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कमलेश्वर पटेल की सच्चाई उजागर करने पर Mukhbir को  मिल रही धमकियां
भोपाल

कमलेश्वर पटेल की सच्चाई उजागर करने पर Mukhbir को मिल रही धमकियां

सीधी से कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) के भ्रष्टाचार की खबर Mukhbirmp.com ने प्रमुखता से प्रसारित की थी। जिसमें कमलेश्वर पटेल ने अवैध तरीके से छह करोड़ का मुआबजा बनवाया है। कमलेश्वर पटेल ने अलग-अलग गांव में अपने घर दर्शाए हैं और भाई,पत्नी,बेटी और बेटे के नाम पर करीब छह करोड़ रुपये का अवैध तरीके से मुआबजा बनवाया है। इस खबर को Mukhbir ने प्रकाशित करते हुए सरकार से जांच की मांग की थी। खबर जैसे ही प्रकाशित हुई तो कमलेश्वर पटेल के करीबियों द्वारा धमकी देने का सिलसिला शुरु हो गया है। कमलेश्वर पटेल के लोग अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वाट्सेप कॉल करके जान से मारनी की धमकी देने के अलावा देख लेंगे की धमकी दे रहे हैं। इस बात में कोई सक नहीं है कि सीधी से कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल ने न सिर्फ मुआबजे के रुप में करोड़ों रुपये का गवन किया है बल्कि मेडिकल कालेज से लेकर कई अलग-अलग संस्थाएं संचालित कर रखी है और सभी में राजश्व के चोरी की बात सामने आ रही है। लेकिन राज्य सरकार से मिली भगत और राजनीतिक रसूख के चलते कमलेश्वर पटेल के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की वैधानिक कार्रवाई नहीं हुई है। मतलब साफ है कि कमलेश्वर पटेल को राज्य सरकार की तरफ से भी संरक्षण दिया जा रहा है। यही कारण है कि खबर प्रकाशित होने के बाद कमलेश्वर पटेल के लोग धमकी देने के लिए वाट्सेप कॉल का इस्तेमाल करते है जिससे किसी प्रकार का सबूत इकट्ठा न होने पाए। कमलेश्वर पटेल और उनके साथी कितना भी दबाव बनाएं लेकिन खबरों का कारवां थमने वाला नहीं है। उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की एक बड़ी लिष्ट है जिसे सबके सामने लाया जाएगा।

31/3/2024183
एमपी कांग्रेस के सबसे नाकाम अध्यक्ष निकले जीतू पटवारी,18 हजार कार्यकर्ता छोड़ चुके पार्टी
भोपाल

एमपी कांग्रेस के सबसे नाकाम अध्यक्ष निकले जीतू पटवारी,18 हजार कार्यकर्ता छोड़ चुके पार्टी

