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कांग्रेस पार्टी ने 144 नामों की पहली सूची की जारी
भोपाल

कांग्रेस पार्टी ने 144 नामों की पहली सूची की जारी

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए 144 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है (congress candidate list)। पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने पहले ही कहा था कि पितृपक्ष खत्म होते ही और नवरात्रि के पहले दिन ही कांग्रेस पार्टी की सूची जारी होगी और ठीक उसी प्रकार कांग्रेस पार्टी (mp congress) ने सुबह सूची को सार्वजनिक कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने काफी विचार मंथन करते हुए इस सूची में अनुभवी और युवाओं को मौका देने का प्रयास किया है। लहार से डॉ. गोविंद सिंह हैं तो,दतिया से अवधेश नायक गृह मंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे,इसी प्रकार भोपाल मध्य से आरिफ मसूद को दोबारा मौका दिया गया है,कसरावद से पूर्व मंत्री सचिन यादव को फिर चुनाव मैदान में उतारा गया है,पिछोर से शेलेन्द्र सिंह,भितरवार से लाखन सिंह यादव,शिवपुरी से केपी सिंह चुनाव मैदान में हैं,कोलारस से बैजनाथ यादव चुनाल लड़ेंगे,महाराजपुर से नीरज दीक्षित चुनाव लड़ेंगे,मंदसौर से विपिन जैन,अनूपपुर से रमेश सिंह,तराना से महेश परमार चुनाव लड़ेंगे।

15/10/2023585
भाजपा की रणनीति को 'डी-कोड' करने में जुटी कांग्रेस,वरिष्ठ नेताओं के सामने चुनाव लड़ने में घबरा रहे कांग्रेस नेता
भोपाल

भाजपा की रणनीति को 'डी-कोड' करने में जुटी कांग्रेस,वरिष्ठ नेताओं के सामने चुनाव लड़ने में घबरा रहे कांग्रेस नेता

भारतीय जनता पार्टी की दूसरी सूची (BJP Second List) ने ना सिर्फ राजनीतिक पंडितों के गणित को फेल कर दिया है बल्कि कांग्रेस के बड़े रणनीतिकारों को भी टेंशन में लाकर खड़ा कर दिया है। भाजपा की दूसरी सूची में तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित कुल सात सांसदों कों चुनाव मैदान में उतारा गया है। जिसमें चार नेता सीएम उम्मीदवार के रुप में भी देखे जाते हैं। सबसे पहले नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) की बात करें तो वो ग्वालियर-चंबल से पार्टी के बड़े चेहरे हैं और चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक भी हैं। महाकौशल से दो बड़े नेता प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह (Rakesh Singh) हैं दोनों नेता पार्टी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। मालवा की बात की जाए तो यहां से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) को पार्टी ने चुनाव मैदान में उतार कर सभी को चौंका दिया है। विंध्य से बात करें तो सतना से गणेश सिंह (Ganesh Singh) को चुनावी मैदान में उतारा गया है जिन पर कट्टर जातिवादी होने का ठप्पा भी लगा है और भाजपा का यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है। सीधी से दो बार की सांसद रीति पाठक (Riti Pathak) को वरिष्ठ नेता केदारनाथ शुक्ला की जगह मौका दिया गया है। केदारनाथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं लेकिन इस बार पार्टी ने उनकी छुट्टी कर दी है माना यह भी जा रहा है कि केदारनाथ ने अगर बगावती तेवर अपना लिया तो रीति पाठक को चुनाव निकालना मुश्किल हो जाएगा। अब बात करते हैं भाजपा के रणनीति की। साल 2018 में भाजपा को ग्वालियर-चंबल से हार मिली थी इसी लिए 15 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई। अब केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को दिमनी से चुनाव मैदान में उतार कर वहां की अलग-अलग सीटों को कवर करने की योजना है। माना जा रहा है कि सभी जगह नरेन्द्र सिंह तोमर को सीएम उम्मीदवार के रुप में प्रजेंट किया जाएगा तो आसपास की सभी सीटों का लाभ भाजपा को मिलेगा। इसी प्रकार महाकौशल से राकेश सिंह और प्रहलाद पटेल को भी सीएम कैंडीडेट के रुप में प्रजेंट किया जाएगा तो आसपास की सभी सीटों में भाजपा को फायदा होगा। ठीक इसी प्रकार मालवा से कैलाश विजयवर्गीय को चुनाव मैदान में उतार कर महाकौशल को साधने की रणनीति तैयार की गई है। केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते (Faggan Singh Kulaste) को भी चुनाव मैदान में उतार दिया गया है और वो भाजपा की तरफ से बड़ा आदिवासी चेहरा माने जाते हैं। भाजपा की इस रणनीति को अब कांग्रेस 'डी-कोड' करने में जुट गई है। दरअसल ये वो सीटें हैं जहां पर भाजपा को हार मिली थी और इन सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। इन हारी हुई सीटों को भाजपा ने आकांक्षी सीटों का नाम दिया था इसी लिए भाजपा ने इन हारी हुई सीटों पर पहले उम्मीदवारों का ऐलान किया है। अभी तक भाजपा 79 उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के कद्दावर नेताओं के चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस खेमें में हलचल मच गई है। केन्द्रीय मंत्रियों के खिलाफ लड़ने की कांग्रेस नेता हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस की दिल्ली में लगातार बैठक जारी है और माना जा रहा है कि भाजपा की गुत्थी को सुलझाने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकार लगातार लगे हुए हैं।

