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मौन होकर चुनाव की बिसात बिछा रहे भाजपा के नेता,असंतुष्टों को भी साधने में हो रहे कामयाब
भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने इन दिनों प्रदेश विधानसभा की चुनाव कमान संभाल रखी है। केन्द्रीय मंत्री और मप्र के चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav) और सह प्रभारी अश्वनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) दोनों ही नेता मौन रह कर पार्टी की सारी रणनीति तैयार कर रहे हैं। कई दिनों से दोनों नेताओं ने मध्य प्रदेश में ही डेरा जमाया हुआ है। ये नेता ना सिर्फ मप्र पर नजर रखे हुए हैं बल्कि टिकट वितरण से लेकर कार्यकर्ताओं में उठ रहे असंतोष को थामने के साथ समन्वय भी बिठा रहे हैं (mp elections)। प्रतिदिन दोनों नेता मप्र के सैकड़ों नेताओं से संवाद भी कर रहे हैं। इनके वार रुम से विपक्ष की पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। दूसरी ओर, कई नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। चुनाव आयोग प्रबंधन के कार्य में एसएस उप्पल,अशोक विश्वकर्मा सहित छह लोगों की टीम लगाई गई है। इसी तरह चुनाव प्रबंधन के कार्य की जिम्मेदारी प्रदीप त्रिपाठी,आलोक संजर,विनोद गोटिया और राजेन्द्र सिंह को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री,गृह मंत्री राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रवास के दौरान उनके आवागमन और ठहरने की व्यवस्था के लिए अलग से समिति बनाई गई है। इसका जिम्मा आनंद सिंह सेंगर को दिया गया है। विमानन का काम राजेन्द्र राजपूत देख रहे हैं। मीडिया समन्वय का काम आशीष अग्रवाल और इंटरनेट मीडिया का काम अभिषेक शर्मा के जिम्मे है। विज्ञापन क्रिएशन और काल सेंटर के लिए पांच-पांच लोगों की टीम कार्य कर रही है। यह व्यवस्था प्रदेश से लेकर संगठनात्मक 57 जिला मुख्यालयों तक बनाई गई है।

धनतेरस के दिन लाड़ली बहनों के खाते में आएंगे 1250 रुपये,जमकर मनेगी दिवाली
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लाभार्थियों के लिए खुशखबरी है (ladli behna yojana)।दिवाली और मप्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की शिवराज सरकार 1.31 करोड़ लाड़ली बहनों को एक बार फिर बड़ा तोहफा देने जा रही है (madhya pradesh elections)। नवंबर में योजना की छठी किस्त के 1250 रुपए जारी किए जाएंगे। सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) का कहना है कि कांग्रेस ने मेरी शिकायत चुनाव आयोग से की थी कि शिवराज चुपचाप महिलाओं के खातों में पैसे डाल रहा है। मैं चुपचाप पैसा क्यों डालूं, डंके की चोट पर आने वाली 10 तारीख को सभी लाड़ली बहनों के खातों में 1250 रुपये डालूंगा। दरअसल, हाल ही में अलीराजपुर दौरे पर पहुंचे सीएम शिवराज ने ऐलान किया था कि 10 तारीख को लाड़ली बहना के खातों में पैसा आएगा। इसके लिए आचार संहिता (model code of conduct) से पहले ही पैसे इकट्ठे करके रख दिए थे। अब इस योजना को कोई भी बंद नहीं कर सकता। कांग्रेसी चुनाव आयोग में मेरी शिकायत कर रहे कि मामा तो पैसे डाल रहा है। इनको बड़ी चिंता हो रही कि पैसे क्यों डाल रहा। जलने वाले जलें, हम तो खाते में पैसा डालेंगे। ये (कांग्रेस) बेईमान सरकार में आ गए तो लाड़ली बहनों के खातों में पैसा डालना बंद कर देंगे। सीएम ने एक्श ट्विटर के माध्यम से कांग्रेस पर निशाना भी साधा और लिखा है कि जिन्होंने सदैव महिलाओं का अपमान किया हो, उन्हें महिलाओं का सम्मान भला कैसे पसंद आ सकता है..?ये कांग्रेसी नहीं चाहते हैं कि महिलाओं का मान, सम्मान और स्वाभिमान बढ़ाने वाली ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ चले, तभी तो विपक्षी दल देश-दुनिया की इस ऐतिहासिक सामाजिक क्रांति का जरा भी समर्थन नहीं कर रहे।खैर, प्रदेश की नारी शक्ति और समस्त जनता कांग्रेस का सच जानती है, इसलिए कमलनाथ जी और दिग्विजय सिंह जी समेत दोनों की पूरी टीम कितना भी प्रयास क्यों न कर ले, मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बनने वाली।

