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'जाति का तड़का' लगा कर भाजपा का नया फॉर्मूला कुशवाह को आगे करो अजा-ओबीसी का वोट साधो 18 साल बाद याद आई 'सामाजिक समीकरण' की रेसिपी

'शिव' के सामने 'उमा' की चुनौती,अब महिला ओबीसी आरक्षण पर होगा आर-पार
मप्र भाजपा में उपेक्षाओं का शिकार हो रहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने अपनी ही सरकार के खिलाफ एक बार फिर बगावती तेवर अपनाते हुए संघर्ष का ऐलान कर दिया है। उमा भारती ने ओबीसी नेताओं के साथ एक बैठक आयोजित की जिसमें उन्होने महिला आरक्षण (अन्य पिछड़ा वर्ग) के मुद्दे को लेकर बैठक में महिला आरक्षण बिल में ओबीसी महिलाओं को विशेष स्थान दिलाने के लिए विचार मंथन किया (women reservation bill) । उमा भारती ने महिलाओं के समक्ष संकल्प दिलाया कि आप मेरी शक्ति बनाए रखिए, मैं 33% महिला आरक्षण पर ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार के ऊपर दबाव बनाऊंगी। उमा भारती पहले ही कह चुकी हैं कि वह महिला आरक्षण में ओबीसी महिलाओं के विशेष स्थान की पक्षधर हैं। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र भी लिख चुकी हूं। उमा भारती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अब कभी भी मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में वह अपने लिए कोई जमीन नहीं तलाश रही हैं। उनका संकल्प अब केवल पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को न्याय दिलाना है। उमा भारती ने यह भी कहा कि मैं गरीब, गाय और समाज के लिए हमेशा लड़की रहूंगी और लड़की रही हूं। गौरतलब है कि इससे पहले उमा भारती ने शराबबंदी के नाम पर प्रदेश सरकार (MP Government) के खिलाफ मोर्चा खोला था जिसके बाद सरकार बैकफुट पर आई और आहाते बंद कर दिए गए। लेकिन अब उमा भारती ने ओबीसी महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरने का नया मुद्दा ढूंढ निकाला है और इस वक्त भाजपा और कांग्रेस किसी भी सूरत में ओबीसी वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए जी जान से जुटा हुआ है।

ओबीसी महिला आरक्षण के नाम पर अपनी ही सरकार से आर-पार के मूड में उमाभारती
संसद में महिला आरक्षण बिल (women reservation bill) पेश किए जाने के बाद अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिलाओं के आरक्षण की मांग की है। उमा भारती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र लिखकर कहा है कि महिला आरक्षण बिल में ओबीसी महिलाओं (obc women voters) को विशेष स्थान दिया जाए। इस बिल में ओबीसी महिलाओं को स्थान नहीं दिया गया है ऐसे में वह इस बिल का खुलकर विरोध करेंगी। पूर्व सीएम उमा भारती ने एक प्रेस वार्ता के दौरान महिला आरक्षण बिल का विरोध करते हुए कहा कि ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए 50% आरक्षण दिए जाने का आंदोलन चलाएंगी। उन्होंने कहा कि देवेगौड़ा सरकार के समय महिला आरक्षण का बिल पेश किया गया था उसी समय मैंने कहा था कि एससी- एसटी की महिलाओं का भी प्रावधान किया जाए, इसके बाद बिल रुक गया था, उमा भारती ने कहा कि मैने सुझाव दिया था कि मंडल कमीशन के आधार पर आरक्षण मिले। पार्टी के हर मंच पर यह मुद्दा उठाया जिस पर अटल और आडवाणी जी का भी समर्थन था। गौरतलब है कि इससे पहले उमाभारती ने प्रदेश में शराबबंदी (mp liquor ban) को मुद्दा बनाया था जिसके कारण प्रदेश की सरकार (Madhya Pradesh government) बैकफुट पर आ गई और बाद में आहातों को बंथ करने का सरकार ने फैसला लिया। इस वक्त प्रदेश भर में ओबीसी का मुद्दा जम कर गर्माया हुआ है और अब उसी मुद्दे पर उमा भारती ने आपनी राय स्पष्ट साफ कर दिया है कि साध्वी का ठप्पा उन पर भले लगा है लेकिन जातियों से बाहर वो नहीं हैं लिहाजा संसद में महिला आरक्षण बिल पास होता है तो ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्राविधान होना चाहिए।

जातियों के सहारे कांग्रेस,जल्द आयोजित करेगी दो बड़े सम्मेलन
प्रदेश में सत्ता पाने के लिए कांग्रेस (mp congress) बड़े मतदाता वर्ग आदिवासी और ओबीसी के सम्मेलन करने जा रही है (congress conference)। ये राज्य स्तरीय सम्मेलन होंगे। आदिवासी सम्मेलन (adivasi sammelan) झाबुआ में तो ओबीसी का सम्मेलन (obc sammelan) भोपाल में आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारी की जिम्मेदारी पार्टी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेताओं को सौंपी गई है। सम्मेलन की तारीख भी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेता ही तय करेंगे। बुंदेलखंड में भी एससी वर्ग का बड़ा कार्यक्रम भी चुनाव अभियान समिति ने प्रस्तावित किया है। प्रदेश में एसटी वर्ग के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं लेकिन इनका प्रभाव 80 सीटों से ज्यादा पर है। ओबीसी मतदाताओं का प्रभाव भी 100 से अधिक सीटों पर है। इसे देखते हुए भाजपा और कांग्रेस, दोनों आदिवासी और ओबीसी वर्ग को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति (congress election committee) ने तय किया है कि आदिवासी बहुल झाबुआ,अलीराजपुर,बड़वानी,खरगोन सहित अन्य जिलों के आदिवासी भाग लेंगे। इसकी तैयारी का जिम्मा चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष कांतीलाल भूरिया को दिया गया है। आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. विक्रांत भूरिया इसमें सहयोगी की भूमिका में होंगे। इसके अलावा भोपाल में आयोजित होने वाले ओबीसी सम्मेलन की जिम्मेदारी कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव को सौंपी गई है। दोनों को कार्यक्रम की रुपरेखा निर्धारित करने के लिए कहा गया है। प्रदेश में कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।