कार्यकर्ताओं का एक से दूसरी पार्टी में आना जाना अब कोई बड़ी बात नहीं रही लेकिन एक के बाद,झटके पर झटके एमपी कांग्रेस (mp congress) को लगते जा रहे हैं जिस दिन से जीतू पटवारी (jitu patwari) को पीसीसी चीफ बनाया गया है ठीक उसी दिन से कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर शुरु हो गया है। एक दो नहीं,एक दो हजार भी नहीं अब तक करीब 18 हजार कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर कमल का फूथ हाथ में थाम चुके हैं। पिछले तीन महीने में ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरा जब कांग्रेस के सौ-दो सौ कार्यकर्ता पार्टी न छोड़ते हों लेकिन अपनी मस्ती में सराबोर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। जो लोग कांग्रेस के लिए सालों से काम करते रहे हैं उनके पार्टी छोड़कर जाने का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कारण भी नहीं पूछते हैं। इतना ही नहीं उनसे कोई मिलने जाता है तो घंटों तक इंतजार करना पड़ता है किसी तरह से वो सूजी हुई आंखों के साथ बाहर निकलते हैं तो सफाई में कहते हैं कि वर्चुअली मीटिंग चल रही थी। जबकि नेताओं कार्यकर्ताओं को यह मालूम रहता है कि कोई मीटिंग नहीं चल रही थी बल्कि उनके अध्यक्ष सोने में ब्यस्त थे। जीतू पटवारी जब तक अध्यक्ष नहीं थे तब तक अक्शर प्रदेश कार्यालय भी आया करते थे लेकिन अध्यक्ष बनने के बाद वो कार्यालय का रास्ता ही भूल गए। शुक्रवार को Mukhbirmp.com की टीम पीसीसी कार्यालय का मुआयना करने पहुंची तो गिनती के एक दो लोग मिले। जो मिले तो कुछ ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं थे लेकिन दवी जुवां से इतना बोल गए कि ऐसा लगता है जैसे पार्टी में कोई अध्यक्ष ही नहीं है और पूरी पार्टी के कार्यकर्ता खुद को अनाथ सा महसूस करते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव सिर पर है नामांकन की प्रक्रियाएं चल रही हैं लेकिन पार्टी की तरफ से उन्हे कोई काम ही नहीं बताया जा रहा है जिससे वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। जब पार्टी कोई काम ही नहीं दे रही है तो कार्यालय आने का भी कोई मतलब नहीं है। जो कार्यकर्ता और नेता कार्यालय आते भी हैं तो उनका समय वर्मान और पूर्व अध्यक्षों की तुलना में ही बीतता है। कुछ कार्यकर्ता दवी जुवां यह भी कहते हैं कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में कार्यालय में जो कर्मचारी काम कर रहे हैं वो भी बीजेपी कार्यालय में नौकरी ढूढने के लिए निकल जाएंगे।

30/3/2024182
कांग्रेस की भगदड़ पर जीतू पटवारी का जवाब,दिग्विजय और कमलनाथ पर मढ़ा सारा दोष
भोपाल

कांग्रेस की भगदड़ पर जीतू पटवारी का जवाब,दिग्विजय और कमलनाथ पर मढ़ा सारा दोष

पिछले तीन महीने से कांग्रेस पार्टी में लगातार भगदड़ का माहौल है। अब तक करीब 17 हजार से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया है। इस मामले में कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) से जवाब तलब किया है। कहा यह भी जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (mallikarjun kharge) ने जीतू पटवारी को बंद कमरे में जमकर खरी खोटी भी सुनाई है। कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व द्वारा पूछे गए सवाल पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने अपनी लिखित सफाई दी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी ने अपनी सफाई में सारा दोष दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर मढ़ दिया है। जीतू पटवारी ने अपने जवाब में कहा है कि उनको नाकाम साबित करने के लिए दिग्विजय सिंह और कमलनाथ इस प्रकार का भयानक षड़यंत्र रच रहे हैं इसी लिए ज्यादातर दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के करीबी लोग ही बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। पीसीसी चीफ ने इनके अलावा दो और नेताओं का नाम भी शामिल किया है जिसमें अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) को भी कांग्रेस की भगदड़ का दोषी बताया है। उन्होने कहा है कि बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा और इन नेताओं की आपस में दोस्ती है और ये सब मिल कर इतना बड़ा खेल- खेल रहे हैं। हांलाकि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी के आरोपों को ज्यादा तबज्जो नहीं दी है। बल्कि कांग्रेस में लगातार जारी पलायन को जल्दी से जल्दी रोकने की नसीहत दी गई है।

29/3/2024200
सैयद जफर ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ पर किया करारा प्रहार,सतह पर आई लड़ाई
भोपाल

सैयद जफर ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ पर किया करारा प्रहार,सतह पर आई लड़ाई

