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शासकीय कर्मचारियों के वोट की भाजपा को नहीं जरुरत,इसी लिए डीए पर नहीं किया विचार
प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने लोकसभा चुनाव में वोट लेने के लिए अलग-अलग वर्गों को साधने का प्लान तैयार कर लिया है। यही कारण है कि मोहन सरकार ने शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को चार फीसदी लंबित डीए देने के मामले में चुप्पी साध ली है। प्रदेश की भाजपा सरकार का सोचना है कि जिस प्रकार से लाड़ली बहनों ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर माला माल किया है ठीक उसी प्रकार से लोकसभा चुनाव में भी लाड़ली बहनें भाजपा के उम्मीदवारों को मोदी के नाम पर वोट देंगी। हाल ही में इसकी झलक पीएम मोदी के भाषण में भी सुनने को मिली जब उन्होने एक बड़ी सभा में कहा कि देश की सभी महिलाएं उनकी बहन और परिवार हैं। मतलब साफ है कि भाजपा को शासकीय कर्मचारियों से ज्यादा देश और प्रदेश की महिलाओं पर विश्वास है। महिलाओं के अलावा भाजपा ने किसानों को भी अपने वोट बैंक का हिस्सा माना है। फरवरी की अंतिम तारीख को पीएम मोदी ने किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि की राशि डाली थी और उसके बाद Mukhbirmp.com ने शिवराज सरकार द्वारा संचालित किसान कल्याण योजना को मोहन सरकार को याद दिलाया तब मोहन सरकार ने भी छह मार्च को किसानों के खाते में डाल दिया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की तरफ से संचालित किसान कल्याण योजना को प्रदेश की मोहन सरकार भूल गई थी जब इस मामले में Mukhbirmp.com ने खबर प्रकाशित की तो उसके अगले दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राशि डालने की घोषणा की और फिर छह मार्च को यह राशि किसानों के खाते में डाल दी गई है। अब भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि प्रदेश की महिलाओं,किसानों और युवाओं को साध लिया जाएगा तो शासकीय कर्मचारियों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। यही कारण है कि प्रदेश की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों के चार फीसदी डीए पर किसी भी प्रकार का फैसला नहीं कर रही है जबकि विधानसभा के बजट सत्र में कर्मचारियों के डीए को लेकर प्राविधान किया गया था लेकिन मोहन सरकार यह मान कर चल रही है कि कर्मचारियों को डीए देने का मतलब सीधे तौर पर फिजूल खर्ची है उससे ज्यादा कुछ नहीं।

विधायकी और प्रदेश महामंत्री पद के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे भगवानदास सबनानी
भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान पदाधिकारी कहे जाने वाले भाजपा नेता भगवानदास सबनानी (bhagwandas sabnani) अब भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से विधायक बन गए हैं। यहां तो ठीक है लेकिन उनके पास पार्टी का प्रदेश महामंत्री का पद पहले से है जिसको वो पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। लेकिन पार्टी ने उन्हे विधायक बनने का भी मौका दिया जिसमें वो फतह हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन अब भगवानदास सबनानी प्रदेश महामंत्री और विधायक पद के बीच संतुलन बनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम का विधायक होने के नाते भगवानदास सबनानी के पास रोजाना सैकड़ों कार्यकर्ता अपना काम लेकर आते हैं लेकिन भगवानदास सबनानी पहले ही पार्टी के कामों में इतना ब्यस्त रहते हैं कि वो कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे पाते हैं जिसके कारण दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के पार्टी कार्यकर्ता और आम नागरिक खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। हमेशा शांत और मुस्कुराते रहने वाले भगवानदास सबनानी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के काफी करीबी माने जाते हैं जिसके कारण कार्यकर्ता उनसे कुछ कहने का साहस भी नहीं जुटा पाते हैं। भगवानदास सबनानी इन दिनों चिड़चिड़े भी होने लगे