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अबकी बार 'गणेश' विसर्जन पर ध्यान,फंसी सतना और अब रीवा की बारी
लोकसभा का चुनाव जितना आसान दिख रहा है उतना है नहीं। एमपी में करीब दस ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां पर जीत किसी की भी हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। विंध्य की बात करें तो यहां पर बीजेपी के लिए विधानसभा से ज्यादा कठिन लोकसभा का चुनाव होता चला जा रहा है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर बीजेपी ने एक बार फिर दांव लगाया है और उनके खिलाफ कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। ये वही सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) है जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी पटखनी दी थी। और अब वही दोनों प्रतिद्वंदी एक बार फिर चुनाव मैदान में दो हाथ करने के लाए तैयार हैं। लेकिन इसके ठीक उलट मैहर से चार बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी (narayan tripathi) ने बीएसपी से टिकट लेकर चुनाव में उतने का ऐलान कर दिया है। मतलब साफ है ब्राम्हण बाहुल सीट में दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों ने ओबीसी उम्मीदवार पर दांव लगाया है। ऐसा माना जा रहा है कि सतना के ब्राम्हणों का पूरा वोट नारायण त्रिपाठी के पक्ष में जाएगा। उसके अलावा एससी वर्ग का वोट बीएसपी के नाते नारायण त्रिपाठी के खाते में जाएगा। और अगर ऐसा होता है तो अबकी बार गणेश विसर्जन तय है। गणेश सिंह से स्थानीय जनता काफी नाराज भी है। गणेश सिंह को कट्टर कुर्मी नेता माना जाता है। हांलाकि भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेता संभावित हार को मानने के लिए तैयार नहीं हैं बल्कि उनका यह मानना है कि नारायण त्रिपाठी का चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि गणेश सिंह एक बार फिर सतना से भाजपा का पर्चम लहराने वाले हैं।

रीवा,सतना,अनूपपुर,जबलपुर और छिंदवाड़ा के हजारों कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) से पहले कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर लगातार जारी है। गुरुवार को हजारों की संख्या में रीवा,सतना,अनूपपुर जबलपुर और छिंदवाड़ा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। भाजपा में ज्वाइन करने वाले नेताओं में पूर्व विधायक और जिला पंचायत अध्यक्षों सहित अलग- अलग तरह के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली है। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 15 हजार कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। और यह आंकड़ा ठीक इसके डबल होने की उम्मीद जताई जा रही है। होली के बाद एक बार फिर ज्वाइनिंग का दौर शुरु होगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी (jitu patwari) के पीसीसी चीफ बनने के बाद ऐसा पहला मौका है जब कांग्रेस के कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में बीजेपी का रुख कर रहे हैं। इस पलायन का कारण भी जीतू पटवारी ही बताए जा रहे हैं क्योंकि उनके पीसीसी चीफ बनने के बाद कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है इसके अलावा पार्टी का सत्ता में नहीं आना भी कांग्रेस से पलायन बड़ा कारण बताया जा रहा है।

विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...
विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव विंध्य (vindhya) हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए अबूझ पहेली रहा है। अब बात लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) की करते हैं बीजेपी ने अपने सभी 29 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जिसमें संसदीय सीट और जातिगत आधार को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। बुधवार को सीधी में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. राजेश मिश्रा को पार्टी ने चुनाव मैदान पर उतार दिया है। लेकिन राजेश मिश्रा को भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पसंद नहीं कर रहे हैं यही कारण है कि बुधवार को उनके नामांकन के लिए सीएम मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला खुद पहुंचे। इस दौरान रोड शो और एक बड़ी जनसभा का आयोजन कर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने का जमकर प्रयास किया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भी भाजपा हाई कमान ने विंध्य में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। पीएम मोदी की जनसभाएं हों अथवा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विंध्य में दौरे हों। भाजपा के इन दोनों बड़े नेताओं ने विंध्य की कमान खुद अपने हाथ में ली जिसका परिणाम ये निकला की विंध्य की जनता ने बीजेपी के खाते में 30 में से 25 सीटें देकर बीजेपी को मालामाल कर दिया। और अब लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही बीजेपी के नेताओं के केन्द्रबिंदु में एक बार फिर विंध्य और वहां की जनता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने अंदर खाने से कई तरह की रणनीति तैयार कर रखी है। इस बात में कोई शक नहीं है कि विंध्य की राजनीति हमेशा कठिन मानी जाती रही है क्योंकि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आवादी विंध्य में ही निवास करती है और भारतीय जनता पार्टी जो ब्राम्हण,बनिया की पार्टी जानी जाती थी वही पार्टी आज पिछड़ा वर्ग समर्थित पार्टी मानी जाने लगी है जिसके कारण सवर्ण वर्ग अब भाजपा से दूर होने लगा है लिहाजा विंध्य में बीजेपी को सीटें जीतने के लिए अपने सभी प्रकार के अस्त्र और शस्त्र इस्तेमाल करने कड़ेंगे।

