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डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए उमड़ा ब्राह्मणों का जन सैलाव,जम कर लगे नारे
देश में ब्राम्हण भी खूब हैं और नेता भी खूब हैं लेकिन ऐसा एक भी ब्राम्हण नेता नहीं जो ब्राम्हणों के हित की बात खुलेआम करता हो। आज प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) हैं जो किसी ब्राम्हण के कार्यक्रम में जाने से परहेज करते हैं वहीं किसी मुस्लिम के टेंट हाउस का शुभारंभ करना हो तो वो उसका रिबन काटने के लिए समय से पहले पहुंच जाते हैं। एक और ब्राम्हण नेता बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) हैं जिनके निवास पर ब्राम्हण जाते हैं तो वो पहले ही कह देते हैं कि मै कोई ब्राम्हण नेता नहीं हूं। कुछ हद तक गोपाल भार्गव (gopal bhargava) अपने क्षेत्र में कोशिश करते हैं लेकिन वो भी बेमन होकर। और एक हैं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा जिसको प्रदेश के हर कोने का ब्राम्हण राजनीति से हट कर अपना नेता मानता है। क्योंकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) का ही एक ऐसा दरवाजा है जो ब्राम्हणों के हित के लिए 24 घंटे खुला रहता है। ऐसा भी नहीं है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा सिर्फ ब्राम्हणों के हित की ही बात करते हैं वो हर समाज के विकास की बात करते हैं और हर समाज के ब्यक्ति के सुख समृद्धि की हमेशा कामना करते हैं। असल में ब्राम्हण भी वही है जो समाज के हर वर्ग की बात करे। आज देश का हर वर्ग ब्राम्हणों को गाली देने में ब्यस्त रहता है लेकिन कभी कोई यह नहीं सोचता कि ब्राम्हतों ने शिक्षा देने में कभी कोई भेदभाव नहीं किया। ब्राम्हणों के दरवाजे जिस समाज का भी ब्यक्ति गया उसके कल्याण की बात ब्राम्हण करता है। मंगलवार को गुना में ब्राम्हणों के होली मिलन में जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा पहुंचे तो वहां पर मौजूद ब्राम्हण समाज के लोगों ने दोनों बाहें फैला कर उनका स्वागत किया। डॉ. नरोत्तम मिश्रा का जब तक संबोधन चला उसका एक-एक शब्द लोग ऐसे सुन रहे थे जैसे श्रीमद भगवत गीता का पाठ चल रहा हो। डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आज ब्राम्हण वर्ग के समर्थन की जरुरत है क्योंकि एक ब्राम्हण हजार पर भारी होता है।

पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल की हार तय,बीजेपी ने बूथ स्तर पर कसा सिकंजा
सीधी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) की हार लगभग तय हो चुकी है। अभी तक कमलेश्वर पटेल के सघन जनसंपर्क कभियान को देख कर लोग कयास लगा रहे थे कि कांग्रेस उम्मीदवार सीधी से जीत दर्ज कर सकते हैं लेकिन भाजपा की रणनीति जिस प्रकार की है उसके आगे कमलेश्वर पटेल बौने साबित होने लगे हैं। ऐसा भी माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने कमलेश्वर पटेल को अभी तक मौका दिया था जिससे उनकी क्षमता का बीजेपी के नेता पता लगा सकें। और अब मतदान को महज 18 दिन बचे हैं ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पासे फेंकने शुरु कर दिए हैं। भाजपा का संगठन शक्ति केन्द्र,मंडल और बूथ स्तर से लेकर पन्ना और अर्ध पन्ना प्रभारियों तक फैला है। जिसमें भाजपा ने कसावट लाना शुरु कर दिया है। भाजपा की तरफ से स्टार प्रचारकों को भी प्रचार के लिए जल्द भेजा जाने वाला है। जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शहडोल से कर दी है। अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की नजर सीधी,सतना और रीवा में है। क्योंकि भाजपा के