हैं। पार्टी का काम और फिर विधायकी का काम दोनों एक ब्यक्ति पर आने के कारण ब्यस्तताएं बढ़ गई हैं। और यही उनके चिड़चिड़े होने का कारण भी बताया जा रहा है। इस बात में कोई सक नहीं कि भगवानदास सबनानी एक मेहनती वर्कर हैं लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अब वो सिर्फ प्रदेश महामंत्री नहीं बल्कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के जनप्रतिनिधि भी हैं और उस क्षेत्र की जनता के साथ कार्यकर्ताओं की कुछ जरुरतें होती हैं जिनको पूरा करना जनप्रतिनिधि का ही काम होता है। कई कार्यकर्ता तो बीजेपी कार्यालय में सबनानी से मिलने के दिन भर खड़े रहते हैं लेकिन उनकी मुलाकात सबनानी से नहीं हो पाती। और यही करण है कि भगवानदास सबनानी के दोनों पदों से संतुलन नहीं बना पाने के कारण स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं में निराशा और नाराजगी का माहौल बनने लगा है।

शासकीय कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही 'मोदी की गारंटी' डीए के प्रस्ताव पर अब तक मंजूरी नहीं
मध्यप्रदेश की करीब साढ़े सात लाख कर्मचारियों का डीए पिछले छह महीने से लंबित है जिसके चलते प्रति माह शासकीय सेवकों को चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। विधानसभा चुनाव में आचार संहिता के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डीए को लेकर पैरवी की थी लेकिन निर्वाचन आयोग की तरफ से उसकी अनुमति नहीं मिली थी। कर्मचारियों को लगा था कि चुनाव समाप्त होने के बाद उनका अधिकार उन्हे मिल जाएगा लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि शासकीय सेवकों के डीए का प्रस्ताव सरकार के पास नहीं पहुंचा है। अब तक नई सरकार बनने के बाद तीन से अधिक बार शासकीय सेवकों (mp government employees) के डीए का प्रस्ताव मुख्यसचिव के टेबल पर गया और उसी तरह सीएम मोहन यादव के टेबल पर भी प्रस्ताव गया लेकिन हर बार मुख्यमंत्री ने यह कह कर प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि अभी बजट नहीं है आगे देखेंगे। अब लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने वाली है। अभी तक राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों का चार फीसदी डीए देने पर किसी प्रकार का विचार नहीं किया है। मंत्रालय में मौजूद Mukhbir का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के एक या दो दिन पहले मुख्यमंत्री डीए देने की घोषणा कर सकते हैं जिससे लोकसभा चुनाव में शासकीय सेवकों का वोट लिया जा सके। जबकि सोमवार को मोहन कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी जिसमें धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा अन्य प्रस्तावों पर चर्चा हुई और उनमें सहमति भी बनी लेकिन इस कैबिनेट में भी शासकीय कर्मचारियों के डीए पर सरकार ने मुहर नहीं लगाई है। सरकार का मानना है कि 'मोदी की गारंटी' पर जनता को विश्वास है लिहाजा जनता भाजपा के प्रत्याशियों को ही चुनाव जिताएगी शासकीय सेवकों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। वहीं कर्मचारी संगठनों की नाराजगी अब धीरे-धीरे सतह पर आने लगी है। कर्मचारी नेताओं का साफ कहना है सरकार ने उनको सिर्फ ठगने का काम किया है सिर्फ आश्वासन देने का काम किया जा रहा है जिसे अब कर्मचारी भी समझ चुके हैं।

मोहन यादव ने चुपके से बंद की 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना'
तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) में प्रदेश के किसानों को राहत देने के लिए 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' (mukhyamantri kisan kalyan yojana) शुरु की गई थी जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) साल में तीन बार दो-दो हजार की तीन किस्त किसानों के खाते में डालते थे जो साल में कुल छह हजार रुपये किसानों को मिलती थी। केन्द्र सरकार की तरफ से भी किसान सम्मान निधि संचालित की जा रही है उस योजना में भी दो-दो हजार रुपये की साल में कुल तीन किस्ते ट्रांसफर की जाती हैं। इस