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कांग्रेस उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता को पीसीसी चीफ कमलनाथ ने दी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
नर्मदा सेवा सेना के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता (bhupendra gupta) को पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की ओर से मिली जिम्मेदारी के अनुसार भूपेन्द्र गुप्ता को वचन पत्र (congress vachan patra) की जानकारियां जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौपी गई है। जिसके तहत भूपेन्द्र गुप्ता आज नर्मदापुरम में प्रेसवार्ता का आयोजन करेंगे और वचन पत्र में दी गई गारंटी की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने का का करेंगे। इसी प्रकार भूपेन्द्र गुप्ता पांच नवंबर को छिंदवाड़ा और छह नवंबर को बैतूल में प्रेसवार्ताएं आयोजित कर वचन पत्र की हर बात जनता तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। भूपेन्द्र गुप्ता प्रदेश उपाध्यक्ष के रुप में कांग्रेस की ओर से मिलने वाली जिम्मेदारियों का लगातार पालन कर रहे हैं। इससे पहले उनको प्रदेश भर में जन चौपाल लगाने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी जिसके तहत भूपेन्द्र गुप्ता ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में जन चौपाल का आयोजन किया और कांग्रेस पार्टी की बात जनता तक पहुंचाने का काम किया था।

चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को चाहिए 75 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट,भाजपा के लिए आसान
क्रिकेट की तरह ही सियासत की पिच पर भी स्ट्राइक रेट का काफी महत्व होता है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2008, 2013 और 2018) के आंकड़े देखें तों 'स्ट्राइक रेट' में कांग्रेस भाजपा से पीछे है (madhya pradesh elections)। हम बात कर रहे हैं पिछले तीन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के लिहाज से सबसे मजबूत ( तीन में से तीन जीत) सीटों के बारे में। बड़े दिलचश्प हैं ये आंकड़े। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 74 सीटें ऐसी हैं,जिन पर कांग्रेस ने पिछले तीनों चुनाव में जीत दर्ज नहीं की है। वहीं भाजपा के लिए ऐसी सीटों की संख्या केवल 11 है। दूसरी ओर पिछले तीनों चुनावों में जीती जाने वाली भाजपा के सीटों की संख्या 58 है,जबकि कांग्रेस के खाते में ऐसी सिर्फ 10 सीटें हैं। इसे दूसरे अर्थों में यूं कहा जा सकता है कि कांग्रेस को इस बार सत्ता में आना है, तो 230 नहीं बल्कि 156 (230-74) सीटों में से बहुमत का आंकड़ा 116 छूना होगा। मतलब करीब 75 प्रतिशत स्ट्राइक रेट कांग्रेस को चाहिए होगा। भाजपा के लिए यह समीकरण थोड़ा आसान है। कुल सीटों मे से उसकी कमजोर 11 सीटें हटा दें, तो 219 सीटें रहती हैं, जिनमें 116 पर जीत दर्ज करने पर सरकार बनेगी। वनडे क्रिकेट में स्लाग ओवर्स मतलब आखिरी के ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की आवश्यकता होती है। कुछ ऐसा ही कांग्रेस को उन 61 सीटों पर करना होगा। जहां जहां पिछले तीन चुनावों के आंकड़े के अनुसार परिणाम कुछ भी हो सकता है। 2018 में कांग्रेस इनमें से 41 सीट जीती थी और सत्ता पर आई थी। जबकि भाजपा को सिर्फ 20 पर ही संतोष करना पड़ा था। इस बार भी ये सीट कांग्रेस की झोली में जाती है तो परिणाम कुछ भी हो सकते हैं।

'सियासत में राम' भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ा संग्राम,'सबके हैं राम'