26/9/2023296
भाजपा की दूसरी लिष्ट जारी होने पर कांग्रेस ने खोया आपा,ट्विटर में बीजेपी नेताओं को लिखा रावण और कुंभकरण
भोपाल

भाजपा की दूसरी लिष्ट जारी होने पर कांग्रेस ने खोया आपा,ट्विटर में बीजेपी नेताओं को लिखा रावण और कुंभकरण

भारतीय जनता पार्टी ने 39 नामों की दूसरी सूची जारी कर दी है (BJP Second List)। भाजपा की दूसरी सूची में तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को मौका दिया गया है। लेकिन भाजपा की सूची जारी होने पर कांग्रेस ने खुद से आपा खो दिया है। दरअसल भाजपा की दूसरी सूची में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar),फग्गन सिंह कुलस्ते (Faggan Singh Kulaste),प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) और राकेश सिंह (Rakesh Singh)जैसे नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतार दिया है (MP Elections)। इन नामों के आते ही कांग्रेस पार्टी ने आपा खो दिया है। एमपी कांग्रेस (MP Congress) ने अपने ऑफिसियल ट्विटर के पोस्ट में लिखा है कि 'हार को सामने देख कर रावण,कुंभकरण,अहिरावण और मेघनाथ को चुनाव मैदान में उतार दिया है' कांग्रेस के ट्वीट से स्पष्ट होता है कि बड़े नेताओं के चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेसी खेमे में बौखलाहट की स्थिति निर्मित हो गई। भाजपा ने जिन उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है उनसे पार पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। यही कारण है कि अब कांग्रेस पार्टी की ओर से भाजपा नेताओं की रावण और कुंभकरण से तुलना की जा रही है। कांग्रेस पार्टी को जिस प्रकार से उम्मीद थी उसके ठीक उलट भाजपा की सूची जारी हुई है। जिन नेताओं को भाजपा ने दूसरी सूची में उम्मीदवार बनाया है उन पर खुद की सीट जीतने का दबाव तो है ही बांकी आसपास की अन्य सीटें जितवाने का दबाव भी उन नेताओं पर है। कांग्रेस के कुछ नेता इन सभी नेताओं पर कटाक्ष कर रहे हैं कुछ का कहना है कि इन सभी नेताओं का अंतिम चुनाव है तो वहीं कुछ नेता कह रहे हैं कि अबकी बार लंका दहन होगा।