कमलनाथ (kamal nath) के नजदीकी नेता सैयद जफर (syed zafar) और दीपक सक्सेना (deepak saxena) के भाजपा ज्वाइन करने के बाद छिदवाड़ा में अब आर-पार की लड़ाई शुरु हो गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता सैयद जफर ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कमलनाथ के आजू-बाजू रहने वाले और तन्खा पर काम करने वाले उनके और दीपक सक्सेना के बारे में कमलनाथ से तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। ऐसे लोग जो एक पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते वो कमलनाथ को लोकसभा चुनाव जीतने के तरीके बता रहे हैं। गौरतलब है कि सैयद जफर और दीपक सक्सेना पूर्व सीएम कमलनाथ के काफी करीबी माने जाते थे लेकिन उन्होने अब बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। जिसके बाद कमलनाथ के आजू-बाजू में रहने वाले और तन्खा लेकर काम करने वाले लोग उनके बारे में भ्रामक जानकारी दे रहे हैं। और इस मामले की जानकारी जब सैयद जफर को हुई तो उन्होने एक सभा के दौरान जम कर खरी खोटी सुनाई। गौरतलब है कि कमलनाथ ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ जैसे लोगों को मोटी तन्खा पर रख रखा है। यही वो लोग हैं जिन्होने विधानसभा चुनाव के दौरान भी कमलनाथ को भ्रामक और गलत जानकारियां लगातार दी थी। जो पार्टी के लिए ईमानदारी से काम करते थे उनके बारे में भी लगातार गलत फीडबैक दिया गया। यहीं नहीं कमलनाथ को सरकार को लेकर निश्चिंच किया गया था कि अबकी बार कांग्रेस 180 के पार कर रही है और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बन रही है। बाद में क्या हुआ नतीजा सबके सामने है। अब इसी तरह के लोगों ने उनके बारे में फिर से कमलनाथ को गलत फीडबैक दिया जिसके कारण सैयद जफर और दीपक सक्सेना जैसे लोगों को भाजपा की सदस्यता लेनी पड़ी और अब इन सभी नेताओं ने संकल्प लिया है कि इस बार छिंदवाड़ा में भी वो कमल का फूल खिला कर रहेंगे। मतलब साफ है कि तन्खा पर काम करने वाले लोगों ने कमलनाथ को कभी भी सही फीडबैक नहीं दिया और उसका प्रतिफल अब कमलनाथ को भुगतना पड़ रहा है।

28/3/2024177
डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे जीतू पटवारी का सरेंडर,कुनवा रोकने में नाकाम हुए जीतू पटवारी
भोपाल

डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे जीतू पटवारी का सरेंडर,कुनवा रोकने में नाकाम हुए जीतू पटवारी

पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) विधानसभा चुनाव क्या हारे ऐसा लगता है उन्होने रौद्र रुप धारण कर लिया है। जब-जब पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को राजनीतिक आघात लगा है तब-तब उन्होने कांग्रेसी खेमे में तबाही मचाई है। इससे पहले साल 2019 में कांग्रेस की सरकार बनी थी जिसके बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस ने टारगेट करने का प्रयास किया नतीजा यह निकला कि उन्होने कांग्रेस की सरकार गिराने की कसम खा ली और कांग्रेस की सरकार को धराशाही भी कर दिया। 2023 के विधानसभा चुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए भाजपा ने उन्हे बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी (bjp joining committee) का प्रदेश संयोजक बना दिया। पूर्व गृह मंत्री को भाजपा ने ज्वाइनिंग कमेटी का संयोजक क्या बनाया उन्होने रौद्र रुप धारण कर कांग्रेस के समूल नाश का बीड़ा उठा लिया। हालात यहां तक पहुंच गए अब तक 17 हजार से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल करा चुके हैं। ऐसा लगता है कि जैसे नरोत्तम मिश्रा के आगे पूरी कांग्रेस ने सरेंडर कर दिया है। इतना ही नहीं विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ बना दिया उनके अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस में पलायन का दौर तेज हो गया। ऐसा लगता है जैसे पर्दे के पीछे से जीतू पटवारी (jitu patwari) खुद अपने नेताओं को बीजेपी में जाने की सलाह दे रहे हैं। दिलचश्प बात यह भी है कि चुनाव से पहले कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ रहे हैं और जीतू पटवारी ने एक भी ऐसी बैठक नहीं की जिसमें उन्होने नेताओं और कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने का कारण पूछा हो। मतलब साफ है कि जीतू पटवारी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा के सामने खुद सरेंडर कर दिया है।

28/3/2024369
भाजपा वालों को कुछ मिल नहीं रहा कांग्रेस से आने वालों को क्या मिलेगा,भूपेन्द्र सिंह का बयान
भोपाल

