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31 मई को विंध्य और बुंदेलखंड को पीएम मोदी देंगे बड़ी सौगात,पढ़िए मुखबिर
मध्य प्रदेश

31 मई को विंध्य और बुंदेलखंड को पीएम मोदी देंगे बड़ी सौगात,पढ़िए मुखबिर

27/5/2025131
अब विंध्य के विकास की होगी बात,सीएम यादव हैदराबाद में करेंगे रोड-शो,रीवा के कान्क्लेव के लिए करेंगे आमंत्रित
मध्य प्रदेश

अब विंध्य के विकास की होगी बात,सीएम यादव हैदराबाद में करेंगे रोड-शो,रीवा के कान्क्लेव के लिए करेंगे आमंत्रित

11/10/2024141
शासकीय कर्मचारियों की लेटलतीफी पर सरकार की तिरछी नजर,बायोमैट्रिक अटेंडेंस से लगानी होगी हाजिरी,लेट आए तो होगा जुर्माना
मध्य प्रदेश

शासकीय कर्मचारियों की लेटलतीफी पर सरकार की तिरछी नजर,बायोमैट्रिक अटेंडेंस से लगानी होगी हाजिरी,लेट आए तो होगा जुर्माना

5/8/2024177
50% की सीमा से अधिक 13 प्रतिशत मिला आरक्षण,अधिकारियों ने की जमकर मनमानी,सामान्य वर्ग की घटी नौकरियां
मध्य प्रदेश

50% की सीमा से अधिक 13 प्रतिशत मिला आरक्षण,अधिकारियों ने की जमकर मनमानी,सामान्य वर्ग की घटी नौकरियां

1/8/202482
भाजपा और कांग्रेस के लिए विंध्य बना वोट 'मशीन' तैयार नहीं कर पाए नेत्रृत्व
मुखबिर विशेष

भाजपा और कांग्रेस के लिए विंध्य बना वोट 'मशीन' तैयार नहीं कर पाए नेत्रृत्व

राजनीतिक पार्टियों के लिए विंध्य (vindhya politics) हमेशा वोट की एक मशीन की तरह रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी का स्वर्गवास होने के बाद कांग्रेस इस क्षेत्र से विलुप्त हो गई और भाजपा ने लगातार जीत का पर्चम लहराया। लेकिन भाजपा के लिए विंध्य हमेशा वोटिंग मशीन से ज्यादा और कुछ नहीं रहा। 30 विधानसभा क्षेत्र वाले विंध्य में एकतरफा बीजेपी की सीटें आ रही हैं लेकिन भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ला के अलावा यहां से किसी अन्य चेहरे को तरजीह नहीं दी। जबकि राजेन्द्र शुक्ला का आम आदमी से कोई सरोकार नहीं वो सिर्फ वीवीआपी लोगों के नेता हैं आम नागरिक की पहुंच से वो काफी दूर हैं। गिरीश गौतम ने लगातार पांच बार विधानसभा का चुनाव जीता लेकिन उन्हे पार्टी ने कभी महत्व नहीं दिया। दिब्यराज सिंह लगातार तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं लेकिन उन्हे भी पार्टी ज्यादा महत्व नहीं दे रही है। सीधी से केदारनाथ शुक्ला कई बार विधायक रहे उन्हे पार्टी ने कभी महत्व नहीं दिया अंत में पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया। सतना की बात करें तो वहां से भी भाजपा ने किसी नेता को महत्व नहीं दिया। मतलब साफ है कि भाजपा के एमपी का जो नेत्रृत्व है वो विंध्य में बड़े नेताओं को तैयार नहीं होने देना चाहता। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को मालूम है कि अगर विंध्य से बड़े नेता तैयार होंगे तो ग्वालियर-चंबल,बुंदेलखंड और मालवा-निमाड़ का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। इसी लिए भाजपा के संगठन की तरफ से विंध्य में नेत्रृत्व तैयार नहीं होने दिया जाता है। कांग्रेस की तरफ से नेत्रृत्व तैयार करने का प्रयास जरुर हुआ लेकिन कमलेश्वर पटेल पर कांग्रेस ने दांव लगाया जिस पर क्षेत्र की जनता विश्वास नहीं करती। कमलेश्वर पटेल कुर्मी समाज से आते हैं और कट्टर कुर्मी के रुप में उनकी पहचान है। महज 15 महीने की सरकार में उनके बंगले पर कुर्मी समाज के अलावा किसी और वर्ग को महत्व नहीं दिया गया। यही कारण है कि आज लोकसभा चुनाव में कमलेश्वर पटेल की हालत खराब है। अजय सिंह (राहुल) के रुप में कांग्रेस के पास जरुर एक बड़ा चेहरा विंध्य में था लेकिन कांग्रेस ने उन्हे लगातार उपेक्षित कर अजय सिंह के राजनीतिक कैरियार को अंत की ओर अग्रसर कर दिया है। कुल मिला कर विंध्य क्षेत्र भाजपा और कांग्रेस के लिए वोट मशीन से ज्यादा कुछ नहीं है।

