Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
Topic & Tag Archive

#assembly elections

Total published stories tagged under #assembly elections: 47

ADVERTISEMENT
विजयपुर विधानसभा चुनाव में कड़ी चुनौती पेस करने की तैयारी में कांग्रेस,आदिवासी कार्ड खेलने की बन रही योजना
मध्य प्रदेश

विजयपुर विधानसभा चुनाव में कड़ी चुनौती पेस करने की तैयारी में कांग्रेस,आदिवासी कार्ड खेलने की बन रही योजना

19/8/2024122
प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने दिल्ली में राष्ट्रीय पदाधिकारियों को दिया एमपी चुनाव की जीत का मंत्र
भोपाल

प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने दिल्ली में राष्ट्रीय पदाधिकारियों को दिया एमपी चुनाव की जीत का मंत्र

दिल्ली में आयोजित भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में शामिल हुए मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (mp assembly elections) में भाजपा की डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों और बूथ प्रबंधन की कुशलता से मिले अब तक के सर्वाधिक जनाधार के बारे में जानकारी अन्य पदाधिकारियों से साझा की। इस मौके पर मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में संगठन द्वारा किए गये विभिन्न नवाचारों के साथ प्रत्येक बूथ पर 51% वोटशेयर पाने की गतिविधियों की जानकारी भी दी गई। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेत्रृत्व में प्रदेश के सभी बूथों को डिजिटल करने से लेकर त्रिदेव बनाने की प्रक्रिया चुनाव में काफी असरदार रही है। जिस प्रकार से प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने प्रदेश की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर प्रवास किया और बूथों को मजबूत करने से लेकर केन्द्र सरकार द्वारा संचालित गरीब कल्याण की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम किया उसी का परिणाम है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने न केवल बूथों को डिजिटल किया बल्कि पन्ना प्रभारी और अर्ध पन्ना प्रभारियों की नियुक्ति कर जीत की आधार शिला रखी। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का विधानसभा चुनाव। के दौरान एक और नवाचार देखने को मिला जिसके तहत उन्होने कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन बैठक कर उनके साथ खाना खाया जिससे कार्यकर्ताओं में छोटे और बड़े का भेदभाव भी खत्म हुआ। टिफिन बैठक में सभी कार्यकर्ता अपने घर से खाना लेकर आते थे और एकदूसरे के साथ खाते थे इससे कार्यकर्ताओं के बीच का भेदभाव खत्म करने में काफी मदद मिली। उसके बाद प्रदेश में जब मोदी की गारंटी चली तो प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा की गई मेहनत का फल मिला और भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की।

23/12/2023134
मप्र और छग की विधानसभा में आज से 'ठाकुर' राज
देश-विदेश

मप्र और छग की विधानसभा में आज से 'ठाकुर' राज

भारतीय जनता पार्टी ने मप्र और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज कर सरकार बना ली है (assembly elections)। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने चौकाने वाला निर्णय भी लिया है। छत्तीसगढ़ में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे सबसे सीनियर नेता डॉ. रमन सिंह (Raman Singh) को छत्तीसगढ़ विधानसभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उसी प्रकार एमपी में सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे चलने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Toma) rको मप्र विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यानि इससे यह तय हो गया है कि अब मप्र और छत्तीसगढ़ की विधानसभाओं में ठाकुरों का ही राज चलेगा। इस प्रकार का संयोग भी पहली बार देखने को मिला है। एमपी विधानसभा में ज्यादातर पंतित विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं और छत्तीसगढ़ में अभी तक चार विधानसभा अध्यक्ष बने और हर बार अलग-अलग वर्ग के अध्यक्ष बनाए गए हैं और इस बार भी वह प्रक्रिया लगातार जारी है।

20/12/2023166
झोपड़ी में रहने वाला बना विधायक,बाइक से पहुंचा विधानसभा,मंत्री बनने की जताई इच्छा
भोपाल

झोपड़ी में रहने वाला बना विधायक,बाइक से पहुंचा विधानसभा,मंत्री बनने की जताई इच्छा