भाजपा वालों को कुछ मिल नहीं रहा कांग्रेस से आने वालों को क्या मिलेगा,भूपेन्द्र सिंह का बयान

पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेन्द्र सिंह (bhupendra singh) का बड़ा बयान आया है। उन्होने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग भाजपा में पिछले 15 साल से काम कर रहे हैं तो उन्हे कुछ नहीं मिला। और जिन कांग्रेस कार्रकर्ताओं ने 15 दिन पहले बीजेपी की सदस्यता ली है उनको क्या मिलने वाला है। गौरतलब है कि विधानसभा का चुनाव समाप्त होते ही एमपी बीजेपी में सदस्यता अभियान शुरु किया गया है जिसके तहत अब तक करीब 16 हजार कांग्रेस कार्रकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। और आने वाले समय में और बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता लेने वाले हैं। दरअसल पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह को मोहन कैबिनेट में स्थान नहीं दिया गया है। वो शिवराज सरकार में करीब 18 साल तक मंत्री रहे हैं। और इस बार उन्हे मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के कारण उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर होती चली जा रही है। भूपेन्द्र सिंह पर महाकाल लोक के घोटाले का आरोप भी लगा था जिसे जांच के बाद क्लीनचिट दे दी गई। लेकिन मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो पाने के कारण भूपेन्द्र सिंह काफी आहत नजर आ रहे हैं और मंच पर सार्वजनिक रुप से उनका बयान आना इस बात का परिचायक है कि जिस प्रकार से उन्हे राजनीतिक रुप से साइडलाइन करने का प्रयास किया गया है उसी की टीस भूपेन्द्र सिंह के बयान में देखने को मिलती है।

27/3/2024212
मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक
भोपाल

मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक

भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने नामांकन भरना शुरु कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं कर पाई है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 22 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर पाई है (congress lok sabha list)। खजुराहो सीट समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस ने छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि आज होने वाली कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में मुरैना,ग्वालियर,गुना समेत छह सीटों के नाम को आज तय कर लिया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शामिल होंगे। बालाघाट सीट से प्रत्याशी बनाए गए सरस्वार को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विरोध शुरु हो गया है जिससे पार्टी की टेंशन बढ़ गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार गुना लोकसभा सीट से जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले अरुण यादव ने भी गुना से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी लेकिन पार्टी वहां से स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देना चाहती है। इधर मजे की बात यह है कि अब तक कांग्रेस के मजबूत नेता कहे जाने वाले सुरेश पचौरी ने जिस दिन से बीजेपी का दामन थामा है उस दिन से उन्होने कांग्रेस में लगातार तोड़-फोड़ मचा रखी है। वो हर दूसरे-तीसरे दिन कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिला रहे हैं। जिसके फलस्वरुप सुरेश पचौरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में उन्हे स्थान दिया है। अब सुरेश पचौरी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर हमला बैलते नजर आएंगे।

27/3/2024174
कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने 'जीतू पटवारी' पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे कांग्रेस
भोपाल

कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने 'जीतू पटवारी' पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे कांग्रेस

देश भर की राजनीतिक पार्टिया लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) जीतने की रणनीति बनाने में जुटी हैं। लेकिन एमपी कांग्रेस (mp congress) के अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) कांग्रेस को खाली करने में लगे हैं। जिस दिन से कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है उसी दिन से कांग्रेस में पलायन का दौर शुरु हुआ जो अब तक निरंतर जारी है। जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद से अब तक करीब 16 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता पार्टी छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। इन दिनों एक और बात भी निकल कर सामने आ रही है कि एमपी कांग्रेस को पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे हैं। वो पत्रकार अक्सर जीतू पटवारी के निवास पर पाए जाते हैं। इनके अलावा जो भी पत्रकार जीतू पटवारी से मिलने जाता है कुछ देर बैठ कर बात करना चाहता है उसको जीतू पटवारी बड़े ही आदर भाव से चलता करते हैं। जीतू पटवारी पहले पत्रकार के कंधे पर हाथ रखते हैं कुछ देर इधर-उधर घुमा कर कुछ बातें करते हुए कहते हैं कि तू तो मेरा भाई है और फिर बड़े प्यार से गेट के बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने पर लोगों को लगा था कि युवा चेहरे को मौका मिला है कुछ नया और अच्छा बदलाव देखने को मिलेगा। लेकिन जीतू पटवारी की अकड़ ने कुछ नया करने की बजाय पार्टी को और गर्त में डालने का काम किया है। पार्टी के कितने कार्यकर्ता छोड़ कर भाजपा में जा चुके हैं उन्हे तो ये भी नहीं मालूम मीडिया कर्मियों से जीतू पटवारी पूछते नजर आते हैं कौन छोड़ कर चला गया।

