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बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व
पिछले कुछ सालों से एमपी बीजेपी में ग्वालियर-चंबल के नेताओं का लगातार प्रभुत्व रहा है। जबकि उसके उलट विंध्य की जनता ने जिस प्रकार से बीजेपी पर विश्वास दिखाया उस हिसाब से एमपी बीजेपी (mp bjp) के नेताओं ने कभी भी विंध्य में किसी भी नेता को पनपने नहीं दिया। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य की कमान खुद हाथ में लेनी पड़ी जिसका नतीया यह निकला कि विंध्य की जनता ने बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रित्व को मायूस नहीं किया और झोली भर कर सीटें दी। राजेन्द्र शुक्ला को छोड़ दिया जाए तो एमपी बीजेपी में जिस प्रकार ग्वालियर-चंबल वाद हावी है उसी का नतीजा है कि विंध्य की जनता को सिर्फ वोटबैंक के रुप में ग्वालियर-चंबल के नेता इस्तेमाल करते रहे हैं। विंध्य क्षेत्र आज भी विकास के मामले में एमपी के अन्य क्षेत्रों से काफी पीछे है। जबकि राजश्व का 30% हिस्सा अकेले विंध्य से राज्य सरकार को मिलता है। ग्वालियर-चंबल की बात करें तो वहां से कद्वार नेताओं में नरेन्द्र सिंह तोमर,डॉ. नरोत्तम मिश्रा,वीडी शर्मा,ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अनेक नाम हैं जो एमपी बीजेपी को चला रहे हैं लेकिन विंध्य में बात करें तो अकेले राजेन्द्र शुक्ला के अलावा ऐसा एक भी चेहरा नहीं है जो बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी में आता हो। जबकि गिरीश गौतम,दिब्यराज सिंह,गणेश सिंह,रीती पाठक जैसे अनेक नेता हैं जो लगातार जीत का पर्चम लहरा रहे हैं लेकिन बीजेपी में इन सभी की हालत क्या है ये किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूभि भी एमपी से रही है। आज जहां सै वो सांसद हैं उस संसदीय क्षेत्र का आधा हिस्सा विंध्य का ही है फिर भी विंध्य को लगातार अनदेखा कर अन्य क्षेत्र के नेताओं को ही बीजेपी में आगे बढ़ाया जाता है। विंध्य में बीजेपी के नेता राजनीतिक पर्यटन में जाते हैं। बड़े-बड़े लच्छेदार भाषण देते हैं और चले आते हैं। क्षेत्र की जनता उन पर विश्वास करके हर बार बीजेपी को झोली भर कर वोट देती है और बाद में उस विंध्य की जनता के हाथ मायूसी ही लगती है। बीजेपी ने विंध्य में जिस राजेन्द्र शुक्ला को आगे बढ़ाया है वो विंध्य के होकर भी नहीं हैं क्योंकि उनको विंध्य की जनता से गंध आती है। वो रीवा की जनता को देखना और मिलना पसंद नहीं करते हैं। मतलब साफ है कि एमपी बीजेपी के नेता चाहते ही नहीं हैं कि विंध्य से कोई मजबूत नेत्रृत्व तैयार हो क्योंकि ऐसा हुआ तो ग्वालियर-चंबल के नेताओं का प्रभुत्व पार्टी में घटने लगेगा।

चुनाव ड्यूटी में लगे शासकीय कर्मचारी कहां डालेंगे वोट,निर्वाचन आयोग ने दी बड़ी सुविधा
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) में मतदान केन्द्रों पर ड्यूटी में तैनात अधिकारी-कर्मचारी उसी केन्द्र पर मतदान कर सकेंगे। उनको विधानसभा चुनाव की तरह डाक मतपत्र से मतदान करने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार चुनाव में तैनात लगभग 15 हजार अधिकारी-कर्मचारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह इलेक्शन ड्यूटी सर्टिफिकेट (सीडीसी) जारी करेंगे। चुनाव आयोग ने डाक मतपत्र की जगह ईवीएम से मतदान कराने की व्यवस्था लागू की है। इससे अधिकारी और कर्मचारियों को लाभ होगा। पिछले विधानसभा चुनाव में 2049 मतदान केन्द्रों के हिसाब से आठ हजार 196 कर्मचारियों का मतदान कराने की जिम्मेदारी दी गई थी,जबकि 20 प्रतिशत अतिरिक्त कर्मचारियों को भी रखा गया था। इस बार मतदान केन्द्रों की तादात बढ़कर 2363 हो गई है। जिसको देखते हुए पुलिसकर्मियों को मिला कर करीब 15 हजार कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाया जाएगा। गौरतलब है कि भोपाल जिले की सातों विधानसभा क्षेत्र सहित सीहोर का एक विधानसभा क्षेत्र मिलाकर भोपाल लोकसभा सीट बनाई है।