आज के दौर में भी सही नीयत और अथक परिश्रम की लगन हो तो आप मंजिल हासिल कर सकते हैं। बस आपको सही दिशा में काम करने की जरूरत होती है। इस जज्बे को हकीकत में बदलकर दिखाया है रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट पर जीत हासिल करके कमलेश्वर डोडियार (kamleshwar dodiyar) ने। जिस समय भाजपा और कांग्रेस अपनी-अपनी जीत की खुशी में बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, ऐसे में कमलेश्वर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को आईना दिखा रहे हैं। आज चुनाव रुपया-पैसा, पीआर एजेंसी, महंगी गाड़ियां और दबदबे के बल पर लड़ा जाता है, लेकिन कमलेश्वर डोडियार ने इन सबके आभाव में भी चुनाव जीत लिया है। कमलेश्वर के पास ना तो आलीशान घर, महंगी गाड़ी और ना ही पैसे हैं, उनके पास है तो बस जनता का प्यार। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमलेश्वर डोडियार ने 12 लाख रुपये कर्ज लेकर चुनाव लड़ा। वह झोपड़ी में रहते हैं। सोशल मीडिया पर कमलेश्वर का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वो एक हीरो स्प्लेंडर बाइक पर सवार होकर भोपाल विधानसभा में कागज जमा करने जा रहे हैं। उनकी बाइक पर 'MLA' लिखआ हुआ है। जिस जमाने में एक मामूली नेता भी स्कार्पियो और फॉर्च्यूनर कार लेकर चलते हैं उस जमाने में डोडियार बाइक से सवारी कर रहे हैं। कमलेश्वर डोडियार की जीत खास है क्योंकि वह पूरे प्रदेश में एक मात्र गैर भाजपा-कांग्रेस विधायक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आदिवासी नेता कमलेश्वर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।आदिवासी बहुल सैलाना विधानसभा सीट पर जयस (जय आदिवासी युवा संगठन) से जुड़े कमलेश्वर डोडियार ने भारत आदिवासी पार्टी के बैनर तले चुनाव जीता है। उनकी जीत ने सभी को चौंका दिया है। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर चुनाव जीता है, वहीं भाजपा का प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा (madhya pradesb elections)। चुनाव जीतने के बाद कमलेश्वर डोडियार ने कहा, "यह मतदाताओं की जीत है। मतदाताओं ने भरपूर साथ देकर सैलाना विधानसभा में इतिहास रचा है। जन अपेक्षाओं पर खरा उतर कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाऊंगा। क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिखूंगा।"

9/12/2023102
कोई कुछ भी कहे सीएम तो मामा ही बनेगा...
भोपाल

कोई कुछ भी कहे सीएम तो मामा ही बनेगा...

प्रदेश में इस वक्त हर ब्यक्ति की जुवां पर एक ही सवाल है कि अगला सीएम कौन बनेगा (madhya pradesh cm)। तो भाई लोग इसका जवाब ये है कि अगला सीएम भी कोई और नहीं शिवराज सिंह चौहान ही बनेंगे (shivraj singh chouhan)। जब भाजपा के अलग-अलग नेता दिल्ली दरवार में चक्कर लगा रहे हैं तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन जगहों पर सभाएं ले रहे हैं जहां पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। सीएम शिवराज पहले छिंदवाड़ा दौरे पर गए जहां की भाजपा सातों सीट हार गई है। उसके बाद सीएम शिवराज शिवपुरी भी गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिस प्रकार लाड़ले भांजे भांजियों के सीच प्यार लुटा रहे हैं और लाड़ली बहनों का सम्मान हासिल कर रहे हैं ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी सीएम बदलने का जोखिम नहीं उठा सकती है। सवाल इस बात का भी उठता है कि आखिर में भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व प्रदेश में सीएम क्यों बदलेगा। शिवराज सिंह चौहान पार्टी की तरफ से सीएम चेहरा जरुर घोषित नहीं किए गए थे लेकिन जब चुनाव हुआ तो प्रदेश के सीएम वही थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अकेले करीब डेढ़ सौ विधानसभा सीटों में जाकर पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया। जिस वक्त लोग कह रहे थे कि सरकार विरोधी लहर है तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना लांच की और उसी योजना को गेम चेंजर के रुप में देखा भी जा रहा है। हांलाकि इस बीच प्रदेश में मोदी मैजिक और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की संगठनात्मक शक्ति भी देखने को मिली लेकिन बात वहीं आकर रुप जाती है कि जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रहते भाजपा ने 163 सीटें जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है तो फिर पार्टी सीएम क्यों बदलेगी।

