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नाम आशीष अग्रवाल,काम पार्टी की आवाज को बुलंद करना और टीम का मनोबल बढ़ाना
भोपाल

नाम आशीष अग्रवाल,काम पार्टी की आवाज को बुलंद करना और टीम का मनोबल बढ़ाना

सियासत की चौसर में पार्टियों का सबसे बड़ा चेहरा उसका मीडिया विभाग होता है (bjp media department)। पार्टी की सूचनाओं का प्रजेंटेशन किस प्रकार होना चाहिए इसका निर्धारण भी मीडिया विभाग के हाथ में ही होता है। बीजेपी ने जिस प्रकार से प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की है उसमें मीडिया विभाग की भूमिका और उस मीडिया विभाग के कप्तान का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐन चुनाव के मौके पर अपने मीडिया प्रभारी का जिम्मा युवा चेहरा आशीष अग्रवाल (ashish agarwal) के कंधों पर डाल दिया था। आशीष अग्रवाल का युवा चेहरा होने के नाते पत्रकारों के बीच यही कानाफूसी हुआ करती थी कि क्या आशीष अग्रवाल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी ठीक तरीके से निभा पाएंगे। इन कश्मकश के बीच आशीष अग्रवाल ने बगैर किसी कंट्रोवर्शी में फंसे किस प्रकार पार्टी की आवाज को बुलंद करना है उसको लेकर लगातार मेहनत की। उनमें उम्र के हिसाब से अनुभव जरुर कम था लेकिन जिस प्रकार से टीम को सजाया और संवारा जाता है और उसका विश्वास किस प्रकार जीता जाता है इस बात को भी आशीष अग्रवाल ने बखूबी बेहतरीन तरीके से दिखाया। युवा और अनुभवी चेहरों के मिश्रण से लैस बीजेपी मीडिया विभाग की टीम का आशीष अग्रवाल ने कभी मनोबल ढीला नहीं पड़ने दिया। जब लोग भाजपा के मीडिया सेंटर (bjp media centre) में भाजपा विरोधी लहर की बात करते थे तो आशीष अग्रवाल बड़े ही विनम्र भाव से कहते थे कि आप देखते रहिए भाजपा की सरकार और संगठन ने जिस प्रकार से काम किया है उसका नतीजा वोट के रुप में सामने आएगा। और तीन दिसंबर का वो दिन भी आया जब प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल की कही हर बात सच साबित हुई और भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की (madhya pradesh election result)। अब सवाल इस बात का उठता है कि भाजपा की जीत में बीजेपी मीडिया विभाग की क्या भूमिका थी। दरअसल किसी भी पार्टी का मीडिया विभाग चेहरा होता है और पार्टी की सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम मीडिया विभाग की टीम का ही होता है। जिस प्रकार एक अखबर में पत्रकारों के साथ संपादक मीटिंग कर रोजाना प्रमुख खबरों पर बात करता है और किस खबर को अखबार में कहां स्थान देना है ठीक उसी प्रकार एक मीडिया प्रभारी की भी जिम्मेदारी होती है कि पार्टी की हर बात को किस बेहतर तरीके से मीडिया के माध्यम से जनता के पास पहुंचाना है। इस मामले में बीजेपी के युवा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने बेहतर तरीके से साबित किया कि उम्र और अनुभव कभी आड़े नहीं आते बस मन में विश्वास और निष्ठा होना जरुरी है। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी का सफर तय करने वाले आशीष अग्रवाल ने कामयाबी की एक ऐसी मिशाल कायम की है जो भविष्य में भाजपा के अन्य मीडिया प्रभारियों के लिए एक नजीर के रुप में देखी जाएगी।

4/12/2023162
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने चुनावी 'रण' में अपनी नीति को किया लागू,मिली प्रचंड जीत
भोपाल

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने चुनावी 'रण' में अपनी नीति को किया लागू,मिली प्रचंड जीत

