसल अलग-अलग क्षेत्रों से कांग्रेस में शामिल हो रहे नेताओं को लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में नाराजगी का आलम देखने को मिल रहा है यही कारण है कि कांग्रेस ने स्थानीय महत्व देते हुए कहा है कि टिकट उसी को दिया जाएगा जिसको लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में सहमति होगी। पार्टी की सदस्यता दिलाने के लिए जिला इकाई के पदाधिकारियों के साथ पहले बैठक की जाती है,फिर उनकी उपस्थिति में ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई जाती है,ताकि विरोध जैसी स्थिति ना बने। प्रत्याशी चयन में भी इसी तरह सावधानी बरती जा रही है। यही कारण है कि संभावित दावेदारों की जानकारी ब्लॉक इकाई तक से लग गई है। कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के साथ भाजपा में जाने वाले नेताओं की बड़ी संख्या में वापसी हो चुकी है। इसमें ग्वालियर,दतिय,शिवपुरी,गुना,अशोकनगर,निवाड़ी,टीकमगढ़,धार,देवास सहित अन्य जिलों के भाजपा से जुड़े नेता अधिक हैं। कोलारस से भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इनके पार्टी में आने से अंदरखाने में चर्चा प्रारंभ हो गई है कि इन नेताओं को कुछ विधानसभा में प्रत्याशी भी बनाया जा सकता है। ऐसे में चुनाव के दौरान इनका विरोध न हो,इसलिए यह तय किया गया है कि स्थानीय स्तर पर सहमति के बिना टिकट नहीं दिया जाएगा। दरअसल जब सिंधिया के साथ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भाजपा में गए थे,तब स्थानीय स्तर पर समीकरण गड़बड़ाए और इसका नुकसान पार्टी को नगरीय निकाय चुनाव में भी उठाना पड़ा। अब तो पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी कह दिया है कि किसी को भी पार्टी में तब तक नहीं लिया जाएगा,जब तक स्थानीय इकाई सहमति नहीं देती है।

जनआशीर्वाद यात्रा में भाजपा के ट्रंप कार्ड बने गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा
भारतीय जनता पार्टी की इस समय प्रदेश भर में जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) चल रही है। इस यात्रा में भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश इकाई के सभी नेता अपने स्तर पर भूमिका निभा रहे हैं लेकिन इन सभी नेताओं में जिस प्रकार की भूमिका गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) निभा रहे हैं उससे स्पष्ट हो गया है कि नरोत्तम मिश्रा ना सिर्फ संकट मोचक की भूमिका में होते हैं बल्कि भाजपा के ट्रंप कार्ड भी नरोत्तम मिश्रा साबित हो रहे हैं। गिनती के लिए भाजपा में बहुत सारे ब्राम्हण नेता हैं लेकिन वो सारे नेता सरनेम के ब्राम्हण नेता साबित हुए हैं। वहीं गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की बात की जाए तो वो मन और कर्म दोनों से ब्राम्हण हैं। यह बात प्रदेश में किसी से छुपी नहीं हैं। हांलाकि उनका ब्योहार जिस स्तर का है तो हर वर्ग उनसे जुड़ा है और वो हर वर्ग को महत्व देते हैं लेकिन हर समाज का ब्यक्ति अपने समाज के किसी ब्यक्ति को ही अपना नेता मानता है यही कारण है कि सवर्ण बाहुल विंध्य में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की लोकप्रियता को देखते हुए उनकी ड्यूटी लगाई गई और अब ग्वालियर-चंबल में भी गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को जनता का आशीर्वाद लेने के लिए मैदान में उतार दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि गृह मंत्री की भाजपा में किस प्रकार की स्वीकार्यता है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ना सिर्फ सदन के अंदर विपक्षी दलों को करारा जवाब देने में माहिर माने जाते हैं बल्कि चुनावी मैदान में वो एक बब्बर शेर की तरह हो जाते हैं। जिनको पार्टी कठिन लक्ष्य देती है और वो हर लक्ष्य को आसानी से हासिल भी कर लेते हैं। रविवार को गृह मंत्री भिंड जिले में जनआशीर्वाद यात्रा में निकले जहां स्थानीय जनता ने उनका जमकर समर्थन किया। सबसे बड़ी बात यह है कि जनता उनके पास अपनी आस्था के अनुरुप हार लेकर आती है तो वो खुद अपना सम्मान कराने के बजाय जनता का ही सम्मान करने लगते हैं। उनकी यही सहजता और सरलता उनको अन्य नेताओं से अलग बना देती है।

