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15अगस्त तक होंगी 30 लाख भर्तियां राहुल गांधी ने किया दावा,चार जून को बनेगी कांग्रेस की सरकार

तस्वीर को जुवां की जरुरत नहीं वो खुद बोलती है,पीएम मोदी और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की ऐसी तस्वीर बनी चर्चा का केन्द्र

कांग्रेस पर बरसे प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,कहा सिक्का आपका खोटा और नोटा पर वोट डाले जनता

...और कितना टूटेगी कांग्रेस,क्या कर रहे हैं पीसीसी चीफ पटवारी,फिर सैकड़ों कार्यकर्ता बीजेपी में हुए शामिल
कांग्रेस पार्टी में लगातार पलायन का दौर जारी है। शुक्रवार को पूर्व विधायक पारुल साहू (parul sahu) सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) की उपस्थिति में सैकड़ों कांग्रेसियों ने अपने हाथ में फूल थाम लिया। ज्वाइन करने वाले नेताओं में सागर जिले की सुरखी से पूर्व विधायक पारुल साहू,अमित सक्सेना जिला पंचायत उपाध्यक्ष छिंदवाड़ा,शेर सिंह यादव प्रदेश महामंत्री कांग्रेस,डॉक्टर प्रतिमा राजगोपाल,पूर्व पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, प्रशासन अकादमी,शाहिद खान, पूर्व अध्यक्ष, शासकीय महाविद्यालय, छिंदवाड़ा सहित छिंदवाड़ा और विदिशा,रायसेन बेगमगंज के सैकडों कांग्रेसियों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। गौरतलब है कि जिस दिन से जीतू पटवारी को मप्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है उसी दिन से कांग्रेस पार्टी में लगातार पलायन का दौर जारी है जो अब तक नहीं थमा है। सदस्यता समारोह के दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिस दिन कांग्रेस ने भगवान राम के स्थापना का निमंत्रण ठुकराया उसी दिन से कांग्रेस के पतन का दौर शुरु हो गया है और अब सभी पीएम मोदी के नेत्रृत्व में देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसी लिए सब बीजेपी में अपना भविष्य देख रहे हैं।

आदिवासी वोट पर भाजपा की नजर,संघ ने संभाला मोर्चा
भारतीय जनता पार्टी अपनी कमजोर कड़ी पर हमेशा जनर रखती है और उसमें सुधार करने का प्रयास करती है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी वोटबैंक (adivasi votebank) को अपनी तरफ करने के लिए अपने अलग-अलग अनुशांगिक संगठनों को मैदान में उतार दिया है। उन्ही अनुशांगिक संगठनों में भाजपा का सबसे प्रमुख अंग है 'संघ' जिसके पदाधिकारियों ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में डेरा डाल दिया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव में भाजपा आदिवासी वर्ग के लिए सुरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटें ही जीत पाई थी। और 23 सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए लोकसभा चुनाव में आदिवासी सीटों पर भाजपा अधिक फोकस कर रही है। भाजपा की तरफ से संघ प्रचारकों ने आदिवासी सीटों और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मोर्चा संभाल लिया है। छिंदवाड़ा जिले में महाराष्ट्र के संघ प्रचारक प्रभारी बनाए गए हैं। संघ प्रचारकों ने गांव में ही डेरा डाल दिया है। संघ के कार्यकर्ता लगातार आदिवासियों के बीच समय बिता रहे हैं। कुछ गांव में संघ की शाखा से दिनचर्या की शुरुआत की जा रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग के लिए सुरक्षित 47 में से 14 विधानसभा सीटों पर भाजपा को कम वोट मिले थे। यहां 2023 के विधानसभा चुनाव में 22 सीटों पर कम वोट मिले थे। भाजपा और संघ ने इन सीटों पर विधानसभा प्रभारी भी बनाए हैं। कम वोटिंग वाली सीटों पर प्रभारी,सह प्रभारी और संयोजक नियुक्त किए गए हैं।

