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बेरोजगार जनसेवा मित्रों ने दिया धरना,न्याय के लिए सीएम हाउस गए तो पुलिस ने लाठियां बरसाई
शनिवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में हजारों की संख्या में जनसेवा मित्र (janseva mitra) न्याय की आस लेकर धरने पर बैठे। दरअसल जनसेवा मित्रों की तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) के द्वारा ज्वाइनिंग कराई गई थी। प्रदेश के हर जिलों में पदस्थ जनसेवा मित्रों से सरकार जनहित की योजनाओं को कराने का काम करती थी। लेकिन जनवरी के महीने में जनसेवा मित्रों का अनुबंध खत्म हो गया और वो बेरोजगार हो गए। बेरोजगारी से आर्थिक तंगी की मार झेल रहे जनसेवा मित्रों ने राजधानी के जंबूरी मैदान में दिन भर धरना दिया। और जब वहां उनकी खोई खोज खबर लेने नहीं पहुंचा तो हजारों की संख्या में मौजूद जनसेवा मित्रों ने सीएम हाउस की तरफ कूंच कर दिया।सीएम हाउस की तरफ जा रहे सभी कर्मचारियों को रास्ते में पुलिस ने पहले रोकने का प्रयास किया जब वो नहीं माने तो पुलिस ने उन जनसेवकों पर हल्का बल प्रयोग भी किया जिसके कारण उन्हे खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। गौरतलब है की जनसेवा मित्र के रुप में काम कर रहे इन कर्मचारियों से लाड़ली बहन योजना के साथ-साथ अन्य योजनाओं के लाभ दिलाना एवं उसकी जानकारी लोगों को प्रदान करना उनके डॉक्यूमेंट की केवाईसी करना जैसे काम दिया जाता था। राज्य सरकार के दमनकारी नीति के कारण फिलहाल जनसेवा मित्रों ने अपने कदम पीछे कर लिया है लेकिन वो जल्द भी एक बड़ा जन आंदोलन सरकार के खिलाफ करने की योजना बना रहे हैं।

मोहन के बजट में शासकीय कर्मचारियों के लिए नहीं स्थान,नहीं मिलेगा कर्मचारियों को डीए
मप्र में शासकीय सेवकों का चार फीसदी डीए लंबे समय से लंबित है। जबकि केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को कई महीने से 46 फीसदी डीए मिल रहा है। एमपी सरकार (mp government) सोमवार को अपना अर्ध बजट पेश करने है। लेकिन पता चल रहा है कि इस बजट में शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) के डीए के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के मुताबिक जो बजट तैयार किया गया है उसमें फिलहाल एमपी के साढ़े सात लाख कर्मचारियों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिलने वाली है। ऐसा नहीं है कि सरकार को कर्मचारियों के लंबित डीए की जानकारी नहीं है। पिछली कैबिनेट में इस मामले पर चर्चा भी हुई थी लेकिन वहां पर मौजूद प्रमुख सचिव वीरा रामा का तर्क था कि अगर शासकीय सेवकों को चार फीसदी डीए की राशि दी जाएगी तो सरकार के खजाने पर अतिरिक्त भार आएगा। पहले से ही लाड़ली बहना योजना के कारण सरकार को हर महीने कर्ज लेना पड़ रहा है। ऊपर से कर्मचारियों का डीए दिया जाता है तो उसकी राशि की ब्यवस्था करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर हो जाएगा। इसी लिए फिलहाल जो बजट पेश होने वाला है उसमें राज्य के शासकीय सेवकों को डीए के लिए किसी प्रकार का प्राविधान नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि कर्मचारियों को डीए देना भी जरुरी है नहीं तो उनमें नारागी बढ़ जाएगी। इन सभी बातों के बाद यह भी फैसला लिया गया है कि लोकसभा चुनाव के बाद शासकीय सेवकों के डीए पर विचार किया जाएगा।