लिए सतना और रीवा की सीट भी इस बार बेहद कठिन मानी जा रही है यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेत्रृत्व खुद विंध्य में फोकस कर रहा है। ठीक इसी प्रकार से भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने विधानसभा चुनाव में भी कसावट करने का काम किया था जिसका परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा और अब एक बार फिर विंध्य में भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने मोर्चा थाम लिया है। मतलब साफ है कि अब भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस विंध्य में होने वाला है। विंध्य की दो सीट सीधी और शहडोल में प्रथम चरण 19 अप्रैल को वोटिंग होने वाली है तो वहीं 26 अप्रैल यानि दूसरे चरण में सतना और रीवा में वोटिंग होनी है।

राजेन्द्र शुक्ला की जिद के चलते बीजेपी के हाथ से फिसल सकता है रीवा,कांग्रेस मजबूत
रीवा में अपना वर्चश्व कायम रखने के लिए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा (janardan mishra) को एक बार फिर चुनाव मैदान में टिकट दिला दिया है। जनार्दन मिश्रा उन निस्क्रिय सांसदों में गिने जाते हैं जो अपने दस साल के कार्यकाल में रीवा से बाहर ही नहीं निकले। रीवा संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें हैं उन विधानसभा क्षेत्र का दस साल में जनार्दन मिश्रा दौरा नहीं कर पाए। जनार्दन मिश्रा राजेन्द्र शुक्ला के बेहद करीबी माने जाते हैं इसी लिए उन्होने जनार्दन को एकबार फिर टिकट दिला कर जिताने की गारंटी ली है। लेकिन जनार्दन के खिलाफ एंटीइनकमबेंसी इतनी ज्यादा है कि अब खुद राजेन्द्र शुक्ला को अपने फैसले पर पछतावा हो रहा है। ठीक इसी प्रकार उन्होने विधानसभा चुनाव में सेमरिया से केपी त्रिपाठी को टिकट दिलाया और आखिर में हताशा ही हाथ लगी। जिस उम्मीदवार ने विधानसभा में राजेन्द्र शुक्ला के करीबी केपी त्रिपाठी को चुनाव में हराया अब उन्ही अभय मिश्रा की पत्नी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में अपना भाग्य आजमा रही हैं। रीवा में राजनीतिक विश्लेषकों का साफ कहना है कि मोदी की गारंटी अलग विषय है लेकिन उन्हे एक ऐसा सांसद चाहिए जो उनके सुख दुख में खड़ा हो सके और जनार्दन मिश्रा में ऐसा कुछ नहीं है। वो थके हुए एक निस्क्रिय नेता हैं जो राजेन्द्र शुक्ला के द्वारा रीवा की जनता पर थोपे गए हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि पीएम मोदी,उनकी योजनाएं और गारंटी सबकुछ ठीक है लेकिन क्षेत्र में अगर उनको कोई जरुरत पड़ेगी तो सांसद के पास ही जाएंगे न की मोदी के पास। लिहाजा भाजपा किसी को भी चुनाव मैदान में उतार देगी तो उसे बार-बार बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

छिंदवाड़ा में भाजपा की बड़ी सेंधमारी,महापौर विक्रम अहाते भाजपा में हुए शामिल
कहते हैं सेना को अपनी तरफ कर लो तो सेनापति क्या कर सकता है। और भाजपा इस वक्त यही रणनीति अपना रही है। कमलनाथ (kamal nath) के अभेद्य किले में फतह हासिल करना है तो वहां सेंधमारी करना जरुरी है। और भाजपा की यह सेंधमारी अभियान लगातार जारी है। कमलनाथ के जितने भी करीबी हैं भाजपा उन्हे एक-एक करके अपने पाले में करती चली जा रही है। इसी कड़ी में अब भाजपा ने छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम अहाते को भी अपने पाले में कर लिया है। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद विक्रम अहाते ने बताया कि नकुलनाथ के द्वारा आदिवासियों को लेकर दिए गए बयान से वो काफी आहत थे यही कारण उनकी पार्टी छोड़ने का बना। विक्रम अहाते (vikram ahate) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर भाजपा में शामिल करवाया। महापौर के साथ छिंदवाड़ा नगर निगम जल विभाग सभापति प्रमोद शर्मा, अनुसूचित जाति विभाग जिला अध्यक्ष सिद्धांत थनेसर,पूर्व एनएसयूआई जिला अध्यक्ष आशीष साहू, पूर्व एनएसयूआई जिला उपाध्यक्ष धीरज राऊत पूर्व एनएसयूआई जिला कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य उपाध्याय सहित अन्य लोगों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। इस मौके पर बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल सहित कई बीजेपी के नेता मौजूद रहे। इससे पहले छिंदवाड़ा से कमलनाथ के करीबी माने जा रहे सैयद जफर सहित अन्य लोग पहले ही बीजेपी की सदस्यता ले चुके थे। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार दिंदवाड़ा के दो और विधायक बीजेपी में जल्द शामिल हो सकते हैं।

बिजली बितरण कंपनियां कम करेंगी कर्मचारी,प्रदेश की हर कॉलोनी में इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूटर होंगे नियुक्त
मध्य प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। (MPEB) बिजली कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने जा रही है। रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटियों को एक डिस्ट्रीब्यूटर की तरह नियुक्त करने की तैयारी है। कॉलोनी में समिति के नाम से कनेक्शन दिया जाएगा और समिति वहां रहने वाले सभी लोगों बिजली सप्लाई करेगी एवं वसूली का काम करेगी। इसके बदले में समिति को उपभोक्ताओं की तरफ से सेवा शुल्क मिलेगा। बिजली कंपनी अपनी तरफ से कुछ नहीं देगी। नगर पालिका निगम की तरह बिजली कंपनी भी अब अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार करने जा रही है। जिस प्रकार नगर पालिक निगम मध्य प्रदेश में प्राइवेट रेजिडेंशियल सोसायटी को एक कनेक्शन देती है और फिर वह कॉलोनी में रहने वाले सभी लोगों को कनेक्शन देकर जलकर वसूली का काम करती है ठीक उसी प्रकार बिजली सप्लाई का काम भी किया जाएगा। इसके बदले में रेजिडेंशियल सोसायटी को बिजली कंपनी की ओर से कुछ नहीं दिया जाएगा बल्कि एक अधिकार दिया जाएगा कि वह अपनी कॉलोनी में रहने वाले नागरिकों से सेवा शुल्क की वसूली कर सकती है। इस व्यवस्था के लागू होने से पहले तक मध्य प्रदेश में सभी बिजली उपभोक्ता सीधे बिजली कंपनी से कनेक्ट होते हैं। बिजली कंपनी उन्हें सभी प्रकार की सेवाएं देती है और उपभोक्ता सीधे बिजली बिल जमा करते हैं। बीच में कोई डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होता। बिजली कंपनी ने ऐलान कर दिया है कि यदि किसी को इस व्यवस्था से कोई आपत्ति है तो वह 12 अप्रैल तक लंबी सरकारी प्रक्रिया का पालन करते हुए अपने आपत्ति दर्ज करवा सकता है। लोकसभा चुनाव के बीच में पब्लिक इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया दे पाएगी, इसकी उम्मीद कम है। इस व्यवस्था के लागू हो जाने से बिजली कंपनी को फायदा होगा लेकिन उपभोक्ताओं को नुकसान होगा। अभी उपभोक्ताओं को बिजली की कीमत के साथ कई प्रकार के टैक्स भी देने पड़ते हैं, अब इसमें सेवा शुल्क भी जुड़ जाएगा।

नामांकन से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी मां से लिया आशीर्वाद
रविवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ग्वालियर दौरे पर पहुंचे जहां उन्होने अपनी मां से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। गौरतलब है कि हिंदू धर्म में मां को ईश्वर का दर्जा दिया गया है। और बेटे के लिए मां के दिल से निकली हर दुआ अपना काम भी करती है। तीन अप्रैल को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा खजुराहो लोकसभा सीट (khajuraho constituency) से अपना नामांकन भर रहे हैं इस लिए वो अपनी मां का आशीर्वाद लेने के लिए घर पहुंचे। लेकिन इस दौरान जिस प्रकार से एक मां और बेटे का मिलाप देखने को मिला वो भाव विभोर करने लायक था। इंसान कितना भी बड़ा हो जाए मां की नजर में वो हमेशा ही छोटा रहता है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की मां काफी देर तक उनको दुलारती रहीं फिर माथे पर तिरक लगा कर उन्हे चुनाव में जीत का आशीर्वाद दिया।

मंत्री के बेटे की खुलेआम गुंडागर्दी,पत्रकार और होटल संचालक को पीटा
भोपाल-रंगपंचमी यानी शनिवार की शाम। मप्र के राज्यमंत्री के बेटे अपने मित्रों और कुछ युवतियों के साथ इनोवा कार में क्या कर रहे थे..ये तो वही जानते होंगे। पर नए नवेले मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल (narendra shivaji patel) के पुत्र का बीच सड़क पर गुंडागर्दी और दादागिरी करने वाला मामला फिलहाल सुर्खियों में है। मजे की बात तो ये है कि अपने बेटे की करतूत पर पर्दा डालने खुद राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल थाने पहुंचे,उनके भाई जिनका नाम राजेश पटेल बताया गया और उनके समर्थकों ने भी थाने में जाकर पुलिस पर दबाव बनाया। अब चूंकि मामला पोलिटिकल प्रेशर से जुड़ा हुआ था सो पुलिस अधिकारी भी थाने पहुंचे। आखिर पुलिस ने घायलों का मेडिकल करा मामला दर्ज किया और मंत्रीजी को संतुष्ट करने कुछ पुलिसकर्मियों पर कार्यवाई की। रात करीब 8 और 9 बजे के बीच जब पत्रकार विवेक सिंह अपनी बाइक से घर जा रहे थे तभी त्रिलंगा के पास चौराहे पर रेड सिग्नल होने से विवेक ने अपनी बाइक रोकी। तभी इनोवा कार में सवार मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बेटे अभिज्ञान अपने मित्रों के साथ वहां से निकले। कार में कुछ युवतियां भी थीं। कार का हॉर्न बहुत तेज़ बजाया जा रहा था। बस हॉर्न तेज़ बजता देख विवेक ने कार के तरफ नजर डाली। तो मानो मंत्री पुत्र को गुस्सा आ गया। बस फिर क्या अभिज्ञान ने अपने दोस्तों के साथ विवेक से मारपीट करना शुरू कर दिया। वहीं सामने मौजूद अम्मा बाबू की रसोई के संचालक सोनू मार्टिन और उनकी पत्नी आलीशा बचाव करने पहुंचे तो मंत्री पुत्र और उसके साथियों ने उन्हें भी जमकर पीटा..सोनू के सर में टांके आए हैं। महिला को भी चोटें आईं..होटल में काम करने वाले को भी रसूख में डूबे अभिज्ञान ने नहीं छोड़ा..उसे भी खूब पीटा। मामला थाने पहुंचा तो बेटे की करतूत पर पर्दा डालने नए नवेले माननीय मंत्री भी पहुंच गए। बताया जा रहा है कि मंत्री पुत्र अपने दोस्तों के साथ रंगीनियों में डूबे थे..और थाने में भी रंगदारी करने से नहीं बाज आए। अभिज्ञान के चाचा का अंदाज तो थाने में देखने लायक था। वो भतीजे की वकालत करने में इतने व्यस्त थे कि घायल होटल संचालक दंपति को सांत्वना देने की बजाय उसके ढाबे के कागजों की जांच कराने की बात करने लगे..बड़ी कश्मकश के बाद पुलिस की एक महिला अधिकारी ने मामला दर्ज करवाया। ये घटनाक्रम रात 3.30 बजे तक चला। अब देखना होगा कि क्या इस तरह सरेराह गुंडागर्दी करने वाले मंत्री पुत्र और उसके साथियों पर पुलिस कोई कड़ा एक्शन लेगी। या ये मामला भी राजनीतिक दबाव की भेंट चढ़ेगा।क्या सरकार के जिम्मेदार इस पर भी कोई संज्ञान लेंगे? क्योंकि थाने में जब मंत्री जी पहुंचे तो वहां किसी को वीडियो बनाने। घायलों से बात करने की भी इजाजत पुलिस नहीं दे रही थी..सवाल तो ये भी है कि इन रसूखदार लोगों के बेटों को डांटने वाले पुलिसवालों पर जो कार्यवाई की गई..क्या वो सही है...?