चुनावी माहौल हो और राजनीतिक पार्टियों की जुवान पर भगवान श्रीराम का नाम ना हो ऐसा भारत देश में तो संभव नहीं है। समय-समय पर नेता यह बता देते हैं कि जब तक भगवान राम की क्रिपा उन पर है तब तक तो वो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक ही सकते हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब खुद को हनुमान भक्त कहने वाले कमलनाथ (Kamal Nath) ने छिंदवाड़ा में नामांकन भरने के दौरान सियासी हुंकार भरते हुए कहा, भाजपा नेता तो ऐसे बता रहे हैं कि जैसे राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) उनका हो। कमलनाथ के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि कमलनाथ चुनावी हिंदू हैं और चुनाव देख कर छद्म हिंदुत्व राग अलापने लगते हैं। लेकिन देश की जनता जानती है कि उनकी ही पार्टी ने भगवान राम और राम सेतु के अस्तित्व को नकारा था। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने भी कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण को लटकाने,भटकाने,अटकाने वाले और प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताने वाले कांग्रेस नेता किस मुंह से राम मंदिर पर बात कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को राम मंदिर पर बात करने का अधिकार नहीं है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि बाबरी विध्वंस के बाद भाजपा की चार राज्य सरकारों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। जिसमें मप्र की भाजपा सरकार भी शामिल थी। सरकार को बर्खास्त करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी असंबैधानिक बताया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद बनाने का फिर से संकल्प लिया था। यह निर्णय लेने वाली सरकार में सनातन विरोधी कमलनाथ प्रमुखता से शामिल थे। गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री मिनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कन्या पूजन को नौटंकी बताने वाले कभी भारतीय संस्कृति और सनातन के पक्ष में नहघं हो सकते। कांग्रेस में कभी महिलाओं का सम्मान नहीं हुआ। जबकि भाजपा सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए कानून बनाया। तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त की। प्रदेश में पुलिस भर्ती में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया है।

पहले आप-पहले आप के चक्कर में अटकी भाजपा कांग्रेस की अगली सूची
बड़ी पुरानी कहावत है कि पहले आप -पहले आप। और इस कहावत को चरितार्थ कर रही हैं वर्तमान में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी और भारतीय जनता पार्टी (MP Elections)। दरअसल भाजपा ने चार सूचियों में कुल 136 विधानसभा में अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है (BJP Candidate list)। वहीं कांग्रेस ने पहली सूची में ही 144 नाम का ऐलान कर दिया था (Congress Candidate list)। लेकिन अब भाजपा (mp bjp) और कांग्रेस (mp congress) एक दूसरे का मुंह ताकते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा ने जिन चार सूचियों में 136 नाम का ऐलान किया है उसमें से कुछ नाम पर भाजपा में अब भी संशय की स्थिति बनी है। ठीक इसी तरह कांग्रेस ने भी जिन 144 नाम की घोषणा की है उन नाम को लेकर पार्टी के अंदर ही जमकर गुटबाजी देखने को मिल रही है और कांग्रेस के कुछ उम्मीदवार भाजपा की तुलना में कमजोर नजर आ रहे हैं। इन्हीं सब बातों को रखते हुए भाजपा और कांग्रेस पहले आप- पहले आप के चक्कर में रुके हुए हैं और सोच रहे हैं कि पहले सामने वाली पार्टी अपने पत्ते खोले। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व (BJP meeting) ने एक दिन पहले घंटों तक मंथन किया है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी (congress screening committee) की भी बैठक देर रात तक हुई है जिसमें प्रत्याशियों के चयन पर लगातार मंथन हुआ है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस ने बची हुई 86 सीटों में 49 प्रत्याशियों को फायनल कर लिया है। साथ ही कांग्रेस शिवपुरी और पिछोर के प्रत्याशियों को बदलने पर भी विचार कर रही है। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता और दावेदार सूची के इंतजार में भोपाल के अलग-अलग होटलों में डेरा जमाए हुए हैं और रोजाना कार्यालयों में जाकर सूची के बारे में इधर-उधर पूछते हैं और फिर मायूस होकर होटल के कमरे में फिर चले जाते हैं।