कमलनाथ की सोशल इंजीनियरिंग ने दावेदारों की बढ़ाई मुश्किलें,अब तक जारी नहीं हुई पहली सूची
मप्र में समाज के सभी वर्गों को साधने के लिए कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला लागू करेगी। कांग्रेस ने इसके लिए विभिन्न समाजों के अलग-अलग प्रकोष्ठ भी गठित किए हैं। कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के तहत हर समाज के प्रतिनिधि को टिकट देने का प्रयास कर रही है। अब तक हुए मंथन में कांग्रेस ने समाज और जातियों के आधार पर सभी को प्रतिनिधित्व यानि टिकट देने का रोडमैप तैयार किया है। पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने विभिन्न समाज और जातियों के लोगों की जनसंख्या का अनुमान लगाने एजेंसी के जरिए सर्वे भी कराया है। इसे टिकट का आधार बनाया जाएगा। 12 सितंबर को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी। गौरतलब है कि साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद कांग्रेस ने सामाजिक संगठनों,जाति आधारित संगठनों और उनके नेताओं को जोड़ने का काम किया है। कांग्रेस ने पूर्व आईएएस देवेन्द्र कुमार राय (Devendra Kumar Rai) को जिम्मेदारी सौंपी कि वो विलुप्त हो रही जनजातियों का अध्ययन कर उन्हे कांग्रेस के मंच पर लाएं। इसके बाद कांग्रेस ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया, कोरकू भील, भिलाला, गौंड,कोल सहित कई जातियों के सम्मेलन किए। उनके लिए पार्टी संगठन में अलग प्रकोष्ठ भी गठित किया। दूसरे चरण में प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने का एक सर्वे भी कराया है। पार्टी की रणनीति है कि जिस जाति से प्रदेश में दस लाख से अधिक मतदाता हैं,उस वर्ग के व्यक्ति को अनिवार्य रुट से टिकट दिया जाए। पीसीसी चीफ कमलनाथ द्वारा व्यक्तिगत रुप से कराए गए सर्वे से पार्टी को अंदाज लग गया है कि किस विधानसभख क्षेत्र में किस जाति के मतदाताओं की कितनी संख्या है। इस आधार को अब पार्टी टिकट वितरण का आधार बनाएगी। लेकिन कमलनाथ का यह सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला पार्टी के अन्य दावेदारों के गले की फांस बन गया है। जो नेता खुद को बाहुबली मानते थे और उन्हे लगता था कि पार्टी उन्हे टिकट भर दे दे। उसके बाद वो धन-बल के दम पर चुनाव जीत लेंगे लेकिन अब कमलनाथ ने सोशल इंजीनियरिंग का पेंच फंसा कर बाहुबली नेताओं के गले में पट्टा डालने की तैयारी कर ली है।

भाजपा की सियासी रोटी में बटर लगाने वाली कांग्रेस के जल रहे हाथ,गृह युद्ध की बनी स्थिति
चुनाव करीब आते-आते भाजपा और कांग्रेस में पलायन का दौर तेज होता जा रहा है (MP Election 2023)। कांग्रेस (mp congress) के बड़े नेता अपने नंबर बढ़वाने के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हे कांग्रेस में ज्वाइन तो करवा रहे हैं लेकिन इन कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में शामिल होने के कारण पार्टी में गृह युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई है। ताजा मामला नर्मदापुरम कांग्रेस का है जहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा (Sitasharan Sharma) के भाई गिरिजा शंकर (Girija Shankar Sharma) को सुरेश पचौरी (Suresh Pachouri) की मिली भगत से कांग्रेस की सदस्यता दिला दी गई है और अब वो एक मजबूत दावेदार के रुप में अपना दावा भी ठोंक रहे हैं। लेकिन इनके दावे के कारण कांग्रेस के मूल कार्यकर्ताओं के बीच कलह की स्थिति बन गई है। उसकी बानगी शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (Madhya