जगह-जगह घूम रहा हाथी,पंजे और फूल से मुकाबला करने कई दावेदार हाथी पर हुए सवार
मप्र के विधानसभा चुनाल में एकबार फिर हाथी जमकर घूम रहा है (bsp mp)। साल 2018 विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार हाथी अच्छी खुराग लेकर निकला है। यूपी से लगे क्षेत्रों में हाथी, पंजे और कमल को टक्कर देने के लिए लगातार फुफकार रहा है। भाजपा (mp bjp) और कांग्रेस (mp congress) के कई बागियों ने बसपा का दामन थामा और उन्हे 24 घंटे के अंदर बसपा की ओर से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। यह बागी ऐसे हैं कि इनका वोटबैंक भाजपा और कांग्रेस का ही है और ये नुकसान भी भाजपा और कांग्रेस को ही पहुंचाएंगे। साल 2018 में करीब एक दर्जन ऐसी सीटें थी जहां पर बसपा के उम्मीदवारों ने दस हजार से ज्यादा का वोट हासिल कर भाजपा और कांग्रेस को काफी नुकसान पहुंचाया था यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां बहुमत से दूर रह गई थी। बाद में कमलनाथ ने निर्दलीयों,सपा और बसपा के विधायकों को अपने साथ मिला कर प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी। इस विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार से बसपा ने कुछ मजबूत उम्मीदवारों पर दांव लगाया है उससे ऐसी स्थिति स्पष्ट हो रही है कि तीन दिसंबर के बाद एमपी में एक बार फिर हाथी दौड़ लगाएगा। कुछ भाजपा के तो कुछ कांग्रेस के नाराज नेता इस बार बसपा से विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे हैं और उनमें कुछ ऐसे उम्मीदवार भी हैं जो चुनाव जीत भी सकते हैं पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के खाते में दो सीट आई थी लेकिन हालिया स्थिति की बात करें तो इस चुनाव में बसपा के खाते में ज्यादा सीटें आती दिख रही हैं। बसपा ने कुछ सीटों पर ब्राम्हण तो कुछ सीटों पर ठाकुरों को मौका दिया है जो चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।

भाजपा और कांग्रेस में धधकी विरोध की ज्वाला,प्रत्याशी चयन में पीसीसी चीफ कमलनाथ के निवास पर प्रदर्शन
एमपी में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस पार्टी की तरफ से उम्मीदवारों का ऐलान हो चुका है (Madhya Pradesh Elections)। लेकिन दोनों ही दलों की सूचियां जारी होते ही विरोध की आग दोनों दलों में धधकने लगी है। इसका असर भाजपा से ज्यादा कांग्रेस कार्यालय में ज्यादा देखने को मिल रहा है (congress protest)। अलग-अलग सीटों पर कांग्रेस के अन्य दावेदार खुद को ज्यादा मजबूत बता कर पार्टी के नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। विरोध इतना बढ़ गया है कि कुछ समर्थकों ने पीसीसी कार्यालय के बाहर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का पुतला दहन कर दिया तो कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) के निवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए टायर में आग लगा कर अपना विरोध दर्ज कराया। हाल कुछ ऐसा ही भाजपा का भी है जहां प्रदेश कार्यालय में तो जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ ही है साथ ही भाजपा के अलग-अलग जिला कार्यालयों में भी जमकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है (BJP Protest)। हांलाकि