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सिंधिया समर्थक उम्मीदवारों पर फंसा पेंच,पार्टी हाई कमान डैमेज कंट्रोल में जुटा
मप्र भाजपा की दूसरी सूची में सिंधिया समर्थकों (Scindia supporters) की दावेदारी ने पेंच फंसा दिया है। जिन सीटों पर समर्थक टिकट मांग रहे हैं, वहां पुराने भाजपा नेता सक्रिय हैं। इधर पार्टी को भी जिताऊ चेहरे की तलाश है। मध्य प्रदेश की सियासत में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का बड़ा कद है जिसके भरोसे वर्ष 2020 में भाजपा ने उस कांग्रेस से सत्ता छीनी थी। पिछले कुछ महीनो से ज्योतिरादित्य सिंधिया का समय ठीक नहीं चल रहा है। पिछले कुछ समय में फोन के पांच बड़े वफादार अब तक कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। इतना ही नहीं भिंड के गोहद से रणवीर सिंह जाटव (Ranveer Singh Jatav) का टिकट काटने के बाद समर्थ कौन है जिस तरह से खून से खत लिखकर अपनी विवशता को दर्शाया था ,उससे यह लगने लगने लगा है कि आने वाले समय में सिंधिया के कुछ और वफादार उनका साथ छोड़ सकते हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक हारी हुई सीट पर प्रत्याशी तय करने बैठे भाजपा के निर्णयकर्ताओं को अपनी अनुशंसा सहित जिस सूची को दिल्ली भेजा है,उसमें कई सिंधिया समर्थकों के नाम गायब बताए जा रहे है। इनमें से चंबल-ग्वालियर अंचल की वो सीटें शामिल हैं। उपचुनाव में हारे सिंधिया समर्थकों की दावेदारी भी अब कमजोर पड़ती जा रही है। गौरतलब है कि जब उपचुनाव हुए तो भाजपा ने सिंधिया समर्थकों को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था। तब इन समर्थकों के लिए भाजपा के पुराने नेताओं ने अपनी कुर्बानी दी थी। इनमें से कई ऐसे नेता हैं,जिन्होने भाजपा को अपने-अपने क्षेत्रों में खड़ा किया था। लेकिन सरकार को बहुमत लाने के लिए इन नेताओं ने तब चुप्पी साध ली थी। और अब ऐसी स्थिति नहीं है उपचुनाव में सिंधिया समर्थक 6 नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था। जिससे उनकी दावेदारी कमजोर पड़ी है और अब पार्टी का पूरा फोकस जिताऊ चम्मीदवार पर आकर टिक गया है। ऐसे में इन समर्थकों के साथ-साथ इस चुनाव में टिकट की आस लगाए बैठे नेताओं की भी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

पहले विंध्य की उपेक्षा और फिर विंध्य को मिला सम्मान,राजेन्द्र शुक्ला बने जनसंपर्क मंत्री
भारतीय जनता पार्टी के सत्ता और संगठन दोनों में विंध्य की लगातार उपेक्षा की गई। लेकिन विंध्य की जनता का मूंड भांपते हुए भाजपा ने आखिरकार विंध्य को प्रतिनिधित्व देने का फैसला करते हुए राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को मंत्री बना दिया है और अब उन्हे जनसंपर्क विभाग (Public Relation) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। हांलाकि राजेन्द्र शुक्ला को यह जिम्मेदारी पहली बार नहीं मिली है इससे पहले राजेन्द्र शुक्ला को पहले भी जनसंपर्क विभाग का जिम्मा सौंपा गया था (Shivraj Cabinet)। चुनाव आचार संहिता लगने के लिए अब करीब 45 से 50 दिन बचे हैं ऐसी स्थिति में राजेन्द्र शुक्ला सहित दो और मंत्रियों को शपथ दिलाई गई है। अब राजेन्द्र शुक्ला के पास समय कम है लेकिन उम्मीदों का बांध उनके पास बहुत है। दरअसल भोपाल में विंध्य के पत्रकारों की एक बड़ी संख्या है लेकिन इस समय मीडिया में ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड का बोलबाला चल रहा है। किसी भी न्यूज चैनल में रीवा अथवा विंध्य के पत्रकारों को नहीं लिया जाता है। भाजपा के संगठन की ओर से भी विंध्य के पत्रकारों को लगातार उपेक्षित किया जाया है। और सरकार में भी विंध्य के पत्रकारों को हमेशा उपेक्षित किया जाता रहा है। बुधवार को मंत्री बनने के बाद राजेन्द्र शुक्ला बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) से मिलने उनके निवास पहुंचे लेकिन वो ये पूछना भूल गए कि आपकी राजनीतिक पृष्ठभूमि विंध्य रहा है लेकिन विंध्य