कमलेश्वर पटेल की सच्चाई उजागर करने पर Mukhbir को मिल रही धमकियां
सीधी से कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) के भ्रष्टाचार की खबर Mukhbirmp.com ने प्रमुखता से प्रसारित की थी। जिसमें कमलेश्वर पटेल ने अवैध तरीके से छह करोड़ का मुआबजा बनवाया है। कमलेश्वर पटेल ने अलग-अलग गांव में अपने घर दर्शाए हैं और भाई,पत्नी,बेटी और बेटे के नाम पर करीब छह करोड़ रुपये का अवैध तरीके से मुआबजा बनवाया है। इस खबर को Mukhbir ने प्रकाशित करते हुए सरकार से जांच की मांग की थी। खबर जैसे ही प्रकाशित हुई तो कमलेश्वर पटेल के करीबियों द्वारा धमकी देने का सिलसिला शुरु हो गया है। कमलेश्वर पटेल के लोग अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वाट्सेप कॉल करके जान से मारनी की धमकी देने के अलावा देख लेंगे की धमकी दे रहे हैं। इस बात में कोई सक नहीं है कि सीधी से कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल ने न सिर्फ मुआबजे के रुप में करोड़ों रुपये का गवन किया है बल्कि मेडिकल कालेज से लेकर कई अलग-अलग संस्थाएं संचालित कर रखी है और सभी में राजश्व के चोरी की बात सामने आ रही है। लेकिन राज्य सरकार से मिली भगत और राजनीतिक रसूख के चलते कमलेश्वर पटेल के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की वैधानिक कार्रवाई नहीं हुई है। मतलब साफ है कि कमलेश्वर पटेल को राज्य सरकार की तरफ से भी संरक्षण दिया जा रहा है। यही कारण है कि खबर प्रकाशित होने के बाद कमलेश्वर पटेल के लोग धमकी देने के लिए वाट्सेप कॉल का इस्तेमाल करते है जिससे किसी प्रकार का सबूत इकट्ठा न होने पाए। कमलेश्वर पटेल और उनके साथी कितना भी दबाव बनाएं लेकिन खबरों का कारवां थमने वाला नहीं है। उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की एक बड़ी लिष्ट है जिसे सबके सामने लाया जाएगा।

छिंदवाड़ा-राजगढ़ का दुर्ग जीतने में जुटी बीजेपी,रीवा-सतना में BSP कर रही सेंधमारी
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अपना सारा फोकस छिंदवाड़ा (chhindwara) और राजगढ़ (rajgarh)में कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के लोकसभा चुनाव (lok sabha ekections) में प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने का संकल्प लिया है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का हर छोटा बड़ा नेता पहले छिंदवाड़ा फिर राजगढ़ की बात करता नजर आ रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि छिंदवाड़ा को जीत लिया तो प्रदेश की अन्य 28 सीटें मोदी और उनकी गारंटी के बल पर ही जीत जाएंगे। जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी छिंदवाड़ा और राजगढ़ को जीतने के लिए ब्यूह रचना करने में जुटी है उससे यह स्पष्ट है कि भाजपा नेताओं ने खुद को दो संसदीय क्षेत्रों में ही सीमित कर लिया है। भाजपा ने जिस प्रकार रणनीति अपनाई है उससे एक कहावत याद आती है। 'आधी छोड़ पूरी को धावै-पूरी मिलै न आधी पावै' मतलब साफ है कि भाजपा ने छिंदवाड़ा और राजगढ़ जीतने की रणनीति तो बना ली लेकिन सतना,रीवा और सीधी बीजेपी के हाथ से फिसलती नजर आ रही है। भाजपा ने रीवा और सतना में अपने थके हुए प्रत्याशियों को वहां की स्थानीय जनता के ऊपर थोपने का काम किया है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह को पांचवीं बार मौका दिया है तो वहीं रीवा से दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है जो निस्क्रिय नेता माने जाते हैं। सतना में गणेश सिंह के लिए कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा चुनौती दे ही रहे हैं लेकिन बीएसपी ने नारायण त्रिपाठी को चुनाव में उतार कर मोदी