छिंदवाड़ा में बीजेपी का 'शंखनाद' अभियान,जीत का तैयार हुआ ब्ल्यू प्रिंट
बीजेपी सोशल मीडिया विभाग ने छिंदवाड़ा में 'शंखनाद' (shankhanad) अभियान का आगाज कर दिया है। इस अभियान के अंतर्गत 33 मंडलों के आईटी और सोशल मीडिया संयोजक,सह संयोजक और प्रभारी जुटे। कार्यक्रम में बीजेपी सोशल मीडिया के प्रदेश संयोजक अभिषेक शर्मा (Abhishekh Sharma) ने मौजूद पदाधिकारियों को बताया कि छिंदवाड़ा की जीत भाजपा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। अभिषेक शर्मा ने कहा कि इस सीट पर ना सिर्फ बीजेपी के संगठन की नजर है बल्कि पूरे प्रदेश और देश की भी नजर टिकी है इसलिए यह सीट बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शंखनाद अभियान के माध्यम से बीजेपी सोशल मीडिया विभाग प्रदेश के हर युवा वोटर को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इसी प्रकार का कार्यक्रम बीजेपी सोशल मीडिया विभाग जबलपुर में भी आयोजित कर चुका है और आने वाले समय में प्रदेश के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में भी भीजेपी सोशल मीडिया विभाग की टीम करने जा रही है। बीजेपी सोशल मीडिया टीम के प्रदेश संयोजक अभिषेक शर्मा ने विधानसभा चचुनाव में भी इसी प्रकार से कई अभियान संचालित किया था जिसके तहत महिलाओं तक लाड़ली बहना योजना सहित महिलाओं के लिए किए जा रहे कामों को पहुंचाने का काम किया था और उसका नतीजा यह निकला कि जिस चुनाव में बीजेपी की सरकार जाने का दावा किया जा रहा था उसी चुनाव में बीजेपी ने 163 सीट जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। और अब एक बार फिर बीजेपी का सोशल मीडिया विभाग ऐक्शन में आ गया है। युवाओं को लगातार जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

धर्म से बात न बने तो जातियों को अलग कर सत्ता तक पहुंचा जा सकता है,ऐसा सोचते हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता
मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी भाजपा और कांग्रेस में इन दिनों जनता के दिल तक उतरने के लिए मुद्दों की तलाश है। भाजपा का स्टैंड तो क्लियर है राम मंदिर और हिंदुत्व लेकिन कांग्रेस अब तक अपना चुनावी एजेंडा तय नहीं कर पाई कि चुनाव में जाकर वो भाजपा का काउंटर कैसे करेगी। ऐसे में शुक्रवार को कांग्रेस का एक कार्यकर्ता पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) के पास टिकट की चाहत लिए पहुंचता है। जीतू पटवारी कहते हैं कि युवा वर्ग चुनाव लड़ने का इच्छुक है अच्छी बात है लेकिन चुनावी समर में जब उतरोगे तो भाजपा के बड़े मुद्दों का काउंटर कैसे करोगे। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ता का जवाब आता है कि भाजपा धर्म की और भगवा की बात करती है जो जनता को पसंद आती है। इसकी काट यही है कि हम लगातार जातियों की बात करें। जाति आधारित जनगणना की बात करे। अलग-अलग वर्गों के पास जाएं बार-बार उनके पिछड़े होने का अहसास दिलाएं और बताएं की जातियों की जनगणना होने से सभी जातियों की संख्या क्लियर हो जाएगी और उससे विकास के नए दरवाजे खुलेंगे। मतलब साफ है कि कांग्रेस के पास भाजपा का काउंटर करने के लिए कुछ नहीं बचा तो डिवाइड एंड रुल की पॉलिसी पर कांग्रेस काम करने लगी मतलब फूट डालो और शासन करो की रणनीति पर कगंग्रेस पार्टी आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी भी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान हर जगह अपने संबोधन में जाति आधारित जनगणना कराने की बात करते हैं। सत्ता पाने के लिए जब धर्म का मुद्दा काम नहीं आया तो कांग्रेस ने जातियों का सहारा लेना शुरु कर दिया है।