भर्तियों में गड़बड़ी की कांग्रेस कराएगी जांच,युवाओं को साधने के लिए कांग्रेस पार्टी की बड़ी रणनीति
मप्र कांग्रेस कमेटी हर वर्ग को साधने के लिए अलग-अलग तरह के प्लान पर काम कर रही है (MP Congress)। कांग्रेस को इस बात का अहसास है कि युवाओं को अपने पक्ष में कर लिया तो विधानसभा चुनाव में फतह हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर शासकीय भर्तियों में हुई गड़बड़ी की जांच कराई जाएगी (congress vachan patra)। गौरतलब है कि एमपी में बहुचर्चित व्यापम घोटाले (vyapam ghotala) सहित पटवारी चयन परीक्षा (patwari exam) और पुलिस भर्ती सहित अलग-अलग परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के आरोप कांग्रेस पार्टी की ओर से लगाए गए हैं और अब कांग्रेस उसी आरोप को अपना हथियार बना कर चुनाव मैदान में उतरना चाहती है। गौरतलब है कि नई मतदाता सूची के हिसाब से प्रदेश में 14 लाख से अधिक युवा मतदाता जुड़े हैं और कांग्रेस को मालूम है कि इन युवाओं को अपने पक्ष में कर लिया तो चुनाव में फतह हासिल करने से कोई रोक नहीं पाएगा। क्योंकि इस वक्त प्रदेश में बेरोजगारी युवाओं की दुखती रग माना जाता है। जिस प्रकार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में युवाओं का पलायन चल रहा है उससे सरकार के प्रति लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी लिए कांग्रेस पार्टी भर्तियों में गड़बड़ी की जांच की गारंटी दे रही है। कांग्रेस की ओर से इंदौर में एक बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाना है जिसके माध्यम से कांग्रेस इस बात की ब्रैंडिंग करेगी कि कांग्रेस की सरकार बनी तो किस प्रकार से भर्तियों की गड़बड़ी को सामने लाया जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस इंदौर में बड़ा कार्यक्रम कर प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के युवाओं में एक मैसेज देना चाहती है कि कांग्रेस पर विश्वास कीजिए,सरकार बनी तो भर्तियों की गड़बड़ी का खुलासा होकर रहेगा। हांलाकि ये बात और है कि कांग्रेस ने भाजपा की सरकार पर आज तक जितने भी आरोप लगाए हैं उनको सिद्ध करने में कांग्रेस नाकाम रही है इसी लिए कांग्रेस पर प्रदेश की जनता पूरी तरह से विश्वास भी नहीं कर पा रही है। इससे पहले साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने व्यापम घोटाले को मुद्दा बनाया था और जब सरकार बनी तो कांग्रेस व्यापम घोटाले को भूल गई,ना कोई जांच हुई ना कोई खुलासा हुआ जिसके कारण कांग्रेस की गारंटी पर प्रदेश की जनता विश्वास भी नहीं कर पा रही है।

कांग्रेस का 101 वचन, कांग्रेस आएगी खुशहाली लाएगी
जिस वचन पत्र की कांग्रेस पिछले छह महीने से गारंटी दे रही थी वो वचन पत्र आज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने जारी कर दिया है (congress vachan patra)। भोपाल के रविन्द्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कमलनाथ (Kamal Nath),दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh),वचन पत्र कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र सिंह (Rajendra Singh) सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस दौरान पीसीसी चीफ ने वचन पत्र जारी करते हुए 101 गारंटियां दी। अब देखते हैं कांग्रेस के वचन पत्र के मुख्य बिंदु- 1.जय किसान कृषि ऋण माफी योजना को निरंतर रखेंगे। किसानों का 2.00 तक का कर्ज माफ करेंगे। 2.महिलाओं को प्रतिमाह 1500/-रूपए नारी सम्मान निधि के रूप में देंगे। 