प्रकार केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को साल में 12 हजार रुपये खेती के लिए दिए जाते थे। लेकिन प्रदेश में सीएम बदलने के बाद एमपी सरकार की ओर से संचालित की जा रही 'किसान कल्याण' योजना को चुपके से बंद कर दिया गया। किसानों को इस बात की भनक तक नहीं लगी और प्रदेश की राज्य सरकार ने इतनी बड़ी योजना को बंद कर दिया है। इस बात से साफ दिखता है कि लाड़ली बहना योजना (ladli behna yojana) को संचालित करने के लिए अलग-अलग योजनाओं को बंद किया जा रहा है। और को इसकी भनक तक नहीं लग पा रही है। इतना ही नहीं कर्मचारियों का चार फीसदी डीए छह महीने से लंबित है लेकिन राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना के कारण उसका भुगतान भी नहीं कर पा रही है।

'ऐसा लगा जैसे बम फूटा हो' बीजेपी से नाम की घोषणा होने पर बोली अनीता नागर
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए 194वे उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है जिसमें एमपी की 24 सीटें शामिल हैं (bjp lok sabha candidate list)। एमपी की जैसे ही घोषणा हुई तो कुछ उम्मीदवारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रतलाम से अनीता नागर (anita nagar chouhan) को लोकसभा उम्मीदवार बनाया गया है उन्होने उम्मीद ही नहीं की थी कि उनका नाम भी लोकसभा प्रत्याशियों में हो सकता है। अनीता नागर ने कहा कि जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई 'ऐसा लगा जैसे बम फूट गया हो' अनीता नागर एक युवा नेत्री हैं उन्होने खुले तौर पर कहा कि पार्टी उन्हे भी मौका दे सकती है ऐसी उम्मीद उन्होने नहीं की थी। कुछ ऐसा ही हाल भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष दर्शन सिंह चौधरी के साथ भी हुआ। हांलाकि वो टिकट को लेकर काफी समय से कोशिश कर रहे थे। विधानसभा चुनाव में भी दर्शन सिंह ने प्रयास किया था लेकिन बात नहीं बनी और बात बनी तो लोकसभा चुनाव में। दर्शन सिंह का कहना है कि उन्होने अपने जीवन में पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया है कभी फल की उम्मीद नहीं की और उन्हे उम्मीद नहीं थी कि उनके जैसे छोटे कार्यकर्ता को मौका मिलेगा लेकिन भारतीय जनता पार्टी में मोदी हैं तो सबकुछ मुमकिन है। दर्शन सिंह ने कहा कि पार्टी के केन्द्रीय और प्रदेश के नेतृत्व ने उन पर जो विश्वास जताया है उस पर वो पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि भाजपा ने एमपी की 29 में से 24 सीटों की घोषणा की है जिसमें छह सांसदों के टिकट काटे गए हैं। और जिन छह नए लोगों को मौका मिला है वो अभी तक इस बात का विश्वास नहीं कर पा रहे कि पार्टी ने उन्हे लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है।

घर-घर जय श्रीराम कहेंगे बीजेपी नेता,पीएम मोदी की चिट्ठी देकर बताएंगे सरकार की उपलब्धि
मिशन 2024 (lok sabha elections 2024) फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी अब एक बार फिर राम भरोसे है। दरअसल बीजेपी ने एक बड़ा अभियान शुरु किया है जिसके तहत बीजेपी के नेता घर-घर दस्तक देंगे और पीएम मोदी की तरफ से सभी घरों में जय श्रीराम कहेंगे। इतना ही नहीं भाजपा के नेता हर घर में पीएम मोदी की एक चिट्ठी भी लोगों को देंगे जिसमें पीएम मोदी की जनता से भावुक अपील के साथ केन्द्र सरकार की ओर से जनहित में संचालित की जा रही योजनाओं के बारे में भी चिट्ठी में जिक्र किया जाएगा। भाजपा के इस अभियान में मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav),प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) और सभी मंत्री,विधायकों के साथ पार्टी के सभी नेता कार्यकर्ता और पदाधिकारी लोगों के घर में जय श्रीराम करने के लिए पहुंचेंगे। भाजपा का यह अभियान दो मार्च से चार मार्च तक चलेगा और इस दौरान भाजपा के नेता प्रदेश के हर घर पहुंच कर मोदी की चिट्ठी के साथ जय श्रीराम कहेंगे। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने लाभार्थी अभियान का आगाज किया है जिसके जहत भाजपा के सभी नेता घर-घर जाकर पीएम मोदी की तरफ से जय श्रीराम कहेंगे और मोदी की चिट्ठी भी लोगों को सौपेंगे। इस अभियान का आगाज प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने किया है जिसके तहत उन्होने घर-घर जाकर लाभार्थियों से न सिर्फ संपर्क किया है बल्कि केन्द्र सरकार की तरस से संचालित जनहित की योजनाओं के बारे में भी बताया है।