Pradesh Congress Committee) में देखने को मिली जहां नर्मदापुरम के कांग्रेस प्रवक्ता राजेन्द्र सिंह राठौर कांग्रेस प्रदेश मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) के सामने अपनी भड़ास निकालते नजर आए। राजेन्द्र सिंह राठौर का गुस्सा इतना भारी था कि बार-बार समझाने के बाद भी वो शांत होने के लिए तैयार नहीं थे। दरअसल Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा को इस बार भाजपा टिकट नहीं दे रही है,मामले की जानकारी होने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पर जमकर डोरे डाले लेकिन उन्होने भाजपा नहीं छोड़ने का फैसला किया। ऐसी स्थिति में राजनीति में बने रहने के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने अपने भाई गिरिजा शंकर शर्मा को कांग्रेस में जाने के लिए मना लिया। पूर्व विस अध्यक्ष को आशंका है कि इस बार कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाएगी लिहाजा भाई को कांग्रेस में शामिल कर सत्ता का सुख पीछे के दरबाजे से भोगा जा सकता है। अभी तक उनकी रणनीति काफी हद तक कामयाब भी हुई लेकिन गिरिजा शंकर के कांग्रेस में आने से कांग्रेस के गुटों की एकबार फिर कलई खुल गई है। जो कांग्रेस एकजुटता का खोंखला दावा करती दिख रही थी उसी कांग्रेस के अलग-अलग धड़े सतह में आने लगे हैं। पचौरी कांग्रेस,अरुण यादव कांग्रेस,अजय सिंह (राहुल) कांग्रेस, दिग्विजय कांग्रेस, कमलनाथ कांग्रेस और अंत में कांतीलाल भूरिया कांग्रेस। इतने धड़ों में बंटी कांग्रेस अब इस पशोपेश की स्थिति में आ गई है कि भाजपा से आए कार्यकर्ताओं और मूल कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाए। अभी तक सिंधिया के भाजपा में जाने और सिंधिया गुट और मूल भाजपाई कार्यकर्ताओं के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई पर कांग्रेस के नेता चुटकी लेते नजर आ रहे थे लेकिन अब उसी मुहाने पर कांग्रेस भी खड़ी है जिस मुहाने पर भाजपा सिंधिया खेमे को लेकर खड़ी है। मजे की बात यह है कि भाजपा में नेताओं के बीच विवाद रोकने के लिए अलग से टीम है लेकिन कांग्रेस में सबकुछ कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के भरोसे ही रहता है लिहाजा पार्टी के अंदर चल रहे गृह युद्ध को रोकने का काम दिग्विजय सिंह और कमलनाथ को करना है साथ में चुनावी तैयारियों को अंतिम रुप देने का काम भी दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) और कमलनाथ (Kamal Nath) को ही करना है।

कांग्रेस सरकार बनते ही पटवारियों की 2800 रुपए ग्रेड-पे दिए जाएंगेःकमलनाथ
छिंदवाड़ा में अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 21 अगस्त से आंदोलनरत पटवारियों (patwaris) के बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal natha) पहुंचे और पटवारियों से मुलाकात कर चर्चा की, साथ ही उनकी मांगों का समर्थन भी किया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हड़ताल स्थल पर पहुंचकर हडताल कर रहे पटवारियों (patwari strike) को यह आश्वासन दिया की आपने 25 साल इंतजार कर लिया है तीन महीने और इंतजार कर लीजिए, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही आपकी 2800 ग्रेड-पे दिए जाने की 25 साल पुरानी मांग सबसे पहले पूरी की जाएगी। कमलनाथ ने कहा कि सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के संघर्ष में वो उनके साथ हैं, उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ग के साथ न्याय होना चाहिए। पटवारियों से संवाद करते हुए कमलनाथ ने कहा कि एक पटवारी का रोल कितना महत्वपूर्ण होता है, वह कितने विभागों का काम अकेला करता है, यह बात सभी जानते हैं। सभी के साथ न्याय हो ऐसी सरकार होनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आगे यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार बनते ही हम पुरानी पेंशन स्कीम लागू करेंगे और सभी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ न्याय हो ऐसी सरकार स्थापित करेंगे। कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश की तस्वीर आप सबके सामने हैं, आज मध्य प्रदेश की सरकार कर्ज पर कर्ज लेती जा रही है और मध्य प्रदेश पर 3 लाख 30 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्जा हो गया है, लेकिन इस कर्ज का वह कर क्या रही है, यह बात देखने लायक है। भाजपा सरकार कर्ज लेकर बड़े-बड़े ठेके दे रही है, ताकि उनका कमीशन बन सके, सरकार द्वारा लिए गए कर्ज से किसी कर्मचारी का, आशा, उषा बहनों का, आउटसोर्स कर्मचारियों का पटवारियों का, किसी का भला नहीं हो रहा है। यदि भला हो रहा है तो चंद ठेकेदारों और भाजपा नेताओं का। उन्होंने कहा कि आज यह बात हम सबको समझना है कि हमारा प्रदेश कहां घसीटा जा रहा है। मुख्यमंत्री घोषणाओं पर घोषणाएं करते जा रहे हैं, चुनाव सर पर है जो चाहे वह, सब कुछ बोल दो। लेकिन आप सबको भी जागरूक बनना पड़ेगा और आम जनता को भी जागरूक करना पड़ेगा। कमलनाथ ने यह भी कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मध्य प्रदेश की जनता सच्चाई का साथ देगी, कांग्रेस का साथ देगी।

'झूठ बोलने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में कोई रिकॉर्ड बनेगा तो वो दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के नाम होगा'
मुरैना में एक प्रेस वार्ता के दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश में हार के डर से बौखलाकर एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल की बाईट को जिस प्रकार से एडिट करके कांग्रेस ने झूठ परोसने का काम किया है और जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री मि. बंटाधार के द्वारा ट्वीट किया गया है, उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस हार के डर से बौखला गई है। भारतीय जनता पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता इनके झूठ का जवाब देने के लिए प्रत्येक बूथ पर सजग प्रहरी बनकर खड़ा है और कमलनाथ (Kamal Nath), दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का झूठ मध्यप्रदेश में नहीं चलेगा। पार्टी इसका कड़ा जवाब देगी। इस मौके पर प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) पार्टी के प्रदेश महामंत्री रणवीर सिंह रावत (Ranveer Singh Rawat) एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (Ashish Agrawal) उपस्थित रहे। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि 2003 से पहले बंटाधार युग में मध्यप्रदेश जिस दुर्दशा का शिकार था, उसे लेकर प्रदेश के लोगों में व्यापक आक्रोश मौजूद है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश में जो जन आशीर्वाद यात्राएं निकाली जा रही हैं, वो जनता को यह बता रही हैं कि बंटाधार युग के मध्यप्रदेश को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने विकास के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके चलते जन आशीर्वाद (Jan Ashirwad Yatra) यात्राओं को व्यापक जन समर्थन मिल रहा है। जनता के इस समर्थन और यात्राओं के प्रति उमड़ रहे उत्साह से घबराई कांग्रेस झूठ का सहारा ले रही है। वीडी शर्मा ने कहा कि उस नेशनल न्यूज चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर ने भी यह स्पष्ट किया है कि जो न्यूज फैलाई जा रही है, वह फेक न्यूज है और हमारी खबर को जिस तरह से एडिट करके उसका दुरुपयोग किया जा रहा है, उसके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ मध्यप्रदेश में लगातार झूठ परोसने का काम कर रहे हैं। अगर सबसे ज्यादा झूठ बोलने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में कोई रिकॉर्ड बनेगा, तो वह दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के