3.घरेलू गैस सिलेंडर 500/- रूपए में देंगे। 4.इंदिरा गृह ज्योति योजना के अंतर्गत 100 यूनिट माफ और 200 यूनिट हाफ दर पर देंगे। 5.पुरानी पेंशन योजना 2005 ओपीएस प्रारंभ करेंगे। 6.किसानों को सिंचाई हेतु 5 हार्सपॉवर का विद्युत निःशुल्क प्रदान करेंगे। 7.किसानों के बकाया विद्युत देयक माफ करेंगे। 8.किसान आंदोलन एवं विद्युत संबंधी झूठे व निराधार प्रकरणों को वापिस लेंगे। 9.बहुदिव्यांगजनों की पेंशन की राशि बढ़ाकर रूपए 2000/- करेंगे। 10.जातिगत जनगणना कराएंगे। 11. शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देंगे। 12.संत शिरोमणि रविदास के नाम पर कौशल उन्नयन विश्वविद्यालय सागर में स्थापित करेंगे। 13.तेंदूपत्ता की मजदूरी की दर 4000/- रूपए प्रति मानक बोरा करेंगे। 14.पढ़ो-पढ़ाओ योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों के बच्चों को कक्षा 1 से 8वीं तक 500/- रूपए, कक्षा 9वीं-10वीं के लिए 1000/- एवं कक्षा 11वीं-12वीं के बच्चों को 1500/- रूपए प्रतिमाह देंगे। 15.मध्यप्रदेश में स्कूली शिक्षा निःशुल्क करेंगे। 16.आदिवासी अधिूसचित क्षेत्रों में कांग्रेस के कार्यकाल में बना पेसा एक्ट लागू करेंगे। कांग्रेस पार्टी के मुख्य नवीन वचन - किसानों के लिए 1. किसानों को गेहूं का 2600/- और धान का 2500/- रूपए मूल्य देगी। 2. 5 हार्सपॉवर निःशुल्क बिजली देने के साथ 10 हार्सपॉवर तक 50 प्रतिशत छूट देंगे। 3. किसान भाइयों को किसान फ्रेण्डली एप उपलब्ध कराएंगे। 4. नंदिनी गोधन योजना प्रारंभ करेंगे। 2/- रूपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदेंगे। 5. कांग्रेस ने जो 1000 गौशालाएं प्रारंभ की थी जिसे भाजपा ने बंद कर दिया है उन्हें पुनः प्रारंभ करेंगे। 6. गो ग्रास अनुदान बढ़ाएंगे। 7. सहकारी क्षेत्र के माध्यम से दूध खरीदी पर 5/- रूपये प्रति लीटर बोनस देंगे। 8. मछुआरों कृषकों को मत्स्य का अधिकार देंगे। 9. सहकारी संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देंगें। 10. खेतिहर श्रमिकों को फसल रक्षक का नाम देंगे एवं प्रशिक्षण देकर किट देंगे। सिंचाई एवं प्रदेश की नदियाँ 1. सिंचाई क्षमता बढ़ायेंगे एवं समितियों के चुनाव करायेंगे। 2. ताप्ती, तमस एवं वेतबा नदी विकास प्राधिकरण गठित करेंगे। प्रदेश में लुप्त हो रही नदियों के संरक्षण के लिए भागीरथ नदी संरक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करेंगे। 3. माँ नर्मदा संरक्षण अधिनियम बनाएंगे। 4.नर्मदा परिक्रमा परिषद का गठन करेंगे एवं नर्मदा परिक्रमा यात्रा प्रारंभ करेंगे। युवाओं के लिए 1. सरकारी भर्ती का कानून बनाएंगे। 2. 2.00 लाख सरकारी पद भरेंगे। 3. प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-चार नए पद निर्मित कर भरेंगे। 4. प्रदेश के युवाओं को ही सरकारी नौकरी में प्राथमिकता मिले, इस हेतु आगे बढ़ेंगे। 5. प्रतियोगी परीक्षा शुल्क में 100 प्रतिशत छूट देंगे। 6. पिछले 18 वर्षों से लंवित भर्तियां - शिक्षकों, पुलिस, पटवारी, फॉरेस्ट गार्ड, नर्स आदि की भरी जाएंगी। 7.युवा स्वाभिमान के अंतर्गत जरूरतमंद शिक्षित बेरोजगार युवाओं को 1500 से 3000/- रूपए तक प्रतिमाह आर्थिक सहायता 2 वर्ष के लिए देंगे। 8.भोपाल में प्रोफेशनल हब बनाएंगे। 9. मध्यप्रदेश में डिजिटल यूनिवर्सिटी शुरू करेंगे। 10. उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करेंगे। 11. छात्र संघ के नियमित चुनाव कराएंगे। 12.प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए ‘पदक लाओ-पद पाओ’, पदक लाओ-करोड़पति बन जाओ, पदक लाओ-कार जीतो, पदक लाओ-छात्रवृत्ति पाओ योजना आरंभ करेंगे। महिलाओं के लिए 1. बेटियों के विवाह की नई योजना प्रारंभ करेंगे, 1 लाख 1 हजार रूपए की सहायता देंगे। 2. महिलाओं के स्टार्ट अप के लिए रूपए 25.00 लाख तक का ऋण 3 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराएँगे। 