14/4/2024453
विंध्य में 'नड्डा' बजाएंगे बीजेपी का डंका,12 अप्रैल को सीधी का करेंगे दौरा
भोपाल

विंध्य में 'नड्डा' बजाएंगे बीजेपी का डंका,12 अप्रैल को सीधी का करेंगे दौरा

विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने लगातार विंध्य क्षेत्र की कमान अपने हाथ में थाम रखी है। यही कारण है कि विंध्य में बीजेपी काफी कमजोर लग रही थी तो केन्द्रीय नेत्रृत्व पर विंध्य की जनता ने विश्वास दिखाया और 30 में 25 सीटें बीजेपी की झोली में डाल दी। इस बात में कोई शक नहीं कि राजनीतिक जानकारों के लिए विंध्य हमेशा अबूझ पहेली रहा है। इतिहास गवाह है विंध्य ने हमेशा चौकाने वाले नतीजे दिए हैं और यही कारण है कि बीजेपी का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार विंध्य में नजरें गड़ाए बैठा है। अब लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) 12 अप्रैल को पहले सीधी में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे फिर रीवा का दौरा करेंगे। विंध्य में रीवा की बात करें तो यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है ठीक इसी प्रकार सतना में भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं सीधी की बात करें तो यहां पर बीजेपी उम्मीदवार राजेश मिश्रा से ज्यादा मजबूत उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल दिख रहे हैं जिसके चलते बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य में आगे आना पड़ रहा है। विंध्य में दो चरणों में चुनाव होने वाला है। सीधी और शहडोल में 19 अप्रैल को वोटिंग होगी तो वहीं सतना और रीवा में 26 अप्रैल को वोटिंग होनी है।

9/4/202496
रीवा और सतना में 'पटेलवाद' मोदी की गारंटी में बनेगा रोड़ा,बीएसपी ने बढ़ाई मुसीबत
मध्य प्रदेश