शासकीय कर्मचारियों के दबाव में मोहन सरकार,रिटायरमेंट सीमा 65 करने पर फंसी सरकार,शिक्षकों ने दी धमकी
शासकीय सेवकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष करने के मामले में अब प्रदेश की मोहन सरकार (mohan government) फंसती नजर आ रही है। दरअसल शासकीय सेवकों (mp government employees) की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष की जाती है तो चयनित शिक्षकों की नियुक्ति पर असर पड़ेगा। एक तरफ सरकारी नौकरी नहीं निकल रही है, युवा बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में राज्य की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की आयु 62 से बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी कर रही है। इधर, इस फैसले से चयनित शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि चार सालों से हम नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में यदि सरकार ऐसा कुछ फैसला लेती है तो चयन के बावजूद हम बाहर हो जाएंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवार इस कवायद से चिंतित हैं। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के अनुसार सरकार रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने जा रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित शिक्षकों का कहना है कि चयनित होने के बावजूद हम नियुक्ति-पत्र का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में पुराने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ने से उनके हाथ में आया यह अवसर भी खत्म हो जाएगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा है कि सरकार ने कुछ साल पहले ही सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 की थी। इस प्रकार से सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से शिक्षित युवाओं को मौका नहीं मिल रहा है, वहीं बेरोजगारों की लिस्ट बढ़ती जा रही है। इससे चयनित शिक्षक जिन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है, वो बेहद चिंतित है। उनका कहना है कि यदि सरकार ऐसा करती है तो चयन के बावजूद हमारे हाथ से सरकारी नौकरी का मौका निकल जाएगा। हजारों चयनित शिक्षकों में से कई ओवरएज हो जाएंगे। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार बार-बार आयु ही बढ़ाती रहेगी तो युवाओं का भविष्य अंधकार में आ जाएगा। सेवानिवृत्ति की आयु पहले की तरह 60 साल करना चाहिए। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी. 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था. अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है. आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा. दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि सरकार अब अपने फैसले पर ही विचार कर रही है क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव है और अगर प्रदेश का युवा सरकार के फैसले से नाराज हुआ तो लोकसभा चुनाव में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।

युवाओं को रोजगार देने के बजाय एमपी सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 65 करने की तैयारी में, सरकार के पास नहीं पैसे
आर्थिक तंगी से जूझ रही मध्य प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने युवाओं को रोजगार देने के बजाय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने का प्लान तैयार किया है। बताया जा रहा है कि मोहन यादव (mohan yadav) सरकार इस बार प्रदेश के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 3 साल बढ़ाकर 65 साल कर सकती है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने पर शासन विचार करे। (mp government employees) मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा लाए गए संकल्प पत्र 2023 में मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र में एकरूपता लाने का भी बिंदु शामिल था। राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने अपने पत्र में इस बिंदु का भी हवाला दिया है। उन्होंने लिखा है कि मध्य प्रदेश के शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाई जाए। उन्होंने लिखा है कि सरकार को शासकीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ानी चाहिए क्योंकि पदोन्नति नहीं होने की वजह से सरकारी विभागों में कैडर गड़बड़ा गया है और कई विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी। 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था। अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है। आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा। दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि रिटायरमेंट आयु बढ़ाने पर कर्मचारी दो खेमे में बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि युवाओं को मौका मिलना चाहिए 60 वर्ष की आयु के बाद काम करना और रोज आफिस जाना मुस्किल होता है।