अबकी बार 'गणेश' विसर्जन पर ध्यान,फंसी सतना और अब रीवा की बारी
लोकसभा का चुनाव जितना आसान दिख रहा है उतना है नहीं। एमपी में करीब दस ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां पर जीत किसी की भी हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। विंध्य की बात करें तो यहां पर बीजेपी के लिए विधानसभा से ज्यादा कठिन लोकसभा का चुनाव होता चला जा रहा है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर बीजेपी ने एक बार फिर दांव लगाया है और उनके खिलाफ कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। ये वही सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) है जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी पटखनी दी थी। और अब वही दोनों प्रतिद्वंदी एक बार फिर चुनाव मैदान में दो हाथ करने के लाए तैयार हैं। लेकिन इसके ठीक उलट मैहर से चार बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी (narayan tripathi) ने बीएसपी से टिकट लेकर चुनाव में उतने का ऐलान कर दिया है। मतलब साफ है ब्राम्हण बाहुल सीट में दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों ने ओबीसी उम्मीदवार पर दांव लगाया है। ऐसा माना जा रहा है कि सतना के ब्राम्हणों का पूरा वोट नारायण त्रिपाठी के पक्ष में जाएगा। उसके अलावा एससी वर्ग का वोट बीएसपी के नाते नारायण त्रिपाठी के खाते में जाएगा। और अगर ऐसा होता है तो अबकी बार गणेश विसर्जन तय है। गणेश सिंह से स्थानीय जनता काफी नाराज भी है। गणेश सिंह को कट्टर कुर्मी नेता माना जाता है। हांलाकि भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेता संभावित हार को मानने के लिए तैयार नहीं हैं बल्कि उनका यह मानना है कि नारायण त्रिपाठी का चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि गणेश सिंह एक बार फिर सतना से भाजपा का पर्चम लहराने वाले हैं।

छिंदवाड़ा को 'छिन्न भिन्न बाड़ा' बनाने के बाद नकुलनाथ को बीजेपी से 'बी' फार्म जारी करने की तैयारी
सियासत में असंभव कुछ नहीं सबकुछ संभव माना जाता है। और बीजेपी में जिस प्रकार से भर्ती अभियान जारी है उससे स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीतिक पार्टियों को 'छिन्न भिन्न' करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। करीब ढाई महीने में 16 हजार से ज्यादा कांग्रेसियों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। गुरुवार को पहले रीवा के पूर्व सांसद देवराज सिंह (devraj singh) और नागौद से कांग्रेस के पूर्व विधायक यादवेन्द्र भाजपा में शामिल हो गए। इनके बाद शाम को छिंदवाड़ा के कई नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया। पिछले एक हफ्ते के अंदर जिस प्रकार से कमलनाथ (kamal nath) के बेहद करीबी नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है उससे स्पष्ट हो गया है कि दाल में कुछ काला है। पर्दे के पीछे सियासत का ऐसा खेल खेला जा रहा है जिसे लोग देख नहीं पा रहे हैं। कमलनाथ के करीबियों का भाजपा में शामिल होना कोई सामान्य घटना नहीं है। कांग्रेस से बीजेपी में आए कमलनाथ के एक करीबी से जब Mukhbirmp.com की टीम ने संपर्क किया और उसके बाद जब उससे सवाल किया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आप सभी की ज्वाइनिंग के बाद भाजपा की तरफ से नकुलनाथ के नाम से 'बी' फाम जारी कर दिया जाए। जिसके बाद कमलनाथ के करीबी ने मुस्कुराते हुए कहा कि ऐसा हुआ तो वो सबसे ज्यादा खुश होंगे। मतलब साफ है बीजेपी और कमलनाथ के बीच कुछ तो ऐसी खिचड़ी पक रही है जिसके तहत पहले कमलनाथ के सभी समर्थकों को बीजेपी में शामिल कराया जा रहा है और अंत में नकुलनाथ के नाम पर पार्टी 'बी' फाम जारी कर सकती है। क्योंकि राजनीति में असंभव तो कुछ है नहीं सबकुछ संभव है। और जिस प्रकार से कमलनाथ के कट्टर समर्थक थोक में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं उससे तो यही संकेत मिल रहे हैं और कांग्रेस से भाजपा में आए कमलनाथ के समर्थकों के चेहरों की मुस्कान भी कुछ ऐसा ही बयां कर रही है।