नाम ही दर्ज होगा। कुछ समय पहले इन्होंने एक पत्र जारी करके भाजपा सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास किया था, वह भी फेक निकला। उस पत्र को लिखने वाले संगठन का पता ही नहीं चला। इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई और कांग्रेस की नेत्री प्रियंका गांधी को भी झूठी साबित होकर मध्यप्रदेश से जाना पड़ा। दिग्विजयसिंह ने मध्यप्रदेश के सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को बिगाड़ने के लिए भगवान कुंडेश्वर को लेकर झूठे ट्वीट किए। बाद में उन्हें अपने ही ट्वीट डिलीट करना पड़ा और वे मैदान छोड़कर भाग गए।

भाजपा के रास्ते पर कांग्रेस,अन्य राज्यों के सांसद-विधायक विधानसभाओं में भेजेगी कांग्रेस
कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी ने चार राज्यों के 230 प्रवासी विधायकों को एमपी बुला कर पार्टी की स्थिति को खंगालने का प्रयास किया था जिसका कांग्रेस के नेता मजाक उड़ा रहे थे लेकिन अब कांग्रेस ने भी भाजपा के रास्ते पर चलने की योजना तैयार की है (MP Congress)। जिसके तहत कांग्रेस दूसरे राज्यों के सांसद और विधायकों को एमपी बुलाने की योजना पर का कर रही है। दूसरे राज्यों से एमपी में आए कांग्रेस के विधायक-सांसद उन विधानसभा सीटों की तैयारियों का आंकलन करेंगे और अपनी पार्टी के संगठन को उसकी रिपोर्ट सौंपेंगे। लोकसभा वार नियुक्त किये गए इन पर्यवेक्षकों की पहली बैठक 12 सितंबर (मंगलवार) को भोपाल में होगी। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal), प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Surjewala), प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ (Kamal Nath) सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। अन्य राज्यों से आए कांग्रेस के विधायक-सांसद सभी सहयोगी संगठनों की भूमिका,आपसी समन्वय और चुनाव अभियान को लेकर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेंगे। साथ ही लोकसभा की दृष्टि से भी संभावित दावेदारों को लेकर भी अन्य जानकारी जुटा कर संगठन को देंगे। मंगलवार को ही कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। इसमें कमेटी के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह,सदस्य अजय कुमार लल्लू,सप्तागिरी उल्का और प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चार दिनों तक दावेदारों का फीडबैक लिया है। जिस पर इस बैठक में विचार किया जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी जिन 66 सीटों पर लंबे समय से चुनाव हार रही है और जिन विधायकों को चुनाव लड़ाया जाना है,उन्हे शामिल करते हुए प्रत्याशियों की पहली सूची घोषित की जा सकती है। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले हर घर दस्तक देने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जन-आक्रोश यात्रा के साथ हर घर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में जिला,ब्लॉक,मंडलम् और सेक्टर इकाई के पदाधिकारियों को घर-घर भेज कर ग्रामीणों को भाजपा सरकार की असफलताओं के बारे में बताया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आरोप पत्र बांटे जाएंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने जो 11 वचन दिये हैं उसकी याद भी दिलाई जाएगी।

जातियों के सहारे कांग्रेस,जल्द आयोजित करेगी दो बड़े सम्मेलन