किसी भी जीत में पार्टी का कार्यकर्ता बहुत अहम होता है। और उस कार्यकर्ता के कर्तब्य बोद को याद दिलाना टीम के कप्तान का काम होता है। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) का कोई सानी नहीं है। आम तौर पर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर यह भ्रांतियां हैं कि वो कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं लेकिन मिलते ही कहते हैं कि काम करो पार्टी आपके काम के आधार पर खुद आपको उठा लेगी। करीब चार साल से प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल रहे वीडी शर्मा को उस वक्त पार्टी की कमान सौंपी गई थी जब भाजपा सत्ता से बाहर हो चुकी थी लेकिन सिंधिया भाजपा में आए और प्रदेश में भाजपा की सरकार फिर स्थापित हो गई इसी लिए वीडी शर्मा जी को पार्टी में शुभंकर अध्यक्ष भी कहा जाता है। साल 2020 में जब 28 सीटों पर उप चुनाव हुए तो पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज कर स्थाई सरकार बना ली। लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का काम वहीं पर समाप्त नहीं हुआ। उन्होने पार्टी को मजबूत करने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाने शुरु किए। बूथ स्तर पर त्रिदेव बनाया,हर बूथ को डिजिटल बनाने का रिकार्ड बनाया,मंडलों को मजबूत किया,लगातार प्रदेश के जिलों और विधानसभाओं में प्रवास किया। कार्यकर्ताओं को लगातार ब्यस्त रखने और उनको पार्टी में अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए कई तरह के अभियान चलाए। जिससे हर कार्यकर्ता को यह महसूस हो कि पार्टी को उनकी चिंता है और उनके काम को वाच किया जा रहा है। एक सामान्य परिवार से आए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की कहानी शुरु की थी। तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह युवा नेता एक दिन भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनेगा और कुशल संगठक कहलाएगा। लोगों के मुगालते उस वक्त दूर होने शुरु हुए जब वीडी शर्मा ने एक के बाद एक कड़े फेसले लिए,पार्टी में युवाओं को भी लगातार मौका दिया,सभी युवाओं ने जी तोड़ मेहनत की। नतीजे के तौर पर पहले उप चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा की स्थाई सरकार बनाई और अब प्रचंड बहुमत के के प्रदेश में पांचवीं बार भाजपा की सरकार बनाने की पूरी पटकथा लिख डाली। जब प्रदेश के सभी जिलों से सरकार के खिलाफ एंटीइंबेंसी की खबरें आती थी तो बीजेपी अध्यक्ष हमेशा यही कहते थे कि भाजपा ऐसी जीत जर्ज करेगी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आखिर रविवार को वो दिन भी आया जब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की कही हर बात सत्य हुई और इससे यह भी साबित हुआ संघर्ष की भट्ठी में तपे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सियासत की हर चाल का जवाब देना बखूबी जानते हैं और बाजी को अपने पक्ष में कैसे करना है वो उन्हे खूब आता है। (madhya pradesh election result)

4/12/2023185
कांग्रेस के 'पेड' वर्करों के अति उत्साह ने डुबोई कांग्रेस की नैया
भोपाल