26/3/2024234
चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता
भोपाल

चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव (vidhansabha elections) खत्म होते ही लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) का शंखनाद कर दिया था। एमपी बीजेपी की ही बात करें तो कांग्रेस अब भी अपने सभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पाई है। उधर बीजेपी ने न सिर्फ उम्मीदवारों का ऐलान किया है बल्कि शक्ति केन्द्रों पर पथ सम्मेलन,होली के मौके पर 'मोदी की राम-राम' लेकर भाजपा के कार्यकर्ता घर-घर पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के सातों मोर्चे और जितने भी अनुशांगिक संगठन हैं सभी घर-घर जाकर लगातार वोटरों से संवाद कर रहे हैं और इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस के कुछ नेताओं को लग रहा है कि वो चुनाव में भाजपा को न सिर्फ टक्कर देंगे बल्कि वो जीत कर आएंगे। जबकि हकीकत यही है कि उन्हे इस बात का पूरी तरह से अहसास है कि चुनाव में उनकी करारी हार होने जा रही है। उन्ही नेताओं में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,कांतीलाल भूरिया सहित कई ऐसे कांग्रेस नेता हैं जिन्हें मालूम है कि चुनाव में उनकी क्या दशा होने वाली है लेकिन पार्टी ने उम्मीदवारों के अभाव में इन बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने का आदेश दिया है तो वो भी अपनी सियासी जमीन बचाए रखने के लिए ना-ना करते-करते चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस ईवीएम मशीन का दिग्विजय सिंह अब तक विरोध करते रहे हैं और उसमें फर्जी मतदान पड़ने का मीडिया के सामने डेमो भी देते रहे हैं अब उसी ईवीएम मशीन से दिग्विजय सिंह के लिए भी जनता वोट करेगी। दिग्विजय सिंह के ईवीएम को लेकर समय-समय पर लगाए गए आरोपों से यह सिद्ध होता है कि वो चुनाव में पहले से ही हारने का मन बना कर चुनाव मैदान में उतरे हैं। क्योंकि दिग्विजय सिंह को ईवीएम मशीन पर विश्वास नहीं है और उन्हे उसी ईवीएम की शरण में जाना पड़ेगा और चुनाव जीतना है तो उसी ईवीएम की आरती भी उतारनी पड़ेगी। कांग्रेस के कुछ अन्य उम्मीदवार भी हैं जो यह दम भर रहे हैं कि वो चुनाव में खुद के दम पर जीत दर्ज कर लेंगे। बाद में कहते हैं ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कुछ भी हो सकता है। वहीं कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे भी हैं जो पार्टी से नाराज चल रहे हैं और कहते हैं की पूरी पार्टी को भगवान राम का श्राप लगा है कांग्रेस के लोगों ने भगवान राम के प्रकोष्टव का आमंत्रण ठुकराया था उसके बाद से ही पार्टी की दुर्दशा होनी शुरु हो गई है।

26/3/2024135
बीजेपी में 28 मार्च को बड़ी बैठक,हारे बूथों पर बनाई जाएगी जीतने की रणनीति
भोपाल