कर्मचारी हितैषी नहीं है प्रदेश की मोहन सरकार,कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही लाड़ली बहना योजना
प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री बदला तो लोगों को लगा था कि अब कुछ नया देखने को मिलेगा। सिर्फ बात नहीं बल्कि काम भी होगा। लेकिन लोगों की उन उम्मीदों पर अब पानी फिरना शुरु हो गया है। दरअसल लंबे समय से शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को उम्मीद थी कि उनका डीए मोहन सरकार (mohan government) जरुर देगी लेकिन नई सरकार का गठन होने के बाद कई कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन एक भी कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार में शासकीय कर्मचारियों के डीए पर चर्चा नहीं हुई। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों की मानें तो निकट भविष्य में फिलहाल कर्मचारियों को डीए मिलने की किसी प्रकार की कोई संभावना नहीं है। ऐसा नहीं है कि इस विषय की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) को नहीं है लेकिन वो कर्मचारियों के विषय पर बात करने के लिए किसी प्रकार से तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों की बात आती है तो सरकार मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार के पास फिलहाल बजट नहीं है जिसके कारण वो डीए नहीं दे पाएंगे। दरअसल कर्मचारियों के डीए के आड़े लाड़ली बहना योजना आ रही है। राज्य सरकार पर लाड़ली बहना योजना की हर महीने मिलने वाली किस्त इतनी भारी पड़ रही है कि अन्य विकास के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव सोच ही नहीं पा रहे हैं। इसके उलट बात करें तो केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों को 46 फीसदी मंहगाई भत्ता दे रही है और प्रदेश के शासकीय कर्मचारी सिर्फ 42 फीसदी ही मंहगाई भत्ता पा रहे हैं। खबर ये भी है कि केन्द्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केन्द्रीय कर्मचारियों का चार फीसदी मंहगाई भत्ता बढ़ाने वाली है। मतलब साफ है कि केन्द्र सरकार मप्र के शासकीय कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। मोहन सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लेकिन कर्मचारी सरकार के खिलाफ जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

शासकीय कर्मचारियों को अभी नहीं मिलेगा 4% डीए का लाभ,केन्द्र फिर देगा मंहगाई भत्ता
मप्र के 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को राज्य सरकार फिलहाल बढ़ा हुआ चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के मूड में नहीं है (mp government employees)। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस बारे में सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव से अब तक दो बाह मंहगाई भत्ते की फाइल चली,लेकिन मुख्य सचिव वीरा राणा के दफ्तर से लौटा दी गई। वहीं Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार जल्द ही मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की और पढ़ोत्तरी करने की योजना बना रही है। इस जानकारी के बाद प्रदेश के कर्मचारी संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। गौरतलब है कि मतदान से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्मचारियों को चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी। वोटिंग से चार दिन पहले धनतेरस के दिन 12 नवंबर को राज्य सरकार की ओक से भेजे गए प्रस्ताव पर तब आयोग ने ये कह कर रोक लगाई थी कि मतदान 17 दिसंबर को है तब तक इस निर्णय को स्थगित रखा जाए। मतदान खत्म होने के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार ने निर्वाचन आयोग के पास प्रस्ताव नहीं भेजा। मतलब साफ है कि वो चुनाव में फायदा लेने के लिए चार फीसदी मंहगाई भत्ता जोड़ना चाहते थे। नई सरकार बनने के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उन्हे अब चार फीसदी मंहगाई भत्ता मिलेगा लेकिन दो बार फाइल चलने के बाद भी उस पर अंतिम मुहर नहीं लगी जिसके चलते अब राज्य के कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऊपर से केन्द्र सरकार एक बार फिर चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता देकर राज्य कर्मचारियों के जले में नमक छिड़कने का काम करने जा रहा है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने जुलाई 2023 में चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता और मंहगाई राहत दी थी। जिसके कारण केन्द्र के कर्मचारियों को कुल 46 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है और राज्य के कर्मचारियों को सिर्फ 42 फीसदी मंहगाई भत्ते पर ही संतोष करना पड़ रहा है। जबकि राज्य में भी केन्द्र के समान ही मंहगाई भत्ता देने की परंपरा रही है। राज्य सरकार के इस फैसले के कारण कर्मचारियों को दो से दस हजार रुपये तक का प्रतिमाह नुकसान उठाना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के इस रवैए के कारण प्रदेश के शासकीय कर्मचारी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ जाकर वोटिंग कर सकते हैं।