26/9/2023270
गंगा जल देकर 11 गारंटी पूरा करने का वचन देगी कांग्रेस
भोपाल

गंगा जल देकर 11 गारंटी पूरा करने का वचन देगी कांग्रेस

एमपी में विधानसभा चुनाव (MP Elections) में अब गंगाजल की एंट्री हो चुकी है। कांग्रेस कार्यकर्ता (MP Congress) गंगाजल के साथ कमलनाथ (Kamal Nath) के 11 वचनों का पर्चा लेकर जनमानस के बीच जाएगें। सरकार बनने के बाद 11 वचनों को पूरा करने का यकीन दिलाएगें। इसकी औपचारिक घोषणा भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में गंगाजल से भरी बोतल और 11 वचन के पोस्टर जारी कर की गई हैं। गंगाजल से भरी बोतलें कांग्रेस कार्यकर्ता इंदौर की सभी 9 विधानसभा क्षेत्र लेकर जाएंगे, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के दस हजार घरों में गंगाजल की बोतल और 11 वचन पत्र के पोस्टर देगें। कांग्रेस ने एक लाख घरों में गंगाजल और 11 वचन पोस्टर भेंट करने का लक्ष्य तय किया है। इंदौर ओबीसी प्रकोष्ठ के लोकसभा अध्यक्ष हिमांशु यादव (Himanshu Yadav) हरिद्वार से गंगाजल की बोतल लेकर भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे (PCC)। यहां उन्होंने गंगाजल की बोतल और उन पर लगे 11 वचन के पर्चे जारी किए। इन पर कमलनाथ की तस्वीर भी है। इसी प्रकार कांग्रेस पार्टी के कुछ अन्य नेता भी प्रचार के अलग-अलग तरीके अपनाने की योजना बना रहे हैं। जिस प्रकार से गंगा जल को हिंदू वर्ग में पवित्रता का प्रतीक माना जाता है ठीक उसी का अनुसरण करते हुए कांग्रेस के और नेता जनता को विश्वास दिलाने के लिए और भी नुस्खे तैयार कर रहे हैं जिससे जनता को विश्वास दिलाया जा सके कि कांग्रेस की सरकार आएगी तो सारे वचन पूरे किए जाएंगे।

21/9/2023172
दलित अत्याचार से सत्ता का रास्ता खोज रही कांग्रेस
भोपाल

दलित अत्याचार से सत्ता का रास्ता खोज रही कांग्रेस

कांग्रेस की ओर से प्रदेश भर में जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) का आगाज 19 सितंबर से हो चुका है। कांग्रेस का यह आक्रोश सिर्फ यात्रा में नहीं दिख रहा है। आक्रोश को लगातार बनाए रखने का जिम्मा प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने उठा लिया है। कांग्रेस प्रभारी हर दूसरे,तीसरे दिन एक प्रेस वार्ता का आयोजन करते हैं और राज्य सरकार की नाकामी को गिनाते हैं। कांग्रेस ने अब अपने जन आक्रोश के निशाने पर दलित और आदिवासी को शामिल किया है। जिन पर हुए अत्याचार को कांग्रेस पार्टी हथियार के रुप में इस्तेमाल कर रही है। बुधवार को कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन कर राज्य सरकार (Shivraj Government) पर जमकर आरोप लगाया। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एक दो घटनाएं हों तो उसको चूक कहा जा सकता है लेकिन दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के अनगित मामले हों तो साफ है कि प्रदेश की सरकार दलित और आदिवासी विरोधी सरकार है। इसी प्रकार कांग्रेस पार्टी ओबीसी की आबादी को भी अपने पक्ष में करने के लिए अलग-अलग उपाय आजमा रही है। ओबीसी वर्ग के सभी नेताओं को कांग्रेस पार्टी ने ऐक्टिव कर दिया है। सभी ओबीसी वर्ग के नेता अपने वर्ग को साधने में जुटे हुए हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी द्वारा एक टीम का गठन कर सभी वर्गों के खिलाफ हुए अत्याचार की लिस्ट तैयार करवाई जा रही है। कांग्रेस का प्रयास है कि जब भी भाजपा सरकार पर आरोप लगाए जाएं तो पार्टी के पास उसके कुछ ठोस प्रमाण जरुर होना चाहिए यही कारण है कि कांग्रेस ने टीम का गठन किया है जिससे वो किसी भी आरोप का बारीकी से अध्ययन करें और फिर उसके बाद खुलासा किया जा सके।