बीजेपी में 28 मार्च को बड़ी बैठक,हारे बूथों पर बनाई जाएगी जीतने की रणनीति

भारतीय जनता पार्टी अपनी कमजोरियों पर हमेशा काम करती है। और यही कारण है कि भाजपा अक्सर चुनाव जीतती है। अब लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता जुट गए हैं। खासकर विधानसभा चुनाव के दौरान जिन बूथों पर भारतीय जनता पार्टी को करारी हार मिली थी उन बूथों पर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मंथन करना शुरु कर दिया है। विधानसभा चुनाव में हारने वाले बूथों की भाजपा ने लिष्ट तैयार कर ली है और 28 मार्च को बीजेपी प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठक (bjp meeting) में उसी पर मंथन किया जाएगा। बैठक प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेतृत्व में होगी,सीएम मोहन यादव सहित पार्टी के अन्य सभी पदाधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में करीब दस ऐसी सीटें हैं जहां भाजपा,कांग्रेस और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की नौवत बन रही है। खास कर विंध्य की सतना और रीवा की सीट फंसती नजर आ रही है। बुंदेलखंड की भी कुछ सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की बात सामने आई है तो वहीं ग्वालियर-चंबल से भी कुछ सीटों के फंसने की बात सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय टीम ने सभी 29 लोकसभा सीटों का आंतरिक सर्वे भी करा लिया है। सर्वे में कुछ सीटें फंसने की बात सामने आई है। और अब उन्ही उलझी सीटों को सुलझाने के लिए 28 मार्च को पार्टी के वरिष्ठ मंथन करेंगे। इसके अलावा खजुराहो संसदीय क्षेत्र के एक बड़े कांग्रेस नेता को भी बीजेपी में शामिल कराया जाएगा। जिस नेता की बयान बीजेपी में ज्वाइनिंग होने जा रही है उन्हे हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए शुरेश पचौरी के माध्यम से बीजेपी में एंट्री दी जा रही है।

25/3/2024142
बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व
भोपाल

बीजेपी में हावी ग्वालियर-चंबल वाद,नहीं चाहते विंध्य से निकले कोई मजबूत नेत्रृत्व

पिछले कुछ सालों से एमपी बीजेपी में ग्वालियर-चंबल के नेताओं का लगातार प्रभुत्व रहा है। जबकि उसके उलट विंध्य की जनता ने जिस प्रकार से बीजेपी पर विश्वास दिखाया उस हिसाब से एमपी बीजेपी (mp bjp) के नेताओं ने कभी भी विंध्य में किसी भी नेता को पनपने नहीं दिया। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य की कमान खुद हाथ में लेनी पड़ी जिसका नतीया यह निकला कि विंध्य की जनता ने बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रित्व को मायूस नहीं किया और झोली भर कर सीटें दी। राजेन्द्र शुक्ला को छोड़ दिया जाए तो एमपी बीजेपी में जिस प्रकार ग्वालियर-चंबल वाद हावी है उसी का नतीजा है कि विंध्य की जनता को सिर्फ वोटबैंक के रुप में ग्वालियर-चंबल के नेता इस्तेमाल करते रहे हैं। विंध्य क्षेत्र आज भी विकास के मामले में एमपी के अन्य क्षेत्रों से काफी पीछे है। जबकि राजश्व का 30% हिस्सा अकेले विंध्य से राज्य सरकार को मिलता है। ग्वालियर-चंबल की बात करें तो वहां से कद्वार नेताओं में नरेन्द्र सिंह तोमर,डॉ. नरोत्तम मिश्रा,वीडी शर्मा,ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अनेक नाम हैं जो एमपी बीजेपी को चला रहे हैं लेकिन विंध्य में बात करें तो अकेले राजेन्द्र शुक्ला के अलावा ऐसा एक भी चेहरा नहीं है जो बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी में आता हो। जबकि गिरीश गौतम,दिब्यराज सिंह,गणेश सिंह,रीती पाठक जैसे अनेक नेता हैं जो लगातार जीत का पर्चम लहरा रहे हैं लेकिन बीजेपी में इन सभी की हालत क्या है ये किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूभि भी एमपी से रही है। आज जहां सै वो सांसद हैं उस संसदीय क्षेत्र का आधा हिस्सा विंध्य का ही है फिर भी विंध्य को लगातार अनदेखा कर अन्य क्षेत्र के नेताओं को ही बीजेपी में आगे बढ़ाया जाता है। विंध्य में बीजेपी के नेता राजनीतिक पर्यटन में जाते हैं। बड़े-बड़े लच्छेदार भाषण देते हैं और चले आते हैं। क्षेत्र की जनता उन पर विश्वास करके हर बार बीजेपी को झोली भर कर वोट देती है और बाद में उस विंध्य की जनता के हाथ मायूसी ही लगती है। बीजेपी ने विंध्य में जिस राजेन्द्र शुक्ला को आगे बढ़ाया है वो विंध्य के होकर भी नहीं हैं क्योंकि उनको विंध्य की जनता से गंध आती है। वो रीवा की जनता को देखना और मिलना पसंद नहीं करते हैं। मतलब साफ है कि एमपी बीजेपी के नेता चाहते ही नहीं हैं कि विंध्य से कोई मजबूत नेत्रृत्व तैयार हो क्योंकि ऐसा हुआ तो ग्वालियर-चंबल के नेताओं का प्रभुत्व पार्टी में घटने लगेगा।