7/12/2023129
करारी हार के बाद कमल नाथ का होगा अध्यक्ष पद से इस्तीफा,पार्टी में उठने लगे बगावती सुर
भोपाल

करारी हार के बाद कमल नाथ का होगा अध्यक्ष पद से इस्तीफा,पार्टी में उठने लगे बगावती सुर

मप्र में चुनाव के नतीजे आने के बाद करारी हार झेल रही कांग्रेस पार्टी में बदलाव की हवा चलने लगी है (madhya pradesh election result)। पार्टी के पदाधिकारी अब पार्टी के नेतृत्व में बदलाव की बात करने लगे हैं। पार्टी के ज्यादातर नेताओं और कार्यकर्ताओं का यही मानना है कि जिस नेता के बल पर वो चुनाव लड़ रहे थे उस नेता के नेतृत्व में पार्टी की इतनी करारी हार के बाद भी वो कैसे अध्यक्ष पद पर बने रह सकते हैं। कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि नैतिकता के आधार पर कमलनाथ (kamal nath) को मतगणना समाप्त होते ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। फिलहाल कमलनाथ दिल्ली में हैं और माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से रायशुमारी करने के बाद पीसीसी चीफ कमलनाथ कभी भी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। कमलनाथ के बाद पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा इस विषय पर भी अभी से मंथन होना शुरु हो गया है। माना यह भी जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी किसी आदिवासी नेता को भी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप सकती है। कुछ नेताओं ने तो दिल्ली दरवार में अभी से हाजिरी लगाना भी शुरु कर दिया है। पूर्व मंत्री उमंग सिंघार (umang singhar) को भी अध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा है। उसके पहले कांग्रेस पार्टी में नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी मंथन हो रहा की पार्टी की तरफ से सदन में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा। नेता प्रतिपक्ष पद की दौड़ में कई नेता शामिल हो चुके हैं जिसमें सबसे पहला नाम पूर्व मंत्री अजय सिंह (ajay singh),जयवर्धन सिंह (jaivardhan singh) और फिर उमंग सिंघार का आ रहा है।

7/12/202394
कांग्रेस के 'पेड' वर्करों के अति उत्साह ने डुबोई कांग्रेस की नैया
भोपाल