3.आवासहीन ग्रामीण महिलाओं को आवास एवं आजीविका के लिए 5000 वर्गफुट का भूखण्ड देंगे। 4.महानगरीय बस सेवा में परिवहन हेतु निःशुल्क पास उपलब्ध कराएंगे। 5.आंगनवाड़ी सहायिका एवं कार्यकर्ताओं को नियमित करने के लिए नियम बनाएंगे। 6.आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं के लिए मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों का नया कैडर बनाकर सेवा से जोड़ेंगे। 7.बेटियों के लिए मेरी बिटिया रानी योजना प्रारंभ करेंगे, उनको 2 लाख 51 हजार की राशि उनके जन्म से विवाह संस्कार होने तक देंगे। स्वास्थ्य 1. स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनायेंगे। प्रदेश के नागरिकों के लिए वरदान स्वास्थ्य बीमा योजना प्रारंभ करंेगे, जिसमें परिवार सहित 25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा एवं 10 लाख का दुर्घटना बीमा शामिल रहेगा। जनसेवक, सरकारी कर्मचारी, अधिकारी एवं पेंशनर्स 1. कर्मचारी एवं अधिकारियों का बीमा कराएंगे। 2. कर्मचारियों की रूकी पदोन्नतियां प्रारंभ करेंगे। 3. कर्मचारियों को चार चरण में समयमान वेतनमान देंगे। आउटसोर्स एवं संविदा कर्मी 1. आउटसोर्स, संविदा, अंशकालीन, दैनिक वेतनभोगी एव मानदेय पर कार्यरत कर्मियों के साथ न्याय करेंगे। पहली कैबिनेट में इनके लिए प्रस्ताव लाएंगे। भूतपूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक 1. भूतपूर्व सैनिकों को सेवा में आरक्षण का लाभ देंगे। खनिज 1. रेत आवंटन की नई नीति बनाएंगे। 2. रेत घोटाले की जांच करेंगे।

विंध्य की राजधानी का चुनावी सर्वे: क्या कहता है विंध्य,अबकी बार किसकी सरकार...
मप्र में विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीति पूरे शबाब पर है (MP Elections)। विंध्य में हर व्यक्ति यही बात कर रहा है अबकी बार किसकी सरकार। विंध्य की तासीर भी ऐसी है कि वहां का एक छोटा सा बच्चा भी राजनीति की बात करता है और उसका राजनीतिक ज्ञान भी कमाल का ही रहता है (Vindhya Range)। गांव में ठंड के सीजन में अलाव जलता है वहां बैठे लोग प्रदेश की राजनीति तय कर देते हैं वो यहां तक बता देते हैं कि इस बार प्रदेश का मुखिया कौन होगा। अब बात करते हैं विंध्य में कौन किस पर भारी पड़ सकता है (Vindhya Politics)। रीवा की त्योंथर विधानसभा सीट में बसपा अथवा भाजपा का वर्चश्व रहता है जब भी कांग्रेस और भाजपा ने त्योंथर से ब्राम्हण को चुनाव मैदान में उतारा है तब हमेशा बसपा ने जीत दर्ज की है। पिछले दो चुनाव से बीजेपी ही जीत दर्ज कर रही है क्योंकि कांग्रेस रमाशंकर पटेल (कुर्मी) को अपना उम्मीदवार बना रही है। और इस चुनाव में फिर कांग्रेस ने भाजपा को वाकओवर देते हुए दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Rama Shankar Patel) को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतार दिया है। देवतालाव की बात करें तो कुर्मी बाहुल सीट है यहां से गिरीश गौतम (Girish Gautam) तीन बार से विधायक हैं लेकिन बसपा यहां से मजबूत रहती है यहां भी अगर भाजपा के बाद कांग्रेस ब्राम्हण को चुनाव मैदान में उतारती है बसपा का उम्मीदवार देवतालाव से जीत दर्ज करता है। मनगंवा आरक्षित सीट है पहले श्रीनिवास तिवारी फिर गिरीश गौतम और अब पंचूलाल प्रजापति (Panchulal Prajapati) वहां से विधायक हैं माना जा रहा है कि गिरीश गौतम ने पंचूलाल प्रजापति को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी ली है इसलिए उन्हे भाजपा एक बार फिर टिकट दे सकती है। मऊगंज आम तौर पर कांग्रेस अथवा बसपा की पारंपरिक सीट मानी जाती है यहां का मतदाता हमेशा चौकाने वाले फैसले करता है। कभी लक्ष्मण तिवारी (Laxman Tiwari) जैसे नेता लोकजन शक्ति पार्टी से चुनाव जीत जाते हैं तो कभी सुखेन्द्र सिंह बन्ना (Sukhendra Singh Banna) कांग्रेस