24/3/2024150
रीवा,सतना और सीधी में बढ़ी बीजेपी की मुस्किलें,अब मोदी की गारंटी से उम्मीद
भोपाल

रीवा,सतना और सीधी में बढ़ी बीजेपी की मुस्किलें,अब मोदी की गारंटी से उम्मीद

भारतीय जनता पार्टी ने विकास को जीत का आधार बनाया है और इसी लिए जनता के बीच मोदी की गारंटी दी जा रही है। लेकिन विंध्य की बात करें तो वहां पर मोदी की गारंटी पर अलग-अलग वर्गों का समीकरण भारी पड़ता नजर आ रहा है (vindhya news)। सबसे पहले सतना की बात करें तो बीजेपी ने गणेश सिंह को पांचवीं बार चुनाव मैदान में उतार कर यह बताने का प्रयास किया कि मोदी की गारंटी है तो सबकुछ मुमकिन है। लेकिन भाजपा ये भूल गई कि उनके खिलाफ कांग्रेस से वही उम्मीदवार चुनाव मैदान मे हैं जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी शिकस्त दी थी। उसके इतर बात करें तो ब्राम्हण चेहरा नारायण त्रिपाठी सतना लोकसभा सीट से इस बार सभी को चौकाने वाले हैं क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ओबीसी वर्ग को अपना उम्मीदवार बनाया है। सतना में बीएसपी का जक बड़ा वोटबैंक है जो आज भी बसपा पर विश्वास रखता है। नारायण त्रिपाठी के बीएसपी से चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि उन्हे हरिजनों का वोट मिलेगा और ब्राम्हण वर्ग के लोगों का भी वोट मिलेगा। मतलब साफ है कि सतना की सीट पूरी तरह से भाजपा के हाथ से खिसकती नजर आ रही है। सीधी की बात करें तो वहां बीजेपी की तरफ से राजेश मिश्रा तो कांग्रेस से कमलेश्वर पटेल चुनाव मैदान पर हैं इन दोनों का गणित बिगाड़ने के लिए पूर्व राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह ने गोंडवाना पार्टी से चुनाव मैदान में उतर कर बीजेपी को कठिनाई में डाल दिया है। वहीं रीवा की बात करें तो भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को फिर चुनाव मैदान में उतारा है और उनके खिलाफ कांग्रेस ने अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतार कर खलबली मचा दी है। इस सीट पर अगर बीएसपी ने कुर्मी को अपना उम्मीदवार बनाया तो रीवा की सीट बीजेपी के हाथ से खिसकने की पूरी उम्मीद है। कुल मिला कर विंध्य के राजनीति की बात करें तो यहां पर सामान्य वर्ग का प्रभुत्व रहा है। जब भी रीवा,सीधी और सतना में भाजपा और कांग्रेस ने एक ही वर्ग के लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है तब-तब बीएसपी ने इन सीटों पर पटखनी देने का काम किया है।

24/3/2024219
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