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पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित दो नेताओं पर दर्ज होगा मानहानि का केस
मुख्यमंत्री के पद से हटने के बाद शिवराज सिंह चौहान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जबलपुर (Jabalpur) की एक विशेष अदालत ने कांग्रेस (Congress) के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा (Vivek Tankha) की याचिका पर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) की मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) इकाई के प्रमुख वीडी शर्मा (VD Sharma), पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह (Bhupendra Singh) के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता के वकील एच.एस. छाबड़ा ने बताया कि सांसद-विधायक मामलों से संबंधित न्यायिक दंडाधिकारी विश्वेश्वरी मिश्रा (प्रथम श्रेणी) की विशेष अदालत ने अपने आदेश में प्रथम दृष्टया मुकदमे के लिए पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने के बाद मानहानि का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया. पिछले साल 29 अप्रैल को तन्खा ने मानहानि मामले में अदालत में अपना प्रारंभिक बयान दर्ज कराया था. तन्खा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने उनकी छवि खराब करते हुए गलत दावा किया कि वह 2021 में पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से संबंधित शीर्ष अदालत के एक मामले में शामिल थे. तन्खा ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने न तो ओबीसी आरक्षण से संबंधित किसी भी अदालती कार्यवाही में भाग लिया है और न ही इस मुद्दे पर कोई याचिका दायर की है। तन्खा ने वीडी शर्मा, शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ 10 करोड़ रुपये का मानहानि संबंधी मामला दायर किया है. विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह तीनों नेताओं को नोटिस भेजा था. विवेक तन्खा की ओर से बीजेपी नेताओं को जो नोटिस भेजा गया था, उसमें नेताओं से माफी मांगने की बात कही गई थी, लेकिन जब विवेक तन्खा को उनके भेजे गए नोटिस का जवाब नहीं मिला तो उनकी ओर से छह जनवरी 2023 को जिला अदालत में परिवाद दायर कर दिया गया था।

मुख्यमंत्री का पद आता जाता रहता है,मामा भांजे का पद हमेशा रहता हैःशिवराज
सीएम का पद आता-जाता रहता है लेकिन भाई बहन और मामा भांजे पा पद हमेशा बना रहता है। ये कहना है प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) का। गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान अपने निर्वाचन क्षेत्र बुंदनी के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होने एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस प्रकार की बातें कह कर स्थानीय जनता का दिल जीत लिया। शिवराज को इस बार प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया और कई जगहों पर लाड़ली बहनें भी उनको घेर कर उनके समर्थन में नारे लगाती नजर आती हैं। शिवराज सिंह चौहान को लेकर केन्द्रीय नेत्रृत्व के पास बहुत शिकायतें थी। जिस प्रकार से उन्होने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में अपने पास पावर रखा किसी मंत्री को कुछ भी नहीं करने दिया उससे केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी नाराज था। और उसकी बानगी के तौर पर इस विधानसभा चुनाव में भाजपा बिना सीएम के चेहरे मोदी की गारंटी के बल पर चुनाव लड़ी और 163 सीटें लाकर प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकर स्थापित की। हांलाकि शिवराज सिंह चौहान अंत तक हार नहीं मान रहे थे। मतगणना समाप्त होते ही जिस प्रकार शिवराज सिंह चौहान ने अपने दौरे शुरु किए थे उससे यही लग रहा था कि शायद केन्द्रीय नेत्रृत्व उन पर फिर महरवान हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मोहन यादव की लाटरी लग गई।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात
सोमवार को कैबिनेट का विस्तार होने के बाद मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। इस दौरान पूर्व सीएम ने पुष्प गुच्छ देकर वर्तमान सीएम का पूरी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। गौरतलब है कि डॉ. मोहन यादव का जब पहली बार सीएम बनाने के लिए नाम प्रस्तावित किया गया था तब भी डॉ. मोहन यादव पूर्व सीएम शिवराज के निवास पर सबसे पहले पहुंचे थे और उनके पैर छू कर उनसे आशीर्वाद लिया था। गौरतलब है कि पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान करीब 17 साल से ज्यादा मप्र के मुख्यमंत्री रहे हैं और सरकार चलाने का उन्हे काफी अनुभव है यही कारण है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार पूर्व सीएम से मुलाकात करने पहुंचते रहते हैं जिससे समय-समय पर उनसे रायसुमारी कर सरकार को और बेहतर ढंग से चलाने की सीख ली जा सके।