को आप इतना उपेक्षित क्यों करते हैं। दरअसल जब से वीडी शर्मा को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तभी से विंध्य के पत्रकारों और विंध्य में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का सिलसिला शुरु हुआ जो आजतक अनवरत जारी है। जबकि राजनीतिक लिहाज से बात की जाए तो विंध्य की 30 सीटों में भाजपा को 24 सीटें और कांग्रेस को मात्र 06 सीटें मिली थी उसके बाद भी विंध्य की उपेक्षा लगातार की गई। पहले विंध्य को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया और जब प्रतिनिधित्व मिला तो समय नहीं है कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि राजेन्द्र शुक्ला को मंत्री बना कर विंध्य के जख्म पर मरहम लगाने का प्रयास किया गया है। लेकिन विंध्य की जनता पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा जागरुक मानी जाती है यही कारण है कि अब उसका अहसास भाजपा को हुआ जिसका नतीजा ये रहा कि भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ला को मंत्री बनाया है।

भाजपा की तस्वीर से अमित शाह गायब,अब जेपी नड्डा यात्रा को दिखाएंगे हरी झंडी
भारतीय जनता पार्टी तीन सितंबर से प्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) का आगाज करने जा रही है। लेकिन यात्रा के पहले ही भारतीय जनता पार्टी में चल रहे आपसी विवाद और मन मुटाव की तस्वीर सामने आने लगी है। दरअसल दो दिन पहले भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में भाजपा की तरफ से जन आशीर्वाद यात्रा का प्रारुप बताने के लिए प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) की तरफ से एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया था। प्रेसवार्ता के दौरान एक होर्गिंग लगाई गई थी जिसमें पीएम मोदी (PM Narendra Modi) की तस्वीर के साथ एमपी के कुछ कद्दावर नेताओं की तस्वीर लगाई गई। लेकिन उस तस्वीर में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) को स्थान नहीं दिया गया था जबकि अमित शाह को ही चित्रकूट से पहली विकास यात्रा (vikas yatra) को हरी झंडी दिखानी थी। पोस्टर में एक और मजे की बात देखने को मिली कि भूपेन्द्र सिंह को विकास यात्र की टोली का संयोजक बनाया गया है लेकिन पोस्टर में भूपेन्द्र सिंह (Bhupendra Singh) को स्थान नहीं दिया गया। हांलाकि भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संत्ति मामले में लोकायुक्त की जांच भी चल रही है यही कारण हो सकता है कि भाजपा भूपेन्द्र सिंह को लाइमलाइट से दूर रख कर उनकी संगठनात्मक काबिलियत का फायदा उठाना चाहती होगी। लेकिन महत्वपूर्ण यही है कि इस पूरी भूमिका में जिस प्रकार से अमित शाह को पोस्टर से गायब किया गया वो राजनीतिक पंडितों के गले से नहीं उतर रहा है और सभी इस सवाल का जवाब ढूंढ़ रहे हैं कि आखिर अमित शाह को पोस्टर से गायब क्यों किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस पूरे मामले की जानकारी अमित शाह को हुई तो उन्होने काफी नाराजगी ब्यक्त की बात यहीं खत्म नहीं हुई अमित शाह ने चित्रकूट आने से इंकार कर दिया जिसके बाद अब राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा चित्रकूट आकर जन आशीर्वाद यात्रा को हरी झंडी दिखाने वाले हैं। गौरतलब है कि भाजपा के सर्वे के अनुसार विंध्य की जनता भाजपा से काफी नाराज है जिनको मनाने के लिए भाजपा की ओर से अलग-अलग प्रयास किए गए लेकिन नतीजा शिफर ही रहा है। इसी लिए अब भाजपा ने विंध्य से जन आशीर्वाद यात्रा का आगाज करने की योजना तैयार की है।

भांजियों और लाड़ली बहनों के बीच सीएम शिवराज की बढ़ी लोकप्रियता,भाजपा की रिपोर्ट में आया सामने