भाजपा की पहली सूची तैयार,आज शाम तक जारी होने की संभावना,विदिशा से होंगे शिवराज
भारतीय जनता पार्टी की पहली सूची तैयार है आज किसी भी वक्त केन्द्रीय नेतृत्व सूची जारी कर सकता है (bjp lok sabha candidate list)। बताया जा रहा है कि करीब 250 सीटों पर केन्द्रीय नेतृत्व ने चर्चा की है जिसमें 100 से 150 सीटें फायनल कर ली गई हैं और अब उन्हे जारी करने की तैयारी है। Mukhbir को मिली सूचना के हिसाब से पहली सूची में वाराणसी से पीएम मोदी,गांदी नगर से अमित शाह और विदिशा से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल किया गया है। पहली सूची में उन सीटों को भी शामिल किया गया है जिनको भाजपा मुस्किल मानती है। मतलब साफ है कि एमपी की छिंदवाड़ा सीट की भी घोषणा पहली सूची में ही होने वाली है। दिल्ली में हुई बीजेपी की बैठक में 16 राज्यों की सीटों पर चर्चा की गई है। यूपी में भाजपा अपना दल को दो सीट दे रही है,निशाद पार्टी और सुभासपा को एक-एक सीट दे रही है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में जिन नेताओं को पार्टी ने फिर से राज्यसभा नहीं भेजा है उन नेताओं को अब भाजपा लोकसभा चुनाव में उतारने की तैयारी में है। इन नेताओं में मनसुख मांडविया, भूपेन्द्र यादव, राजीव चन्द्रशेखर,धर्मेन्द्र प्रधान,पुरुषोत्तम रुपाला सहित कई अन्य नेता शामिल हैं जिन्हे भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व इस बार लोकसभा चुनाव में उतार कर उनके सियासी जमीन की भी पड़ताल करना चाहता है। बताया यह भी जा रहा है कि जिस प्रकार से भाजपा ने कई सांसदों को विधानसभा में उतारा था ठीक उसी प्रकार कुछ विधायकों को भी भाजपा लोकसभा चुनाव में उतारने जा रही है।

प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को अचार संहिता लगने से पहले मिलेगा डीए,सरकार ने बनाई कार्ययोजना
मध्य प्रदेश के सात लाख से अधिक शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को आठ माह से चार प्रतिशत महंगाई भत्ते की वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं (mp government employees)। विधानसभा चुनाव के समय शिवराज सरकार ने राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 42 से बढ़ाकर 46 प्रतिशत करने का प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजा था, लेकिन तब मतदान के प्रभावित होने की संभावना के चलते अनुमति नहीं मिली। कर्मचारियों को आशंका है कि यदि मार्च के पहले पखवाड़े तक इस पर निर्णय नहीं हुआ तो मामला जून तक अटक जाएगा। हालांकि मोहन सरकार डीए बढ़ाने का मन बना रही है, इसके लिए सरकार ने अर्ध बजट में प्राविधान भी किया है लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री ने चार फीसदी डीए बढ़ाने की घोषणा नहीं की है। जिसके चलते शासकीय सेवकों में राज्य सरकार के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। जबकि केंद्र सरकार जुलाई 2023 से अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को 46 प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ता और राहत दे रही है। अभी तक जब भी केंद्र सरकार महंगाई भत्ते में वृद्धि करती थी तो मध्य प्रदेश शसरकार भी इसका लाभ अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को देती थी लेकिन इस बार मामला लंबा अटक गया। विधानसभा चुनाव के मतदान से पहले शिवराज सरकार ने चुनाव आयोग को महंगाई भत्ते व राहत में वृद्धि का प्रस्ताव भेजा था, जिसे अनुमति नहीं मिली। आचार संहिता के कारण और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि, इस बीच सरकार ने आइएएस, आइपीएस और आइएफएस अधिकारियों का चार प्रतिशत महंगाई भत्ता जुलाई 2023 से बढ़ा दिया। राज्य के कर्मचारी और पेंशनर भी मांग कर रहे हैं कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की तरह उनका भी महंगाई भत्ता और राहत बढ़ाया जाए। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार वित्त विभाग भी इसके लिए सभी तैयारी कर चुका है और सरकार के स्तर से निर्णय की प्रतीक्षा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा मार्च के पहले पखवाड़े में संभावित है। यदि इसके पहले सरकार ने निर्णय लेकर कर्मचारियों को लाभांवित नहीं किया तो फिर जून तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। मंत्रालय में पदस्थ सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव चुनाव आचार संहिता लगने से पहले कर्मचारियों को चार फीसदी डीए देने की घोषणा कर देंगे। जिससे कर्मचारियों की नाराजगी को दूर किया जा सके।

सन्यास के लिए कमलनाथ हुए तैयार,चौरई में कमलनाथ ने किया ऐलान
बेटे का भविष्य संवारने के लिए पिता कोई भी त्याग करने से पीछे नहीं हटता। और इसकी जीती जागती मिशाल हैं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath)। कुछ समय पहले तक उन्होने भाजपा में शामिल होने के लिए अपनी ओर से तमाम प्रयास किए लेकिन बात नहीं बन पाई। अब कमलनाथ पर कांग्रेस हाई कमान भी पहले की तरह विश्वास नहीं कर रहा है। और यही कारण है कि कमलनाथ ने राजनीति से सन्यास लेने की योजना तैयार कर ली है। लेकिन बेटे को एक बार फिर सांसद बनाने के लिए उन्होने छिंदवाड़ा जिले के चौरई विधानसभा की जनता के सामने कुछ ऐसी बातें कही जिससे स्थानीय जनता का दिल भर आया। दरअसल कमलनाथ ने भावुक होते हुए कहा कि मुझे आपने इतने साल तक प्यार और सम्मान दिया है। अगर कमलनाथ को आप विदा करना चाहते हैं तो मै विदा होने के लिए तैयार हूं। कमलनाथ ने चौरई की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मै खुद को आपके ऊपर थोपना नहीं चाहता हूं। कमलनाथ यहीं नहीं रुके उन्होने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा बहुत मजबूत और आक्रामक प्रचार कर रही है। लेकिन डरिएगा नहीं मुझे विश्वास है कि आप फिर नकुलनाथ को सांसद बनाएंगे। गौरतलब है कि भाजपा पिछले कुछ समय से छिंदवाड़ा में लगातार किलेबंदी करने में जुटी है। जिससे कमलनाथ को अपने बेटे नकुलनाथ (nakul nath) का भविष्य अधर में दिख रहा है यही कारण है कि कमलनाथ बेटे सहित भाजपा में शामिल होने की योजना बना रहे थे। दो चरणों में उनकी भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व से बात भी हुई लेकिन उन पर सिक्ख दंगे का आरोप है और भाजपा के नेता लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। एमपी बीजेपी के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने का विरोध किया था जिसके कारण कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। अब कमलनाथ अपने बेटे को जिताने के लिए चुनाव प्रचार में जुट चुके हैं और जनता के सामने इमोश्नल कार्ड खेल कर किसी भी तरह से नकुलनाथ को एक बार फिर सांसद बनाना चाहते हैं।

मोदी की जड़ी बूटी और माइक्रो मैनेजमेंट से बीजेपी ने तैयार किया जीत का ड्राफ्ट,कैसा होगा ड्राफ्ट देखिए Mukhbir
भारतीय जनता पार्टी की और मध्य प्रदेश चुनाव समिति (mp bjp meeting) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) की दृष्टि से पूरे एजेंडों पर सभी सदस्यों ने गंभीरता से चर्चा की। बैठक में आगामी चुनाव की दृष्टि से माइक्रो मैनेजमेंट प्रत्येक बूथ पर चुनाव लड़ना और प्रत्येक बूथ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) की जड़ी बूटी 370 वोट हर बूथ पर बढ़ाने का जो संकल्प है उसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई कि किस प्रकार से हर बूथ पर 370 वोट प्रधानमंत्री के नेतृत्व में और हर बूथ पर 10% वोट बढ़ाना और मध्य प्रदेश में जो 70% वोट का भाजपा का संकल्प है उस पर गंभीरता से बात सभी सदस्यों ने की है। चुनाव समिति में आने वाले लोकसभा चुनाव की दृष्टि से 29 के 29 लोकसभा पर विस्तृत चर्चा की गई है। कार्यकर्ता चुनाव की दृष्टि से अच्छे से अच्छे प्रत्याशी के तौर पर हो सकते हैं। एक अच्छे भाव के साथ सभी सदस्यों ने मिलकर गंभीरता से चर्चा की। माना जा रहा है कि जिस प्रकार से एमपी बीजेपी ने लोकसभा चुनाव जीतने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया है उसी ड्राफ्ट के हिसाब से अब भाजपा में बूथ स्तर के कार्यकर्ता काम करेंगे। जल्दी ही लोकसभा चुनाव की दृष्टि से केंद्रीय नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर भी निर्णय लेगा।