की गारंटी को संशय में डाल दिया है। ठीक उसी प्रकार रीवा में भाजपा ने जनार्दन मिश्रा और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियों में ब्राम्हण उम्मीदवार होते ही बीएसपी ने कुर्मी को अपना प्रत्याशी बना दिया है जिससे बीएसपी की संभावनाएं मजबूत हो गई है। सीधी की बात करें तो कमलेश्वर पटेल भीजेपी उम्मीदवार पर भारी पड़ते दिख रहे हैं पैसों की भी उनके पास कमी नहीं है जिसे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मंच पर भी स्वीकार कर चुके हैं। मतलब साफ है कि भाजपा छिंदवाड़ा और राजगढ़ का दुर्ग जीतने में लगी है और विंध्य में बीएसपी सेंधमारी कर रही है।

एमपी कांग्रेस के सबसे नाकाम अध्यक्ष निकले जीतू पटवारी,18 हजार कार्यकर्ता छोड़ चुके पार्टी
कार्यकर्ताओं का एक से दूसरी पार्टी में आना जाना अब कोई बड़ी बात नहीं रही लेकिन एक के बाद,झटके पर झटके एमपी कांग्रेस (mp congress) को लगते जा रहे हैं जिस दिन से जीतू पटवारी (jitu patwari) को पीसीसी चीफ बनाया गया है ठीक उसी दिन से कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर शुरु हो गया है। एक दो नहीं,एक दो हजार भी नहीं अब तक करीब 18 हजार कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर कमल का फूथ हाथ में थाम चुके हैं। पिछले तीन महीने में ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरा जब कांग्रेस के सौ-दो सौ कार्यकर्ता पार्टी न छोड़ते हों लेकिन अपनी मस्ती में सराबोर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। जो लोग कांग्रेस के लिए सालों से काम करते रहे हैं उनके पार्टी छोड़कर जाने का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कारण भी नहीं पूछते हैं। इतना ही नहीं उनसे कोई मिलने जाता है तो घंटों तक इंतजार करना पड़ता है किसी तरह से वो सूजी हुई आंखों के साथ बाहर निकलते हैं तो सफाई में कहते हैं कि वर्चुअली मीटिंग चल रही थी। जबकि नेताओं कार्यकर्ताओं को यह मालूम रहता है कि कोई मीटिंग नहीं चल रही थी बल्कि उनके अध्यक्ष सोने में ब्यस्त थे। जीतू पटवारी जब तक अध्यक्ष नहीं थे तब तक अक्शर प्रदेश कार्यालय भी आया करते थे लेकिन अध्यक्ष बनने के बाद वो कार्यालय का रास्ता ही भूल गए। शुक्रवार को Mukhbirmp.com की टीम पीसीसी कार्यालय का मुआयना करने पहुंची तो गिनती के एक दो लोग मिले। जो मिले तो कुछ ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं थे लेकिन दवी जुवां से इतना बोल गए कि ऐसा लगता है जैसे पार्टी में कोई अध्यक्ष ही नहीं है और पूरी पार्टी के कार्यकर्ता खुद को अनाथ सा महसूस करते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव सिर पर है नामांकन की प्रक्रियाएं चल रही हैं लेकिन पार्टी की तरफ से उन्हे कोई काम ही नहीं बताया जा रहा है जिससे वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। जब पार्टी कोई काम ही नहीं दे रही है तो कार्यालय आने का भी कोई मतलब नहीं है। जो कार्यकर्ता और नेता कार्यालय आते भी हैं तो उनका समय वर्मान और पूर्व अध्यक्षों की तुलना में ही बीतता है। कुछ कार्यकर्ता दवी जुवां यह भी कहते हैं कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में कार्यालय में जो कर्मचारी काम कर रहे हैं वो भी बीजेपी कार्यालय में नौकरी ढूढने के लिए निकल जाएंगे।

कांग्रेस की भगदड़ पर जीतू पटवारी का जवाब,दिग्विजय और कमलनाथ पर मढ़ा सारा दोष