शासकीय कर्मचारियों को एक से पांच तारीख तक वेतन नहीं मिला तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारायों (government employees) को एक से पांच तारीख के अंदर वेतन नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। समस्त आहरण संवितरण कार्यालयों के प्रत्येक शासकीय सेवक का मासिक वेतन आगामी माह की 05 तारीख तक न होने की स्थिति में, विलंब के लिये संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी की जबावदेही होगी। शासन स्तर पर स्पष्ट निर्देश के बावजूद यह देखने में आ रहा है कि कुछ कार्यालयों द्वारा संदर्भित पत्र में दिये गये निर्देशों की अवहेलना की जाकर जा रही है। मासिक वेतन का नियत समत पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप शासकीय सेवकों के वेतन में अनावश्यक विलंब की स्थिति निर्मित हो रही है। इसके अतिरिक्त अधिकाशं कार्यालय उनके अधीनस्थ अधिकारियों / कर्मचारियों का मासिक वेतन स्टॉप सैलरी पेमेंट के माध्यम अथवा विलंब से आहरित करते हैं, किन्तु स्टॉप सैलरी पेमेंट एवं विलंब से भुगतान के संबंध में, उसका कारण एवं सक्षम स्वीकृति संलग्न नही की जाती है, जिससे त्रुटिपूर्ण भुगतान एवं वित्तीय अनियमितता / गबन की स्थिति बन रही है। स्पष्ट किया गया है कि, प्रत्येक माह के अंतिम कार्य दिवस के 02 दिवस पूर्व समस्त प्रकार के वेतन देयक पारित किये जाने हेतु कोषालय में ऑनलाईन प्रेषित किया जाना है।

एमपी के संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, कर्मचारियों के वेतनमान में 8% की वृद्धि
मप्र के संविदा कर्मचारियों (samvida workers) के लिए बड़ी खबर है, Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कर्मचारियों के वेतनमान में 8% की वेतन वृद्धि होने जा रही है। प्रदेश सरकार अब शासकीय कर्मचारियों और संविदा कर्मचारियों (samvida) के वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते में वृद्धि कर रही है। ताकि प्रदेश में शासकीय और संविदा कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का लाभ मिल सके। मध्य प्रदेश में शासकीय और संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके लिए कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और एरियर भी दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने अब शासकीय और संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि महंगाई भत्ते में भी वृद्धि की जाएगी और कर्मचारियों को एरियर भी दिया जाएगा।प्रदेश में 750000 शासकीय कर्मचारी हैं और 250000 संविदा कर्मचारी हैं। अब उनके वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते की कैलकुलेशन की जा रही है। वित्त विभाग ने बताया कि इन कर्मचारियों को पिछला महंगाई भत्ता और एरियर भी देना होगा। बता दे की कर्मचारियों की महंगाई भत्ते में 8% की वृद्धि की जाने के लिए कहा गया है। मध्य प्रदेश सरकार में अभी कर्मचारियों को 42% महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। और केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2024 से 50% महंगाई भत्ता दिया जाएगा। आपको जानकारी लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और केंद्र के कर्मचारियों के बीच 8% महंगाई भत्ते का अंतर देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश में प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों को 4% महंगाई भत्ता देने की बात कही थी। लेकिन कर्मचारियों को इसका भुगतान नहीं किया गया।