भारतीय जनता पार्टी विरोध को शांत करने में काफी माहिर मानी जाती है। इसी लिए भाजपा ने अप्रिय स्थितियों से निपटने और कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया है जो डैमेज को कंट्रोल करने का पूरा प्रयास कर रही है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस की 47 सीटों पर बगावत की आग धधक रही है तो भाजपा की 27 सीटों पर कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विरोध का आलम ये है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नाराज कार्यकर्ता 5 - 5 सीटों से बागी होकर चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। अब बात उन सीटों की करते हैं जिनमें कांग्रेस के कार्यकर्ता काफी नाराज हैं। सुमावली, ग्वालियर, दतिया, पिछोर, निवाड़ी, नागौद, सिरमौर, सेमरिया, रीवा, गोटेगांव, पिपरिया, कुरवाई, भोपाल उत्तर, बैरसिया, गोविंदपुरा, हुजूर, नरसिंहगढ़, खातेगांव, नेपानगर, बुराहनपुर, बदनावर, रतलाम ग्रामीण, जावरा, जौरा, ग्वालियर ग्रामीण, डबरा, सेवढ़ा, भांडेर, सुर्खी, नरयावली, खरगापुर, बिजावर, पवई, गुन्नौर, नागोद, त्योंथर, हरदा, बुधनी, इंदौर 4, उज्जैन उत्तर, आलोट शामिल हैं। वहीं बीजेपी की बात करें तो उनको इन सीटों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। टीकमगढ़, पवई, भोपाल दक्षिण पश्चिम, त्योंथर, जबलपुर उत्तर, बुराहनपुर, जोबट, अलीराजपुर, कालापीपल, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर दक्षिण, अटेर, रैगांव, नागौद, वारासिवनी, नर्मदापुरम, भिंड, महू, मनावर, महेश्वर और देपालपुर शामिल हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि मतदान 17 नवंबर को होना है और 30 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है ऐसी स्थिति में भाजपा और कांग्रेस किस प्रकार से डैमेज कंट्रोल कर पाएंगी यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

दक्षिण-पश्चिम की 108 V/S 'भगवान' की लड़ाई,सतह पर आई
भारतीय जनता पार्टी ने पांचवी सूची में 92 वे उम्मीदवारों की घोषणा कर अब तक 228 सीटों में अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है (bjp candidate list)। इस सूची में भोपाल की दक्षिण -पश्चिम विधानसभा सीट भी शामिल है। इस सीट के इतिहास पर जाएं तो इस सीट से जिस पार्टी का विधायक जीता है उसी की प्रदेश में सरकार बनी है। पहले इस सीट से पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता (Umashankar Gupta) जीता करते थे लेकिन साल 2018 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा (PC Sharma) ने जीत दर्ज की और प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी हुई। पीसी शर्मा उन नेताओं में शुमार किए जाते हैं जो 24 घंटे अपने क्षेत्र की जनता के लिए उपलब्ध रहते हैं। 2019 में गणेश चतुर्थी के दौरान एक घटना खटलापुरा में हुई थी जहां गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान कई बच्चे तालाब में डूब गए थे। रात के करीब दो बजे थे पीसी शर्मा जी को कहीं से घटना की जानकारी हुई,उस वक्त उनके पास ड्राइवर तक नहीं था लेकिन पीसी शर्मा ने सबकुछ परवाह किए बगैर घटना स्थल पर पहुंचे और अपनी तरफ से यथासंभव मदद की। उसके बाद कोरोनाकाल का दौर आया जब ना सिर्फ दक्षिण-पश्चिम विधानसभा (Bhopal Dakshin Paschim) बल्कि भोपाल की अलग-अलग विधानसभा सीटों की जनता राशन से लेकर उपचार तक के लिए परेशान होकर भटक रही थी उस दौरान भी पीसी शर्मा के दरवाजे लगातार जनता की मदद के लाए खुले रहे। पीसी शर्मा जनता की भलाई के लिए ना सिर्फ शारीरिक अथवा आर्थिक रुप से मदद करने के लिए तैयार रहते हैं बल्कि उनके क्षेत्र