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विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...
विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव विंध्य (vindhya) हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए अबूझ पहेली रहा है। अब बात लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) की करते हैं बीजेपी ने अपने सभी 29 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जिसमें संसदीय सीट और जातिगत आधार को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। बुधवार को सीधी में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. राजेश मिश्रा को पार्टी ने चुनाव मैदान पर उतार दिया है। लेकिन राजेश मिश्रा को भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पसंद नहीं कर रहे हैं यही कारण है कि बुधवार को उनके नामांकन के लिए सीएम मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला खुद पहुंचे। इस दौरान रोड शो और एक बड़ी जनसभा का आयोजन कर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने का जमकर प्रयास किया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भी भाजपा हाई कमान ने विंध्य में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। पीएम मोदी की जनसभाएं हों अथवा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विंध्य में दौरे हों। भाजपा के इन दोनों बड़े नेताओं ने विंध्य की कमान खुद अपने हाथ में ली जिसका परिणाम ये निकला की विंध्य की जनता ने बीजेपी के खाते में 30 में से 25 सीटें देकर बीजेपी को मालामाल कर दिया। और अब लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही बीजेपी के नेताओं के केन्द्रबिंदु में एक बार फिर विंध्य और वहां की जनता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने अंदर खाने से कई तरह की रणनीति तैयार कर रखी है। इस बात में कोई शक नहीं है कि विंध्य की राजनीति हमेशा कठिन मानी जाती रही है क्योंकि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आवादी विंध्य में ही निवास करती है और भारतीय जनता पार्टी जो ब्राम्हण,बनिया की पार्टी जानी जाती थी वही पार्टी आज पिछड़ा वर्ग समर्थित पार्टी मानी जाने लगी है जिसके कारण सवर्ण वर्ग अब भाजपा से दूर होने लगा है लिहाजा विंध्य में बीजेपी को सीटें जीतने के लिए अपने सभी प्रकार के अस्त्र और शस्त्र इस्तेमाल करने कड़ेंगे।

चुनावी मिठाई में आएगी खटास,बैंड के शोर पर भी लगेगी लगाम
चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही निर्वाचन आयोग ने अलग-अलग गाइडलाइन तय कर दी है जिससे उम्मीदवारों की समस्याएं बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाल (lok sabha elections) में उम्मीदवारों द्वारा की जा रही फिजूल खर्ची पर भी रोक लगाने की योजना तैयार की है। जिसके तहत बैंड पार्टी से प्रचार-प्रसार किया तो सात हजार रुपये खर्च में जोड़ दिए जाएंगे। वहीं अगर प्रचार के दौरान स्पेशल अंजीर की मिठाई से मुंह मीठा कराया तो एक हजार रुपये जेब खर्च में अलग से जोड़ दिए जाएंगे। निर्वाचन शाखा द्वारा चाय,नास्ता,बैंड,सवारी,पटाखा,मिठाई सहित 400 वस्तुओं की दरें तय कर दी गई हैं। इन दरों को राजनीतिक दलों के समक्ष भी रखा गया है। जिला निर्वाचन शाखा द्वारा इन दरों की सूची तैयार कर ली गई है। जिसे आज निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह की अनुमति के बाद जारी कर दिया जाएगा। दो ढोल के प्रतिदिन 1500 रुपये चार्ज होंगे तो वहीं घोड़ा गाड़ी बुलाने पर 2100 रुपये तक चार्ज किए जाएंगे। इनके अलावा एक कट चाय पांच रुपये,पूड़ी,सब्जी और अचार के 50 रुपये जबकि मीठा लेने पर 16 रुपये अलग जोड़े जाएंगे।