पूर्व सीएम शिवराज की पिक्चर खत्म,दक्षिण भारत में पार्टी के लिए करेंगे काम
भारतीय जनता पार्टी फर्ष से अर्ष तक लेकर जाती है तो अर्ष से फर्ष में भी पहुंचाना जानती है। यही हाल पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) का हुआ है। दरअसल मप्र में शिवराज विरोधी लहर थी उस बीच भाजपा ने सीएम का चेहरा घोषित किए बगैर मोदी की 'गारंटी' पर चुनाव लड़ा। नतीजा ये निकला कि प्रदेश में एक बार फिर भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ आई। लेकिन पूर्व सीएम शिवराज यह साबित करने में जुट गए कि मोदी की गारंटी नहीं बल्कि उनके द्वारा लांच की गई लाड़ली बहना योजना के कारण प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनी है। यहीं से पूर्व सीएम शिवराज और केन्द्रीय नेत्रृत्व के बीच अहम की लड़ाई शुरु हो गई। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान आए दिन लाड़ली बहनों के साथ वीडियो जारी करवाते और महिलाओं के रोने की तस्वीर वायरल करवाते। केन्द्रीय नेत्रृत्व ने सबकुछ भांप लिया। और मर्ज बढ़ने से पहले उसका उपचार करने की योजना तैयार कर ली। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आनन-फानन में शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली बुलाया गया और वहां शिवराज सिंह चौहान का दक्षिण भारत के लिए टिकट कटवा दिया गया। शिवराज सिंह चौहान से कहा गया कि आप संगठन मजबूत करने के लिए अभ्यस्त नेता हैं लिहाजा आप दक्षिण भारत जाइए और पार्टी के संगठन को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाइए। आखिर में शिवराज सिंह चौहान ने भी कह दिया कि पार्टी का काम ही उनके लिए मिशन है। पार्टी जो काम और भूमिका देगी वो पूरी करुंगा

मप्र सरकार पर वित्तीय संकट,कई योजनाओं पर लगा ब्रेक
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 जीतने के लिए शिवराज सरकार (shivraj government) ने सरकारी खजाना खोल दिया था। अब खजाना खाली हो गया है। मध्य प्रदेश पर 3.31 लाख करोड़ का लोन है और अब केवल 15000 करोड़ की लिमिट बची है। नतीजा सरकार ने मध्य प्रदेश के 38 विभागों द्वारा संचालित योजनाओं पर रोक लगा दिए। मध्य प्रदेश शासन (mp government) के वित्त विभाग ने 38 विभागों की योजनाओं पर रोक लगाते हुए, निर्देशित किया है कि सभी विभाग राजस्व संग्रहण के काम को प्राथमिकता पर रखें। जिन योजनाओं पर रोक लगाई गई है, उनमें नगरीय प्रशासन विभाग की महाकाल परिसर विकास योजना, मेट्रो ट्रेन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित तीर्थ दर्शन योजना भी शामिल है। इसके अलावा अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि देने की योजना भी समाप्त कर दी गई है। गृह विभाग के अंतर्गत थानों के सुदृढ़ीकरण, परिवहन विभाग की ग्रामीण परिवहन नीति के क्रियान्वयन, खेल विभाग के खेलो इंडिया एमपी, सहकारिता विभाग की मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना, लोक निर्माण विभाग की विभागीय संपत्तियों के संधारण, स्कूल शिक्षा विभाग की निशुल्क पाठ्य सामग्री के प्रदाय, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लेपटाप प्रदाय, एनसीसी के विकास एवं सुदृढीकरण, जनजातीय कार्य विभाग टंट्या भील मंदिर के जीणोद्धार, उच्च शिक्षा विभाग की योजना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नए आईटी पार्क की स्थापना, विमानन विभाग की भू-अर्जन के लिए मुआवजा, ग्रामीण विकास विभाग की पीएम सड़क योजना में निर्मित सड़कों का नवीनीकरण और महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भवन निर्माण सहित अन्य योजनाओं में व्यय बिना वित्त विभाग की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंतिम संस्कार हेतु मदद वाली योजना भी बंद मध्य प्रदेश के अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि नहीं दी जाएगी। नई राज्य सरकार ने नौ साल पहले शिवराज सरकार के समय बनाई योजना, जिसमें अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उनकी दुर्घटना में मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता एवं एक लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था, इसे भी बंद कर दिया है। मध्य प्रदेश श्रम विभाग के अंतर्गत कार्यरत भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल ने चार दिसंबर 2014 को मंडल में अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा देने की योजना जारी की थी जिसमें निर्माण श्रमिकों को उनकी मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता, निर्माण कार्य के दौरान घटित दुर्घटना में मृत्यु होने पर एक लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर 75 हजार रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था। 13 जनवरी 2017 में इस योजना में बदलाव कर प्रविधान किया गया था कि दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर दो लाख रुपये अनुग्रह राशि दी जाएगी। अब यह योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है।