की जनता खुशहाल और समृद्ध रहे उसके लिए पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सावन के महीने में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन कराया लगातार पार्थिव शिवलिंग का भी निर्माण कराया,हाल ही में जब भाजपा और कांग्रेस के नेता टिकट के लिए अपने हाई कमान के पास चक्कर काट रहे थे उस दौरान पीसी शर्मा शास्त्री नगर में तीन दिवसीय भागवत कथा का आयोजन कर रहे थे। पीसी शर्मा हमेशा कहते हैं कि वो दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में आने वालों को वोटर नहीं बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। चुनाव वो पद अथवा प्रतिष्ठा के लिए नहीं लड़ते बल्कि जनता की सेवा के लिए वो चुनाव लड़ते हैं जिससे वो अपने क्षेत्र के जनता की पूरी शक्ति के साथ सेवा कर सकें।

सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा का टिकट मिलते ही पुराने जख्म हुए हरे,मूल भाजपाइयों ने किया किनारा
भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को 92 वे प्रत्याशियों की घोषणा कर कुल 228 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है अभी दो सीटों की घोषणा होनी बांकी है (bjp candidate list)। इस बीच सबसे चौकाने वाला जो नाम आया वो त्योंथर विधानसभा सीट से श्रीनिवास तिवारी (shrinivas tiwari) के नाती सिद्धार्थ तिवारी (siddharth tiwari) का नाम रहा है। सिद्धार्थ तिवारी काफी समय से त्योंथर (teonthar) में सक्रिय थे और उन्हे पूरी उम्मीद थी कि कांग्रेस पार्टी उन्हे टिकट जरुर देगी। लेकिन उनके अरमानों में उस वक्त पानी फिर गया जब कांग्रेस ने दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Ramashankar Patel) को टिकट दे दिया। सिद्धार्थ तिवारी को अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में दिख रहा था ऐसे में उनके लिए मंत्री राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) उम्मीद की किरण बन कर आए और सिद्धार्थ को भाजपा में ज्वाइन करवा दिया। महज दो दिन पहले हाथ छोड़ फूल थामने वाले सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा ने टिकट भी दे दिया। लेकिन भाजपा को यह नहीं मालूम था कि सिद्धार्थ को टिकट देने से वो सीट उसके हाथ से जा सकती है। एक कहावत है कि आधी छोड़ पूरी को धावे,पूरी मिलै ना आधी पावै, भाजपा के इस फैसले से त्योंथर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। श्यामलाल द्विवेदी (shyamlal dwivedi) जैसे पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता का टिकट कटने के कारण स्थानीय कार्यकर्ताओं में काफी विरोध देखने को मिल रहा है। दूसरी तरफ श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि कांग्रेस की तत्कालीन दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh government) सरकार में जिस प्रकार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया और उनके खिलाफ फर्जी केस दर्ज करवाए गए उससे त्योंथर भाजपा के कार्यकर्ता अब तक उबर नहीं पाए थे कि श्रीनिवास तिवारी के नाती को भाजपा ने टिकट देकर उन पुराने जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है। सिद्धार्थ तिवारी को टिकट मिलते ही कौशलेश द्विवेदी जैसे नेता फिर सक्रिय हो गए बिना भाजपा ज्वाइन किए सभी सिद्धार्थ के कार्यक्रम में शामिल होने लगे और परिणाम यह निकला कि भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं ने सिद्धार्थ और भाजपा से दूरी बना ली। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार रमाशंकर पटेल पटेल का चुनाव जीतना आसान नजर आने लगा है।

भारतीय जनता पार्टी ने पांचवी सूची की जारी,त्योंथर से सिद्धार्थ तिवारी को मिला टिकट