राहुल गांधी ने भाजपा को दिया मुद्दा,लोकसभा चुनाव में 'शक्ति' होगा चुनावी मुद्दा
लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी का काम राहुल गांधी (rahul gandhi) खुद आसान करते चले जा रहे हैं। उनकी भाषाई पकड़ और उनका ज्ञान भारतीय जनता पार्टी के लिए ब्रम्हास्त्र का काम कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुंबई में एक रैली के दौरान कहा कि वो 'शक्ति के विरुद्ध लड़ाई' (rahul gandhi on shakti) लड़ रहे हैं। फिर क्या था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस मामले को ऐस लपका कि राहुल गांधी अब सफाई देते फिर रहे हैं। राहुल गांधी ने जब यह बयान दिया तब उन्हे इस बात का अहसास नहीं था कि भारत में महिलाओं को 'शक्ति' का रुप माना जाता है और राहुल गांधी ने उसी शक्ति के विरुद्ध लड़ाई लड़ने की बात कह कर भारतीय जनता पार्टी का काम आसान कर दिया। जैसे ही पीएम मोदी ने राहुल गांधी को शक्ति विरोधी बताया पूरी भाजपा ने राहुल गांधी पर अटैक करना शुरु कर दिया। राहुल गांधी के बयान पर करारा हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके लिए हर मां-बेटी शक्ति का स्वरुप है और इस शक्ति की रक्षा के लिए वो जान लगा देंगे। पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए खुद को शक्ति का उपासक बताया तो वहीं राहुल गांधी को शक्ति का विनाशक बताया। लोकसभा चुनाव का प्रचार करने के लिए राहुल गांधी जहां भी जा रहे हैं वो कुछ ऐसा बयान दे देते हैं जिससे भाजपा का काम आसान हो जाता है।

कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक,18 सीटों पर अब तक तय नहीं हो पाए उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी से चुनावी तैयारियों में पिछड़ी कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति (congress working committee) की बैठक दिल्ली में आयोजित होने जा रही है जिसमें एमपी के लिए 18 उम्मीदवारों का ऐलान किया जाना है। कांग्रेस अब तक दस उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है 18 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन किया जाना है। एक सीट खजुराहो कांग्रेस पार्टी ने अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी को दिया है। अब तक हुई बैठकों में कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशी नहीं मिले जिसके कारण पार्टी 18 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन करने में नाकाम रही है। कांग्रेस पार्टी को विंध्य में भी उम्मीदवारों को लेकर काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है। सतना छोड़ अन्य सीटों पर कांग्रेस अब भी उम्मीदवारों की खोज करने में लगी हुई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी रीवा से विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को टिकट दे सकती है। ऐसी स्थिति में रीवा का मुकाबला का त्रिकोणीय होने वाला है। सतना में भी मुकाबला त्रिकोणीय होने की बात सामने आ रही है।

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान,एमपी में चार चारण में होगा मतदान
चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव-2024 (lok sabha elections) की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग की घोषणा के मुताबिक 19 अप्रैल से 7 चरणों में वोटिंग होगी. इसके बाद 4 जून को मतों की गिनती होगी और चुनाव के नतीजे घोषित हो जाएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। इस मौके पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एस एस संधू और दूसरे बड़े अधिकारी मौजूद थे। निर्वाचन आयोग लोकसभा चुनाव के लिए कार्यक्रम की घोषणा आज यानी शनिवार को करने की सूचना पहले ही दी थी। गौरतलब है कि मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को खत्म हो रहा है और नई लोकसभा का गठन उससे पहले होना है। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 19 अप्रैल, दूसरे चरण में 26 अप्रैल, तीसरे चरण में 7 मई, चौथे चरण में 13 मई, पांचवें चरण में 20 मई, छठे चरण में 25 और सातवें चरण में 1 जून को वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 21 राज्य में 19 अप्रैल को 102 सीटों पर चुनाव होगा। दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 13 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेश में 89 सीटों पर चुनाव होंगे। तीसरे चरण में 7 मई को कुल 12 राज्यों में 94 सीटों पर चुनाव होंगे. चौथे चरण में 13 मई को कुल 10 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों 96 सीटों पर चुनाव होंगे। जबकि पांचवें चरण में 20 मई को कुल 49 सीटों पर, छठे चरण 26 मई को कुल 57 सीटों पर और सातवें चरण में 1 जून को कुल सीट 57 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा में विधानसभाओं का कार्यकाल जून में अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो रहा है। पिछली बार लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा 10 मार्च को की गयी थी और 11 अप्रैल से सात चरणों में मतदान हुआ था। मतगणना 23 मई को हुई थी. आगामी चुनावों में 10.5 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर करीब 97 करोड़ लोग मतदान करने के पात्र हैं। 1.5 करोड़ पोलिंग कर्मचारी और सुरक्षा स्टाफ इसके लिए लगाए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि 85 वर्ष से अधिक के मतदाता और 40 फीसदी विकलांगता वाले मतदाता अगर मतदान केंद्र पर नहीं आना चाहें तो अपने घर से वोट दे सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि पिछले 11 चुनाव में 3400 करोड़ रुपये जब्त किए गए। इस पूरी रकम में 835 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