मिशन 2023 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी में सीएम शिवराज के आगे किसी अन्य चेहरे की स्वीकार्यता नहीं है (Shivraj Singh Chouhan) । दरअसल लाड़ली बहना योजना (ladli behna yojana) लांच होने के बाद भाजपा के केन्द्रीय संगठन ने प्रदेश भर में गुप्त तरीके से एक सर्वे करवाया है (bjp survey)। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक लाड़ली बहनों और भांजियों के बीच सीएम शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता बढ़ी है। रिपोर्ट आने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब 'मामा-भांजी और बहना' के रिस्ते को भुनाने में जुट गई है। रिपोर्ट के मुताबिक लाड़ली बहना योजना लांच होने के बाद एक करोड़ 25 लाख परिवार सीएम शिवराज से सीधे जुड़ गया है और इस योजना के कारण सीएम शिवराज की छवि भी सुधर गई है। भांजियों को इस सर्वे में इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि लाड़ली लक्ष्मी योजना (ladli lakshmi yojana) का लाभ उठा चुकी हजारों युवतियां इस बार मतदान करने वाली हैं। रिपोर्ट को आधार बना पर महिलाओं के अधिकतम वोट पाने के लिए भाजपा ने अलग से रणनीति बनाना शुरु कर दिया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर सर्वे करवा कर यह जानने का प्रयास किया गया कि आम जनता के बीच भाजपा सरकार और खासतौर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि कैसी है। रिपोर्ट में महिलाओं में सरकार की अधिक लोकप्रियता की बात सामने आने से भाजपा खुश है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस वोटबैंक के डगमगाने के आसार भी नहीं हैं। भाजपा की ओर से कांग्रेस नेताओं की भी स्थिति जानने का प्रयास किया गया है। भाजपा रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं का भरोसा कांग्रेस नेताओं के प्रति कम है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि लाड़ली बहना और अन्य महिला केन्द्रित योजनाओं से ही सीएम शिवराज की लोकप्रियता का ग्राफ ऊंचा हुआ है। भाजपा की सरकार ने महिलाओं के बीच ज्यादा लोकप्रिय होने की मुख्य वजह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरल-सहज छवि है। खासतौर से उनके द्वारा महिलाओं से भाई यानि उनके बच्चों के मामा का जो रिश्ता बनाया है उससे ग्रामीण महिलाओं में मुख्यमंत्री की छवि अमिट छाप बनाई है। महिलाएं मुख्यमंत्री को आम जनता के बीच आम आदमी मानती हैं। लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के साथ शिवराज सिंह की छवि बनाने में राज्य सरकार की महिलाओं के लिए बनाई गई अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी अहम योगदान है।

केन्द्रीय नेतृत्व ने एमपी में सात मंत्री भेजे,सभी 230 सीटों की टटोली जा रही नब्ज
मप्र चुनाव के लिए भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने उत्तरप्रदेश से सात मंत्रियों को मप्र भेजा है। ये मंत्री अलग-अलग संभागों में जाकर चुनावी प्रबंधन का काम देखेंगे (MP Elections)। इन मंत्रियों द्वारा अपनी रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व को भेजी जाएगी। वहीं प्रदेश की 230 विधानसभा क्षेत्रों में भेजे गए प्रवासी विधायक भी अपने-अपने राज्य वापस लौट गए हैं। इन विधायकों ने सात दिन के प्रवास के दौरान अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के पक्ष में वातावरण बनाने का प्रयास किया। बाहरी विधायकों ने पार्टी के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। वो स्थानीय प्रतिष्ठित रहवासियों से भी मिले और उन्हे भाजपा की केन्द्र और प्रदेश सरकार के कामों की जानकारी दी। दूसरी तरफ चुनावी तैयारियों में जुटी भाजपा ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। सोमवार को प्रदेश कार्यालय में चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ,गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) सहित शीर्ष नेतृत्व ने आगामी कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की। बैठक में नेताओं से कहा गया कि सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ जुट जाएं। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश (Shivprakash) के नेतृत्व में हुई बैठक में आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। विशेष कर जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) के दौरान प्रधानमंत्री मोदी,गृह मंत्री अमित शाह,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकान नड्डा (JP Nadda) के प्रदेश प्रवास पर मंथन किया गया। बैठक में कहा गया कि टिकट मिलने या ना मिलने का असर किसी भी स्तर पर चुनावी तैयारियों पर नहीं पड़ना चाहिए,जिन सदस्यों को संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौपी ग ई है और वो चुनाव लड़ने के आकांक्षी हैं,उन्हे यह ध्यान रखना होगा कि पार्टी जिसे प्रत्याशी बनाए उन्हे पूरी मेहनत के साथ चुनाव जिताना होगा। प्रत्याशियों की पहली सूची (candidate list) जारी होने के बाद कुछ स्थानों पर इठ रहे विरोध पर भी बैठक में चर्चा हुई। वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि इस तरह का विरोध अनुचित है और उसे समय रहते सुलझाना होगा। किसी भी स्तर पर इस तरह की परिस्थितियां खड़ी नहीं होनी चाहिए,इस पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। बैठक में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि हम सभी का उद्देश्य पार्टी को जीत दिलाना होना चाहिए। इसके लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। तोमर ने कहा कि जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री,गृह मंत्री जैसे वरिष्ठ नेता मध्यप्रदेश के प्रवास पर रहेंगे। पार्टी को इन लोकप्रिय नेताओं की बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचानी है। इसके लिए सदस्य ऐसी व्यवस्था करें इसका लाभ चुनाव में पार्टी को मिल सके।

महाकाल लोक घोटाले के आरोपी मंत्री भूपेन्द्र सिंह बनाए गए जन आशीर्वाद यात्रा के संयोजक
भारतीय जनता पार्टी तीन सितंबर से प्रदेश भर में जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) निकालने जा रही है। इस यात्रा को सफलता पूर्वक संचालित करने के लिए आठ सदस्यीय केन्द्रीय टोली का गठन किया गया है। टोली की खास बात ये है कि उसका संयोजक नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह (Bhupendra Singh) को बनाया गया है। भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ महाकाल लोक (Mahakal Lok) के घोटाले का आयोप है और आय से आधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त की जांच चल रही है। महाकाल लोक का घोटाला सामने आने के बाद भूपेन्द्र सिंह को पीएम मोदी के मंत्री इन वेटिंग के लिए भी चुना गया था लेकिन जैसे ही मामले की जानकारी पीएमओ तक पहुंची थी तो भूपेन्द्र सिंह को पीएम मोदी के स्वागत से अलग कर दिया गया था और उनकी जगह पर संगठन के नेताओं ने पीएम मोदी (PM Narendra Modi) का स्वागत किया था। कुछ समय तक संगठन और सरकार की ओर से मंत्री भूपेन्द्र सिंह को साइडलाइन किया गया लेकिन अब संगठन ने भूपेन्द्र सिंह को बड़ी जिम्मेदारी देकर यह बता दिया है कि उनके खिलाफ जो आरोप लगे हैं वो निराधार हैं। गौरतलब है कि नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच चल रही है। कांग्रेस ने उन पर पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए थे और इसे लेकर 11 मई 2023 को लोकायुक्त को शिकायत की थी। इस मामले में प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) का कहना है कि जिस मंत्री के खिलाफ आय से अधिक मामले की जांच चल रही है उस मंत्री को भाजपा ने जन आशीर्वाद यात्रा का संयोजक बना कर प्रदेश की जनता के सामने संदेश क्या देना चाहती है। मतलब साफ है कि मंत्री भूपेन्द्र सिंह को लेकर एक बार फिर प्रदेश में सियासत रौद्र रुप लेने वाली है।

10 हजार KM का सफर, 678 रथ और 211 बड़ी सभाएं, 25 सितंबर को भोपाल में होगा कार्यकर्ता महाकुंभ
विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) के माध्यम से चुनाव प्रचार से पूर्व ही लोगों के बीच पहुंचेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) यात्रा की शुरुआत करेंगे। जबकि इसके समापन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शामिल होंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। वीडी शर्मा ने बताया कि भाजपा जन आशीर्वाद यात्रा के माध्यम से जनकल्याण के कार्यों को प्रत्येक विधानसभा में जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। शर्मा के अनुसार भाजपा इस बार पांच जनआशीर्वाद यात्राएं निकालेगी। पहली जन आशीर्वाद यात्रा 3 सितंबर को विंध्य संभाग के चित्रकूट से शुरू होगी। इसका शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। दूसरी जन आशीर्वाद यात्रा महाकौशल के मंडला से 5 सितंबर को शुरू होगी। इसका भी शुभारंभ अमित शाह ही करेंगे। तीसरी जन आशीर्वाद यात्रा 4 सितंबर से इंदौर संभाग के खंडवा से शुरू होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) इसकी शुरुआत करेंगे। चौथी यात्रा उज्जैन संभाग से 4 सितंबर को ही प्रारंभ होगी, जिसका शुभारंभ भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। पांचवी और अंतिम यात्रा ग्वालियर-चंबल संभाग के श्योपुर से निकाली जाएगी। यह 6 सितंबर को शुरू होगी। जिसकी शुरुआत भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) करेंगे। जन आशीवार्द यात्रा का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर किया जाएगा। समापन कार्यक्रम भोपाल में होने वाले कार्यकर्ता महाकुंभ में होगा। जिसमें 10 लाख भाजपा कार्यकर्ता शामिल होंगे। प्रदेश में निकाली जाने वाली ये पांचों जनआशीर्वाद यात्राएं 10 हजार 643 किमी का सफर तय करेगी। इस दौरान 678 रथ सभाएं और 211 बड़ी सभाओं का आयोजन किया जाएगा।

लाड़ली बहनों को सीएम शिवराज की सौगात,450 रुपये घरेलू गैस में मिलेगी सब्सिडी,250 रुपये मिले
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित लाड़ली बहना (ladli behna yojana) कार्यक्रम में सौगातों की झड़ी लगा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं एक संकल्प ले रहा हूं प्रदेश में नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जाएगा और जहां आधी से ज्यादा बहनें नहीं चाहेंगी, वहां पर शराब की दुकान बंद कर दी जाएगी। नशा सबसे ज्यादा बहनों की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ करता है। दूसरी चीज, स्थानीय निकाय के चुनाव में बहनों को आरक्षण दिया ताकि बहनें पंच, सरपंच और अध्यक्ष बनें। पुलिस भर्ती में बेटियों को 30% प्रतिशत आरक्षण दिया। अभी तक पुलिस भर्ती में 30% भर्ती बेटियों की होती थी अब 35% बेटियों की पुलिस में भर्ती होगी। ममुख्यमंत्री ने कहा कि हम ये भी फैसला कर रहे है बाकी सभी भर्तियों में 35% भर्तियां बेटियों की होगी। सरकारी पदों में भी कई पद ऐसे होते हैं जिनमें सरकार नियुक्त करती है उन पदों पर भी 35% नियुक्तिया महिलाओं की होगी। मैंने प्रयास किया बेटियों को लाड़ली लक्ष्मी बनाऊँ, इस योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म से लेकर उसकी उच्च शिक्षा का सारा खर्च सरकार उठा रही है। सीएम शिवराज ने अपने संबोधन में कहा कि बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। पैसा होता है तो दुनिया पूछती है। बहनों तुम्हारे आंसू, दुःख और तकलीफ पी जाऊंगा। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना बनाई जिसमें हर पात्र बहना को एक हजार रूपये प्रतिमाह दे रहा हूं।एक हजार रुपए मिल रहे है तो उन पैसों से बहनों ने काम-धंधे शुरू किये है। आजीविका मिशन की बहनें 10 हजार रुपए प्रतिमाह कमाए ये मेरा संकल्प है। संपत्ति माँ, बहन और बेटी के नाम पर खरीदी जाएगी तो उनसे 1% शुल्क लिया जाएगा। रक्षाबंधन का संकल्प है जिन बहनों के पास घर नहीं है उन्हें घर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि आज मैं ये फैसला कर रहा हूँ कि बढ़े हुए बिजली के बिलों की वसूली नहीं होगी, मैं उन बिलों का इंतजाम करूँगा, सितम्बर में बढ़े हुए बिल जीरो हो जाएंगे। गरीब बहना का बिल केवल 100 रुपए आए, इसका इंतजाम किया जाएगा। 