से चुनाव जीत जाते हैं पिछली बार भाजपा उम्मीदवार प्रदीप पटेल (Pradeep Patel) ने मऊगंज से जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में उनका भारी विरोध है,और माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता सुखेन्द्र सिंह बन्ना का दावा ज्यादा मजबूत है। गुढ़ की बात करें तो यहां से भाजपा उम्मीदवार नागेन्द्र सिंह (Nagendra Singh) जीतते रहे हैं और इस चुनाव में उन्होने फिर दावा ठोंक रखा है कांग्रेस की तरफ से कपिध्वज सिंह (Kapidhwaj Singh) का टिकट फायनल हो चुका है,दोनों तरफ से ठाकुर नेता होने के कारण यहां के राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। सिरमौर से बीजेपी की तरफ से दिब्यराज सिंह (Divyaraj Singh) हैं जो दो बार के विधायक हैं,यहां से तीन ब्राम्हण चुनाव मैदान में हैं इसलिए माना जा रहा है कि दिब्यराज एकबार फिर फतह हासिल करने में कामयाब हो सकते हैं।

कांग्रेस में 'धारा 144 लागू' 96 वे विधायकों में 69 को मिला टिकट,सूची में मजबूत उम्मीदवारों की कमी
कांग्रेस पार्टी ने 144 नामों की सूची जारी करते हुए धारा 144 की यादों को ताजा कर दिया है (Congress Candidate list)। इसके उलट भारतीय जनता पार्टी ने चार सूची जारी की जिसमें 39-39,01 और 57 नामों की सूची जारी कर कुल 136 उम्मीदवारों की घोषणा की है (BJP Candidate list)। कांग्रेस पार्टी की सूची में मोहब्बत की दुकान चलाने के लिए एक मुस्लिम उम्मीदवार अरिफ मसूद (Arif Masood) को मौका दिया गया है। कांग्रेस की सूची में यह स्पष्ट नजर आया है कि उनके पास दावेदारों की भारी कमी थी,पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) कहते थे कि दो बार से ज्यादा हारे उम्मीदवारों को टिकट नही दिया जाएगा लेकिन इनमें त्योंथर विधानसभा क्षेत्र से रमाशंकर पटेल (Rama shankar patel) ऐसे उम्मीदवार हैं जो दो बार पहले चुनाव हार चुके हैं और उन्हे तीसरी बार फिर मौका दिया गया है,जबकि यह सीट ब्राम्हण बाहुल सीट मानी जाती है और 35 साल से यहां कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया है। कांग्रेस की पहली सूची में 96 वे विधायकों में 69 को टिकट दिया गया है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) के सामने अवधेश नायक (Avdesh Nayak) को चुनाव मैदान में उतारा,अवधेश नायक भाजपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे हैं। सिंधिया के साथ बीजेपी में गए और फिर वापस कांग्रेस में लौटे बैजनाथ यादव (Baijnath Yadav) को कोलारस से टिकट दिया। सुरखी से परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के ख़िलाफ़ जनपद अध्यक्ष नीरज शर्मा (Neeraj Sharma) को प्रत्याशी बनाया है। नरयावली से कांग्रेस ने पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी पर ही दांव लगाया है। कांग्रेस ने हारे हुए नेताओं को भी टिकट दिया।विजयपुर पूर्व विधायक रामनिवास रावत, जौरा में उपचुनाव हारे पंकज उपाध्याय, अटेर में पूर्व विधायक हेमंत कटारे, मेहगांव में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के भांजे राहुल भदौरिया को प्रत्याशी बनाया… गुना की बमोरी सीट पर पूर्व मंत्री कन्हैया लाल अग्रवाल के बेटे ऋषि अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया,कन्हैया लाल पिछला चुनाव भाजपा के महेन्द्र सिंह सिसोदिया (Mahendra Singh Sisodiya) से हार गए थे। मुंगावली सीट पर भाजपा के पूर्व विधायक रहे स्व. राव देशराज सिंह यादव के बेटे राव यादवेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया,कांग्रेस ने बसपा से चुनाव लड़े नेताओं को भी प्रत्याशी बनाया, ग्वालियर ग्रामीण सीट पर बहुजन समाज पार्टी से पिछला चुनाव लड़े साहब सिंह गुर्जर, भांडेर में पूर्व विधायक फूल सिंह बरैया, पोहरी सीट पर पिछला उपचुनाव लड़े कैलाश कुशवाह, शिवपुरी जिले