कांग्रेस के 'पेड' वर्करों के अति उत्साह ने डुबोई कांग्रेस की नैया

मप्र में जब विधानसभा चुनाव की उल्टी गीनती चल रही थी उसी वक्त कांग्रेस मीडिया विभाग का अति उत्साह पूरे शबाब पर था (congress mp) । उत्साह तो अच्छी बात है लेकिन अति उत्साह हमेशा बरबादी की ओर लेकर ही जाता है। पीसीसी चीफ कमल नाथ (kamal nath) को मीडिया विभाग को दुरुस्त करने के लिए भी एमपी से कोई और नहीं मिला उन्होने दिल्ली में काम करने वाले एक पत्रकार को समन्वयक बनाया। और कांग्रेस कार्यालय में मीडिया विभाग को दुरुस्त करने के लिए बैठा दिया। अब जब कमलनाथ ने किसी को बैठाया है तो अन्य प्रवक्ता उनकी जी हुजूरी में लग गए। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि जिन प्रवक्ताओं ने जी हुजूरी नहीं की उन प्रवक्ताओं को ठिकाने लगा लिया गया। बांकि बचे प्रवक्ताओं ने दिल्ली से आए पेड वर्कर के सामने घुटने टेक दिए। अब पेड वर्कर साहब को खुश करने के लिए कांग्रेस के प्रवक्ता कुछ न कुछ करते रहते। आलम यह रहा कि जितने प्रवक्ता थे वो सब पेड वर्कर के साथ पीसीसी चीफ कमलनाथ की खुसामदी करने में भी जुट गए आलम ये था कि अगर कोई पत्रकार कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस के कमजोर पहलू पर बात करे तो उसे भाजपाई पत्रकार घोषित कर ब्लैक लिष्ट में डाल दिया जाता था और कहा जाता था कि हमारी सरकार आने दो उसके बाद इसको देख लिया जाएगा। दिल्ली से आए पेड वर्कर के अंडर में काम करने वाले प्रवक्ताओं का उत्साह इस सीमा पर पहुंच गया था कि वो पत्रकारों से सीधे मुंहु बात तक नहीं करते थे। आखिर ऐसा हो भी क्यों न। जब टीम का मुखिया आंख में पट्टी बांध ले तो फिर स्थिति में सुधार कैसे आएगा। कांग्रेस मीडिया विभाग पत्रकारों की लिष्ट बनाने में महगूल रहा और उसके ठीक उलट बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल बगैर किसी भेदभाव के सभी पत्रकारों का मान और सम्मान करने में जुटे रहे। स्थिति तो तब और बुरी लगती थी जब कांग्रेस के पेड वर्कर पीसीसी चीफ कमल नाथ को यह बताते थे कि कांग्रेस इस बार 180 सीटों से कम नहीं जीतेगी। और पीसीसी चीफ कमलनाथ जैसा मझा हुआ सियासी खिलाड़ी भी अपने पेड वर्कर की बात को माल लेते थे। कांग्रेस के मीडिया विभाग में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी कांग्रेस मीडिया विभाग भाजपा के मीडिया विभाग को टक्कर देने में नाकाम रहा। यहां तक कि कांग्रेस के प्रवक्ता ठीक तरीके से भाजपा के प्रवक्ताओं का सामना तक नहीं कर पाए। जबकि सत्ता धारी दल के खिलाफ कहने के लिए बहुत कुछ होता है लेकिन कांग्रेस के प्रवक्ता पेड वर्कर की खुशामदी करने में इतने ब्यस्त रहे कि उन्हे पार्टी की बात जनता तक पहुंचाने का वक्त ही नहीं मिला। कुछ प्रवक्ताओं की स्तिति तो यहां तक देखने को मिली कि वो पेड वर्कर के पीछे-पीछे घूमते और उसका बैग उठाते उसके अलावा उनके पास अन्य कोई काम नहीं था (madhya pradesh election result)। ऐसे प्रवक्ताओं की लिष्ट भी Mukhbirmp.con जल्द ही जारी करेगा जो पार्टी का काम करने के बजाय बैग और टिफिन उठाने का काम करते थे।