20 घरों की बस्ती है तो वहाँ भी बिजली ले जाऊंगा, इसके लिए 900 करोड़ रुपए की व्यवस्था मैंने की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इसी क्षण सिंगल क्लिक से रक्षाबंधन के लिए 250 रुपए सवा करोड़ बहनों के खातों में डालूंगा जिससे राखी का त्योहार अच्छे से मनाया जा सके। सावन के महीने में रसोई गैस 450 रुपये में दी जाएगी। इसके बाद पर्मानेंट व्यवस्था बनाऊँगा, ताकि बहनें परेशान न हों। अब अक्टूबर माह से लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत बहनों के खातों में रु. 1,250 की राशि डाली जाएगी। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की राशि रु. 1,250 से बढ़ाकर धीरे-धीरे रु. 3 हजार तक करूँगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणाओं के बाद कांग्रेसी खेमें में हलचल मज गई नतीजा ये निकला कि पीसीसी चीफ कमलनाथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश की जनता को 11 वचन दिया और कहा कि वो कांग्रेस के वचन पर विश्वास रखें। कांग्रेस जो कहती है वो करती है।

सवर्ण बाहुल्य विंध्य में कांग्रेस ने ओबीसी चेहरा कमलेश्वर पटेल को आगे कर सवर्णों के जख्म पर छिड़का नमक
ओबीसी नेताओं की खोज में जुटी कांग्रेस पार्टी ने विंध्य से कमलेश्वर पटेल (Kamleshwar patel) को आगे कर सवर्णों को नाराज कर दिया है। इस बात में कोई शक नहीं कि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आबादी विंध्य क्षेत्र में रहती है यही कारण रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी का विंध्य में सालों तक वर्चश्व रहा है। लेकिन इन दोनों नेताओं के स्वर्गवासी होने के बाद कांग्रेस पार्टी किसी भी सवर्ण नेता की खोज इतने सालों में नहीं कर पाई या फिर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने विंध्य से सवर्ण नेताओं को पनपने नहीं दिया। लेकिन अब कांग्रेस पार्टी ने विंध्य में सवर्णों के जख्म पर मरहम लगाने के बजाय नमक छिड़ने का काम किया है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने विंध्य से पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (Congress Working Committee) का सदस्य बना दिया है। ये वही कमलेश्वर पटेल हैं जिनके निवास पर ब्राम्हण वर्ग का कोई ब्यक्ति जाता है तो उसे किसी प्रकार का महत्व नहीं दिया जाता है। 15 महीनों तक कमलेश्वर पटेल मंत्री रहे उस दौरान उनके बंगले में जितने स्टाफ थे सभी कुर्मी समाज के ही थे। यहीं नहीं कोई भी सवर्ण वर्ग का ब्यक्ति कमलेश्वर पटेल के पास अपना काम अथवा फरियाद लेकर जाता था तो कमलेश्वर पटेल उस ब्यक्ति को दरवाजे के बाहर कर देते थे अथवा घंटों तक इंतजार करवा कर वो उससे अंत में मिलते थे और काम भी नहीं करते थे। ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस ने विंध्य की ओर से चेहरा बना कर खुद के पैर में कुल्हाड़ी मारने का काम कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की रणनीति पर नजर डालें तो सवर्ण वर्ग भाजपा से भी नाराज था लेकिन भाजपा ने सवर्ण वर्ग को खुश करने के लिए अलग-अलग उपाय तैयार किए जिसमें भाजपा की ओर से गिरीश गौतम (Girish Gautam) को विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया ये बात और है कि गिरीश गौतम का कोई जनाधार नहीं है वो अपने बेटे तक को जिला पंचायत के चुनाव में नहीं जिता पाए और इस चुनाव में उनकी हालत और खराब है। भाजपा के दूसरे बड़े चेहरे हैं राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) जो लोगों के व्यक्तिगत काम तो नहीं करते लेकिन शहर का विकास राजेन्द्र शुक्ला ने बढिया किया है और सहज-सरल व्यक्ति होने के नाते राजेन्द्र शुक्ला चुनाव जीतने में कामयाब हो जाते हैं ये बात और है कि नगर निगम के चुनाव में वो इस बार भाजपा को नहीं जिता पाए और रीवा में कांग्रेस का महापौर बन गया। रीवा सहित पूरे विंध्य का इतिहास उठा कर देखें तो विंध्य में ब्राम्हण और ठाकुरों का वर्चश्व