की पिछोर सीट पर केपी सिंह की जगह शैलेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया,शैलेंद्र के पिता भानु प्रताप सिंह पहले विधायक रह चुके हैं, वर्तमान में शैलेंद्र सिंह नगर पालिका अध्यक्ष हैं। कांग्रेस ने 5 सीटों पर बदलाव किया। कटंगी से टामलाल सहारे की जगह पूर्व सांसद बोध सिंह भगत, गोटेगांव में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की जगह शेखर चौधरी, गुनौर से विधायक शिवदयाल बागरी की जगह जीवन लाल सिद्धार्थ, भगवानपुरा में निर्दलीय विधायक केदार डाबर और झाबुआ में वर्तमान विधायक कांतिलाल भूरिया की जगह बेटे विक्रांत भूरिया (Vikrant Bhuria) को उम्मीदवार बनाया।

आज की सबसे बड़ी भविष्यवाणी- हारे कोई भी लेकिन सरकार तो 'कमल' की ही बनेगी
मप्र सहित पांच राज्यों में कल से आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है (Madhya Pradesh Elections)। अगले 37 दिनों तक प्रदेश में सियासी बुखार जमकर देखने को मिलने वाला है। प्रदेश में जिस प्रकार से भाजपा और कांग्रेस सत्ता हासिल करने के लिए अपने सियासी मोहरे फिट करने में जुटे हैं उससे स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस इस चुनाव को बिल्कुल भी हल्के में नहीं ले रहे हैं। कर्नाटक चुनाव में हार के बाद जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने वहां से सीख ली है तो वहीं कांग्रेस पार्टी अति उत्साहित नजर आ रही है। जो कांग्रेस अभी तक 150-180 सीटों का दावा कर रही थी उसी कांग्रेस के पदाधिकारी कुछ एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वे को वाट्सेप ग्रुपों में वायरल कर खुश हो रहे हैं। दरअसल एक एजेंशी के सर्वे में भाजपा को 104 से 116 सीटें मिलती दिख रही हैं तो वहीं कांग्रेस को 116 से 125 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। इस प्रकार के सर्वे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है। लेकिन उन्हे यह नहीं मालूम कि चुनाव का काउनडाउन अब शुरु हुआ है। जिस भारतीय जनता पार्टी को लड़ाई में नहीं माना जा रहा था उसी भारतीय जनता पार्टी को सर्वे एजेंसियों 104 से 116 सीट तक दे रहे हैं। मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री शिवराज स़िह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) द्वारा ऐन मौके पर शुरु की गई लाड़ली बहना योजना (Ladli Behana Yojana) काम कर गई है जिसके कारण भाजपा के वोटबैंक का ग्राफ बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अलग-अलग तरह की यात्राएं निकाल कर लगातार जनता से संवाद भी किया है। भाजपा महिला मोर्चा (BJP Mahila Morcha) को भी लक्ष्य दे दिया गया है कि वो हर बूथ में जाएं वाट्सेप ग्रुप बनाएं और स्थानीय महिलाओं को ग्रुपों में जोड़ कर केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से महिला हितैषी योजनाओं का जमकर प्रचार करें जिससे महिलाओं को भावनात्मक तरीके से भाजपा से जोड़ा जाए। जनता का दिल जीतने के लिए कांग्रेस (MP Congress) की ओर से भी बहुत सारे अभियान चलाए जाते रहे हैं लेकिन कांग्रेस की कमजोरी यही रही है कि भोपाल में पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) को खुश करने के लिए नेता और कार्यकर्ता तो जुट जाते हैं लेकिन वो अभियान भोपाल से निकलने के बाद कहां जाता है और कहां खत्म होता है इसका पता आज तक नहीं चल पाया है। बात स्पष्ट है कि अगले 37 दिन मध्यप्रदेश में जमकर एमोश्नल ड्रामा देखने को मिलने वाला है। साम-दाम-दंड और भेद सभी इस चुनाव में स्पष्ट रुप से देखने को मिलने वाला है। इस बीच यह बात तय है कि सत्ता के सिंहासन की इस लड़ाई में भाजपा और कांग्रेस कितनी भी मेहनत कर लें लेकिन यह अटल सत्य है कि सरकार 'कमल' की ही बनेगी।

चुनाव आचार संहिता लगने से पहले एक दिन में 53 हजार करोड़ से अधिक का लोकार्पण और भूमिपूजन