सुरेश पचौरी के बीजेपी में शामिल होते ही एमपी कांग्रेस में 'दिग्विजय' बाद हावी
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कांग्रेस नेता आधारित पार्टी है। जहां नेताओं के जयकारे लगाए जाते हैं न कि पार्टी के समर्थन में जयकारे लगाए जाते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने अपने कई समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सुरेश पचौरी के कांग्रेस छोड़ने पर पार्टी के नेताओं को पछतावा तो दूर की बात है बल्कि कांग्रेस पार्टी में जश्न का माहौल है। क्योंकि सुरेश पचौरी के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस में मैदान खाली हो गया। एक के बाद एक कांटे कांग्रेस के खुद निकलते चले गए ऐसे में मैदान खाली देख कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) के समर्थकों ने अपना आधिपत्य स्थापित करना शुरु कर दिया। इन दिनों एमपी कांग्रेस में पूर्व सीएम दिग्विजय खेमे का बोलबाला देखने को मिल रहा है। ऐसे में जो दिग्विजय समर्थक नहीं हैं अथवा उनके खेमे के नहीं हैं वो अपनी ही पार्टी में बेगाना सा महसूस करने लगे हैं। पार्टी में अब भी ऐसे कई प्रतिभाशाली और मेहनती वर्कर हैं जो पार्टी के लिए काम तो करना चाहते हैं लेकिन दिग्विजय वाद हावी होने के कारण वो पार्टी में काम नहीं कर पा रहे हैं। कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता आते हैं तो उन्हे बैठने के लिए स्थान भी नहीं मिलता जिसके कारण वो पार्टी कार्यालय के बाहर चाय की दुकान में भटकते हुए अक्शर देखे जाते हैं। जीतू पटवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। जिस दिन से जीतू पटवारी को पार्टी की कमान मिली है उस दिन से कांग्रेस में लगातार पलायन का दौर जारी है। एक के बाद एक बड़े नेता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूल का दामन थामते चले जा रहे हैं। कुल मिला कर कांग्रेस पार्टी इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। पार्टी की स्थिति सुधरना तो दूर लगातार नए-नए खेमे पनपते चले जा रहे हैं और जो नेता खेमेबाजी करने में सक्षम नहीं हैं वो दिग्विजय सिंह के सामने माथा टेकने के लिए मजबूर हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है और कांग्रेस कार्यालय में किसी प्रकार की चुनावी रौनक देखने को अब तक नहीं मिल रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि टीवी डिवेट में बैठने के लिए कांग्रेस में प्रवक्ता तक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बीजेपी प्रवक्ताओं को भी डिबेट करने में मजा नहीं आ रहा है।