विंध्य में 'नड्डा' बजाएंगे बीजेपी का डंका,12 अप्रैल को सीधी का करेंगे दौरा
विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने लगातार विंध्य क्षेत्र की कमान अपने हाथ में थाम रखी है। यही कारण है कि विंध्य में बीजेपी काफी कमजोर लग रही थी तो केन्द्रीय नेत्रृत्व पर विंध्य की जनता ने विश्वास दिखाया और 30 में 25 सीटें बीजेपी की झोली में डाल दी। इस बात में कोई शक नहीं कि राजनीतिक जानकारों के लिए विंध्य हमेशा अबूझ पहेली रहा है। इतिहास गवाह है विंध्य ने हमेशा चौकाने वाले नतीजे दिए हैं और यही कारण है कि बीजेपी का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार विंध्य में नजरें गड़ाए बैठा है। अब लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) 12 अप्रैल को पहले सीधी में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे फिर रीवा का दौरा करेंगे। विंध्य में रीवा की बात करें तो यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है ठीक इसी प्रकार सतना में भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं सीधी की बात करें तो यहां पर बीजेपी उम्मीदवार राजेश मिश्रा से ज्यादा मजबूत उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल दिख रहे हैं जिसके चलते बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य में आगे आना पड़ रहा है। विंध्य में दो चरणों में चुनाव होने वाला है। सीधी और शहडोल में 19 अप्रैल को वोटिंग होगी तो वहीं सतना और रीवा में 26 अप्रैल को वोटिंग होनी है।

आज बीजेपी का मेगा ज्वाइनिंग अभियान,एक लाख से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता लेंगे बीजेपी की सदस्यता
भारतीय जनता पार्टी स्थापना दिवस के मौके पर आज रिकार्ड दर्ज करने वाली है। (bjp foundation day) और इस स्थापना दिवस को एमपी बीजेपी के नेता ऐतिहासिक बनाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को शामिल करने वाले हैं बल्कि कांग्रेस के कुछ विधायक भी बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। दरअसल बीजेपी ने स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए एक लाख कार्यकर्ताओं की सदस्यता का लक्ष्य रखा है और जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति तैयार की है उस रणनीति के तहत भाजपा एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं को सदस्यता दिला सकती है। वहीं कांग्रेस पार्टी यह सोच कर हैरान हो रही है कि भाजपा के नेता एक लाख सदस्यता की फर्जी बातें कर रहे हैं। जबकि सभी को यह मालूम है कि भाजपा का संगठन बहुत मजबूत है और बाजपा मंडल से लेकर बूथ स्तर तक काफी मजबूत है। प्रदेश भर में 65 हजार से ज्यादा बूथ हैं और भाजपा ने हर बूथ पर दो कार्यकर्ताओं की सदस्यता का लक्ष्य रखा है। इस प्रकार भारतीय जनता पार्टी अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर लेगी और कांग्रेस यही गणित सुलझाने में लगी है कि भाजपा किस हिसाब से एक लाख कार्यकर्ताओं को सदस्यता करवाएगी। दिलचश्प बात यह है कि इस सदस्यता अभियान में भाजपा कांग्रेस के कुछ वर्तमान और पूर्व विधायकों को सदस्यता दिला कर बड़ा झटका भी देने वाली है। कुछ ऐसे नेता भाजपा में शामिल होने वाले हैं जिनका अंदाजा न कांग्रेस नेताओं को है न ही भाजपा के नेताओं को है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए बीजेपी ज्वाइनिंग टोली के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।