रीवा और सतना में 'पटेलवाद' मोदी की गारंटी में बनेगा रोड़ा,बीएसपी ने बढ़ाई मुसीबत

एमपी में विध्य क्षेत्र हमेशा राजनीति के जानकारों के लिए अबूझ पहेली रहा है। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र की तासीर बदली है लेकिन इतनी भी नहीं बदली है जितनी भाजपा ने उम्मीद की है। रीवा की बात करें तो यह संसदीय क्षेत्र ब्राम्हण बाहुल माना जाता है। और बीजेपी ने उस ब्राम्हणत्व का पिछली दो पंचवर्षीय से काफी लाभ उठाया है। लेकिन इस बार की परिस्थितियां भिन्न हैं। हांलाकि बीजेपी अब भी मोदी की गारंटी का दंभ भर रही है और बीजेपी का यह भी मानना है कि मोदी की गारंटी फेल हुई तो 'राम बेड़ा पार करेंगे' लेकिन जिस प्रकार से रीवा में भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा (janardan mishra) और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा (neelam mishra) पर दांव लगाया है उसके बाद लड़ाई दिलचश्प हो गई है। इन दोनों पार्टियों से अलग बीएसपी ने रीवा में भाजपा और कांग्रेस का तोड़ निकालते हुए कुर्मी को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। रीवा में ब्राम्हणों के अलावा कुर्मी समाज की बड़ी आबादी है और बीएसपी ने उसी का फायदा उठाते हुए अभिषेक पटेल (abhishekh patel) को चुनाव मैदान में उतार दिया है। इतिहास गवाह है कि जब भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने ब्राम्हण को अपना उम्मीदवार बनाया है तो रीवा में बीएसपी उम्मीदवारों ने चमत्कारिक प्रदर्शन कर जीत दर्ज की है। सतना का भी सूरतेहाल कुछ ऐसा ही है। बीजेपी ने चार बार के सांसद गणेश सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है जो विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं और कट्टर कुर्मी होने के कारण अन्य वर्ग इनसे काफी नाराज है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) को चुनाव मैदान में उतारा है दोनों नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं। यहां भी बीएसपी ने बड़ा खेला करते हुए पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। मतलब साब है कि बहुजन और ब्राम्हण एक तरफ होंगे तो यहां नारायण त्रिपाठी यानि बीएसपी जीत दर्ज कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों में मोदी की गारंटी रीवा और सतना में फैल होने की उम्मीद की जा रही है।

29/3/2024192
बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व
भोपाल

बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व

पिछले कुछ सालों से एमपी बीजेपी में ग्वालियर-चंबल के नेताओं का लगातार प्रभुत्व रहा है। जबकि उसके उलट विंध्य की जनता ने जिस प्रकार से बीजेपी पर विश्वास दिखाया उस हिसाब से एमपी बीजेपी (mp bjp) के नेताओं ने कभी भी विंध्य में किसी भी नेता को पनपने नहीं दिया। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य की कमान खुद हाथ में लेनी पड़ी जिसका नतीया यह निकला कि विंध्य की जनता ने बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रित्व को मायूस नहीं किया और झोली भर कर सीटें दी। राजेन्द्र शुक्ला को छोड़ दिया जाए तो एमपी बीजेपी में जिस प्रकार ग्वालियर-चंबल वाद हावी है उसी का नतीजा है कि विंध्य की जनता को सिर्फ वोटबैंक के रुप में ग्वालियर-चंबल के नेता इस्तेमाल करते रहे हैं। विंध्य क्षेत्र आज भी विकास के मामले में एमपी के अन्य क्षेत्रों से काफी पीछे है। जबकि राजश्व का 30% हिस्सा अकेले विंध्य से राज्य सरकार को मिलता है। ग्वालियर-चंबल की बात करें तो वहां से कद्वार नेताओं में नरेन्द्र सिंह तोमर,डॉ. नरोत्तम मिश्रा,वीडी शर्मा,ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अनेक नाम हैं जो एमपी बीजेपी को चला रहे हैं लेकिन विंध्य में बात करें तो अकेले राजेन्द्र शुक्ला के अलावा ऐसा एक भी चेहरा नहीं है जो बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी में आता हो। जबकि गिरीश गौतम,दिब्यराज सिंह,गणेश सिंह,रीती पाठक जैसे अनेक नेता हैं जो लगातार जीत का पर्चम लहरा रहे हैं लेकिन बीजेपी में इन सभी की हालत क्या है ये किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूभि भी एमपी से रही है। आज जहां सै वो सांसद हैं उस संसदीय क्षेत्र का आधा हिस्सा विंध्य का ही है फिर भी विंध्य को लगातार अनदेखा कर अन्य क्षेत्र के नेताओं को ही बीजेपी में आगे बढ़ाया जाता है। विंध्य में बीजेपी के नेता राजनीतिक पर्यटन में जाते हैं। बड़े-बड़े लच्छेदार भाषण देते हैं और चले आते हैं। क्षेत्र की जनता उन पर विश्वास करके हर बार बीजेपी को झोली भर कर वोट देती है और बाद में उस विंध्य की जनता के हाथ मायूसी ही लगती है। बीजेपी ने विंध्य में जिस राजेन्द्र शुक्ला को आगे बढ़ाया है वो विंध्य के होकर भी नहीं हैं क्योंकि उनको विंध्य की जनता से गंध आती है। वो रीवा की जनता को देखना और मिलना पसंद नहीं करते हैं। मतलब साफ है कि एमपी बीजेपी के नेता चाहते ही नहीं हैं कि विंध्य से कोई मजबूत नेत्रृत्व तैयार हो क्योंकि ऐसा हुआ तो ग्वालियर-चंबल के नेताओं का प्रभुत्व पार्टी में घटने लगेगा।