रीवा,सतना,अनूपपुर,जबलपुर और छिंदवाड़ा के हजारों कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) से पहले कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर लगातार जारी है। गुरुवार को हजारों की संख्या में रीवा,सतना,अनूपपुर जबलपुर और छिंदवाड़ा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। भाजपा में ज्वाइन करने वाले नेताओं में पूर्व विधायक और जिला पंचायत अध्यक्षों सहित अलग- अलग तरह के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली है। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 15 हजार कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। और यह आंकड़ा ठीक इसके डबल होने की उम्मीद जताई जा रही है। होली के बाद एक बार फिर ज्वाइनिंग का दौर शुरु होगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी (jitu patwari) के पीसीसी चीफ बनने के बाद ऐसा पहला मौका है जब कांग्रेस के कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में बीजेपी का रुख कर रहे हैं। इस पलायन का कारण भी जीतू पटवारी ही बताए जा रहे हैं क्योंकि उनके पीसीसी चीफ बनने के बाद कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है इसके अलावा पार्टी का सत्ता में नहीं आना भी कांग्रेस से पलायन बड़ा कारण बताया जा रहा है।

कमलेश्वर पटेल का बड़ा कारनामा,पत्नी,बेटे और भाई के नाम पर बनवाया छह करोड़ का मुआबजा
सीधी लोकसभा (sidhi lok sabha) से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी एवं कमलनाथ (kamal nath) की 15 महीने की सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहे सिहावल के पूर्व विधायक कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) के ऊपर करोड़ों के भू-अर्जन भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। सिंगरौली कलेक्टर की आधिकारिक वेबसाइट पर धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना हेतु किए गए भू- अर्जन का अपलोड किया गया अवार्ड एवं गणना पत्रक पूरे विंध्य में चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। मुखबिर को मिले दस्तावेजों की सूची में धिरौली कोल ब्लॉक में प्रभावित विभिन्न ग्रामों में कमलेश्वर पटेल की पत्नी प्रीति पटेल उनके सुपुत्र ईशान पटेल सुपुत्री ईशा पटेल एवं भाई अजीत पटेल के नाम करीबन 6 करोड रुपए का मुआबजा तैयार किया गया है। उक्त ग्रामों में कोल उत्खनन हेतु अधिग्रहण की सूचना लगते ही कमलेश्वर पटेल एवं उनके परिजनों के द्वारा गरीब किसानों से बेहद ही मामूली कीमत पर जमीन क्रय कर ली गई और अपने राजनीतिक रसूल का उपयोग कर उन जमीनों पर फर्जी मकान एवं पर संपत्तियां दर्शाकर करोड़ों का मुआबजे का खेल खेलने की एक पूरी साजिश रची गई है। जाहिर है कांग्रेस सरकार में मिले मंत्री पद का रसूक बड़ी मुआबजे प्रतिकार की राशि में कमलेश्वर पटेल के काम आया ऐसे में अब बड़ा सवाल यह उठत है की क्या प्रदेश की भाजपा सरकार मामला प्रकाश में आ जाने के बावजूद संपूर्ण मुआबजा कमलेश्वर पटेल को प्रदान करेगी अथवा मामले की गंभीरता से जांच करवाएगी। सिंगरौली में कमलेश्वर पटेल की ही तरह विभिन्न रसूखदारों ने मुआबजे का अरबों में गबन किया है। मुआबजा प्रभावित ग्रामों में ना तो कमलेश्वर पटेल कभी गए ना ही उनके परिजन नहीं उनके पास बिजली पानी राशन कार्ड जैसी कोई चीज का मुआबजा प्रभावित गांव की है फिर भी स्थानीय लोगों से ज्यादा मुआबजा उनके नाम कैसे तैयार हो गया यह गंभीर प्रश्न है। अन्य नेताओं अधिकारियों मीडिया कर्मियों और पुलिस के लोगों के मुआवजे के बंदर पाट की जानकारी mukhbirmp.com आपके साथ शेयर करता रहेगा। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने जिस प्रकार से भाजपा की सरकार में अवैध तरीके से वैध राशि को निकालने का एक बड़ा शड़यंत्र रचा है उससे स्पष्ट है की इस पूरे मामले में भाजपा के नेताओं का भी हाथ है। इसी लिए अभी तक बीजेपी के किसी भी नेता ने इस मामले में किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया। अब इस पूरे मामले में ईडी की क्या भूमिका रहेगी यह तो वक्त बताएगा। कमलेश्वर पटेल के द्वारा फर्जी तरीके से निकाली जा रही मुआबजे की राशि की लिष्ट यहीं खत्म नहीं होती है। उनके कारनामें और हैं जिन्हे Mukhbir में आगे प्रकाशित किया जाएगा।

विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...
विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव विंध्य (vindhya) हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए अबूझ पहेली रहा है। अब बात लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) की करते हैं बीजेपी ने अपने सभी 29 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जिसमें संसदीय सीट और जातिगत आधार को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। बुधवार को सीधी में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. राजेश मिश्रा को पार्टी ने चुनाव मैदान पर उतार दिया है। लेकिन राजेश मिश्रा को भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पसंद नहीं कर रहे हैं यही कारण है कि बुधवार को उनके नामांकन के लिए सीएम मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला खुद पहुंचे। इस दौरान रोड शो और एक बड़ी जनसभा का आयोजन कर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने का जमकर प्रयास किया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भी भाजपा हाई कमान ने विंध्य में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। पीएम मोदी की जनसभाएं हों अथवा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विंध्य में दौरे हों। भाजपा के इन दोनों बड़े नेताओं ने विंध्य की कमान खुद अपने हाथ में ली जिसका परिणाम ये निकला की विंध्य की जनता ने बीजेपी के खाते में 30 में से 25 सीटें देकर बीजेपी को मालामाल कर दिया। और अब लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही बीजेपी के नेताओं के केन्द्रबिंदु में एक बार फिर विंध्य और वहां की जनता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने अंदर खाने से कई तरह की रणनीति तैयार कर रखी है। इस बात में कोई शक नहीं है कि विंध्य की राजनीति हमेशा कठिन मानी जाती रही है क्योंकि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आवादी विंध्य में ही निवास करती है और भारतीय जनता पार्टी जो ब्राम्हण,बनिया की पार्टी जानी जाती थी वही पार्टी आज पिछड़ा वर्ग समर्थित पार्टी मानी जाने लगी है जिसके कारण सवर्ण वर्ग अब भाजपा से दूर होने लगा है लिहाजा विंध्य में बीजेपी को सीटें जीतने के लिए अपने सभी प्रकार के अस्त्र और शस्त्र इस्तेमाल करने कड़ेंगे।

