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एमपी बीजेपी में संभालेंगे गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार के विधायक मोर्चा, 17 अगस्त से दमन-दीप में ट्रेनिंग
मध्यप्रदेश में भाजपा मिशन 2023 के लिए कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। भाजपा ने अब नया प्लान तैयार किया है। भाजपा सभी 230 विधानसभा सीटों में एक-एक विधायक तैनात करेगी। विधायकों की ड्यूटी लगाने के लिए 4 क्लस्टर बनाए जाएंगे। भाजपा शासित राज्यों के विधायकों की ड्यूटी मध्यप्रदेश में लगाई जाएगी। उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र के भाजपा विधायकों को मप्र भेजा जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार 15 अगस्त के बाद इन विधायकों को प्रभार की विधानसभा आवंटित कर दी जाएगी। जिन राज्यों में फिलहाल चुनाव नहीं हैं, उन राज्यों के विधायकों को मप्र की जिम्मेदारी दी जाएगी। लोकल फैक्टर की स्क्रीनिंग और डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटी भाजपा दूसरे राज्य के विधायक को फिलहाल इसी महीने सात दिनों के लिए एमपी भेज सकती है। वो प्रभार वाले विधानसभा क्षेत्र में जाकर स्थानीय पदाधिकारियों और समाज के प्रभावशाली लोगों से मिलकर जानकारी जुटाएंगे। कार्यकर्ताओं के बीच से मिले फीडबैक की रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व को देंगे। जो फैक्टर ऐसे हैं, जिनकी वजह से चुनाव में असर पड़ सकता है। इसकी भी रिपोर्ट बनाकर पार्टी को देंगे। दूसरी तरफ जिले की सरकार की दमन-दीप में ट्रेनिंग दी जाएगी। इस साल के विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के तमाम वर्गों के साथ ही भाजपा समर्थित गांव और नगर के जनप्रतिनिधियों को खुश करने में जुटी है। अब दमन-दीप में मप्र के भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की अगले हफ्ते में ट्रेनिंग होगी। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय ने देश भर के जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के लिए राज्यों के अलग-अलग क्लस्टर बनाए हैं। और सभी को ट्रेनिंग खुद जेपी नड्डा देंगे। जानकारी के मुताबिक 17 और 18 अगस्त को दमन-दीप के देवका बीच रिसॉर्ट में दो दिवसीय क्षेत्रीय पंचायत परिषद का आयोजन किया जाएगा। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और टेक्निकल एक्सपर्ट जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को केन्द्र सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए चलाई गई योजनाओं और भविष्य की रणनीति के बारे में बताएंगे।

संविदा कर्मियों के वेतन पर शासकीय अधिकारी लगा रहे पलीता,1500 आयुष चिकित्सकों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी
चार जुलाई को भोपाल में संविदा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण का तोहफा दिया । 22 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए लेकिन पता चला है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार संविदा कर्मचारियों को नियमित के समकक्ष कर्मचारियों के पद के न्यूनतम वेतनमान का सत प्रतिशत वेतन एवं महंगाई भत्ता महंगाई दर के अनुसार दिया जाने का आदेश जारी किया गया है। विभागीय सेटअप मे समकक्ष पद ना होने पर एक अप्रैल 2018 की स्थिति में कर्मचारी की सैलरी अथवा समकक्ष पद निर्धारण के उपरांत पद के वेतनमान के शत प्रतिशत में से जो भी अधिक हो उसे वेतन मानते हुए महंगाई दर दिए जाने का निर्णय एवं दिशा निर्देश जारी किए गए थे । संविदा आयुष चिकित्सक संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले 15 से 20 वर्षों से काम कर रहे आयुष चिकित्सा अधिकारियों जो ओपीडी एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं उन सभी आयुष चिकित्सकों को मेडिकल सोशल वर्कर की श्रेणी में डालकर उनके मान सम्मान एवं वेतनमान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जो कतई बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब राज्य सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एवं विभागीय सेटअप में आयुष चिकित्सा अधिकारियों (आयुर्वेदिक चिकित्सा/ होम्योपैथिक चिकित्सा /यूनानी चिकित्सा )के समकक्ष 5400 ग्रेड पे एवं ₹56100 न्यूनतम वेतनमान पूर्व में 2018 में भी निर्धारित किया जा चुका था फिर वर्तमान पॉलिसी में संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार अधिकारियों को किसने दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेट्री मध्य प्रदेश शासन, स्वास्थ्य मंत्री और अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई संविदा नियमितीकरण पॉलिसी के अनुसार संविदा आयुष चिकित्सकों के भविष्य का निर्धारण करें अन्यथा की स्थिति में मुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत काम होने पर दुखी मन से प्रदेश में कार्यरत सभी आयुष चिकित्सा अधिकारी सामूहिक निर्णय लेंगे, जिसके जिम्मेदार विभागीय अधिकारी होंगे।