24/3/2024139
रीवा,सतना और सीधी में बढ़ी बीजेपी की मुस्किलें,अब मोदी की गारंटी से उम्मीद
भोपाल

रीवा,सतना और सीधी में बढ़ी बीजेपी की मुस्किलें,अब मोदी की गारंटी से उम्मीद

भारतीय जनता पार्टी ने विकास को जीत का आधार बनाया है और इसी लिए जनता के बीच मोदी की गारंटी दी जा रही है। लेकिन विंध्य की बात करें तो वहां पर मोदी की गारंटी पर अलग-अलग वर्गों का समीकरण भारी पड़ता नजर आ रहा है (vindhya news)। सबसे पहले सतना की बात करें तो बीजेपी ने गणेश सिंह को पांचवीं बार चुनाव मैदान में उतार कर यह बताने का प्रयास किया कि मोदी की गारंटी है तो सबकुछ मुमकिन है। लेकिन भाजपा ये भूल गई कि उनके खिलाफ कांग्रेस से वही उम्मीदवार चुनाव मैदान मे हैं जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी शिकस्त दी थी। उसके इतर बात करें तो ब्राम्हण चेहरा नारायण त्रिपाठी सतना लोकसभा सीट से इस बार सभी को चौकाने वाले हैं क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ओबीसी वर्ग को अपना उम्मीदवार बनाया है। सतना में बीएसपी का जक बड़ा वोटबैंक है जो आज भी बसपा पर विश्वास रखता है। नारायण त्रिपाठी के बीएसपी से चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि उन्हे हरिजनों का वोट मिलेगा और ब्राम्हण वर्ग के लोगों का भी वोट मिलेगा। मतलब साफ है कि सतना की सीट पूरी तरह से भाजपा के हाथ से खिसकती नजर आ रही है। सीधी की बात करें तो वहां बीजेपी की तरफ से राजेश मिश्रा तो कांग्रेस से कमलेश्वर पटेल चुनाव मैदान पर हैं इन दोनों का गणित बिगाड़ने के लिए पूर्व राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह ने गोंडवाना पार्टी से चुनाव मैदान में उतर कर बीजेपी को कठिनाई में डाल दिया है। वहीं रीवा की बात करें तो भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को फिर चुनाव मैदान में उतारा है और उनके खिलाफ कांग्रेस ने अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतार कर खलबली मचा दी है। इस सीट पर अगर बीएसपी ने कुर्मी को अपना उम्मीदवार बनाया तो रीवा की सीट बीजेपी के हाथ से खिसकने की पूरी उम्मीद है। कुल मिला कर विंध्य के राजनीति की बात करें तो यहां पर सामान्य वर्ग का प्रभुत्व रहा है। जब भी रीवा,सीधी और सतना में भाजपा और कांग्रेस ने एक ही वर्ग के लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है तब-तब बीएसपी ने इन सीटों पर पटखनी देने का काम किया है।

24/3/2024204
विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...
भोपाल

विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...

विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव विंध्य (vindhya) हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए अबूझ पहेली रहा है। अब बात लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) की करते हैं बीजेपी ने अपने सभी 29 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जिसमें संसदीय सीट और जातिगत आधार को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। बुधवार को सीधी में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. राजेश मिश्रा को पार्टी ने चुनाव मैदान पर उतार दिया है। लेकिन राजेश मिश्रा को भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पसंद नहीं कर रहे हैं यही कारण है कि बुधवार को उनके नामांकन के लिए सीएम मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला खुद पहुंचे। इस दौरान रोड शो और एक बड़ी जनसभा का आयोजन कर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने का जमकर प्रयास किया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भी भाजपा हाई कमान ने विंध्य में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। पीएम मोदी की जनसभाएं हों अथवा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विंध्य में दौरे हों। भाजपा के इन दोनों बड़े नेताओं ने विंध्य की कमान खुद अपने हाथ में ली जिसका परिणाम ये निकला की विंध्य की जनता ने बीजेपी के खाते में 30 में से 25 सीटें देकर बीजेपी को मालामाल कर दिया। और अब लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही बीजेपी के नेताओं के केन्द्रबिंदु में एक बार फिर विंध्य और वहां की जनता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने अंदर खाने से कई तरह की रणनीति तैयार कर रखी है। इस बात में कोई शक नहीं है कि विंध्य की राजनीति हमेशा कठिन मानी जाती रही है क्योंकि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आवादी विंध्य में ही निवास करती है और भारतीय जनता पार्टी जो ब्राम्हण,बनिया की पार्टी जानी जाती थी वही पार्टी आज पिछड़ा वर्ग समर्थित पार्टी मानी जाने लगी है जिसके कारण सवर्ण वर्ग अब भाजपा से दूर होने लगा है लिहाजा विंध्य में बीजेपी को सीटें जीतने के लिए अपने सभी प्रकार के अस्त्र और शस्त्र इस्तेमाल करने कड़ेंगे।

20/3/2024155
विंध्य की जनता को किसी एक पार्टी पर नहीं विश्वास,BSP का होगा वर्चश्व
भोपाल

विंध्य की जनता को किसी एक पार्टी पर नहीं विश्वास,BSP का होगा वर्चश्व

विधानसभा चुनाव पूरे शबाब पर है। भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपनी तरफ से पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में हैं लेकिन विंध्य की बात करें तो इस बार किसी एक पार्टी पर विंध्य की जनता को विश्वास होता नहीं दिख रहा है (vindhya politics)। दरअसल विंध्य में जातिगत सियासत होती है और यही कारण है कि जो पार्टी जातियों का सही समीकरण बैठाती है उस पार्टी का विंध्य में वर्चश्व होता है। साल 2018 में विंध्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को 30 में 24 सीटें देकर यह बता दिया था कि वो विकास के पक्षधर हैं। लेकिन जब साल 2020 में कांग्रेस की सरकार गिरी और भाजपा की सरकार फिर बनी तब विंध्य की जमकर उपेक्षा की गई। विंध्य से तीन मंत्री बनाए गए लेकिन उनमें सामान्य वर्ग का एक भी मंत्री नहीं था यहीं से विंध्य की जनता ने भाजपा से किनारा करना शुरु कर दिया। हांलाकि भाजपा ने बाद में भरपाई के लिए गिरीश गौतम (girish gautam) को विधानसभा अध्यक्ष बना कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस चुनाव में भाजपा ने विंध्य की कई सीटों में बदलाव किया है तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में बेहतर तरीके से जातिगत समीकरण बैठाया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत है। भाजपा और कांग्रेस के कई उम्मीदवार एक ही वर्ग के आमने सामने हैं। इस बीच बीएसपी ने होशियारी का परिचय देते हुए दोनों पार्टियों की तुलना में अलग वर्ग के प्रत्याशी दिए हैं। रीवा की बात करें तो वहां पर आठ विधानसभा सीटों में भाजपा,कांग्रेस और बीएसपी तीनों ही पार्टियों को इस बार प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। सतना की बात करें तो यहां भी बीएसपी कई सीटों में कड़ा मुकाबला कर रही है खास कर सतना की गणेश सिंह (ganesh singh) जिस सीट से चुनाव मैदान पर हैं उस सीट पर बीएसपी जीतने की स्थिति में दिख रही है। सीधी से भी यही खबर है यहां पर भी बीएसपी उम्मीदवार कठिन चुनौती देने में कामयाब हो रहे हैं और दो सीट बीएसपी सीधी में भी पाती हुई नजर आ रही है। सिंगरौली की बात करें तो वहां की भी कुछ ऐही ही स्थिति है।