4/12/2023104
एग्जिट अनुमान अबकी बार 'कमल' की सरकार
भोपाल

एग्जिट अनुमान अबकी बार 'कमल' की सरकार

मप्र में 17 नवंबर को मतदान संपन्न हुए थे तब से अब तक सभी प्रकार के राजनीतिक पंडित अपने-अपने तरीके से गणित लगा रहे थे कि एमपी में अगली किसकी सरकार बन रही है (madhya pradesh elections)। लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को अलग-अलग एजेंसियों का एग्जिट पोल जारी हो गया। एग्जिट पोल (exit polls) में जिस प्रकार से चौकाने वाले आंकड़े आए हैं उसके बाद कांग्रेसी खेमें में खामोशी सी छा गई है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा (mp bjp) में भी तरह-तरह की बातें शुरु हो गई है। दरअसल जिस प्रकार से एग्जिट पोल के अनुमान आया है उसके मुताबिक भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। मतलब साफ है कि एग्जिट पोल के मुताबिक कमलनाथ (kamal nath) की कोई भी गारंटी काम नहीं आई। कांग्रेस के वचन पत्र में महिलाओं,कर्मचारियों,किसानों हर वर्ग को साधने के लिए कुछ न कुछ गारंटी दी गई थी। यह भी बार-बार कहा जा रहा था कि इस बार कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों ने कांग्रेस (mp congress) की बकिया उधेड़ कर रख दी है। कांग्रेस की ओर से एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि भाजपा की साजिश के तहत इस प्रकार के रुझान दर्शाए जा रहे हैं जबकि स्थिति ठीक इसके उलट है। वहीं भाजपा नेताओं की मानें तो उधर खुशी की लहर है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि एग्जिट पोल के अनुमान से भी अच्छे परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे क्योंकि भाजपा की सरकार ने इतने काम किए हैं जिसका परिणाम वोट के रुम में भाजपा के पक्ष में आएगा।

1/12/2023146
एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करतीं पूर्व सीएम उमा भारती
भोपाल

एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करतीं पूर्व सीएम उमा भारती

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती (uma bharti) ने गुरुवार को कहा कि वो एग्जिट पोल (exit poll) पर भरोसा नहीं करतीं हैं। उनका ये बयान पांच राज्यों के एग्जिट पोल जारी होने से पहले आया। पत्रकारों ने जब उनसे एग्जिट पोल के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वह (एग्जिट पोल) भरोसा नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि वे भविष्यवाणी करते हैं कि एक पार्टी 112 से 130 सीटों के बीच जीतेगी। उन्होंने कहा कि अब अगर उस पार्टी को 112 सीटें मिलती हैं और चुनाव हार जाती है, तो एग्जिट पोल करने वालों का दावा है कि वे सही साबित हुए हैं, लेकिन अगर उस पार्टी को 120 सीटें मिलती हैं और वह जीतती है, तो एग्जिट पोल का दावा है कि उनकी भविष्यवाणी सही थी। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा कितनी सीटें जीतेगी, तो उन्होंने कहा कि पार्टी हर सीट जीतने के लिए चुनाव लड़ती है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 और मार्च 2020 के बीच 15 महीने की अवधि को छोड़कर भाजपा 2003 से मध्य प्रदेश में सत्ता में है। मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार गिर गई और भाजपा सत्ता में वापस आ गई।

30/11/2023188
17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार
भोपाल

17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार

मध्य प्रदेश के 17 जिलों के चुनाव परिणाम पर भाजपा और कांग्रेस,दोनों दलों की नजर है (madhya pradesh elections)। 2018 के चुनाव में यहां एकतरफा परिणाम रहे थे। टीकमगढ़,रीवा,सिंगरौली,शहडोल,उमरिया,हरदा,नर्मदापुरम,सीहोर और नीमच जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थी। जबकि मुरैना,अशोक नगर,अनूपपुर,डिंडौरी,छिंदवाड़ा,अलीराजपुर और झाबुआ जिले की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थी। खरगोन जिले की छह में से पांच सीटें कांग्रेस ने तो एक पर कांग्रेस के बागी (केदार डाबर) निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीते थे। अब ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान पर हैं। प्रदेश में बुरहानपुर और आगर जिला ऐसा है, जहां एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा तो एक-एक पर निर्दलीय चुनाव जीते थे। बुरहानपुर जिले में नेपानगर सीट कांग्रेस और बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा चुनाव जीते थे। शेरा अब कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। यही स्थिति आगर जिले में भाजपा के साथ बनी थी। यहां एक सीट भाजपा तो एक निर्दलीय विक्रम सिंह राणा ने जीती थी। राणा इस चुनाव में भाजपा से मैदान में हैं। इस प्रकार 17 जिलों के परिणाम या तो भाजपा के पक्ष में थे या फिर कांग्रेस के।