20/9/2023168
जन आक्रोश यात्रा में दलबदलू नेताओं की होगी अग्नि परीक्षा
भोपाल

जन आक्रोश यात्रा में दलबदलू नेताओं की होगी अग्नि परीक्षा

कांग्रेस पार्टी की 19 सितंबर से जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) का आगाज होने जा रहा है। इस यात्रा को सफल बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी (mp congress) ने अपनी सारी ताकत झोंक दी है। यात्रा की निगरानी का जिम्मा खुद प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने उठा रखी है। लेकिन कांग्रेस पार्टी इस यात्रा के माध्यम से एक तीर में दो निशाने भी लगाने जा रही है। दरअसल भाजपा से कांग्रेस में आए उन नेताओं पर कांग्रेस की विशेश नजर रहेगी जिन्होने कांग्रेस ज्वाइन करते समय कांग्रेस कार्यालय में अपने कार्यकर्ताओं की ताकत को दिखाया तो वही ताकत अब अग्नि परीक्षा के रुप में तब्दील हो चुकी है। भाजपा से कांग्रेस में आयातित नेताओं के प्रदर्शन के अनुसार ही पार्टी में उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। कुछ नेता चुनाव की दौड़ में भी शामिल हैं। अभी तक चंद्रभूषण सिंह बुंदेला (Chandra bhushan singh bundela) और रघुनंदन शर्मा (Raghunandan Sharma) को प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। चुनाव से पहले जन आक्रोश यात्रा का बड़ा अभियान है। राज्य स्तर पर इसकी निगरानी प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेलाला कर रहे हैं तो लोकसभा पर्यवेक्षक विधानसभा क्षेत्रों में नजर रखेंगे। इसकी रिपोर्ट केन्द्रीय संगठन को सौपी जाएगी। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अधुसार भाजपा से जो लोग आए हैं,उन्हे अपनी ताकत दिखाने का अवसर भी इस यात्रा के माध्यम से दिया जा रहा है। सभी नेताओं से यह कह दिया गया है की वो अपने समर्थकों को साथ लेकर यात्रा को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। जन आक्रोश में इस दावे को भी परखा जाएगा और इस आधार पर यह भी निर्धारित होगा कि जो लोग चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं,उनका आधार कितना है। इसलिए भाजपा से कांग्रेस में आए नेताओं को अब जन आक्रोश यात्रा अग्नि परीक्षा के रुप में बन गई है। भाजपा से कांग्रेस में आए नेताओं का प्रदर्शन ही संगठन में आगे बढ़ने का आधार होगा।

17/9/2023230
कमलनाथ ने दिया भाजपा को चार नाम,बनावटी,मिलावटी,दिखावटी और सजावटी भाजपा
भोपाल

कमलनाथ ने दिया भाजपा को चार नाम,बनावटी,मिलावटी,दिखावटी और सजावटी भाजपा

कांग्रेस पार्टी ने जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) का रोडमैप जारी कर दिया है। 15 दिनों तक चलने वाली यात्रा 11 हजार 400 किलोमीटर का सफर तय कर प्रदेश की सभी 230 विधानसभा से होते हुए गुजरेगी। हर विधानसभा में भाजपा के नेता जनसभा को आयोजित करेंगे और इसके अलावा वो हर विधानसभा में नुक्कड़ सभाओं का भी आयोजन करेंगे (MP Elections)। यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता घर-घर जाकर भाजपा सरकार के खिलाफ पर्चे वितरित करेंगे जिसमें मंहगाई,बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों का उल्लेख किया जाएगा। इस जन आक्रोश यात्रा के लिए कांग्रेस पार्टी ने अलग-अलग नेताओं को प्रभारी नियुक्त किया है (mp congress)। यात्रा का आगाज गणेश चतुर्थी से किया जाएगा मतलब साफ है कि सनातन को लेकर चल रहे विवाद को कांग्रेस यहां से खत्म करने की कोशिश कर रही है। प्रेसवार्ता को प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ (Kamal Nath) और प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने इतने सालों में सिवाय घोटालों के और कुछ नहीं किया है। पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भाजपा को चार नाम भी दिए। कमलनाथ ने कहा कि भाजपा के चार नाम हैं बनावटी भाजपा,मिलावटी भाजपा,दिखावटी भाजपा और सजावटी भाजपा। कमलनाथ ने साफ शब्दों में कहा कि आज प्रदेश की जनता इस सरकार से परेशान है। बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का माहौल पूरे प्रदेश में है। इंडिया गठबंधन पर जब कमलनाथ से सवाल किए गए तो वो टालते नजर आए और कहा कि अभी हम चुनाव की तैयारी में लगे हैं। कांग्रेस नहीं चाहती की इंडिया गठबंधन का कार्यक्रम भोपाल में हो और उसमें कोई भी गलती हो जिसका खामियाजा कां ग्रेस पार्टी को उठाना पड़े। यात्रा में कई वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी बनाया गया लेकिन महिलाओं को प्रभारी के तौर पर शामिल नहीं किया गया है। हांलाकि इस मामले में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सहयोगी के तौर पर कई महिला नेतृयों को इस यात्रा में जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी।

16/9/2023148
19 सितंबर से 'आक्रोश' में आएगी कांग्रेस,प्रदेश भर में निकाली जाएगी जन आक्रोश यात्रा
भोपाल