कांग्रेस के 'पेड' वर्करों के अति उत्साह ने डुबोई कांग्रेस की नैया

मप्र में जब विधानसभा चुनाव की उल्टी गीनती चल रही थी उसी वक्त कांग्रेस मीडिया विभाग का अति उत्साह पूरे शबाब पर था (congress mp) । उत्साह तो अच्छी बात है लेकिन अति उत्साह हमेशा बरबादी की ओर लेकर ही जाता है। पीसीसी चीफ कमल नाथ (kamal nath) को मीडिया विभाग को दुरुस्त करने के लिए भी एमपी से कोई और नहीं मिला उन्होने दिल्ली में काम करने वाले एक पत्रकार को समन्वयक बनाया। और कांग्रेस कार्यालय में मीडिया विभाग को दुरुस्त करने के लिए बैठा दिया। अब जब कमलनाथ ने किसी को बैठाया है तो अन्य प्रवक्ता उनकी जी हुजूरी में लग गए। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि जिन प्रवक्ताओं ने जी हुजूरी नहीं की उन प्रवक्ताओं को ठिकाने लगा लिया गया। बांकि बचे प्रवक्ताओं ने दिल्ली से आए पेड वर्कर के सामने घुटने टेक दिए। अब पेड वर्कर साहब को खुश करने के लिए कांग्रेस के प्रवक्ता कुछ न कुछ करते रहते। आलम यह रहा कि जितने प्रवक्ता थे वो सब पेड वर्कर के साथ पीसीसी चीफ कमलनाथ की खुसामदी करने में भी जुट गए आलम ये था कि अगर कोई पत्रकार कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस के कमजोर पहलू पर बात करे तो उसे भाजपाई पत्रकार घोषित कर ब्लैक लिष्ट में डाल दिया जाता था और कहा जाता था कि हमारी सरकार आने दो उसके बाद इसको देख लिया जाएगा। दिल्ली से आए पेड वर्कर के अंडर में काम करने वाले प्रवक्ताओं का उत्साह इस सीमा पर पहुंच गया था कि वो पत्रकारों से सीधे मुंहु बात तक नहीं करते थे। आखिर ऐसा हो भी क्यों न। जब टीम का मुखिया आंख में पट्टी बांध ले तो फिर स्थिति में सुधार कैसे आएगा। कांग्रेस मीडिया विभाग पत्रकारों की लिष्ट बनाने में महगूल रहा और उसके ठीक उलट बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल बगैर किसी भेदभाव के सभी पत्रकारों का मान और सम्मान करने में जुटे रहे। स्थिति तो तब और बुरी लगती थी जब कांग्रेस के पेड वर्कर पीसीसी चीफ कमल नाथ को यह बताते थे कि कांग्रेस इस बार 180 सीटों से कम नहीं जीतेगी। और पीसीसी चीफ कमलनाथ जैसा मझा हुआ सियासी खिलाड़ी भी अपने पेड वर्कर की बात को माल लेते थे। कांग्रेस के मीडिया विभाग में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी कांग्रेस मीडिया विभाग भाजपा के मीडिया विभाग को टक्कर देने में नाकाम रहा। यहां तक कि कांग्रेस के प्रवक्ता ठीक तरीके से भाजपा के प्रवक्ताओं का सामना तक नहीं कर पाए। जबकि सत्ता धारी दल के खिलाफ कहने के लिए बहुत कुछ होता है लेकिन कांग्रेस के प्रवक्ता पेड वर्कर की खुशामदी करने में इतने ब्यस्त रहे कि उन्हे पार्टी की बात जनता तक पहुंचाने का वक्त ही नहीं मिला। कुछ प्रवक्ताओं की स्तिति तो यहां तक देखने को मिली कि वो पेड वर्कर के पीछे-पीछे घूमते और उसका बैग उठाते उसके अलावा उनके पास अन्य कोई काम नहीं था (madhya pradesh election result)। ऐसे प्रवक्ताओं की लिष्ट भी Mukhbirmp.con जल्द ही जारी करेगा जो पार्टी का काम करने के बजाय बैग और टिफिन उठाने का काम करते थे।

4/12/2023105
'सुन लो रे कांग्रेसियो प्रदेश के हर घर में लाड़ली बहनों का ही राज चलता है'
भोपाल

'सुन लो रे कांग्रेसियो प्रदेश के हर घर में लाड़ली बहनों का ही राज चलता है'

मप्र में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज की है (madhya pradesh elections)। प्रदेश का हर राजनीतिक पंडित यही कह रहा था कि इस बार टफ फाइट है,कुछ ने यह माना कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी 140 से 160 सीटें जीतेगी,लेकिन उन राजनीतिक पंडितों को यह नहीं मालूम था कि हारी बाजी कैसे जीती जाती है उसका सबसे बड़ा उदाहरण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) हैं। जहां से राजनीतिक पंडितों की सोच खत्म होती है वहीं से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सोच शुरु होती है। प्रदेश का हर ब्यक्ति यही कह रहा था कि सीएम के खिलाफ एंटीइंबेंसी है लेकिन उसे प्रो इंकंबेंसी में कैसे तब्दील करना है यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बखूबी आता है। जिस वक्त लोग पाला बदलने में लगे थे उस वक्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में लगे थे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले प्रदेश की आधी आवादी यानि महिलाओं को भाजपा की सरकार और खुद से जोड़ने की मुहिम शुरु की (ladli behna)। जिसके तहत उन्होने लाड़ली बहना योजना का आगाज किया। जिसके तहत सीएम शिवराज ने महिलाओं को आर्थिक रुप से सक्षम बनाने पर जोर दिया और उन्हे एक हजार रुपये देने की घोषणा कर दी। योजना की पहली किस्त डालते समय मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा दांव खेला और कहा कि इस योजना को वो आगे बढ़ा कर तीन हजार रुपये तक कर देंगे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना योजना के तहत घरेलू गैस सिलेंडर को 450 रुपये में देने की घोषणा भी कर दी। इस योजना को लांच करने के बाद मुख्यमंत्री ने ताबड़ तोड़ सभाएं लेनी शुरु की और महिलाओं से लगातार संपर्क और संवाद किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का अहसास था कि बहनें अपने भाई को कभी धोखा नहीं दे सकतीं। और भाई बहन के इस अटूट संबंध को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लगातार मजबूत किया। सीएम शिवराज की जितनी तस्वीरें भी जारी होती थी वो लाड़ली बहनों के साथ ही होती थी। आखिरकार मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई रणनीति काम आई और लाड़ली बहनों ने अपने लाड़ले भाई का विश्वास नहीं तोड़ा। यह भी बता दिया कि घर के बाहर किसी का राज चले लेकिन घर के अंदर लाड़ली बहनों का ही राज चलता है।