28/11/2023104
मतगणना से पहले कांग्रेस देगी उम्मीदवारों को ट्रेनिंग
भोपाल

मतगणना से पहले कांग्रेस देगी उम्मीदवारों को ट्रेनिंग

मप्र में 17 नवंबर को वोटिंग हो चुकी है और अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है (madhya pradesh elections)। उसके पहले भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों को मतगणना को ट्रेनिंग देने की योजना बना रहे हैं। जिससे मतगणना के दौरान किसी प्रकार की हेरा फेरी ना होने पाए। दिलचश्प पहलू यह है कि कांग्रेस पार्टी के जितने भी एजेंट मतगणना में मौजूद रहेंगे वो हर राउंड के बाद प्रमाण पत्र लेंगे। कांग्रेस पार्टी की ओर से बकायदा ट्रेनिंग देने का काम किया जा रहा है जिसके लिए 26 तारीख तय की गई है। पार्टी के सभी 230 उम्मीदवार अथवा उनका कोई प्रतिनिधि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 26 नवंबर को आकर ट्रेनिंग लेगा। और फिर वो अपने क्षेत्र में जाकर अन्य कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देगा। ठीक इसी प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने भी रणनीति तैयार की है लेकिन भाजपा के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को भोपाल बुलाने के बजाय उन्हे जिला मुख्यालय में ही ट्रेनिंग देने का काम किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी एक्सपर्टों की टीम सभी जिला मुख्यालयों में भेजेगी जहां उस संबंधित जिले की सभी विधानसभा सीटों के प्रत्याशी और उनके एजेंट मौजूद रहेंगे जिन्हे एक्सपर्टों के माध्यम से ट्रेनिंग दी जाएगी। गौरतलब है कि तीन दिसंबर को प्रदेश भर में मतगणना होने जा रही है (assembly elections results) भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं और उनका दावा खोंखला साबित न होने पाए, मतगणना के दौरान किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाए जिसके कारण भविष्य में पछताना न पड़े इसी लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने की रणनीति तैयार की है। जिसको अमली जामा पहनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस की ओर से काम भी शुरु हो चुका है।

21/11/2023105
एमपी में सियासी जमीन की तलाश में तीसरे दलों ने कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का बिगाड़ा गणित
भोपाल

एमपी में सियासी जमीन की तलाश में तीसरे दलों ने कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का बिगाड़ा गणित

मप्र में मतदान हो चुका है और उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है (mp elections)। साल 2018 की तुलना में इस साल बंपर वोटिंग हुई है जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि लाड़ली बहना योजना के कारण महिलाएं घर से बाहर निकली हैं और भाजपा कज पक्ष में वोट किया है वहीं कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ ने जिस प्रकार से अपने वचन पत्र में गारंटियां दी हैं उसी का परिणाम है कि प्रदेश में बंपर वोटिंग हुई है। खैर किस पार्टी का वर्चश्व होगा वो तो तीन दिसंबर को ही पता चलेगा लेकिन सबसे अहम बात यह है कि मप्र में हुए इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा,आमआदमी पार्टी,सपा सहित कई अन्य दलों ने भी खूब पसीना बहाया और मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं। प्रदेश की करीब दो दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। अकेले विंध्य की दर्जन भर सीटों में त्रृकोणीय मुकाबला देखने को माल रहा है। जिसमें बीएसपी और सपा दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों ने अलग-अलग सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को खासी टक्कर दी है। पूरे एमपी में माना जा रहा है कि बीएसपी की करीब पांच से छह सीटें आने वाली हैं। जिस प्रकार से वोटिंग प्रतिशत आया है उससे दोनों पार्टियों में उत्साह तो खूब है लेकिन अंदर ही अंदर दोनों पार्टियों में चिंता की लकीरें भी देखने को मिल रही हैं। सभी नेता हिसाब लगाने में जुट गए हैं कि वोट प्रतिशत बढ़ा है तो इसका मतलब क्या है?

18/11/202382
Page 1 of 4
PreviousNext Page