बीजेपी प्रदेश कार्यालय में लिखे अटल जी के विचार से कानाफूसी का दौर तेज
मप्र में पिछले कुछ दिनों में काफी सियासी उलटफेर देखने को मिले हैं (madhya pradesh bjp)। सोच से परे फैसले हुए बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों का गणित फैल हो गया। और प्रदेश की सियासत में 18 साल से खड़ा वटवृक्ष एक झटके में धराशाही हो गया। जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार फिर बनाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी लेकिन जिस प्रकार से शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) को सीएम पद से हटाया गया वो किसी के गले से नहीं उतर रहा है। लोग अब भी यही सोच रहे हैं कि आखिर उनके राजनीतिक गणित में कहां चूक रह गई। प्रदेश का सीएम बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि वो दिल्ली जाकर अपने अधिकार की मांग करने से बेहतर मरना पसंद करेंगे। बात यहीं खत्म नहीं हुई, डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) के शपथ लेने के तुरंत बाद लाल परेड ग्राउंड के बाहर जिस प्रकार का परिदृष्य देखने को मिला वह साफ बता रहा था कि यह पूर्व नियोजित है। मीडिया के सामने दुखड़ा रोना और फिर यह कहना कि यह अंत नहीं है मै लौट कर आउंगा यही दर्शाता है कि रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया। इन सब बातों को ध्यान में रखें और फिर बीजेपी प्रदेश कार्यालय में लिखे अटल (atal bihari vajpayee) जी के विचार को पढ़े तो ऐसा लगता है कि किसी ब्यक्ति को ध्यान में रख कर यह लाइनें लिखी गई हैं। 'मनुष्य को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लड़े एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े' आज की राजनीति को देखकर ऐसा लगता है कि यह लाइनें ठीक उसी वट वृक्ष के लिए हैं जो पिछले 18 साल से अनवरत खड़ा था कई आंधी और तूफान आए लेकिन कोई उस वट बृक्ष को हिला नहीं पाया लेकिन इस बार की सुनामी से वो वट वृक्ष जमीन से उखड़ कर धराशाही हो गया।

भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने ली प्रोटेम स्पीकर की शपथ
भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव (gopal bhargava) को प्रोटेम स्पीकर की शपथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दिलाई है। शपथ ग्रहण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने और राज्यपाल ने गोपाल भार्गव को बधाई दी है। शपथ के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला,जगदीश देवड़ा सहित अन्य विधायक भी मौजूद रहे। जानकारी के मुलाबिक 18 से 21 दिसंबर के बीच विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी आहुत किया जा रहा है जिसमें सभी विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और उसके बाद पूर्णकालिक अध्यक्ष के रुप में वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव विधानसभा अध्यक्ष के रुप में चार्ज संभालेंगे।