पिछले तीन महीने से कांग्रेस पार्टी में लगातार भगदड़ का माहौल है। अब तक करीब 17 हजार से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया है। इस मामले में कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) से जवाब तलब किया है। कहा यह भी जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (mallikarjun kharge) ने जीतू पटवारी को बंद कमरे में जमकर खरी खोटी भी सुनाई है। कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व द्वारा पूछे गए सवाल पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने अपनी लिखित सफाई दी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी ने अपनी सफाई में सारा दोष दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर मढ़ दिया है। जीतू पटवारी ने अपने जवाब में कहा है कि उनको नाकाम साबित करने के लिए दिग्विजय सिंह और कमलनाथ इस प्रकार का भयानक षड़यंत्र रच रहे हैं इसी लिए ज्यादातर दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के करीबी लोग ही बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। पीसीसी चीफ ने इनके अलावा दो और नेताओं का नाम भी शामिल किया है जिसमें अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) को भी कांग्रेस की भगदड़ का दोषी बताया है। उन्होने कहा है कि बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा और इन नेताओं की आपस में दोस्ती है और ये सब मिल कर इतना बड़ा खेल- खेल रहे हैं। हांलाकि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी के आरोपों को ज्यादा तबज्जो नहीं दी है। बल्कि कांग्रेस में लगातार जारी पलायन को जल्दी से जल्दी रोकने की नसीहत दी गई है।

सैयद जफर ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ पर किया करारा प्रहार,सतह पर आई लड़ाई
कमलनाथ (kamal nath) के नजदीकी नेता सैयद जफर (syed zafar) और दीपक सक्सेना (deepak saxena) के भाजपा ज्वाइन करने के बाद छिदवाड़ा में अब आर-पार की लड़ाई शुरु हो गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता सैयद जफर ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कमलनाथ के आजू-बाजू रहने वाले और तन्खा पर काम करने वाले उनके और दीपक सक्सेना के बारे में कमलनाथ से तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। ऐसे लोग जो एक पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते वो कमलनाथ को लोकसभा चुनाव जीतने के तरीके बता रहे हैं। गौरतलब है कि सैयद जफर और दीपक सक्सेना पूर्व सीएम कमलनाथ के काफी करीबी माने जाते थे लेकिन उन्होने अब बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। जिसके बाद कमलनाथ के आजू-बाजू में रहने वाले और तन्खा लेकर काम करने वाले लोग उनके बारे में भ्रामक जानकारी दे रहे हैं। और इस मामले की जानकारी जब सैयद जफर को हुई तो उन्होने एक सभा के दौरान जम कर खरी खोटी सुनाई। गौरतलब है कि कमलनाथ ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ जैसे लोगों को मोटी तन्खा पर रख रखा है। यही वो लोग हैं जिन्होने विधानसभा चुनाव के दौरान भी कमलनाथ को भ्रामक और गलत जानकारियां लगातार दी थी। जो पार्टी के लिए ईमानदारी से काम करते थे उनके बारे में भी लगातार गलत फीडबैक दिया गया। यहीं नहीं कमलनाथ को सरकार को लेकर निश्चिंच किया गया था कि अबकी बार कांग्रेस 180 के पार कर रही है और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बन रही है। बाद में क्या हुआ नतीजा सबके सामने है। अब इसी तरह के लोगों ने उनके बारे में फिर से कमलनाथ को गलत फीडबैक दिया जिसके कारण सैयद जफर और दीपक सक्सेना जैसे लोगों को भाजपा की सदस्यता लेनी पड़ी और अब इन सभी नेताओं ने संकल्प लिया है कि इस बार छिंदवाड़ा में भी वो कमल का फूल खिला कर रहेंगे। मतलब साफ है कि तन्खा पर काम करने वाले लोगों ने कमलनाथ को कभी भी सही फीडबैक नहीं दिया और उसका प्रतिफल अब कमलनाथ को भुगतना पड़ रहा है।