चुनावी मिठाई में आएगी खटास,बैंड के शोर पर भी लगेगी लगाम
चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही निर्वाचन आयोग ने अलग-अलग गाइडलाइन तय कर दी है जिससे उम्मीदवारों की समस्याएं बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाल (lok sabha elections) में उम्मीदवारों द्वारा की जा रही फिजूल खर्ची पर भी रोक लगाने की योजना तैयार की है। जिसके तहत बैंड पार्टी से प्रचार-प्रसार किया तो सात हजार रुपये खर्च में जोड़ दिए जाएंगे। वहीं अगर प्रचार के दौरान स्पेशल अंजीर की मिठाई से मुंह मीठा कराया तो एक हजार रुपये जेब खर्च में अलग से जोड़ दिए जाएंगे। निर्वाचन शाखा द्वारा चाय,नास्ता,बैंड,सवारी,पटाखा,मिठाई सहित 400 वस्तुओं की दरें तय कर दी गई हैं। इन दरों को राजनीतिक दलों के समक्ष भी रखा गया है। जिला निर्वाचन शाखा द्वारा इन दरों की सूची तैयार कर ली गई है। जिसे आज निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह की अनुमति के बाद जारी कर दिया जाएगा। दो ढोल के प्रतिदिन 1500 रुपये चार्ज होंगे तो वहीं घोड़ा गाड़ी बुलाने पर 2100 रुपये तक चार्ज किए जाएंगे। इनके अलावा एक कट चाय पांच रुपये,पूड़ी,सब्जी और अचार के 50 रुपये जबकि मीठा लेने पर 16 रुपये अलग जोड़े जाएंगे।

राहुल गांधी ने भाजपा को दिया मुद्दा,लोकसभा चुनाव में 'शक्ति' होगा चुनावी मुद्दा
लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी का काम राहुल गांधी (rahul gandhi) खुद आसान करते चले जा रहे हैं। उनकी भाषाई पकड़ और उनका ज्ञान भारतीय जनता पार्टी के लिए ब्रम्हास्त्र का काम कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुंबई में एक रैली के दौरान कहा कि वो 'शक्ति के विरुद्ध लड़ाई' (rahul gandhi on shakti) लड़ रहे हैं। फिर क्या था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस मामले को ऐस लपका कि राहुल गांधी अब सफाई देते फिर रहे हैं। राहुल गांधी ने जब यह बयान दिया तब उन्हे इस बात का अहसास नहीं था कि भारत में महिलाओं को 'शक्ति' का रुप माना जाता है और राहुल गांधी ने उसी शक्ति के विरुद्ध लड़ाई लड़ने की बात कह कर भारतीय जनता पार्टी का काम आसान कर दिया। जैसे ही पीएम मोदी ने राहुल गांधी को शक्ति विरोधी बताया पूरी भाजपा ने राहुल गांधी पर अटैक करना शुरु कर दिया। राहुल गांधी के बयान पर करारा हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके लिए हर मां-बेटी शक्ति का स्वरुप है और इस शक्ति की रक्षा के लिए वो जान लगा देंगे। पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए खुद को शक्ति का उपासक बताया तो वहीं राहुल गांधी को शक्ति का विनाशक बताया। लोकसभा चुनाव का प्रचार करने के लिए राहुल गांधी जहां भी जा रहे हैं वो कुछ ऐसा बयान दे देते हैं जिससे भाजपा का काम आसान हो जाता है।

कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक,18 सीटों पर अब तक तय नहीं हो पाए उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी से चुनावी तैयारियों में पिछड़ी कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति (congress working committee) की बैठक दिल्ली में आयोजित होने जा रही है जिसमें एमपी के लिए 18 उम्मीदवारों का ऐलान किया जाना है। कांग्रेस अब तक दस उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है 18 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन किया जाना है। एक सीट खजुराहो कांग्रेस पार्टी ने अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी को दिया है। अब तक हुई बैठकों में कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशी नहीं मिले जिसके कारण पार्टी 18 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन करने में नाकाम रही है। कांग्रेस पार्टी को विंध्य में भी उम्मीदवारों को लेकर काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है। सतना छोड़ अन्य सीटों पर कांग्रेस अब भी उम्मीदवारों की खोज करने में लगी हुई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी रीवा से विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को टिकट दे सकती है। ऐसी स्थिति में रीवा का मुकाबला का त्रिकोणीय होने वाला है। सतना में भी मुकाबला त्रिकोणीय होने की बात सामने आ रही है।