प्रदेश में सत्ता पाने के लिए कांग्रेस (mp congress) बड़े मतदाता वर्ग आदिवासी और ओबीसी के सम्मेलन करने जा रही है (congress conference)। ये राज्य स्तरीय सम्मेलन होंगे। आदिवासी सम्मेलन (adivasi sammelan) झाबुआ में तो ओबीसी का सम्मेलन (obc sammelan) भोपाल में आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारी की जिम्मेदारी पार्टी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेताओं को सौंपी गई है। सम्मेलन की तारीख भी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेता ही तय करेंगे। बुंदेलखंड में भी एससी वर्ग का बड़ा कार्यक्रम भी चुनाव अभियान समिति ने प्रस्तावित किया है। प्रदेश में एसटी वर्ग के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं लेकिन इनका प्रभाव 80 सीटों से ज्यादा पर है। ओबीसी मतदाताओं का प्रभाव भी 100 से अधिक सीटों पर है। इसे देखते हुए भाजपा और कांग्रेस, दोनों आदिवासी और ओबीसी वर्ग को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति (congress election committee) ने तय किया है कि आदिवासी बहुल झाबुआ,अलीराजपुर,बड़वानी,खरगोन सहित अन्य जिलों के आदिवासी भाग लेंगे। इसकी तैयारी का जिम्मा चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष कांतीलाल भूरिया को दिया गया है। आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. विक्रांत भूरिया इसमें सहयोगी की भूमिका में होंगे। इसके अलावा भोपाल में आयोजित होने वाले ओबीसी सम्मेलन की जिम्मेदारी कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव को सौंपी गई है। दोनों को कार्यक्रम की रुपरेखा निर्धारित करने के लिए कहा गया है। प्रदेश में कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

अधिमान्य पत्रकारों को अब दस के बजाय प्रतिमाह मिलेगी 20 हजार रुपये सम्मान निधि
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास में गुरुवार को आयोजित पत्रकार समागम में (Patrkar Samagam) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने पत्रकारों के हित में कई बड़ी घोषणाएं की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाया जाएगा। इसके लिए वरिष्ठ पत्रकारों की समिति बनाई जाएगी। समिति के सुझाव पर ही कानून बनाया जाएगा। अधिमान्य प्राप्त बुजुर्ग पत्रकारों को प्रतिमाह दस हजार के बजाय बीस हजार रुपये सम्मान निधि मिलेगी। इसकी पात्रता आयु न्यूनतम 60 वर्ष होगी। सम्मान निधि पाने वाले पत्रकार का निधन होने पर जीवन साथी को एकमुश्त आठ लाख रुपये दिये जाएंगे। पत्रकार स्वास्थ्य बीमा में प्रीमियम की राशि में जो 27% की वृद्धि हुई है,उसका भार भी सरकार उठाएगी। पत्रकारों को पिछले साल के बराबर ही प्रीमियम देना होगा। इसे जमा करने की अंतिम तिथि भी 16 सितंबर के स्थान पर 25 सितंबर होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के आधार स्तंभ के रुप में मीडिया प्रतिनिधियों का परिश्रम प्रशंसनीय है। पत्रकारों की सुरक्षा जरुरी है,इसके लिए कानून बनाया जाएगा। भोपाल के मालवीय नगर में पत्रकार भवन बनेगा। इसे स्टेट मीडिया सेंटर का दर्जा दिया जाएगा। इसमें सभागार,पुस्तकालय,कैंटीन ससहित अन्य सुविधाएं होंगी। सेंटर में आधुनिक सुविधाएं भी होंगी। पत्रकारों के लिए भोपाल में दो स्थानों पर भूमि आवंटित कर कालोनी विकसित की गई है। अन्य नगरों में अवश्यकता के अनुसार पत्रकारों की सोसायटी को भूमि प्रदान करने की कार्यवाही की जाएगी।

खंडवा में केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जन आशीर्वाद यात्रा को दिखाई झंडी
केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने खंडवा में जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) को हरी झंडी दिखाते कहा कि गांव, गरीब, मजूदर और किसानों का कल्याण भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह (Shivraj Singh Chouhan) को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार 7 बार से कृषि कर्मण अवार्ड जीत रहा है। यहां सिंचित क्षेत्र बढ़ा है और उसके साथ ही उत्पादन भी बढ़ रहा है। हर हाथ को काम और हर खेत को पानी के मंत्र पर चलते हुए मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार आगे बढ़ी और कृषि विकास दर के साथ कृषि उत्पादन को