9/11/2023133
एक ऐसी विधानसभा सीट जहां पार्टियां बदलती हैं विधायक नहीं
भोपाल

एक ऐसी विधानसभा सीट जहां पार्टियां बदलती हैं विधायक नहीं

मप्र की एक ऐसी विधानसभा सीट है जहां हर पंचवर्षीय में राजनीतिक पार्टियां तो बदल जाती हैं लेकिन विधायक वही रहता है। इस सीट से समाजवादी पार्टी,कांग्रेस पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई लेकिन विधायक वही रहा। इस सीट का नाम सुन कर हैरानी होगी,महाकौशल और विंध्य क्षेत्र का वार्डर भी कहा जा सकता है। यह सीट है मैहर (Maihar) विधानसभा जो शारदामाई का स्थल भी है। और वो विधायक हैं नारायण त्रिपाठी (Narayan Tripathi) जो चुनाव तो लगातार जीतते हैं लेकिन इन्होने हर बार दल बदल कर ही चुनाव जीता है। इस सीट की मान्यता है कि अगर कोई विधायक एक ही पार्टी से चुनाव लड़ता है तो वो चुनाव हार जाता है। तीन अलग-अलग पार्टियों से जीत दर्ज करने वाले विधायक नारायण त्रिपाठी ने इस बार खुद की पार्टी बनाई है VJP (विंध्य जनता पार्टी), नाराण त्रिपाठी उन नेताओं में शामिल हैं जो लगातार एक पार्टी में नहीं रहते दल बदल करते रहते हैं। और इनकी खूबी है कि जिस पार्टी में वो रहते हैं उस पार्टी का भी वो विरोध करते रहते हैं। नारायण त्रिपाठी को किसी भी पार्टी में टिकाऊ नेता के रुप में नहीं देखा जाता है। ये दल बदल की एक मूर्ति हैं। पिछले कुछ महीनों से नारायण त्रिपाठी पृथक विंध्य राज्य की मांग करते रहे हैं इसके लिए नारायण त्रिपाठी ने अलग-अलग तरह की मुहिम चलाई,कई यात्राएं भी निकाली लेकिन अभी तक उनको सफलता नहीं मिली है और वो पृथक विंध्य राज्य को लेकर आज भी संघर्ष कर रहे हैं। और यही कारण है कि नारायण त्रिपाठी ने विंध्य के नाम से ही अब अपनी पार्टी का गठन किया है। फिलहाल विंध्य जनता पार्टी की ओर से 25 उम्मीदवारों का ऐलान हो चुका है। नारायण त्रिपाठी का कहना है कि अभी तो शुरुआत है लोकसभा चुनाव में विंध्य जनता पार्टी (Vindhya Janta Party) का विराट रुप देखने को मिलेगा जो प्रदेश की जनता को पसंद भी आएगा। नारायण त्रिपाठी का साफ कहना है कि उन्होने अलग से पार्टी का गठन ही इसलिए किया है क्योंकि उन्हे किसी भी सूरत में पृथक विंध्य राज्य चाहिए और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती तस तक अलग-अलग तरीके से उनका आंदोलन जारी रहेगा और वो विंध्य की जनता के बीच जाकर पृथक विंध्य राज्य की अपनी मांग को दोहराते रहेंगे।

27/10/2023174
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