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान,एमपी में चार चारण में होगा मतदान
चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव-2024 (lok sabha elections) की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग की घोषणा के मुताबिक 19 अप्रैल से 7 चरणों में वोटिंग होगी. इसके बाद 4 जून को मतों की गिनती होगी और चुनाव के नतीजे घोषित हो जाएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। इस मौके पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एस एस संधू और दूसरे बड़े अधिकारी मौजूद थे। निर्वाचन आयोग लोकसभा चुनाव के लिए कार्यक्रम की घोषणा आज यानी शनिवार को करने की सूचना पहले ही दी थी। गौरतलब है कि मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को खत्म हो रहा है और नई लोकसभा का गठन उससे पहले होना है। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 19 अप्रैल, दूसरे चरण में 26 अप्रैल, तीसरे चरण में 7 मई, चौथे चरण में 13 मई, पांचवें चरण में 20 मई, छठे चरण में 25 और सातवें चरण में 1 जून को वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 21 राज्य में 19 अप्रैल को 102 सीटों पर चुनाव होगा। दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 13 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेश में 89 सीटों पर चुनाव होंगे। तीसरे चरण में 7 मई को कुल 12 राज्यों में 94 सीटों पर चुनाव होंगे. चौथे चरण में 13 मई को कुल 10 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों 96 सीटों पर चुनाव होंगे। जबकि पांचवें चरण में 20 मई को कुल 49 सीटों पर, छठे चरण 26 मई को कुल 57 सीटों पर और सातवें चरण में 1 जून को कुल सीट 57 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा में विधानसभाओं का कार्यकाल जून में अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो रहा है। पिछली बार लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा 10 मार्च को की गयी थी और 11 अप्रैल से सात चरणों में मतदान हुआ था। मतगणना 23 मई को हुई थी. आगामी चुनावों में 10.5 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर करीब 97 करोड़ लोग मतदान करने के पात्र हैं। 1.5 करोड़ पोलिंग कर्मचारी और सुरक्षा स्टाफ इसके लिए लगाए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि 85 वर्ष से अधिक के मतदाता और 40 फीसदी विकलांगता वाले मतदाता अगर मतदान केंद्र पर नहीं आना चाहें तो अपने घर से वोट दे सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि पिछले 11 चुनाव में 3400 करोड़ रुपये जब्त किए गए। इस पूरी रकम में 835 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

धर्म से बात न बने तो जातियों को अलग कर सत्ता तक पहुंचा जा सकता है,ऐसा सोचते हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता
मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी भाजपा और कांग्रेस में इन दिनों जनता के दिल तक उतरने के लिए मुद्दों की तलाश है। भाजपा का स्टैंड तो क्लियर है राम मंदिर और हिंदुत्व लेकिन कांग्रेस अब तक अपना चुनावी एजेंडा तय नहीं कर पाई कि चुनाव में जाकर वो भाजपा का काउंटर कैसे करेगी। ऐसे में शुक्रवार को कांग्रेस का एक कार्यकर्ता पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) के पास टिकट की चाहत लिए पहुंचता है। जीतू पटवारी कहते हैं कि युवा वर्ग चुनाव लड़ने का इच्छुक है अच्छी बात है लेकिन चुनावी समर में जब उतरोगे तो भाजपा के बड़े मुद्दों का काउंटर कैसे करोगे। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ता का जवाब आता है कि भाजपा धर्म की और भगवा की बात करती है जो जनता को पसंद आती है। इसकी काट यही है कि हम लगातार जातियों की बात करें। जाति आधारित जनगणना की बात करे। अलग-अलग वर्गों के पास जाएं बार-बार उनके पिछड़े होने का अहसास दिलाएं और बताएं की जातियों की जनगणना होने से सभी जातियों की संख्या क्लियर हो जाएगी और उससे विकास के नए दरवाजे खुलेंगे। मतलब साफ है कि कांग्रेस के पास भाजपा का काउंटर करने के लिए कुछ नहीं बचा तो डिवाइड एंड रुल की पॉलिसी पर कांग्रेस काम करने लगी मतलब फूट डालो और शासन करो की रणनीति पर कगंग्रेस पार्टी आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी भी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान हर जगह अपने संबोधन में जाति आधारित जनगणना कराने की बात करते हैं। सत्ता पाने के लिए जब धर्म का मुद्दा काम नहीं आया तो कांग्रेस ने जातियों का सहारा लेना शुरु कर दिया है।