बढ़ाया। केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं, लेकिन कृषि उपज का वांछित मूल्य न मिल पाना उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा है, क्योंकि इनके दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय होते हैं। इसलिए हमने तय किया कि किसानों को ऊर्जादाता बनाना है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में यह सपना पूरा हो रहा है। आज 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली कारें आ रही हैं, हवाई जहाज उड़ रहे हैं, स्कूटर भी आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि हमारा देश 16 लाख करोड़ से अधिक का फॉसिल फ्यूल आयात करता है। अगर ये पैसा बचेगा, तो हमारे किसानों को ही मिलेगा। निति गडकरी ने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में अच्छा काम हो रहा है। थर्मल एनर्जी, सोलर एनर्जी और सोलर संयंत्रों में इलेक्ट्रोलाइजर लगाकर हाइड्रोजन उत्पादन का काम हो रहा है। इस क्षेत्र में प्रदेश में जो काम हो रहा है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि जल्द ही मध्यप्रदेश हाइड्रोजन के उत्पादन में देश का नं.1 राज्य बनेगा और यहां के किसान ऊर्जादाता बनेंगे। खंडवा में गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार लगातार विकास और गरीब कल्याण के काम कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना में 44 लाख लोगों को आवास दिये गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। उज्जवला योजना में गैस सिलेंडर मिल रहे हैं, तो आयुष्मान योजना में मुफ्त इलाज हो रहा है। जिस मध्यप्रदेश में 5-6 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे, वहां अब 30 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। बच्चों को शिक्षा, किसानों को पानी और बिजली मिल रही है। गांवों में उद्योग लग रहे हैं, जिनसे लोगों को रोजगार मिलेगा। अधोसंरचना में तेजी से सुधार हो रहा है। मध्यप्रदेश में इंदौर-हैदराबाद और देहली-मुंबई हाईवे बन रहे हैं, जिनके तैयार हो जाने पर एक घंटे में ओंकारेश्वर और 2 घंटे में बुरहानपुर से इंदौर पहुंचा जा सकेगा। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सड़क, बिजली, पानी, ट्रांसमिशन नेटवर्क का लगातार विकास हो रहा है और मध्यप्रदेश देश के पॉवर स्टेशन के रूप में उभर रहा है। नितिन गडकरी ने कहा कि ये सब विकास का सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। मैं आपसे यही आग्रह करने आया हूं कि पूरी फिल्म देखने के लिए भाजपा को अपना आशीर्वाद दीजिए। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे और सभी ने संकल्प लिया कि अबकी बार फिर भाजपा की सरकार।

कांग्रेस नए मॉडल हिंदुत्व से डरीःअजीज कुरैशी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजीज कुरैशी (aziz qureshi) ने कांग्रेस पार्टी पर मुस्लिमों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। साथ ही पूर्व राज्यपाल ने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेताओं के कथा कराने और कांग्रेस दफ्तर में सुंदरकांड कराने को लेकर भी अजीज कुरैशी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व राज्यपाल और कांग्रेस नेता अजीज कुरैशी ने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर कथा कराने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में इस तरह के आयोजन ठीक नहीं हैं. कांग्रेस ने कहा कि अजीज उम्र के जिस पड़ाव पर है, उन्हें ईश्वर को उनके अपने आराध्य को याद करना चाहिए. धार्मिक विवाद में पड़ने की कुरैशी को जरूरत नहीं है. बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सनातन हो या सुंदरकांड कांग्रेस वोट बैंक की सियासत करती है। अजीज कुरैशी के बयान पर कांग्रेस के नेताओं ने हमला बोलना शुरु कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अजीज