लंबे इंतजार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पांचवी लिष्ट जारी कर दिया है (bjp candidate list)। भोपाल में कई बैठकें और फिर दिल्ली में हुई कई दौर की बैठकों के बाद भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय संगठन ने सूची जारी कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने पांचवी 92 वे नामों की सूची जारी की गई है दो नाम अब भी होल्ड किए गए हैं। भोपाल की दक्षिण पश्चिम से भाजपा ने प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी पर विश्वास दिलाया है,अब पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और भगवानदास सबनानी के बीच लड़ाई देखने को मिलेगी। त्योंथर से सिद्धार्थ तिवारी को मिरा टिकट,सुभाष वर्मा,देवसर,आष्टा से गोपाल सिंह सहित कुल 92 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए हैं। विजयपुर से- बाबूलाल मेवरा,जौरा से सुबेदार सिंह,अंबाह (अजा) से कमलेश जाटव,भिंड से नरेन्द्र सिंह कुशवाह,मेहगांव से राजेन्द्र शुक्ला,ग्वालियर पूर्व से माया सिंह,नेपानगर (अजजा) से मंजू राजेन्द्र दादू को मिला टिकट।

आग इधर भी है आग उधर भी है,अब देखना है इस आग में घी कौन डालता है
सियासी आग इस वक्त प्रदेश में इस कदर जल रही है कि उसकी लपटें प्रदेश के हर कोने में जल रही हैं और धुंआ चारों ओर फैला हुआ है (MP elections)। दरअसल मतदान की तारीख जितनी करीब आती चली जा रही है चुनाव का नशा और उसकी खुमारी उसी प्रकार बढ़ती चली जा रही है। जिन वर्तमान विधायकों का टिकट कटा वो हार मानने के लिए तैयार नहीं हैं। और जिन्हे टिकट मिला उन्हे भाजपा और कांग्रेस अपना बेस्ट आप्शन मान कर चल रहे हैं। अब बात करते हैं उम्मीदवारों के चयन और सरकार के रास्ते का। कांग्रेस ने पहली सूची में 144 नामों की घोषणा की जिसमें कांग्रेस यह मान कर चल रही है कि उसमें पार्टी को कमसे कम 120 सीटें मिलेंगी (congress candidate list)। दूसरी सूची 88 नामों की आई जिसमें कांग्रेस यह मान कर चल रही है कि उसके खाते में 30 विधायक आएंगे। कुल मिला कर कांग्रेस का यह मानना है कि उसके 150 विधायक आएंगे। कांग्रेस के कुछ नेताओं का यह मानना है कि 150 विधायक आएंगे तो भाजपा खरीद फरोख्त नहीं कर पाएगी,इसी लिए कांग्रेस पार्टी 150 से अधिक विधायकों का लक्ष्य लेकर चल रही है। कांग्रेस की जिस प्रकार 2020 में सरकार गिरी उसके बाद कांग्रेसी खेमें में विश्वास की कमी आई और यही कारण है कि कांग्रेस नेता चाहते हैं कि माहौल का फायदा उठाया जाना चाहिए और कमसे कम 150 विधायकों की जीत होनी चाहिए। वहीं भारतीय जनता पार्टी है कि वो सत्ता को अपने हाथ से जाने नही देना चाहती है। जिसके चलते आलम ये है कि भाजपा अभी भी 94वे उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पाई है (bjp candidate list)। भाजपा के नेताओं का मानना है कि गिरी हालत में उसके 120 से 130 विधायक जीत कर आएंगे। मतलब साफ है कि भाजपा किसी भी सूरत में सत्ता को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही है।

भाजपा में पांचवी सूची की नहीं सुलझ रही गुत्थी,पहले प्रदेश और अब दिल्ली में चल रही माथापच्ची