3/12/2023130
एमपी में चला मोदी मैजिक,प्रचंड बहुमत की ओर भाजपा,मिठाई खिला कर मनाई जा रही खुशी
भोपाल

एमपी में चला मोदी मैजिक,प्रचंड बहुमत की ओर भाजपा,मिठाई खिला कर मनाई जा रही खुशी

रुझानों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी में उत्साह का माहौल है। किस प्रकार से मध्य प्रदेश भाजपा (mp bjp) की ओर से एमपी के मन में मोदी नारा दिया गया था वह अब चरितार्थ होता नजर आ रहा है। जिस प्रकार से भाजपा लगातार प्रदेश में प्रचंड बहुमत की ओर आगे बढ़ रही है उसको देखते हुए भाजपा के नेता एक दूसरे को मिठाइयां खिला कर खुशियां मना रहे हैं। इस मौके पर प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (ashish agrawal) ने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) को मिठाई खिला कर जीत का जश्न मनाया। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में कंट्रोल रुम का भी निर्माण किया गया है जिसमें पल-पल की खबर पर नजर रखी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का दावा है कि केन्द्र और राज्य सरकार की जन कल्याण की योजनाओं के कारण आज प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की सरकार बन रही है। (madhya pradesh elections)

3/12/202394
'कमलनाथ को अपने नेताओं पर नहीं भरोसा' निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलते ही कमल नाथ के पास होगा जमा
भोपाल

'कमलनाथ को अपने नेताओं पर नहीं भरोसा' निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलते ही कमल नाथ के पास होगा जमा

आपरेशन लोटस (operation lotus) एमपी में फिर ना हो इसलिए कांग्रेस पार्टी ने बड़ी रणनीति तैयार की है। कांग्रेस की इस रणनीति का यह मतलब भी निकाला जा रहा है कि पीसीसी चीफ कमल नाथ (kamal nath) को अपने नेताओं पर भरोसा नहीं है। यह कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी की ओर से सभी 230 प्रत्याशियों को फरमान जारी कर निर्देश जारी किया गया है कि मतगणना समाप्त होते ही प्रमाण पत्र को पीसीसी कमलनाथ के पास जमा कराना होगा। मतलब साफ है कि कांग्रेस के जितने संभावित विजेता हैं उनकी जीत होते ही उनको भोपाल आकर अपने प्रमाण पत्र पीसीसी चीफ कमलनाथ के हाथों में सौंपना पड़ेगा। जिससे भाजपा की तरफ से संपर्क करने के अथवा किसी भी लालच अथवा प्रलोभन देने के बाद भी कांग्रेस के विधायक भाजपा की तरफ न जाने पाएं। फिलहाल कांग्रेस के कंट्रोल रुम की तरफ से हर प्रत्याशियों से मिनट टू मिनट संवाद स्थापित किया जा रहा है जिससे उनके मन को समझने में दिक्कत न हो। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार हर जिलों में प्रदेश कांग्रेस की ओर से ऐसे पदाधिकारियों को निगरानी में तैनात किया गया है जिन्हे वहां के स्थानीय नेता अथवा प्रत्याशी ना पहचानते हैं। खैर मतगणना कल है लेकिन कांग्रेस इस बार किसी प्रकार का मौका भाजपा को नहीं देना चाहती है यही कारण है कि कांग्रेस अलग-अलग तरीकों से अपने प्रत्याशियों की निगरानी कर रही है।