19 सितंबर से 'आक्रोश' में आएगी कांग्रेस,प्रदेश भर में निकाली जाएगी जन आक्रोश यात्रा

भारतीय जनता पार्टी को करारा जवाब देने के लिए कांग्रेस पार्टी 19 सितंबर से प्रदेश भर में जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) निकालने जा रही है। भाजपा के जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Aashirwad Yatra) की तर्ज पर कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा प्रदेश के सात स्थान से प्रारंभ होगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी सभा और छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाएं होंगी। इसकी तैयारियों को लेकर शुक्रवार को भोपाल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने यात्रा के प्रभारी,जिला अध्यक्ष, प्रभारी और संगठन मंत्रियों के साथ बैठक की। यात्रा के दौरान घर-घर भाजपा सरकार के विरुद्ध जारी पार्टी का आरोप पत्र जारी किया जाएगा। यात्रा के दौरान मंहगाई,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार,महिलाओं पर अत्याचार,अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के उत्पीड़न की घटनाओं को मुद्दा बना कर भाजपा सरकार को घेरा जाएगा। साथ ही शिवराज सरकार (Shivraj Government) द्वारा की जा रही घोषणाओं की स्थिति भी जनता के बीच रखी जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस सरकार बनने पर विभिन्न वर्गों के हित में जो कदम उठाए जाएंगे,उसे भी प्रचारित किया जाएगा। यात्रा की पूरी रुपरेखा आज पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) और प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला सार्वजनिक करेंगे।

15/9/2023240
कांग्रेस में टिकट के लिए स्थानीय नेताओं की सहमति होगी जरुरी
भोपाल

कांग्रेस में टिकट के लिए स्थानीय नेताओं की सहमति होगी जरुरी

मिशन 2023 फतह करने में जुटी कांग्रेस पार्टी (mp congress) में इन दिनों बड़ी संख्या में बाहरी नेताओं का दाखिला हो रहा है। लेकिन उन्हे चुनाव लड़ने के लिए टिकट तभी मिलेगा जब स्थानीय स्तर पर सहमति बनेगी। दरअसल अलग-अलग क्षेत्रों से कांग्रेस में शामिल हो रहे नेताओं को लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में नाराजगी का आलम देखने को मिल रहा है यही कारण है कि कांग्रेस ने स्थानीय महत्व देते हुए कहा है कि टिकट उसी को दिया जाएगा जिसको लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में सहमति होगी। पार्टी की सदस्यता दिलाने के लिए जिला इकाई के पदाधिकारियों के साथ पहले बैठक की जाती है,फिर उनकी उपस्थिति में ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई जाती है,ताकि विरोध जैसी स्थिति ना बने। प्रत्याशी चयन में भी इसी तरह सावधानी बरती जा रही है। यही कारण है कि संभावित दावेदारों की जानकारी ब्लॉक इकाई तक से लग गई है। कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के साथ भाजपा में जाने वाले नेताओं की बड़ी संख्या में वापसी हो चुकी है। इसमें ग्वालियर,दतिय,शिवपुरी,गुना,अशोकनगर,निवाड़ी,टीकमगढ़,धार,देवास सहित अन्य जिलों के भाजपा से जुड़े नेता अधिक हैं। कोलारस से भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इनके पार्टी में आने से अंदरखाने में चर्चा प्रारंभ हो गई है कि इन नेताओं को कुछ विधानसभा में प्रत्याशी भी बनाया जा सकता है। ऐसे में चुनाव के दौरान इनका विरोध न हो,इसलिए यह तय किया गया है कि स्थानीय स्तर पर सहमति के बिना टिकट नहीं दिया जाएगा। दरअसल जब सिंधिया के साथ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भाजपा में गए थे,तब स्थानीय स्तर पर समीकरण गड़बड़ाए और इसका नुकसान पार्टी को नगरीय निकाय चुनाव में भी उठाना पड़ा। अब तो पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी कह दिया है कि किसी को भी पार्टी में तब तक नहीं लिया जाएगा,जब तक स्थानीय इकाई सहमति नहीं देती है।

10/9/2023179
कमलनाथ की सोशल इंजीनियरिंग ने दावेदारों की बढ़ाई मुश्किलें,अब तक जारी नहीं हुई पहली सूची
भोपाल