पूरी कांग्रेस खाली हुई जा रही है और राहुल गांधी चने के झाड़ में बैठ कर गिनती कर रहे हैं
कांग्रेस मुक्त अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग का कारवां बढ़ता चला जा रहा है। बुधवार को मुरैना जिले के करीब 500 और छिंदवाड़ा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ले ली (bjp membership)। इन सभी कार्यकर्ताओं को ज्वाइनिंग कमेंटी (bjp joining committee) के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर बीजेपी की सदस्यता दिलाई है। विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के सफर में कांग्रेस के 15 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं बीजेपी का दामन थाम लिया है। मजे की बात ये है कि रोजाना सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं यहां तक की कांग्रेस के पास इस वक्त मजबूत उम्मीदवार तक नहीं हैं इसके वाबजूद कांग्रेस के नेता पार्टी में चल रहे पलायन को रोकने का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी (rahul gandhi) भारत न्याय यात्र निकाल कर चने के झाड़ में चढ़े बैठे हैं उन्हे लग रहा है कि जनता कांग्रेस को जिताएगी और भारतीय जनता पार्टी है कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को भाजपा की सदस्यता दिलाती चली जा रही है।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज
पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (govind singh) पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब बीस मिनट तक बंद कमरे में बात की जिसके बाद डॉ. गोविंद सिंह की भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। हांलाकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इस मुलाकात को सौजन्य मुलाकात बताते हुए भाजपा में शामिल होने की अटकलों को विराम लगाने का प्रयास किया है। लेकिन जिस वक्त कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है उस वक्त डॉ. गोविंद सिंह का पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिलना कई तरह के राजनीतिक कयासों को हवा दे रहा है। डॉ. गोविंद सिंह ने ये भी कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा रहे हैं उन्हे उनके कद के हिसाब से पार्टी में सम्मान नहीं मिल पाया जिसके कारण उन्होने भाजपा की सदस्यता ली है। लोकसभा चुनाव लड़ने के विषय पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुरैना लोकसभा सीट से वो चुनाव लड़ना चाहते थे और पार्टी भी तैयार थी लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होने अपना मन बदल लिया और अब वो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। साथ ही डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा की ज्वाइनिंग को लेकर कहा है कि अभी वो भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहे हैं लेकिन जब भी भाजपा ज्वाइन करेंगे मीडिया को सबसे पहले बुला कर जरुर बताएंगे। गौरतलब है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक हैं और जिस प्रकार से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने काम को अंजाम दिया है उससे पूरी कांग्रेस में उथल पुथल सी स्थिति बन गई है। और ऐसी स्थिति में दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात ने कांग्रेसी खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

सुरेश पचौरी की चार साल पहले भाजपा ज्वाइन करने की लिखी गई पटकथा,बहुत देर कर दी सनम आते-आते
राजधानी की नगर निगम में एल्डरमैन से राजनीति की शुरुआत करने वाले सुरेश पचौरी (suresh pachouri) केंद्र में दो बार राज्य मंत्री और 24 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। सुरेश पचौरी गांधी नेहरू परिवार से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार रहे अहमद पटेल के मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा करीबी रहे हैं। उन्होंने शनिवार सुबह कांग्रेस को बाय-बाय कह दिया। हालांकि पचौरी और इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला मार्च 2020 में ऑपरेशन लोटस के वक्त भी कुछ शर्तों के कारण भाजपा में जाते-जाते रह गए थे। उनके भाजपा में जाने की पटकथा 4 साल पहले लिखी गई थी। बात मार्च 2020 की है।तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनबन होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी थी। उस वक्त कांग्रेस के 22 विधायकों को पहले हरियाणा के मानेसर और उसके बाद भाजपा शासित कर्नाटक के बेंगलुरु ले जाया गया था। कांग्रेस सरकार के दौरान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी से सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया ही नहीं पचोरी भी परेशान थे और वह कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। सिंधिया की बगावत के बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया था। भाजपा में मौजूद Mukhbir बताते हैं कि उस वक्त सिंधिया और पचौरी की आपस में बात नहीं हो पाई थी। कांग्रेस के महाकौशल के एक नेता के जरिए सुरेश पचौरी की भाजपा में बात हुई लेकिन महाकौशल के नेता वही पद चाहते थे जिस पद पर वह कांग्रेस सरकार में थे। उस वक्त सुरेश पचौरी खेमे की तरफ से उन्हें राज्यसभा में भेजने की भी शर्त रखी गई थी। तब बात नहीं बन पाई और सुरेश पचौरी कांग्रेस में ही रह गए।

कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका,सुरेश पचौरी सहित आधा दर्जन नेता बीजेपी में हुए शामिल
मप्र में राहुल गांधी के जाते ही कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस नेताओं में चार बार राज्यसभा सांसद रहे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी के साथ, विशाल पटेल,गजेंद्र सिंह राजू खेड़ी,संजय शुक्ला,अर्जुन पलिया,आलोक चंसोरिया,कैलाश मिश्रा,योगेश शर्मा,अतुल शर्मा,सुभाष यादव,दिनेश ढिमोले ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन सभी नेताओं को जॉइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) भाजपा में लेकर आए हैं। ज्वानिंग के दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,सीएम मोहन यादव,पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान,मंत्री कैलाश विजय वर्गीय मौजूद रहे। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा कि जिस प्रकार से भगवान राम के स्थापना दिवस के निमंत्रण को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया था उसके बाद से ही वो आहत चल रहे थे। साथ में सुरेश पचौरी ने ये भी कहा कि पहले वाली कांग्रेस अब नहीं रही। और यही कारण है कि उन्होने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी ने कहा कि यूं ही कोई वेबफा नहीं होता। कुछ तो कारण रहे होंगे वेवफा होने के।