रहा है इन्ही के इर्द- गिर्द राजनीति चलती रही है लेकिन कांग्रेस ने कमलेश्वर पटेल जैसे जातिवादी नेता को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बना कर अपने लिए विंध्य में ज्यादा मुसीबतें खड़ी कर ली है। कांग्रेस के इस फैसले से सवर्णों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को विंध्य की 30 सीटों में मात्र छह सीटें मिली थी बांकी 24 सीटें भाजपा के कब्जे में आई थी और उस परिणाम को बदलने के लिए कांग्रेस ने इस बार काफी मेहनत की है लेकिन कमलेश्वर को आगे कर कांग्रेस पार्टी ने खुद की मेहनत पर ही पानी फेर दिया है और इसके अलावा कमलेश्वर पटेल और अजय सिंह (राहुल) की दुश्मनी भी किसी से छुपी नहीं है लिहाजा अब तो विंध्य में कांग्रेस के लिए भगवान ही मालिक है।

मंत्रियों की शपथ पर रोया कुत्ता,'कांग्रेस को हुआ दुख'
शनिवार को जिस वक्त राजभवन में तीन मंत्रियों को शपथ दिलाई जा रही थी (Shivraj Cabinet Expansion) ठीक उसी वक्त राजभवन के बाहर एक कुत्ता (स्वान) जमकर रो रहा था। कुत्ते के रोने की दर्दनाक आवाज कांग्रेस नेताओं के कानों तक पहुंच गई (MP Congress)। कुत्ते को रोता देख कांग्रेस नेताओं का दिल भी फफक-फफक कर रोने लगा फिर क्या था कांग्रेस प्रवक्ताओं से कुत्ते का रोते हुए चेहरा देखा नहीं गया। कांग्रेस नेताओं ने कुत्ते का वीडियो बनाया और फिर उसे वायरल करने के साथ ट्वीट करने में लग गए । कुत्ते को रोता देख कांग्रेस को एक मौका भी मिल गया आनन फानन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गूगल से शकुन शास्त्र निकाला और कुत्ते के रोने के मायने निकालने लगे। अलग-अलग तरीके से गूगल से कुत्ते के रोने के मायने निकाल कर कांग्रेस प्रवक्ताओं ने उसे वायरल करने लगे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने चुनाव के महज कुछ समय पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया है जिसमें विंध्य से राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla),बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन (Gaurishankar Bisen) और राहुल सिंह लोधी (Rahul Singh Lodhi) को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। इस बात में कोई शक नहीं कि बीजेपी में इस वक्त काफी विवाद की स्थिति है पार्टी के अंदर कलह हावी हो रही है। संगठन की लाख कोशिशों के वाबजूद भी पार्टी में कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं हो रही है। यही कारण है कि मंत्रिमंडल का विस्तार कर अंतर्कलह को खत्म करने का प्रयास किया गया है। लेकिन लगता है कि तीन को खुश करने के चक्कर में 13 नाराज हो गए हैं। और जिस प्रकार से राजभवन के बाहर कुत्ता रोया है उससे फिलहाल कांग्रेसी खेमें को चुटकी लेने का बेहतर मौका मिल गया है।

सरकार में चल रही कलह के लिए तीन विधायकों को दिलाई गई शपथ
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने मंत्रिमंडल विस्तार कर पार्टी की अंदरुनी कलह को खत्म करने का प्रयास किया है (MP Assembly elections)। चुनाव के लिए महज डेढ महीने का वक्त बचा है ऐसे समय में मंत्रिमंडल (shivraj cabinet expansion) का विस्तार कर भाजपा ने पार्टी की कलह को खत्म करने का प्रयास किया है लेकिन साथ में विपक्षी दलों के लिए मुद्दा भी दे दिया है। दरअसल जिस प्रकार से मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है वो सियासी पंडितों के गले से नहीं उतर रहा है। खास कर जिस प्रकार से तीन विधायकों को मंत्री की शपथ दिलाई गई है और जिस वर्ग से मंत्री बनाए गए हैं वो लोगों की समझ में नहीं आ रहा है। विंध्य की जनता भाजपा से काफी नाराज थी खासकर सीधी पेशाब कांड (Sidhi Urination case) के बाद जिस प्रकार से आरोपी प्रवेश शुक्ला के मकान पर बुलडोजर चला था उसके बाद विंध्य की जनता भाजपा से काफी नाराज चल रही थी। संघ और संगठन के सर्वे में भी विंध्य की जनता भाजपा से नाराज चल रही थी यही कारण है कि राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को एक बार फिर मंत्री बनाया गया है। लेकिन ओबीसी वर्ग से गौरीशंकर बिसेन (Gaurishankar Bisen) और राहुल सिंह लोधी (Rahul Singh Lodhi) को मंत्री बनाया जाना लोगों के समझ में नहीं आ रहा है । लोगों को उम्मीद थी कि एक एससी वर्ग के विधायक को भी मंत्री बनाया जाएगा लेकिन ऐसा नही हुआ। भाजपा में कुछ नेताओं से बात हुई तो उनका कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से नेताओं की व्यक्तिगत नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया गया है। लेकिन कुछ विधायकों से बात हुई तो वो इस मंत्रिमंडल विस्तार से और ज्यादा नाराज नजर आए। मतलब साफ है भाजपा की सरकार ने कुछ नेताओं को खुश करने के चक्कर में बहुत से नेताओं को नाराज कर दिया है। जिस प्रकार से तीन मंत्रियों के शपथ में दो ओबीसी वर्ग के विधायकों को मंत्री बनाया गया है उससे भाजपा की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ओबीसी वर्ग को भाजपा लगातार साधने का प्रयास कर रही है। एससी वर्ग को खुश करने के लिए भाजपा ने एससी वर्ग के संत सिरोमणि रविदास जी के मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ करवा दिया है। भाजपा मान कर चल रही है कि संत रविदास जी का मंदिर बनने के बाद एससी वर्ग भाजपा की ओर ही आएगा। भाजपा की योजना के मुताबिक राजेन्द्र शुक्ला को मंत्री बनाए जाने के बाद विंध्य का ब्राम्हण खुश हो जाएगा तो गौरीशंकर बिसेन और राहुल लोधी को मंत्री बनाए जाने के बाद बुंदेलखंड का ओबीसी वर्ग खुश हो जाएगा। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी ओर से जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साधने का प्रयास किया है अब देखना यही दिलचश्प होगा कि दो महीने बाद होने वाले विधानसभा में भाजप का यह दांव कितना सही साबित होता है।

तीसरे नाम ने अटकाया मंत्रिमंडल विस्तार
शिवराज कैबिनेट (Shivraj Cabinet) का विस्तार फिलहाल अटक गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) दो दिन के लिए राजधानी से बाहर हैं। हांलाकि मंत्री बनने की आस में दो विधायक राजधानी में रुके हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार दो विधायकों के नामों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण फिलहाल विस्तार नहीं हो पाया। गौरतलब है कि कैबिनेट के विस्तार की चर्चाएं पिछले कई दिन से चल रही है। इसके लिए पार्टी संगठन के कहने पर रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) और पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन (Gaurishankar Bisen) समर्थकों के साथ भोपाल पहुंचे हैं। इसी तरह टीकमगढ़ के खरगापुर विधायक राहुल लोधी (Rahul Lodhi) भी बुधवार को देर रात भोपाल पहुंचे थे। उन्हे उम्मीद थी कि गुरुवार को कभी भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हो सका गुरुवार सुबह सीएम हाउस में तकरीबन डेढ़ घंटे संभावित नाम को लेकर चर्चा भी चली किंतु तीसरे और चौथा नाम पर सहमत नहीं बन सकी जिससे आम सहमति बनाए जाने तक बिस्तर डाल दिया गया। सूत्रों की मानें तो तो वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गी (Kailash Vijayvargiya) की ओर से विधायक रमेश मेंदोला (Ramesh Mendola) को मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। इधर विधायक संजय पाठक (Sanjay Pathak) को भी मंत्री बनाए जाने के लिए भी कुछ नेताओं द्वारा पैरवी भी की गई है। लेकिन इन दोनों नाम पर सहमत नहीं बन पाई है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज दोपहर भोपाल लौटेंगे जबकि राज्यपाल 26 अगस्त की दोपहर को 2 दिन के लिए राजधानी से बाहर रहेंगे। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार अब राज्यपाल के वापस लौटने के बाद हो सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वापस लौटने से लेकर शनिवार को राज्यपाल के भोपाल से बाहर जाने तक का समय है जिसमें विस्तार किया जा सकता है।