कमलनाथ की सोशल इंजीनियरिंग ने दावेदारों की बढ़ाई मुश्किलें,अब तक जारी नहीं हुई पहली सूची

मप्र में समाज के सभी वर्गों को साधने के लिए कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला लागू करेगी। कांग्रेस ने इसके लिए विभिन्न समाजों के अलग-अलग प्रकोष्ठ भी गठित किए हैं। कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के तहत हर समाज के प्रतिनिधि को टिकट देने का प्रयास कर रही है। अब तक हुए मंथन में कांग्रेस ने समाज और जातियों के आधार पर सभी को प्रतिनिधित्व यानि टिकट देने का रोडमैप तैयार किया है। पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने विभिन्न समाज और जातियों के लोगों की जनसंख्या का अनुमान लगाने एजेंसी के जरिए सर्वे भी कराया है। इसे टिकट का आधार बनाया जाएगा। 12 सितंबर को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी। गौरतलब है कि साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद कांग्रेस ने सामाजिक संगठनों,जाति आधारित संगठनों और उनके नेताओं को जोड़ने का काम किया है। कांग्रेस ने पूर्व आईएएस देवेन्द्र कुमार राय (Devendra Kumar Rai) को जिम्मेदारी सौंपी कि वो विलुप्त हो रही जनजातियों का अध्ययन कर उन्हे कांग्रेस के मंच पर लाएं। इसके बाद कांग्रेस ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया, कोरकू भील, भिलाला, गौंड,कोल सहित कई जातियों के सम्मेलन किए। उनके लिए पार्टी संगठन में अलग प्रकोष्ठ भी गठित किया। दूसरे चरण में प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने का एक सर्वे भी कराया है। पार्टी की रणनीति है कि जिस जाति से प्रदेश में दस लाख से अधिक मतदाता हैं,उस वर्ग के व्यक्ति को अनिवार्य रुट से टिकट दिया जाए। पीसीसी चीफ कमलनाथ द्वारा व्यक्तिगत रुप से कराए गए सर्वे से पार्टी को अंदाज लग गया है कि किस विधानसभख क्षेत्र में किस जाति के मतदाताओं की कितनी संख्या है। इस आधार को अब पार्टी टिकट वितरण का आधार बनाएगी। लेकिन कमलनाथ का यह सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला पार्टी के अन्य दावेदारों के गले की फांस बन गया है। जो नेता खुद को बाहुबली मानते थे और उन्हे लगता था कि पार्टी उन्हे टिकट भर दे दे। उसके बाद वो धन-बल के दम पर चुनाव जीत लेंगे लेकिन अब कमलनाथ ने सोशल इंजीनियरिंग का पेंच फंसा कर बाहुबली नेताओं के गले में पट्टा डालने की तैयारी कर ली है।

10/9/2023124
भाजपा की सियासी रोटी में बटर लगाने वाली कांग्रेस के जल रहे हाथ,गृह युद्ध की बनी स्थिति
भोपाल

भाजपा की सियासी रोटी में बटर लगाने वाली कांग्रेस के जल रहे हाथ,गृह युद्ध की बनी स्थिति