2/12/2023138
एग्जिट अनुमान अबकी बार 'कमल' की सरकार
भोपाल

एग्जिट अनुमान अबकी बार 'कमल' की सरकार

मप्र में 17 नवंबर को मतदान संपन्न हुए थे तब से अब तक सभी प्रकार के राजनीतिक पंडित अपने-अपने तरीके से गणित लगा रहे थे कि एमपी में अगली किसकी सरकार बन रही है (madhya pradesh elections)। लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को अलग-अलग एजेंसियों का एग्जिट पोल जारी हो गया। एग्जिट पोल (exit polls) में जिस प्रकार से चौकाने वाले आंकड़े आए हैं उसके बाद कांग्रेसी खेमें में खामोशी सी छा गई है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा (mp bjp) में भी तरह-तरह की बातें शुरु हो गई है। दरअसल जिस प्रकार से एग्जिट पोल के अनुमान आया है उसके मुताबिक भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। मतलब साफ है कि एग्जिट पोल के मुताबिक कमलनाथ (kamal nath) की कोई भी गारंटी काम नहीं आई। कांग्रेस के वचन पत्र में महिलाओं,कर्मचारियों,किसानों हर वर्ग को साधने के लिए कुछ न कुछ गारंटी दी गई थी। यह भी बार-बार कहा जा रहा था कि इस बार कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों ने कांग्रेस (mp congress) की बकिया उधेड़ कर रख दी है। कांग्रेस की ओर से एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि भाजपा की साजिश के तहत इस प्रकार के रुझान दर्शाए जा रहे हैं जबकि स्थिति ठीक इसके उलट है। वहीं भाजपा नेताओं की मानें तो उधर खुशी की लहर है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि एग्जिट पोल के अनुमान से भी अच्छे परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे क्योंकि भाजपा की सरकार ने इतने काम किए हैं जिसका परिणाम वोट के रुम में भाजपा के पक्ष में आएगा।

1/12/2023147
एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करतीं पूर्व सीएम उमा भारती
भोपाल

एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करतीं पूर्व सीएम उमा भारती

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती (uma bharti) ने गुरुवार को कहा कि वो एग्जिट पोल (exit poll) पर भरोसा नहीं करतीं हैं। उनका ये बयान पांच राज्यों के एग्जिट पोल जारी होने से पहले आया। पत्रकारों ने जब उनसे एग्जिट पोल के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वह (एग्जिट पोल) भरोसा नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि वे भविष्यवाणी करते हैं कि एक पार्टी 112 से 130 सीटों के बीच जीतेगी। उन्होंने कहा कि अब अगर उस पार्टी को 112 सीटें मिलती हैं और चुनाव हार जाती है, तो एग्जिट पोल करने वालों का दावा है कि वे सही साबित हुए हैं, लेकिन अगर उस पार्टी को 120 सीटें मिलती हैं और वह जीतती है, तो एग्जिट पोल का दावा है कि उनकी भविष्यवाणी सही थी। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा कितनी सीटें जीतेगी, तो उन्होंने कहा कि पार्टी हर सीट जीतने के लिए चुनाव लड़ती है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 और मार्च 2020 के बीच 15 महीने की अवधि को छोड़कर भाजपा 2003 से मध्य प्रदेश में सत्ता में है। मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार गिर गई और भाजपा सत्ता में वापस आ गई।

30/11/2023189
कांग्रेस की सरकार बनी तो शर्त में मिलेंगे एक लाख,स्टांप पर लिख कर दिया
भोपाल