कुरैशी को कांग्रेस पार्टी ने सब कुछ दिया है। सांसद भी बने राज्यपाल भी बने। कई अहम पदों पर रहे। शायद यह सारी बातें अजीज कुरैशी जी को याद नहीं आई. उनके जैसे जिम्मेदार व्यक्ति को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए. अजीज उम्र के जिस पड़ाव पर हैं, उन्हें ईश्वर को उनके अपने आराध्य को याद करना चाहिए. राजी खुशी से बच्चों के साथ परिवार के साथ बिताना चाहिए. धार्मिक विवाद में पड़ने की कुरैशी को जरूरत नहीं. धार्मिक भावनाओं को लेकर बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। बीजेपी के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सनातन हो या सुंदरकांड कांग्रेस वोट बैंक की सियासत करती है। यही कांग्रेस की सबसे बड़ी विशेषता है। रोज इफ्तार में जालीदार टोपी लगाकर जाते हैं। चुनावी दौर में सुंदरकांड करते हैं. आपस में ही लड़ भिड़ रहे हैं और कांग्रेसी धर्म के नाम पर एकमत नहीं होते हैं।

भाजपा की नैया पार लगाने निकले गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा,विंध्य में जन आशीर्वाद यात्रा का मिला जिम्मा
भारतीय जनता पार्टी जब-जब संकट में आती है तो उसके संकटमोचक डॉ. नरोत्तम मिश्रा होते हैं (Narottam Mishra)। इसकी बानगी आए दिन देखने को मिलती रहती है। सदन में सरकार पर कोई आरोप लगता है तो गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा अंगद की तरह पांव जमा कर विपक्ष को करारा जवाब देते हैं और जब पार्टी में कोई संकट आता है तो गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा 'दादा' संकटमोचक बन कर सामने खड़े हो जाते हैं। पिछले कुछ समय से लगातार यह बातें उठ रहीं थी कि विंध्य इस बार भाजपा से नाराज है। खासकर विंध्य के ब्राम्हण भाजपा से खासे नाराज हैं। विंध्य में ब्राम्हणों की बहुत बड़ी आवादी निवास करती है और वहां की 30 सीटों में उन्ही का प्रभाव देखने को मिलता है। सबसे पहले विंध्य की नाराजी इस बात को लेकर थी कि उन्हे उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला जबकि विंध्य के लोगों ने 30 सीटों में 24 सीटें भाजपा को दी। नाराजगी पर तड़का उस वक्त और लग गया जब सीधी में पेशाब कांड (Sidhi Peshab Kand) हुआ और सरकार ने जल्दबाजी में आरोपी के घर पर बुल्डोजर चलवा दिया इससे ना सिर्फ ब्राम्हण वर्ग भाजपा से नाराज हुआ बल्कि सवर्ण वर्ग में आने वाले सभी लोग भाजपा से नाराज हो गए इस बात की जानकारी भाजपा की इंटरनल रिपोर्ट में सामने आई। ऐसी स्थिति में विंध्य में डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा के पास एक ही चेहरा था डॉ. नरोत्तम मिश्रा। ब्राम्हणों की नाराजगी के चलते ही भाजपा ने चित्रकूट से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) से जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) को हरी झंडी दिखवाई और फिर उसको गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हवाले कर दिया। गृह मंत्री पूर्व में रीवा के प्रभारी मंत्री रहे हैं और उनको वहां की तासीर मालूम है। विंध्य में नरोत्तम मिश्रा को बाहरी नहीं बल्कि घर का नेता माना जाता है। वैसे भी गृह मंत्री जिस विधानसभा दतिया से चुनाव लड़ते हैं पहले वो विंध्य का ही हिस्सा माना जाता था। डॉ. नरोत्तम मिश्रा की ब्राम्हणों के बीच जिस प्रकार की लोकप्रियता है उसी को भुनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने उन्हे विंध्य की जिम्मेदारी सौंपी है। और भाजपा यह मान कर चल रही है कि जब गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को जब एक बार कोई जिम्मेदारी सौंप दी जाती है तो उसको पूरा करके ही वो चैन की सांस लेते हैं। लिहाजा अब देखना यह दिलचश्प होगा कि भाजपा द्वारा खेला गया यह ब्राम्हण कार्ड विंध्य को रिझाने में कामयाब होगा अथवा नहीं यह तो वक्त बताएगा।