बीजेपी की रायशुमारी में चौकाने वाला नाम,मंडल अध्यक्षों ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा का लिया नाम
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) को लेकर जिला पार्टी पदाधिकारियों की हुई रायशुमारी में पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) अब तक के दावेदारों में सबसे आगे आ चुके हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा सभी लोकसभा सीटों से मंडल अध्यक्ष और स्थानीय विधायकों सहित अन्य पदाधिकारियों से रायशुमारी की योजना तैयार की गई है। रायशुमारी में पहले प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और फिर जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी का नाम सामने आया था लेकिन अब पता चला है कि पहली तीन पसन्दों में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम उभरा है। मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों को अपनी पसंद के तीन नाम देने को कहा गया था। सूत्रों का कहना है कि तीन नामों में अधिकांश ने पहले दो नामों में प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम दिया है। डॉ. मिश्रा का नाम अचानक सामने आने से पार्टी का नेतृत्व भी हैरान है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कि अभी तक ग्वालियर या मुरैना से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। इन दो नामों के अलावा मौजूदा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह,जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी,शैलेन्द्र शर्मा के नाम भी रायशुमारी में सामने आए हैं।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस में फिर लगाई सेंध,एक साथ कई नेताओं को दिलाई बीजेपी की सदस्यता
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा (vd sharma)और वरिष्ठ नेता न्यू ज्वाइनिंग टोली के प्रदेश प्रभारी डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) के के नेत्रृत्व में कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित दो दर्दन से अधिक कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। जिसमें कांग्रेस महिला कांग्रेस की प्रदेश संगठन मंत्री रश्मि मिश्रा, रायसेन जिले के पिछडा वर्ग मोर्चा के जिला महामंत्री मिट्ठू लाल धाकड़, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की पूर्व कुल सचिव डॉ. बी. भारती सहित रायसेन के 40 से अधिक सरपंच पूर्व सरपंचों ने पार्टी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कल ली। पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वालों में आगर नगर पालिक अध्यक्ष निलेश जैन, महिला कांग्रेस की प्रदेश संगठन मंत्री रश्मि मिश्रा, रायसेन जिले के पिछडा वर्ग मोर्चा के जिला महामंत्री मिट्ठू लाल धाकड़, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की पूर्व कुल सचिव डॉ. बी. भारती, रायसेन जिले के देव नगर मंडल के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह सिगोरिया, सदालपुरा सरपंच मोहर सिंह पूर्व सांची मंडल अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बघेल, पूर्व सरपंच संतोष पाटीदार, तेज सिंह बैरागी, युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष हेमंत पटेल, पूर्व जनपद सदस्य नथन सिंह कुशवाह, मोर्चा पदाधिकारी अमित शर्मा, मंडल महामंत्री श्री रघुनाथ पटेल, रघुनाथ सिंह कुशवाह, कुशवाह समाज के जिला अध्यक्ष मुलचंद कुशवाह सहित पूर्व सरपंच शामिल है।