कांग्रेस की सरकार बनी तो शर्त में मिलेंगे एक लाख,स्टांप पर लिख कर दिया

तीन दिसंबर को मतगणना होने वाली है लेकिन उसके पहले लोगों के धैर्य का बांद फूट रहा रहा (madhya pradesh elections)। दरअसल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में से किसकी सरकार बनेगी उसको लेकर शर्त लगाने का दौर तेज हो गया हो। दो लोगों ने शर्त की सीमा को लांघते हुए स्टांप पेपर पर एक लाख रुपये की शर्त लगा डाली है। बकायता दोनों ने स्टांप पेपर में एक लाख रुपये की शर्त लगाई है। धनीराम भलावी ने शर्तलगाते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार (congress government) बनेगी वहीं नीरज मालवीय ने कहा है कि भाजपा की सरकार (bjp government) बनेगी। शर्त को और अपनी बात को सही साबित करने के लिए नोटरी से पचास रुपये स्टांप भी बनवाया गया है। इतना ही नहीं दोनों ने एक-एक लाख का चेक साइन कर गांव के ही अमित पांडे को दिया है जिसकी सर्त सही साबित होगी वो नीरज पांडे से एक लाख रुपये का चेक प्राप्त कर लेगा। यह पहला मौका नहीं है इससे कुछ दिन पहले भी इसी प्रकार से सर्त लगाई गई थी। फिलहाल इंतजार तीन दिसंबर का है जिस दिन मतगणना होगी उस दिन क्लियर होगा की एक लाख की लाटरी किसकी लगने वाली है।

28/11/2023163
17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार
भोपाल

17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार

मध्य प्रदेश के 17 जिलों के चुनाव परिणाम पर भाजपा और कांग्रेस,दोनों दलों की नजर है (madhya pradesh elections)। 2018 के चुनाव में यहां एकतरफा परिणाम रहे थे। टीकमगढ़,रीवा,सिंगरौली,शहडोल,उमरिया,हरदा,नर्मदापुरम,सीहोर और नीमच जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थी। जबकि मुरैना,अशोक नगर,अनूपपुर,डिंडौरी,छिंदवाड़ा,अलीराजपुर और झाबुआ जिले की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थी। खरगोन जिले की छह में से पांच सीटें कांग्रेस ने तो एक पर कांग्रेस के बागी (केदार डाबर) निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीते थे। अब ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान पर हैं। प्रदेश में बुरहानपुर और आगर जिला ऐसा है, जहां एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा तो एक-एक पर निर्दलीय चुनाव जीते थे। बुरहानपुर जिले में नेपानगर सीट कांग्रेस और बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा चुनाव जीते थे। शेरा अब कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। यही स्थिति आगर जिले में भाजपा के साथ बनी थी। यहां एक सीट भाजपा तो एक निर्दलीय विक्रम सिंह राणा ने जीती थी। राणा इस चुनाव में भाजपा से मैदान में हैं। इस प्रकार 17 जिलों के परिणाम या तो भाजपा के पक्ष में थे या फिर कांग्रेस के।

28/11/2023105
बुंदेलखंड की कुछ सीटों पर सपा भाजपा और कांग्रेस का बिगाड़ सकती है गणित
भोपाल