भक्ति,मुदित और हर्षवर्धन के नेत्रृत्व में भाजपा ने बनाई पांच सदस्यीय डिजिटल टीम
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (mp bjp) ने पांच सदस्यीय डिजिटल टीम का गठन कर दिया है। भाजपा की इस डिजिटल टीम का नेत्रृत्व युवा नेत्री भक्ति शर्मा (bhakti sharm), मुदित शेजवार (mudit shejwar) और हर्षवर्धन जोशी (harshavardhan joshi) करेंगे। इनके सहयोग के लिए दो अन्य सदस्य भी दिए गए हैं। यह डिजिटल टीम डिजिटल ऐड के बारे में डिकसन कर पार्टी नेत्रृत्व को देगी और जब वो फायनल होगा तो फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म में प्रसारित किया जाएगा। गौरतलब है कि भक्ति और मुदित शेजवार को लेकर लंबे समय से भाजपा में कोई जिम्मेदारी देने की योजना चल रही थी लेकिन पार्टी नेत्रृत्व तय नहीं कर पा रहा था कि इन युवा नेताओं को उनकी क्षमता के हिसाब से कौन सी जिम्मेदारी दी जाए। आखिरकार चुनाव करीब आया तो पार्टी नेत्रृत्व ने इन युवा नेताओं को गंभीर जिम्मेदारी देकर यह बता दिया है कि पार्टी में चेहरों के हिसाब से उन्हे कार्य वितरित किए जाते हैं। भाजपा की यह युवा डिजिटल टीम सोशल मीडिया में प्रसारित होने वाली सभी प्रकार की सामग्री पर नजर रखने के अलावा कांग्रेस के कार्यकर्ता अथवा आईटी सेल के लोग किस प्रकार मोदी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं उस पर भी नजर रखेंगे। साथ में यह प्लान भी तैयार करेंगे कि कांग्रेस के आरोपों का काउंटर कैसे करना है। भक्ति और मुदित के नेत्रृत्व में बनाई गई टीम को बारीकी से कांग्रेस के भ्रामक प्रचार पर नजर रखने के लिए भी कहा गया है।

बीजेपी में पांच सीटों पर अब तक नहीं हुआ फैसला,चार में महिला उम्मीदवार की उम्मीद,कांग्रेस की बैठक आज
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए एमपी की 29 लोकसभा सीटों में 24 की घोषणा कर दी है (bjp lok sabha candidate list) । अब पांच सीटों पर संशय की स्थिति बन गई है। केन्द्रीय हाई कमान का मानना है कि कमजोर सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मौका दिया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि इसी लिए भाजपा में बची हुई पांच सीटों के लिए फैसला नहीं हो पार रहा है। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा छोड़ कर बांकी की चार सीटों पर बीजेपी महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतार सकती है (mo bjp)। अभी तक 24 सीटों में चार महिला उम्मीदवारों को भाजपा ने मौका दिया है। पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी और बढ़नी चाहिए इसलिए पांच में चार सीटें महिलाओं के खाते में जाने की संभावना बढ़ गई है। उधर कांग्रेस की बात करें तो अभी तक एक भी प्रत्याशी की घोषणा कांग्रेस पार्टी नहीं कर पाई है। आज दिल्ली में कांग्रेस ने केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक आयोजित की है। जिसमें स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचार कर उसे अंतिम रुप दिया जाएगा। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी,विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम भाग लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के लिए सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में रायशुमारी कराई थी। समन्वयकों ने जिला,ब्लाक इकाइयों के पदाधिकारी,विधायक,विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी,पार्टी के सभी संगठनों के पदाधिकारियों से संभावित दावेदारों से जानकारी ली है।