धर्म से बात न बने तो जातियों को अलग कर सत्ता तक पहुंचा जा सकता है,ऐसा सोचते हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता
मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी भाजपा और कांग्रेस में इन दिनों जनता के दिल तक उतरने के लिए मुद्दों की तलाश है। भाजपा का स्टैंड तो क्लियर है राम मंदिर और हिंदुत्व लेकिन कांग्रेस अब तक अपना चुनावी एजेंडा तय नहीं कर पाई कि चुनाव में जाकर वो भाजपा का काउंटर कैसे करेगी। ऐसे में शुक्रवार को कांग्रेस का एक कार्यकर्ता पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) के पास टिकट की चाहत लिए पहुंचता है। जीतू पटवारी कहते हैं कि युवा वर्ग चुनाव लड़ने का इच्छुक है अच्छी बात है लेकिन चुनावी समर में जब उतरोगे तो भाजपा के बड़े मुद्दों का काउंटर कैसे करोगे। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ता का जवाब आता है कि भाजपा धर्म की और भगवा की बात करती है जो जनता को पसंद आती है। इसकी काट यही है कि हम लगातार जातियों की बात करें। जाति आधारित जनगणना की बात करे। अलग-अलग वर्गों के पास जाएं बार-बार उनके पिछड़े होने का अहसास दिलाएं और बताएं की जातियों की जनगणना होने से सभी जातियों की संख्या क्लियर हो जाएगी और उससे विकास के नए दरवाजे खुलेंगे। मतलब साफ है कि कांग्रेस के पास भाजपा का काउंटर करने के लिए कुछ नहीं बचा तो डिवाइड एंड रुल की पॉलिसी पर कांग्रेस काम करने लगी मतलब फूट डालो और शासन करो की रणनीति पर कगंग्रेस पार्टी आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी भी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान हर जगह अपने संबोधन में जाति आधारित जनगणना कराने की बात करते हैं। सत्ता पाने के लिए जब धर्म का मुद्दा काम नहीं आया तो कांग्रेस ने जातियों का सहारा लेना शुरु कर दिया है।

रीवा और सतना में जातीय समीकरण के आगे फेल हो सकती है मोदी की 'गारंटी'
विंध्य क्षेत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से हमेशा कठिन माना जाता रहा है। और बात जब चुनाव की आती है तो विंध्य में जातीय समीकरण पूरे शबाब पर आ जाते हैं। बात सतना और रीवा की हो तो कुछ अलग ही समीकरण सामने आते हैं। सतना से भाजपा ने चार बार के सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) को पांचवीं बार चुनाव मैदान में उतार दिया है जो विधानसभा चुनाव में शिकस्त खा चुके हैं फिर भी भाजपा ने उनके नाम पर ही विश्वास दिखाया है। उनके खिलाफ कांग्रेस ने शिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) को चुनाव मैदान में उतारा है दोनों नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं। गणेश सिंह को कट्टर कुर्मी और जातिवादी नेता माना जाता है इसी लिए सतना में अन्य वर्ग के वोटर गणेश सिंह को पसंद नहीं करते। अब पता चल रहा है कि मैहर विधानसभा से कई बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी फिर से चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बना रहे हैं। नारायण त्रिपाठी एक ब्राम्हण नेता हैं और भाजपा कांग्रेस दोनों दलों से ओबीसी नेताओं के चुनाव लड़ने के कारण नारायण त्रिपाठी को ब्राम्हण वोट मिलना तय है। कुछ इसी प्रकार रीवा में भी समीकरण देखने को मिल रहे हैं जहां भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को फिर चुनाव मैदान में उतार दिया है। जनार्दन मिश्रा सरल और सौम्य ब्यक्तित्व के धनी हैं लेकिन उनकी क्षेत्र में उपस्थिति न के बराबर रहती है इसलिए रीवा की जनता उनसे नाराज है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस भी ब्राम्हण उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारने की योजना बना रही है। अगर यहां से कांग्रेस ने किसी DMT वर्ग के नेता यानि मिश्रा,तिवारी अथवा दुबे पर दांव लगाया तो मुकाबला दिलचश्प हो जाएगा। और इनसे हट कर बीएसपी ने अगर किसी कुर्मी वर्ग (पटेल) नेता को चुनाव मैदान में उतार दिया तो मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा और बीएसपी के जीतने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। रीवा और सतना में जिस प्रकार से जातीय समीकरण देखने को मिल रहे हैं उसमें मोदी की 'गारंटी' भी कुछ ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाएगी।

कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल,पूछ रही सवाल क्या गारंटी है टिकट मिला तो आप अंत तक टिके रहेंगे
कांग्रेस पार्टी जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। मंगलवार को कांग्रेस के दस नामों की जारी सूची में स्पष्ट नजर आया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पास आज उम्मीदवारों का अकाल पड़ चुका है (congress lok sabha candidate list) । कांग्रेस पार्टी ने दस उम्मीदवारों में तीन वर्तमान विधायकों को चुनावी मैदान में उतारा है उससे यह तस्वीर साफ हो गई कि कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल पड़ गया है। हार के डर से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह,विवेक तन्खा सहित कई नेताओं ने चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया है। ऊपर से कांग्रेस जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता अगले दिन भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। इसी प्रकार कांग्रेस नेत्रृत्व ने जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह और सागर से अरुणोदय को भी लोकसभा में उतारने की रणनीति बनाई थी लेकिन इन दोनों नेताओं ने ऐन मौके पर कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया। दिल्ली में जब कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक हुई तो सबसे पहले यही सवाल उठा कि जिन नेताओं को वो टिकट देंगे उनकी मैदान में टिके रहने की क्या गारंटी है। पिछले एक हफ्ते से कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार अपने नेताओं को फोन करके सवाल कर रहा है कि चुनाव लड़ने की इच्छा है क्या? और अगर पार्टी आपको टिकट देती है तो क्या आप चुनाव मैदान में डटे रहेंगे। इस प्रकार के कई सवाल कांग्रेस नेत्रृत्व द्वारा संभावित दावेदारों से किए जा रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस की कमर तोड़ने का पूरी तरह से मन बना लिया है। वो लगातार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल कराते जा रहे हैं इसी लिए पूरी कांग्रेस में खलबली मची हुई है। कांग्रेस पार्टी में बचे खुचे नेताओं को सक की नजर से देखा जा रहा है। कोई भी नेता एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर रहा है।

कांग्रेस टिकट देने से पहले पूछ रही पार्टी तो नहीं छोड़ोगे,आज 14 उम्मीदवारों की घोषणा करेगी कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने केन्द्रीय चुनाव समिति (congress cec meeting) की बैठक में एमपी की 14 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर लिया है (congress candidate list)। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक में सोनिया गांधी की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया गया। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर भी शामिल हुए। बैठक के बाद जानकारी देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि 70% सीटों पर नाम तय कर लिए गए हैं। सर्वे के आधार पर जो नाम सर्वश्रेष्ठ थे उन्ही नामों पर सहमति बनी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा से नकुलनाथ एक बार फिर चुनाव मैदान में होंगे। जिन सीटों पर सिंगल नाम थे उन सीटों को भी फायनल कर दिया गया है। कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की कमी का मुद्दा भी इस बैठक में जमकर गर्माया है। कांग्रेस के कई ऐसे दावेदार थे जिन्हे पार्टी लोकसभा में उतारने जा रही थी लेकिन उन्होने नाम की घोषणा से पहले ही कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूर थाम लिया जिसके कारण कांग्रेस पार्टी को उम्मीदवारों की घोषणा करने पर दिक्कत हो रही है। कांग्रेस के नेता एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। टिकट देने से पहले कांग्रेस अपने संभावित दावेदारों से पूछ रही है कि ऐन मौके पर पार्टी छोड़ कर तो नहीं जाओगे। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने मिशन कांग्रेस मुक्त अभियान चला कर कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करने का अभियान चलाया है उससे कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी सहमा हुआ है। कांग्रेस के नेता पूरे दम-खम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने की बात तो कर रहे हैं लेकिन उन्हे यही विश्वास नहीं हो रहा कि जिन्हे वो टिकट दे रहे हैं क्या वास्तव में वो नामांकन के आखिरी दिन तक कांग्रेस पार्टी में रहेंगे अथवा मौके पर पार्टी का दामन छोड़ कर हाथ में फूल तो नहीं थाम लेंगे।