एमपी के शासकीय कर्मचारियों के लिए सरकार का खुलेगा खजाना,जल्द मिलेगा डीए
राज्य सरकार फरवरी में आने वाले वोट एंड अकाउंट (लेखानुदान) में कर्मचारियों को 7 से 8 प्रतिशत तक डीए (mp government employees DA) बढ़ाए जाने का वित्तीय प्रावधान करने जा रही है। दरअसल, मार्च 2025 तक कर्मचारियों का डीए 14% तक बढ़ाए जाने का की व्यवस्था की जा रही है। इसके बाद यह 56% हो जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024,25 में 6000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है। अभी राज्य के 7.50 लाख कर्मचारियों को 42% डीए मिल रहा है। जो केंद्रीय कर्मचारियों को मिल रहे 46% से 04% कम है। हालांकि इस भुगतान के लिए की विश्व विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री और सचिवालय को भेज दिया है। जिस पर मंजूरी मिलना बाकी है। गौरतलब है कि मप्र विधानसभा चुनाव होने की वजह से चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो गई थी। इसलिए एक जुलाई 2023 से लंबित 4% प्रतिशत लंबित डीए का भुगतान नहीं किया जा सका है। इस बड़े हुए दिए का भुगतान किया जाता है तो यह खर्च 1280 करोड़ रुपये होगी। इसराज को फिलहाल अभी वोट एंड अकाउंट में शामिल नहीं किया गया है।

सरकारी कर्मचारियों की CM से DA में बढ़ोतरी की मांग,DA नहीं बढ़ने से नाराज कर्मचारी
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी न होने को लेकर राज्य के कर्मचारी संघ में नाराजगी देखने को मिल रही है (dearness allowance), राज्य के कर्मचारियों को प्रदेश सरकार की तरफ से लगातार यह आश्वासन दिया जा रहा था कि उनके DA में नए साल तक बढ़ोतरी की जाएगी लेकिन साल 2024 भी शुरू हो गया और लगभग 5-6 दिन बीत चुके हैं और शासकीय कर्मचारियों को अभी तक मोहन यादव (mohan yadav) सरकार की तरफ से महंगाई भत्ते को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई है। कर्मचारी संगठन के महंगाई भत्ते में हो रही देरी के कारण राजकीय कर्मचारियों की CM डॉ मोहन यादव के प्रति नाराजगी बहुत तेजी से बढ़ रही है। महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर पिछले दिनों वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्ताव मुख्यमंत्री ऑफिस भेजा गया था जिस पर आखिरी फैसला नवनियुक्त CM डॉ मोहन यादव को लेना है। महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर राज्य कर्मचारियों के साथ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से DA को 4% बढ़ाने की डिमांड रख रहे हैं। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने DA और अन्य भत्तों को बढ़ाने की मांग राज्य सरकार के समक्ष रखी है। राज्य कर्मचारी सहित तृतीय वर्ग के कर्मचारियों को लंबे समय से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार है। तृतीय वर्ग के कर्मचारी संघ ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से महंगाई भत्ते में 4 फीसदी बढ़ोतरी के साथ पदोन्नति, मकान किराया और वाहन भत्ते को बढ़ाने की मांग की है। कर्मचारियों को अंतिम महंगाई भत्ता जुलाई माह में मिला था जिसके अब 6 महीने बाद तक कर्मचारियों को महंगाई भत्ते सहित अन्य भत्तों में वृद्धि का इंतजार है। अभी पिछले दिनों तृतीय वर्ग के कर्मचारी संघ द्वारा CM डॉ मोहन यादव और मुख्य सचिव वीराना को पत्र लिखा गया था जिसमें महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ DR में बढ़ोतरी करने वाली घोषणाओं को पूरा करने की मांग की है। वर्तमान में कर्मचारियों को 7वे वेतन आयोग के अनुसार 42% महंगाई भत्ता मिलता है जिसको जुलाई 2023 से नहीं बढ़ाया गया। कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की बढ़ोतरी की जानी है।