बुंदेलखंड की कुछ सीटों पर सपा भाजपा और कांग्रेस का बिगाड़ सकती है गणित

इस बार विधानसभा चुनाव पर प्रत्याशियों से ज्यादा भाजपा, कांग्रेस और सपा के दिग्गज चेहरों पर नजर है। क्योंकि बुंदेलखंड (bundelkhand) में कुछ सीट ऐसी हैं जहां से हार जीत के साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव (akhilesh yadav) भाजपा, की दिग्गज नेत्री उमा भारती (uma bharti) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) सहित कांग्रेस के दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) की प्रतिष्ठा दांव पर है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने छतरपुर की महाराजपुर और निवाड़ी विधानसभा में पूरा जोर लगा दिया है। क्योंकि पिछली बार छतरपुर से बिजावर सीट सपा को मिली थी। इसलिए वह प्रदेश में कहीं न कहीं अपना वजूद बनाए रखने के लिए ताबड़तोड़ सभाएं करते रहे। जिले की महाराजपुर सीट पर कांग्रेस से बागी हुए दौलत तिवारी के समर्थन में अखिलेश यादव ने चुनावी सभाएं कीं और नौगांव में पार्टी के लिए लोगों को संगठित करने का काम किया। बुंदेलखंड में चुनाव के नजदीक कुछ दिन अखिलेश यादव खजुराहो में डेरा डाले रहे।चुनावी परिणाम आने में अभी करीब आठ दिन बाकी हैं। चुनावी कयास भले ही किसी भी पार्टी के हार जीत के लगाए जाते रहे हों लेकिन असल फैसला तीन दिसंबर को ही सामने आएगा। अपने नाम का झंडा गाड़ने झौंकी पूरी ताकत बुंदेलखंड में छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी में उमा भारती, भाजपा प्रदेश ध्यक्ष वीडी शर्मा और अखिलेश यादव ने शुरू ये ही अपना प्रभाव जमा रखा था। कहीं न कहीं इन दिग्गजों के चाहने वाले ही चुनावी मैदान में उतरे हैं। इसलिए इन तीनों दिग्गजों की प्रतिष्ठा का भी सवाल है। हालांकि इस बार उमा भारती चुनावी मैदान में कम नजर आईं। खास बात यह है कि बुंदेलखंड की सीटों पर भोपाल और यूपी से नजरें गढ़ी हुई हैं। भाजपा कांग्रेस के प्रभाव के बीच अखिलेश यादव भी नौगांव, निवाड़ी और चंदला आदि सीटों पर अपना झंडा गाड़ने तुले हुए हैं। क्योंकि इन जगहों पर अखिलेश यादव ने एड़ी चोड़ी का जोर लगाया है। इस बार का चुनाव जो पिछला चुनाव हारे और इस बार पहली बार चुनाव में खड़े हुए प्रत्याशियों के लिए बेहद अहम है। क्योंकि इस बार की हार जीत आने वाले दिनों की राजनीति तय करेंगी। छतरपुर से ललिता यादव के लिए यह चुनाव बहुत अहम है। भाजपाइयों के कड़े अंदरूनी विरोध के चलते वह टिकट पाने में कामयाब रही थीं और उन्होंने पूरी दमदारी से चुनाव भी लड़ा है। लेकिन छतरपुर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे आलोक चतुर्वेदी अपनी पहले से ही चुनावी चौसर बिछाए बैठे थे। इस कड़े चुनावी मुकाबले में कौन अधिक भारी है यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि यहां कांग्रेस से बागी हुए बब्बू राजा के चुनावी मैदान में आने से त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। इधर ललिता यादव तो मुख्यमंत्री को जीत की बधाई तक देने पहुंच गई। त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी महाराजपुर कांग्रेस से दौलत तिवारी के बागी होने के बाद से ही महाराजपुर में त्रिकोणीय मुकाबला कहा जा रहा था। यहां त्रिकोणीय मुकाबले में सीट फंसी हुई है। महाराजपुर से कौन जीतेगा यह कह पाना मुश्किल है। महाराजपुर से पहली बार भाजपा से चुनावी मैदान में उतरे कामाख्या प्रताप सिंह को मिला युवाओं का साथ चुनावी समीकरण बदलने का काम कर सकता है। इधर कांग्रेस के नीरज दीक्षित की घर-घर तक पकड़ रही है। बसपा प्रत्याशी भी सबसे आगे रहने के दावे कर रहे हैं। अब दोनों ही युवाओं में कौन भारी रहा है यह फैसला तीन दिसंबर को सामने आएगा।

26/11/2023119
दांव पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  कमलनाथ, दस लाख रुपये की लगी शर्त
भोपाल

दांव पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, दस लाख रुपये की लगी शर्त

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हाट सीट रही छिंदवाड़ा से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ मैदान में हैं (kamal nath)। मतगणना तीन दिसंबर को होगी। इससे पहले हार-जीत पर शर्त लगाई जाने लगी है। छिंदवाड़ा में एक पत्र व स्टांप पेपर इंटरनेट मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें कमल नाथ की हार पर 10 लाख रुपयों की शर्त लगाई गई है। दो लोगों के बीच लगी शर्त में स्टांप पेपर पर तीन गवाह भी शामिल हैं। हालांकि मामला सुर्खियों में आने के बाद शर्त लगाने वालों ने यह शर्त रद की बात कही। शहर के लालबाग निवासी प्रकाश साहू और राम मोहन साहू ने एक एग्रीमेंट तैयार किया था। इसमें लिखा गया कि अगर कमल नाथ हारते हैं तो वह राम मोहन साहू को 10 लाख रुपये देंगे। अगर भाजपा के बंटी साहू (banti sahu) हारेंगे तो राम मोहन साहू एक लाख रुपये देंगे। इस इकरारनामे में तीन गवाह भी शामिल हैं। इसी प्रकार कांग्रेस के दो युवाओं ने भी आपस में शर्त लगाई है। (madhya pradesh elections)

22/11/2023183
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