छिंदवाड़ा-राजगढ़ का दुर्ग जीतने में जुटी बीजेपी,रीवा-सतना में BSP कर रही सेंधमारी
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अपना सारा फोकस छिंदवाड़ा (chhindwara) और राजगढ़ (rajgarh)में कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के लोकसभा चुनाव (lok sabha ekections) में प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने का संकल्प लिया है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का हर छोटा बड़ा नेता पहले छिंदवाड़ा फिर राजगढ़ की बात करता नजर आ रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि छिंदवाड़ा को जीत लिया तो प्रदेश की अन्य 28 सीटें मोदी और उनकी गारंटी के बल पर ही जीत जाएंगे। जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी छिंदवाड़ा और राजगढ़ को जीतने के लिए ब्यूह रचना करने में जुटी है उससे यह स्पष्ट है कि भाजपा नेताओं ने खुद को दो संसदीय क्षेत्रों में ही सीमित कर लिया है। भाजपा ने जिस प्रकार रणनीति अपनाई है उससे एक कहावत याद आती है। 'आधी छोड़ पूरी को धावै-पूरी मिलै न आधी पावै' मतलब साफ है कि भाजपा ने छिंदवाड़ा और राजगढ़ जीतने की रणनीति तो बना ली लेकिन सतना,रीवा और सीधी बीजेपी के हाथ से फिसलती नजर आ रही है। भाजपा ने रीवा और सतना में अपने थके हुए प्रत्याशियों को वहां की स्थानीय जनता के ऊपर थोपने का काम किया है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह को पांचवीं बार मौका दिया है तो वहीं रीवा से दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है जो निस्क्रिय नेता माने जाते हैं। सतना में गणेश सिंह के लिए कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा चुनौती दे ही रहे हैं लेकिन बीएसपी ने नारायण त्रिपाठी को चुनाव में उतार कर मोदी की गारंटी को संशय में डाल दिया है। ठीक उसी प्रकार रीवा में भाजपा ने जनार्दन मिश्रा और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियों में ब्राम्हण उम्मीदवार होते ही बीएसपी ने कुर्मी को अपना प्रत्याशी बना दिया है जिससे बीएसपी की संभावनाएं मजबूत हो गई है। सीधी की बात करें तो कमलेश्वर पटेल भीजेपी उम्मीदवार पर भारी पड़ते दिख रहे हैं पैसों की भी उनके पास कमी नहीं है जिसे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मंच पर भी स्वीकार कर चुके हैं। मतलब साफ है कि भाजपा छिंदवाड़ा और राजगढ़ का दुर्ग जीतने में लगी है और विंध्य में बीएसपी सेंधमारी कर रही है।

रीवा और सतना में 'पटेलवाद' मोदी की गारंटी में बनेगा रोड़ा,बीएसपी ने बढ़ाई मुसीबत
एमपी में विध्य क्षेत्र हमेशा राजनीति के जानकारों के लिए अबूझ पहेली रहा है। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र की तासीर बदली है लेकिन इतनी भी नहीं बदली है जितनी भाजपा ने उम्मीद की है। रीवा की बात करें तो यह संसदीय क्षेत्र ब्राम्हण बाहुल माना जाता है। और बीजेपी ने उस ब्राम्हणत्व का पिछली दो पंचवर्षीय से काफी लाभ उठाया है। लेकिन इस बार की परिस्थितियां भिन्न हैं। हांलाकि बीजेपी अब भी मोदी की गारंटी का दंभ भर रही है और बीजेपी का यह भी मानना है कि मोदी की गारंटी फेल हुई तो 'राम बेड़ा पार करेंगे' लेकिन जिस प्रकार से रीवा में भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा (janardan mishra) और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा (neelam mishra) पर दांव लगाया है उसके बाद लड़ाई दिलचश्प हो गई है। इन दोनों पार्टियों से अलग बीएसपी ने रीवा में भाजपा और कांग्रेस का तोड़ निकालते हुए कुर्मी को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। रीवा में ब्राम्हणों के अलावा कुर्मी समाज की बड़ी आबादी है और बीएसपी ने उसी का फायदा उठाते हुए अभिषेक पटेल (abhishekh patel) को चुनाव मैदान में उतार दिया है। इतिहास गवाह है कि जब भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने ब्राम्हण को अपना उम्मीदवार बनाया है तो रीवा में बीएसपी उम्मीदवारों ने चमत्कारिक प्रदर्शन कर जीत दर्ज की है। सतना का भी सूरतेहाल कुछ ऐसा ही है। बीजेपी ने चार बार के सांसद गणेश सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है जो विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं और कट्टर कुर्मी होने के कारण अन्य वर्ग इनसे काफी नाराज है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) को चुनाव मैदान में उतारा है दोनों नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं। यहां भी बीएसपी ने बड़ा खेला करते हुए पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। मतलब साब है कि बहुजन और ब्राम्हण एक तरफ होंगे तो यहां नारायण त्रिपाठी यानि बीएसपी जीत दर्ज कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों में मोदी की गारंटी रीवा और सतना में फैल होने की उम्मीद की जा रही है।

चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता
भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव (vidhansabha elections) खत्म होते ही लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) का शंखनाद कर दिया था। एमपी बीजेपी की ही बात करें तो कांग्रेस अब भी अपने सभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पाई है। उधर बीजेपी ने न सिर्फ उम्मीदवारों का ऐलान किया है बल्कि शक्ति केन्द्रों पर पथ सम्मेलन,होली के मौके पर 'मोदी की राम-राम' लेकर भाजपा के कार्यकर्ता घर-घर पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के सातों मोर्चे और जितने भी अनुशांगिक संगठन हैं सभी घर-घर जाकर लगातार वोटरों से संवाद कर रहे हैं और इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस के कुछ नेताओं को लग रहा है कि वो चुनाव में भाजपा को न सिर्फ टक्कर देंगे बल्कि वो जीत कर आएंगे। जबकि हकीकत यही है कि उन्हे इस बात का पूरी तरह से अहसास है कि चुनाव में उनकी करारी हार होने जा रही है। उन्ही नेताओं में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,कांतीलाल भूरिया सहित कई ऐसे कांग्रेस नेता हैं जिन्हें मालूम है कि चुनाव में उनकी क्या दशा होने वाली है लेकिन पार्टी ने उम्मीदवारों के अभाव में इन बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने का आदेश दिया है तो वो भी अपनी सियासी जमीन बचाए रखने के लिए ना-ना करते-करते चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस ईवीएम मशीन का दिग्विजय सिंह अब तक विरोध करते रहे हैं और उसमें फर्जी मतदान पड़ने का मीडिया के सामने डेमो भी देते रहे हैं अब उसी ईवीएम मशीन से दिग्विजय सिंह के लिए भी जनता वोट करेगी। दिग्विजय सिंह के ईवीएम को लेकर समय-समय पर लगाए गए आरोपों से यह सिद्ध होता है कि वो चुनाव में पहले से ही हारने का मन बना कर चुनाव मैदान में उतरे हैं। क्योंकि दिग्विजय सिंह को ईवीएम मशीन पर विश्वास नहीं है और उन्हे उसी ईवीएम की शरण में जाना पड़ेगा और चुनाव जीतना है तो उसी ईवीएम की आरती भी उतारनी पड़ेगी। कांग्रेस के कुछ अन्य उम्मीदवार भी हैं जो यह दम भर रहे हैं कि वो चुनाव में खुद के दम पर जीत दर्ज कर लेंगे। बाद में कहते हैं ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कुछ भी हो सकता है। वहीं कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे भी हैं जो पार्टी से नाराज चल रहे हैं और कहते हैं की पूरी पार्टी को भगवान राम का श्राप लगा है कांग्रेस के लोगों ने भगवान राम के प्रकोष्टव का आमंत्रण ठुकराया था उसके बाद से ही पार्टी की दुर्दशा होनी शुरु हो गई है।

बीजेपी में 28 मार्च को बड़ी बैठक,हारे बूथों पर बनाई जाएगी जीतने की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी अपनी कमजोरियों पर हमेशा काम करती है। और यही कारण है कि भाजपा अक्सर चुनाव जीतती है। अब लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता जुट गए हैं। खासकर विधानसभा चुनाव के दौरान जिन बूथों पर भारतीय जनता पार्टी को करारी हार मिली थी उन बूथों पर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मंथन करना शुरु कर दिया है। विधानसभा चुनाव में हारने वाले बूथों की भाजपा ने लिष्ट तैयार कर ली है और 28 मार्च को बीजेपी प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठक (bjp meeting) में उसी पर मंथन किया जाएगा। बैठक प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेतृत्व में होगी,सीएम मोहन यादव सहित पार्टी के अन्य सभी पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में करीब दस ऐसी सीटें हैं जहां भाजपा,कांग्रेस और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की नौवत बन रही है। खास कर विंध्य की सतना और रीवा की सीट फंसती नजर आ रही है। बुंदेलखंड की भी कुछ सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की बात सामने आई है तो वहीं ग्वालियर-चंबल से भी कुछ सीटों के फंसने की बात सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय टीम ने सभी 29 लोकसभा सीटों का आंतरिक सर्वे भी करा लिया है। सर्वे में कुछ सीटें फंसने की बात सामने आई है। और अब उन्ही उलझी सीटों को सुलझाने के लिए 28 मार्च को पार्टी के वरिष्ठ मंथन करेंगे। इसके अलावा खजुराहो संसदीय क्षेत्र के एक बड़े कांग्रेस नेता को भी बीजेपी में शामिल कराया जाएगा। जिस नेता की बयान बीजेपी में ज्वाइनिंग होने जा रही है उन्हे हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए शुरेश पचौरी के माध्यम से बीजेपी में एंट्री दी जा रही है।

बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व
पिछले कुछ सालों से एमपी बीजेपी में ग्वालियर-चंबल के नेताओं का लगातार प्रभुत्व रहा है। जबकि उसके उलट विंध्य की जनता ने जिस प्रकार से बीजेपी पर विश्वास दिखाया उस हिसाब से एमपी बीजेपी (mp bjp) के नेताओं ने कभी भी विंध्य में किसी भी नेता को पनपने नहीं दिया। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य की कमान खुद हाथ में लेनी पड़ी जिसका नतीया यह निकला कि विंध्य की जनता ने बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रित्व को मायूस नहीं किया और झोली भर कर सीटें दी। राजेन्द्र शुक्ला को छोड़ दिया जाए तो एमपी बीजेपी में जिस प्रकार ग्वालियर-चंबल वाद हावी है उसी का नतीजा है कि विंध्य की जनता को सिर्फ वोटबैंक के रुप में ग्वालियर-चंबल के नेता इस्तेमाल करते रहे हैं। विंध्य क्षेत्र आज भी विकास के मामले में एमपी के अन्य क्षेत्रों से काफी पीछे है। जबकि राजश्व का 30% हिस्सा अकेले विंध्य से राज्य सरकार को मिलता है। ग्वालियर-चंबल की बात करें तो वहां से कद्वार नेताओं में नरेन्द्र सिंह तोमर,डॉ. नरोत्तम मिश्रा,वीडी शर्मा,ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अनेक नाम हैं जो एमपी बीजेपी को चला रहे हैं लेकिन विंध्य में बात करें तो अकेले राजेन्द्र शुक्ला के अलावा ऐसा एक भी चेहरा नहीं है जो बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी में आता हो। जबकि गिरीश गौतम,दिब्यराज सिंह,गणेश सिंह,रीती पाठक जैसे अनेक नेता हैं जो लगातार जीत का पर्चम लहरा रहे हैं लेकिन बीजेपी में इन सभी की हालत क्या है ये किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूभि भी एमपी से रही है। आज जहां सै वो सांसद हैं उस संसदीय क्षेत्र का आधा हिस्सा विंध्य का ही है फिर भी विंध्य को लगातार अनदेखा कर अन्य क्षेत्र के नेताओं को ही बीजेपी में आगे बढ़ाया जाता है। विंध्य में बीजेपी के नेता राजनीतिक पर्यटन में जाते हैं। बड़े-बड़े लच्छेदार भाषण देते हैं और चले आते हैं। क्षेत्र की जनता उन पर विश्वास करके हर बार बीजेपी को झोली भर कर वोट देती है और बाद में उस विंध्य की जनता के हाथ मायूसी ही लगती है। बीजेपी ने विंध्य में जिस राजेन्द्र शुक्ला को आगे बढ़ाया है वो विंध्य के होकर भी नहीं हैं क्योंकि उनको विंध्य की जनता से गंध आती है। वो रीवा की जनता को देखना और मिलना पसंद नहीं करते हैं। मतलब साफ है कि एमपी बीजेपी के नेता चाहते ही नहीं हैं कि विंध्य से कोई मजबूत नेत्रृत्व तैयार हो क्योंकि ऐसा हुआ तो ग्वालियर-चंबल के नेताओं का प्रभुत्व पार्टी में घटने लगेगा।