चुनाव करीब आते-आते भाजपा और कांग्रेस में पलायन का दौर तेज होता जा रहा है (MP Election 2023)। कांग्रेस (mp congress) के बड़े नेता अपने नंबर बढ़वाने के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हे कांग्रेस में ज्वाइन तो करवा रहे हैं लेकिन इन कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में शामिल होने के कारण पार्टी में गृह युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई है। ताजा मामला नर्मदापुरम कांग्रेस का है जहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा (Sitasharan Sharma) के भाई गिरिजा शंकर (Girija Shankar Sharma) को सुरेश पचौरी (Suresh Pachouri) की मिली भगत से कांग्रेस की सदस्यता दिला दी गई है और अब वो एक मजबूत दावेदार के रुप में अपना दावा भी ठोंक रहे हैं। लेकिन इनके दावे के कारण कांग्रेस के मूल कार्यकर्ताओं के बीच कलह की स्थिति बन गई है। उसकी बानगी शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (Madhya Pradesh Congress Committee) में देखने को मिली जहां नर्मदापुरम के कांग्रेस प्रवक्ता राजेन्द्र सिंह राठौर कांग्रेस प्रदेश मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) के सामने अपनी भड़ास निकालते नजर आए। राजेन्द्र सिंह राठौर का गुस्सा इतना भारी था कि बार-बार समझाने के बाद भी वो शांत होने के लिए तैयार नहीं थे। दरअसल Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा को इस बार भाजपा टिकट नहीं दे रही है,मामले की जानकारी होने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पर जमकर डोरे डाले लेकिन उन्होने भाजपा नहीं छोड़ने का फैसला किया। ऐसी स्थिति में राजनीति में बने रहने के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने अपने भाई गिरिजा शंकर शर्मा को कांग्रेस में जाने के लिए मना लिया। पूर्व विस अध्यक्ष को आशंका है कि इस बार कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाएगी लिहाजा भाई को कांग्रेस में शामिल कर सत्ता का सुख पीछे के दरबाजे से भोगा जा सकता है। अभी तक उनकी रणनीति काफी हद तक कामयाब भी हुई लेकिन गिरिजा शंकर के कांग्रेस में आने से कांग्रेस के गुटों की एकबार फिर कलई खुल गई है। जो कांग्रेस एकजुटता का खोंखला दावा करती दिख रही थी उसी कांग्रेस के अलग-अलग धड़े सतह में आने लगे हैं। पचौरी कांग्रेस,अरुण यादव कांग्रेस,अजय सिंह (राहुल) कांग्रेस, दिग्विजय कांग्रेस, कमलनाथ कांग्रेस और अंत में कांतीलाल भूरिया कांग्रेस। इतने धड़ों में बंटी कांग्रेस अब इस पशोपेश की स्थिति में आ गई है कि भाजपा से आए कार्यकर्ताओं और मूल कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाए। अभी तक सिंधिया के भाजपा में जाने और सिंधिया गुट और मूल भाजपाई कार्यकर्ताओं के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई पर कांग्रेस के नेता चुटकी लेते नजर आ रहे थे लेकिन अब उसी मुहाने पर कांग्रेस भी खड़ी है जिस मुहाने पर भाजपा सिंधिया खेमे को लेकर खड़ी है। मजे की बात यह है कि भाजपा में नेताओं के बीच विवाद रोकने के लिए अलग से टीम है लेकिन कांग्रेस में सबकुछ कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के भरोसे ही रहता है लिहाजा पार्टी के अंदर चल रहे गृह युद्ध को रोकने का काम दिग्विजय सिंह और कमलनाथ को करना है साथ में चुनावी तैयारियों को अंतिम रुप देने का काम भी दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) और कमलनाथ (Kamal Nath) को ही करना है।

9/9/2023198
जातियों के सहारे कांग्रेस,जल्द आयोजित करेगी दो बड़े सम्मेलन
भोपाल

जातियों के सहारे कांग्रेस,जल्द आयोजित करेगी दो बड़े सम्मेलन

प्रदेश में सत्ता पाने के लिए कांग्रेस (mp congress) बड़े मतदाता वर्ग आदिवासी और ओबीसी के सम्मेलन करने जा रही है (congress conference)। ये राज्य स्तरीय सम्मेलन होंगे। आदिवासी सम्मेलन (adivasi sammelan) झाबुआ में तो ओबीसी का सम्मेलन (obc sammelan) भोपाल में आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारी की जिम्मेदारी पार्टी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेताओं को सौंपी गई है। सम्मेलन की तारीख भी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेता ही तय करेंगे। बुंदेलखंड में भी एससी वर्ग का बड़ा कार्यक्रम भी चुनाव अभियान समिति ने प्रस्तावित किया है। प्रदेश में एसटी वर्ग के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं लेकिन इनका प्रभाव 80 सीटों से ज्यादा पर है। ओबीसी मतदाताओं का प्रभाव भी 100 से अधिक सीटों पर है। इसे देखते हुए भाजपा और कांग्रेस, दोनों आदिवासी और ओबीसी वर्ग को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति (congress election committee) ने तय किया है कि आदिवासी बहुल झाबुआ,अलीराजपुर,बड़वानी,खरगोन सहित अन्य जिलों के आदिवासी भाग लेंगे। इसकी तैयारी का जिम्मा चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष कांतीलाल भूरिया को दिया गया है। आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. विक्रांत भूरिया इसमें सहयोगी की भूमिका में होंगे। इसके अलावा भोपाल में आयोजित होने वाले ओबीसी सम्मेलन की जिम्मेदारी कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव को सौंपी गई है। दोनों को कार्यक्रम की रुपरेखा निर्धारित करने के लिए कहा गया है। प्रदेश में कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

8/9/2023127
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