भारतीय जनता पार्टी ने पहली सूची जारी कर बहुत बड़ा दंभ भरा था कि कांग्रेस कहती रही और भाजपा ने सूची जारी कर दिखा दिया कि चुनावी तैयारी में कौन तेज चल रहा है (bjp candidate list)। भाजपा ने पहली सूची अगस्त के महीने में जारी कर सभी को चौंकाया उसके बाद सितंबर के महीने में भाजपा ने तीन सूचियां जारी की और लगातार कांग्रेस पर सूची को लेकर हमला किया। भाजपा ने चार सूचियों में 136 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया लेकिन पांचवीं सूची से भाजपा भटक गई,भाजपाई खेमें में हार का फोविया ऐसे हावी हुआ कि भाजपा का संगठन सूची जारी करने की हिम्मत ही नही जुटा पा रहा है। उधर कांग्रेस ने दो सूचियों में ही अपने सारे तुरुप के इक्कों को चुनावी मैदान में उतार कर यह बता दिया कि वो इस चुनाव को टेस्ट स्टाइल में नहीं टी20 की स्टाइल में देख रहे हैं। अब बारी भाजपा की है लेकिन एक-एक दिन कर बढ़ते चले जा रहे हैं आज से नामांकन की तारीख भी शुरु हो चुकी है और आलम यह है कि भाजपा ने अभी तक 94वे नामों पर सहमति नहीं बनाई है। एमपी बीजेपी से लेकर दिल्ली तक भाजपा की कई चरणों में बैठक हो चुकी है लेकिन पार्टी सही उम्मीदवारों का चयन करने में अब तक नाकाम साबित हुई है (bjp meeting)। भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का भी दंभ भरती है और हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि 94वे नाम भाजपा को नही मिल रहे जो कांग्रेस को चुनौती दे पाएं। मतलब साफ है। भाजपा के सर्वे में पार्टी की स्थिति ठीक नहीं है यही कारण है कि भाजपा अपने उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पा रही है।

आज जारी होगी भाजपा की सूची,27 हारी सीटों पर भी होंगे चौकाने वाले नाम
कांग्रेस पार्टी ने 230 विधानसभा सीटों में 229 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है,एक नाम बैतूल का रोका गया है (congress candidate list)। लेकिन भारतीय जनता पार्टी को 94वे सीटों पर अब भी उम्मीदवारों का ऐलान करना बांकी है (bjp candidate list)। भाजपा अभी 136 सीटों में ही उम्मीदवारों की घोषणा कर पाई है। अब कांग्रेस की सूची जारी होने के बाद भाजपा पर भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने का दबाव है लिहाजा दिल्ली में आज होने वाली भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में बची हुई सीटों पर मंथन होना है,सबसे बड़ी बात यह है कि इन 94वे सीटों पर 27 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां पर साल 2018 में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। लिहाजा ऐसी सीटों पर भाजपा को काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है। बैठक के दौरान 58 विधायकों की किस्मत का भी भाजपा हाई कमान को फैसला करना बांकी है। ये वो नाम हैं जिनका परफॉर्मेंश खराब बताया गया है। भाजपा के हर सर्वे में इन विधायकों की रिपोर्ट खराब बताई जा रही है। लेकिन भाजपा संगठन टिकट काटने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है। भाजपा को डर सता रहा है कि जिस विधायक का वो टिकट काटेंगे वो भाजपा के विरोध में गतिविधियां चलाएगा और चुनाव में काफी नुकसान हो सकता है। आज होने वाली भाजपा की दिल्ली की बैठक में इन्ही सब बातों पर विचार किया जाएगा। और फिर उम्मीदवारों के नामों को फायनर करके सूची जारी कर दी जाएगी।

सिद्धार्थ के भाजपा ज्वाइन करते ही त्योंथर भाजपा में विद्रोह,सभी ने स्थानीय उम्मीदवार की उठाई मांग,बात नहीं मानी तो होंगे सामूहिक इस्तीफे
हाल ही में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) के नाती सिद्धार्थ (राज) तिवारी (Siddharth Tiwari) ने भोपाल स्थिति भाजपा कार्यालय में भाजपा की सदस्यता ली है। सिद्धार्थ के भाजपा ज्वाइन करने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हे भाजपा त्योंथर से अपना उम्मीदवार भी घोषित कर रकती है। और यही कारण है कि त्योंथर विधानसभा के सभी भाजपा पदाधिकारियों ने बगावती तेवर अपनाते हुए इस्तीफा देने का मन बना लिया है। गुरुवार को त्योंथर भाजपा के तीनों मंडल अध्यक्षों सहित ब्लाक