प्रदेश की शिवराज सरका हमेशा यही कहती रही है कि वो विकास के माडल पर ही जनता से वोट मांगेगी और प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकार बनाएगी (Shivraj Government)। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब ठीक चुनाव आचार संहिता (Model of Conduct) से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने एक दिन में 53 हजार करोड़ से ज्यादा का शिरान्याश और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के गुफा मंदिर को भी बड़ी सौगात दी और गुफा लोक बनाने का ऐलान किया साथ में सीएम शिवराज ने कहा कि 35 करोड़ की लागत से संत निवास का भी निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद माना जा रहा है कि गुफा मंदिर एक प्रसिद्ध स्थल के रुप में निर्मित होगा जहां देश भर के दर्शनार्थी और पर्यटक पहुंच सकेंगे। वहीं सीएम शिवराज की घोषणाओं और लोकार्पण पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक दिन में मुख्यमंत्री ने 53 हजार करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया है तो 18 साल तक ये क्या कर रहे थे। केके मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकार्पण और भूमिपूजन तो ठीक है लेकिन पहले सरकार ये बताए कि क्या सरकार के पास 53 हजार करोड़ रुपये हैं जिससे इतने सारे विकास कार्य किए जा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि आदर्श आचार संहिता लगने से पहले सरकार एक दिखावा करती है और जिस प्रकार दिया बुझने से पहले खूब फड़फड़ाता है ठीक वही हालत वर्तमान में भाजपा सरकार की है क्योंकि उन्हे भविष्य की जानकारी हो चुकी है कि आगे क्या होने वाला है।

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।

कमलनाथ पर अजय सिंह का 'अजेय' वार,सिद्धार्थ कुशवाहा की नहीं करेंगे मदद
कांग्रेस (MP Congress) विंध्य में काफी कमजोर है और उसकी विंध्य में अगर कोई उम्मीद हैं तो पूर्व मंत्री अजय सिंह (राहुल) भैया (Ajay Singh Rahul)। लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार से अजय सिंह की उपेक्षा हुई है उससे वो खुद परिचित हैं यही कारण है कि राहुल सिंह इस वक्त पार्टी के बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के बजाय खुद की विधानसभा में मेहनत करना ज्यादा जरुरी समझते हैं। मामला अजय सिंह (राहुल) भैया और कमलनाथ (Kamal Nath) के बीच का है। दरअसल कमलनाथ ने अजय सिंह को बुलाकर कहा कि आपको सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (Siddharth Kushwaha) की मदद करनी है जिसके बाद अजय सिंह ने कमलनाथ से सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद करने से साफ इंकार कर दिया। अजय सिंह ने कहा कि जब रैगांव में विधानसभा का उपचुनाव चल रहा था तब उन्होने सिद्धार्थ कुशवाहा से मदद करने के लिए कहा था जबकि उसके रैगांव में करीब दस हजार वोट हैं लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा ने कांग्रेस उम्मीदवार कल्पना वर्मा की किसी भी सूरत में मदद नहीं की। अजय सिंह (राहुल) भैया ने कमलनाथ से यहां तक कहा कि आप चाहो तो मेरा टिकट काट दो अथवा प्रदेश में किसी के भी पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए कहो मैं करुंगा लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद नहीं करुंगा। अजय सिंह के इस प्रकार बात करने से पीसीसी चीफ कमलनाथ भी टेंशन में आ गए हैं। सही मायने में कहा जाए तो कांग्रेस के पास विंध्य में कोई मजबूत नेता नहीं है। साल 2013 के बाद विंध्य में कांग्रेस लगातार कमजोर पड़ती चली गई है। अजय सिंह खुद चुनाव नहीं जीत पाए माना यह भी जा रहा है कि विंध्य में अजय सिंह ने सही तरीके से मेहनत नहीं की तो फिर कांग्रेस पार्टी विंध्य (Vindhya)में ठीक तरीके से परफार्मेंश नहीं कर पाएगी।