मोहन की 'अग्नि परीक्षा' चार दिग्गज परीक्षा लेने के लिए सदन में हमेशा रहेंगे मौजूद
डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) प्रदेश के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। काफी समय बाद एमपी को नया मुख्यमंत्री मिला है लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने जिस प्रकार से चार वरिष्ठ नेताओं को मोहन यादव का जूनियर बनने के लिए उन्हे मजबूर कर दिया है तो क्या वो चारों दिग्गज अपनी सिकस्त को ऐसे ही स्वीकार कर लेंगे या फिर डॉ. मोहन यादव के लिए समस्या भी खड़ी करेंगे। इस बात में कोई शक नहीं है कि डॉ. मोहन यादव एक सुलझे हुए खिलाड़ी हैं लेकिन जिन सीनियरों को उनका जूनियर बनने के लिए मजबूर कर दिया गया है तो क्या वो अपमान के आंसू पी कर ऐसे ही अपनी सियासी जमीन खिसकते हुए देखते रहेंगे। कहते हैं दुस्मन का दुस्मन दोस्त होता है ठीक वैसा ही जैसा मोहब्बत और जंग में सबकुछ जायज होता है। लिहाजा राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न ही कोई दुस्मन। मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे चल रहे नरेन्द्र सिंह तोमर (narendra singh tomar) को पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष बना कर उन्हे उनके राजनीतिक कद का अहसास करवा दिया है तो वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा की जमीन तैयार करने वाले कैलाश विजयवर्गीय (kailash Vijayvargiya) को भी भाजपा ने उनका कद और पार्टी में क्या हैसियत है वो बता दिया है। प्रलाद पटेल भी भाजपा के कद्दावर नेता हैं उम्र के अंतिम पड़ाव में वो भी अपना डेजिग्नेशन बदलना चाहते थे लेकिन केन्द्रीय नेत्रृत्व ने यह बता दिया कि आप विश्वास के लायक नहीं हो पहले पल्टी मार चुके हो। अब बात करते हैं एक ऐसे नेता कि जो पिछले 18 साल से एमपी बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा था। लाड़ली बहनों का भाई और लाड़ली लक्ष्मियों का मामा। प्रदेश में जब सब कह रहे थे कि सीएम विरोधी लहर है तब उन्होने सभी के समीकरण को धता बताते हुए 163 सीटें लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आखिर में नतीजा यह निकला कि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उन्हे भी दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर बाहर कर दिया। और तीसरी बार चुनाव जीत कर आए डॉ. मोहन यादव को मप्र का अगला मुख्यमंत्री बना दिया। फिलहाल भाजपा के सभी नेताओं के होंठों पर मुस्कान तो दिख रही है लेकिन मुस्कान कुटिलता की भी निशानी होती है किसी को यह नहीं भूलना चाहिए। आने वाले समय में प्रदेश के नए मुखिया को अपने घर के अंदर ही जूझने के लाए तैयार रहना पड़ेगा।

कार्यकारी सीएम शिवराज का बयान,यह अंत नहीं लौट कर आउंगा
प्रदेश की 18 साल तक बागडोर संभालने वाले कार्यकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने प्रेसवार्ता आयोजित कर अपने 18 साल के कार्यकाल की जानकारी दी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब वो मुख्यमंत्री बने थे तब प्रदेश बीमारु राज्य हुआ करता था जिसको उन्होने दिन रात मेहनत कर विकसित राज्य की श्रेणी में खड़ा किया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लाड़ली बहना योजना उन्होने महिलाओं वोट के लिए नहीं शुरु की थी बल्कि नारी सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाने के प्रयास किया था। और उसका असर भी देखने को माला है। कार्यकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि भाई बहन और मामा का जो रिस्ता है वो हमेशा आखिरी सांस तक बना रहेगा। प्रेसवार्ता समाप्त होने के बाद शिवराज सिंह चौहान जब मीडिया कर्मियों के बीच आए तो उन्होने कहा कि यह अंत नहीं है लौक कर जरुर आउंगा किसी न किसी भूमिका में। शिवराज सिंह चौहान जब 74 बंगला स्थित उनके नवीन भवन में पहुंचे तो उनसे मिलने के लिए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला भी उनका स्वागत करने के लिए आए। जहां दोनों नेताओं ने काफी देर तक आपस में बात की। गौरतलब है कि राजेन्द्र शुक्ला और शिवराज सिंह चौहान को एक दूसरे का बेहद करीबी माना जाता है।

'नरेन्द्र सिंह तोमर होंगे प्रदेश के अगले सीएम',दो डिप्टी सीएम और और 29 मंत्री लेंगे शपथ
मप्र में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इस बात को लेकर संशय और कयासों का दौर लगातार जारी है (mp chief minister)। सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक होने जा रही है। केन्द्रीय पर्यवेक्षक बैठक में शामिल होंगे। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) स्पेशल विमान से अन्य नेताओं के साथ भोपाल बैठक बैठक में शामिल होने के लिए आएंगे। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अगली सरकार में 29 मंत्रियों को शपथ दलाई जाएगी। सबसे अहम बात यह है कि लोकसभा चुना को देखते हुए छिंदवाड़ा के अलावा हल लोकसभा सीट से एक मंत्री बनाया जाएगा। माना यह भी जा रहा है कि सागर जिले से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं। दिल्ली के सूत्रों के मुताबिक नरेन्द्र सिंह तोमर पर सहमति बना ली गई है,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी नरेन्द्र सिंह तोमर पर सहमति जता दी है। हांलाकि अभी यह खबर सूत्रों पर आधारित है क्योंकि भाजपा लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए कई प्रकार के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम आने के कारण कोई भी नेता विरोध करने की स्थिति में दिखाई नहीं पड़ रहा है लेकिन सभी नेताओं के बीच कानाफूसी का दौर जरुर जरी है। प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठक को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षा ब्यवस्था तैनात की गई है। प्रदेश कार्यालय को दुल्हन की तरह सजाया गया है।