के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने वर्तमान विधायक श्यामलाल द्विवेदी (Shyamlal Dwivedi) के निवास पर बैठक की थी। बैठक में सभी ने प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav) ,सह प्रभारी अश्वनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) और सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के नाम पर एक आवेदन तैयार किया है जिसमें उन्होने लिखा है कि कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए सिद्धार्थ तिवारी और उनके परिवार ने भाजपा और RSS के विरुद्ध हमेशा काम किया है। तिवारी खानदान के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध बहुत सारे प्रकरण दर्ज कराने के साथ-साथ प्रताड़ित भी किया गया था। पार्टी के सभी पदाधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर मांग करते हुए कहा है कि उन्हे स्थानीय और पार्टी के किसी मूल कार्यकर्ता में से ही उम्मीदवार का चयन करके दिया जाना चाहिए। बैठक में मंडल अध्यक्ष राजनारायण तिवारी,जिला अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा प्रशांत पाठक,कौशलेश तिवारी जिला कार्यकारिणी सदस्य,विभव कुमार जायसवाल,अध्यक्ष नगर परिषद चाकघाट। सहित कई पदाधिकारी शामिल हुए और सभी ने एकमत होते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मूल और स्थानीय कार्यकर्ता को ही टिकट दिया जाना चाहिए और ऐसा नहीं होने पर सभी पदाधिकारी सामूहिक रुप से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे। पत्र की जानकारी सभी पदाधिकारियों ने मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को भी दी है,बैठक के दौरान मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को फोन लगाया गया और उन्हे बताया गया कि सिद्धार्थ तिवारी को टिकट दिया जाता है तो भाजपा के मूल कार्यकर्ता भाजपा के उम्मीदवार का साथ नहीं देंगे।

कांग्रेस ने 88 प्रत्याशियों की जारी की सूची,छह विधायकों के काटे टिकट
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार देर रात को प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी (congress second list) । इसमें 88 नाम हैं, जिसमें में पहली सूची में घोषित तीन प्रत्याशी के टिकट भी बदले गए हैं। पार्टी ने छह विधायकों के टिकट काटे हैं। सूची के अनुसार अब दतिया से अवधेश नायक की जगह राजेंद्र भारती, गोटेगांव में शेखर चौधरी की जगह नर्मदा प्रसाद प्रजापति यथावत और पिछोर से शैलेंद्र सिंह का टिकट काटकर अरविंद लोधी को प्रत्याशी बनाया गया है। भोपाल दक्षिण-पश्चिम से पीसी शर्मा,गोविंदपुरा से रवीन्द्र साहू,हुजूर से नरेश ज्ञानचंदानी और भोपाल उत्तर से विधायक आरिफ अकील के उत्तराधिकारी के तौर पर आतिफ अकील मैदान में होंगे। छिंदवाड़ा से सांसद नकुल नाथ ने जिन तीन प्रत्याशियों के नाम पहले घोषित किए थे उन्हें शामिल करते हुए 88 प्रत्याशियों की सूची जारी की गई है (congress candidate list)। अब केवल बैतूल जिले की आमला सीट का प्रत्याशी घोषित होना बांकी है। कांग्रेस यहां से राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी निशा बांगरी को चुनाव लड़ना चाहती है। पर अभी शासन ने उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया है। शिवपुरी से प्रत्याशी केपी सिंह को वापस किशोर भेजे जाने की चर्चा थी लेकिन पार्टी अपने पूर्व के निर्णय पर कायम रही। यहां से भाजपा से कांग्रेस में आए विधायक वीरेंद्र रघुवंशी का प्रत्याशी बनने की मांग रघुवंशी समाज कर रहा था। भिंड से एक बार फिर चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को मैदान में उतर गया है वह भाजपा से फिर कांग्रेस में लौटे हैं।