बीजेपी में पांच सीटों पर अब तक नहीं हुआ फैसला,चार में महिला उम्मीदवार की उम्मीद,कांग्रेस की बैठक आज
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए एमपी की 29 लोकसभा सीटों में 24 की घोषणा कर दी है (bjp lok sabha candidate list) । अब पांच सीटों पर संशय की स्थिति बन गई है। केन्द्रीय हाई कमान का मानना है कि कमजोर सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मौका दिया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि इसी लिए भाजपा में बची हुई पांच सीटों के लिए फैसला नहीं हो पार रहा है। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा छोड़ कर बांकी की चार सीटों पर बीजेपी महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतार सकती है (mo bjp)। अभी तक 24 सीटों में चार महिला उम्मीदवारों को भाजपा ने मौका दिया है। पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी और बढ़नी चाहिए इसलिए पांच में चार सीटें महिलाओं के खाते में जाने की संभावना बढ़ गई है। उधर कांग्रेस की बात करें तो अभी तक एक भी प्रत्याशी की घोषणा कांग्रेस पार्टी नहीं कर पाई है। आज दिल्ली में कांग्रेस ने केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक आयोजित की है। जिसमें स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचार कर उसे अंतिम रुप दिया जाएगा। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी,विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम भाग लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के लिए सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में रायशुमारी कराई थी। समन्वयकों ने जिला,ब्लाक इकाइयों के पदाधिकारी,विधायक,विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी,पार्टी के सभी संगठनों के पदाधिकारियों से संभावित दावेदारों से जानकारी ली है।

बीजेपी का अभियान 'मोदी का परिवार' प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने X पर बदली प्रोफाइल
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने एक्स पर अपनी प्रोफाइल बदल दी है। इसके साथ ही बीजेपी ने 'मोदी का परिवार' नाम को अभियान भी बना लिया है (modi ka parivar)। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा अपनी प्रोफाइल में लिखा है 'मोदी का परिवार' गौरतलब है कि पीएम मोदी ने पूरे देश की जनता को अपना परिवार बताया था। जिसके बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने मोदी के परिवार पर निशाना साधा था। लालू के तंज कसने के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी प्रोफाइल को बदला है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को युवाओं का प्रेरणाश्रोत माना जाता हैं और जिस प्रकार से उन्होने अपनी प्रोफाइल बदली है उससे यह साफ है कि अब बीजेपी के अन्य नेता भी अपनी प्रोफाइल बदलेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव और अन्य मंत्रियों ने भी प्रदेश अध्यक्ष के बाद अपनी प्रोफाइल को बदल दिया है। माना जा रहा है कि अब बीजेपी का हर कार्यकर्ता अपनी प्रोफाइल बदलने वाला है।

टिकट वितरण में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का रहा जलवा,जो नाम दिये वो हुए कुबूल
लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने एमपी की 29 सीटों में 24 सीटों की घोषणा कर दी है (mp lok sabha candidate list)। हालाकि इस सूची की बात करें तो भाजपा ने एक बार फिर चौका दिया है। जिस प्रकार से लोगों ने सूची में बदलाव की उम्मीद की थी वैसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। जिन 24 सीटों की घोषणा हुई है उसमें सिर्फ छह सांसदों के टिकट काटे गए हैं। मतलब साफ है कि भाजपा ने सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हुए किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं और प्रदेश की आम जनता को उम्मीद थी कि भाजपा इस चुनाव में काफी कुछ चौकाएगी। लेकिन सभी की उम्मीदों पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने पानी फेर दिया। जिन सांसदों के टिकट कटने का लोग इंतजार कर रहे थे उन सांसदों का टिकट नहीं कटा। हांलाकि एमपी बीजेपी (mp bjp) इस सूची को सर्वश्रेष्ठ बताने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने जिस प्रकार से सीटों का आंकलन किया और अपनी अंतिम सहमति दी उसे केन्द्रीय नेतृत्व ने सहर्स स्वीकार किया। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भोपाल से जरुर उम्मीद की जा रही थी लेकिन उन्हे खजुराहो से ही रिपीट किया गया है। एक बड़ा नाम है जिसकी सभी उम्मीद लगा रहे थे कि उनको भाजपा लोकसभा चुनाव में मौका देगी डॉ. नरोत्तम मिश्रा लेकिन अभी तक घोषित 24 नामों की सूची में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नाम पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने किसी प्रकार से दिलचश्पी नहीं दिखाई है। अभी पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होनी बांकी है अब सभी की नजरें पांच सीटों पर टिकी हैं कि किसका भाग्य उन सीटों पर पलटने वाला है।