शासकीय कर्मचारियों को 4% डीए की जल्द मिलेगी सौगात,सीएम यादव जल्द करेंगे घोषणा
मोहन सरकार ने सरकारी खजाना खोलने का मन बना लिया है और अब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी कर उनको नए साल का उपहार देने वाले हैं (madhya pradesh government)। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने मध्य प्रदेश के तकरीबन 7.5 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में इजाफा करने का फैसला कर लिया है। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर वित्त विभाग द्वारा प्रस्ताव भी तैयार कर दिया गया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक CM डॉ. मोहन यादव द्वारा कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी करने से राज्य सरकार को भारी बजट तैयार करना पड़ सकता है (mp government employees)। नए साल के शुभ अवसर पर राज्य के 7.5 लाख कर्मचारियों को CM डॉ. मोहन यादव द्वारा महंगाई भत्ते में 4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी करने की कभी भी घोषणा की जा सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि कर्मचारियों को वर्तमान में 42 फ़ीसदी महंगाई भत्ता मिलता है। आने वाले नए साल के शुभ अवसर पर राज्य के 7.5 लाख कर्मचारियों को CM डॉ. मोहन यादव द्वारा महंगाई भत्ते में 4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी करने की घोषणा की जा सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि कर्मचारियों को वर्तमान में 42 फ़ीसदी महंगाई भत्ता मिलता है। और साल 2024 में CM डॉ. मोहन यादव राज्य के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का उपहार देने वाले हैं। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को प्रतिवर्ष जनवरी और जुलाई के महीने में ही बढ़ाया जाता है। राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का प्रस्ताव वित्त विभाग में मुख्यमंत्री कार्यालय में भेज दिया है अब इंतजार है तो बस CM मोहन यादव की घोषणा का। मध्य प्रदेश राज्य के सरकारी कर्मचारियों को वर्तमान में 42% महँगाई भत्ता राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी यानी की 42 फ़ीसदी से बढ़ाकर 4 फ़ीसदी करने की घोषणा सीएम यादव करने वाले हैं। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में पहले ही 4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 46 फ़ीसदी कर दिया गया है इसके बाद राज्य में भी DA में बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य सरकार ने मुख्य निर्वाचन के समक्ष रखा था पर विधानसभा चुनाव की निकटता के कारण प्रस्ताव को मंजूरी देने में देरी हुई इसलिए अब इस प्रस्ताव को पुनः वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा है। 7.5 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 4 फीसदी बढ़ोतरी करने पर राज्य सरकार को 480 करोड़ो रुपए का बोझ झेलना पड़ सकता है।

नए साल में शासकीय कर्मचारियों को सीएम मोहन यादव की सौगात,पहली तारीख को मिलेगा वेतन
मध्य प्रदेश के समस्त कर्मचारियों (mp government officers) के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने सभी कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को नए साल के पहले दिन ही सैलिरी दी जाए। भोपाल के कलेक्टर आशीष सिंह ने जिला अधिकारी को निर्देश दिया है कि प्रत्येक माह की एक तारीख को सभी शासकीय सेवकों को वेतन का भुगतान किया जाएगा। सभी कार्यालय को प्रत्येक शासकीय सेवकों का मासिक वेतन आगामी माह की 5 तारीख तक ना होने की स्थिति में विलंब के लिए संबधित अधिकारियों की जवाबदेही होगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को नए साल के पहले ही दिन सैलरी मिलनी चाहिए। निर्देश में यह भी बताया गया है कि सही तारीख पर सही प्रकार के वेतन को पारित करने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। कलेक्टर ने आधिकांश कार्यालयों के अधिकारियों को वेतन विलंब और स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी दी है, ताकि स्थिति में सुधार किया जा सके और कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके। मध्यप्रदेश में वेतन को लेकर कर्मचारियों ने अपने नाराजगी को जाहिर किया है। इसको लेकर राजधानी भोपाल के कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी किए हैं। नए साल के शुभ अवसर पर कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी खुश खुशखबरी दी है कि अब कर्मचारियों को समय पर उनका वेतन मिलेगा। विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अपनी जिम्मेदारियां को बहुत अच्छे से निभा रहे हैं और वह एक-एक करके सभी पहलुओं को सुलझा भी रहे हैं।