लाड़ली बहन को सीएम भाई का वादा,बहन मै तुम्हारे साथ हूं
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) प्रदेश की महिलाओं को लाड़ली बहना (ladli behna yojana) कहने तक ही सीमित नहीं हैं इसकी जीती जागती तस्वीर भी जनता के सामने आती रहती है। जब भी किसी महिला पर अत्याचार की खबर मुख्यमंत्री के पास पहुंची है तो वो एक भाई की तरह ही उससे संपर्क करते हैं और यथासंभव अपने निवास पर बुला कर उसको संबल देने का काम भी करते हैं। दरअसल सीहोर से लगे अहमदपुर थाना के बरखेड़ा हसन गांव में एक ऐसा मामला सामने आया जहां की रहने वाली महिला का आरोप है कि बीजेपी को वोट देने पर उसके देवर ने जमकर मारपीट कर दी। सीएम को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने महिला को सीएम आवास बुलाकर चर्चा की, उसका हाल जाना और उसे सुरक्षा और सम्मान देने को लेकर आश्वस्त किया। दरअसल, समीना बी नाम की महिला अपने बच्चों के साथ सीएम हाउस पहुंचीं. उन्हें सीएम शिवराज सिंह ने यहां बुलाया था। कारण, सीएम को जानकारी मिली थी कि बीजेपी को वोट देने पर सीहोर जिले के बरखेड़ा हसन गांव की मुस्लिम महिला के साथ मारपीट की गई है. इसके बाद सीएम शिवराज ने समीना बी को सीएम आवास बुलाकर चर्चा की, उसका हाल जाना और उसे सुरक्षा और सम्मान देने को लेकर आश्वस्त किया। मुलाकात के बाद सीएम शिवराज ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए भाजपा को अपना मत देने पर मेरी एक बहन को उसके परिवार द्वारा प्रताड़ित करने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैंने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देशित कर उचित कार्रवाई करने को कहा है. इसके साथ ही पीड़ित बहन को पूरी सुरक्षा व आर्थिक मदद भी दी जाएगी। मैंने उनसे कहा है कि मेरी बहन, तुम किसी बात की चिंता मत करना, तुम्हारा भाई सदैव तुम्हारे साथ है।

सुन लो रे कांग्रेस वालो लोकसभा चुनाव में तुमको 'खाता भी नहीं खोलने दूंगा'
जहां एक ओर प्रदेश में अगले सीएम को लेकर चर्चाएं जोर पर हैं वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) मिशन 2024 (loksabha elections 2024) फतह हासिल करने के अभियान को अंजाम दे रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुल कर बोल दिया है कि वो दिल्ली नहीं जाएंगे और एमपी में ही रह कर पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। सीएम शिवराज ने यह भी दावा किया कि वो सीएम पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं और न ही वो दावेदार हैं। मतगणना समाप्त होते ही जहां प्रदेश की जनता और भाजपा के नेता अगले सीएम की बात करने में जुट गए हैं वहीं दूसरी तरफ सीएम शिवराज ने उन सीटों को अपने रडार पर ले लिया है जहां पर विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने अभियान का आगाज छिंदवाड़ा से किया जहां की सभी सातों विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। मतलब साफ है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ के अभेद्य किले पर सीएम शिवराज ने सेंध लगाने की रणनीति तैयार कर ली है। यही कारण है कि सीएम चौहान ने सबसे पहले छिंदवाड़ा जाना उचित समझा। अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन सभी सीटों पर दौरा करने जाएंगे जहां पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। बात सिर्फ सीएम शिवराज सिंह चौहान तक ही सीमित नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी छिंदवाड़ा फतह की रणनीति पर काम कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष से लेकर मंडल और ब्लाक अध्यक्षों के साथ मीटिंग कर हार के कारणों की समीक्षा करने की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाने के लिए ठोस रणनीति पर काम कर रहे हैं।