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आज रीवा दौरे पर रहेंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,विकास की देंगे सौगात
मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) आज रीवा के एक दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव कालेज चौराहे से लेकर साईं मंदिर तक आयोजित आभार यात्रा में रीवा की स्थानीय जनता से संवाद करेंगे (mohan yadav in rewa)। इसके अलावा मुख्यमंत्री एनसीसी मैदान टीआरएस कालेज में आयोजित आम सभा में निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में आयोजित बैठक में रीवा संभाग में शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। रीवा संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरा कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में निर्देश दिए हैं। कमिश्नर ने कहा कि समीक्षा बैठक में रीवा संभाग की प्रमुख योजननाओं की समीक्षा की जाएगी। इसमें सड़क,सिंचाई,कृषि,शिक्षा और अन्य विभागों की प्रमुख योजनाएं शामिल हैं। सभी अधिकारी समीक्षा बैठक में संभाग में एक दशक में हुई प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी भी प्रस्तुत करेंगे। गौरतलब है कि इस बैठक में सांसद,मंत्री गण और विधायक भी शामिल होंगे। संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर बैठक में अनिवार्य रुप से शामिल रहेंगे। रीवा के कलेक्ट्रेट में सीएम मोहन यादव की होने वाली इस पहली बैठक पर खुद उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला बारीकी से नजर रख रहे हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि राजेन्द्र शुक्ला का रीवा के विकास में हमेशा ध्यान रहता है और वो विकास के लिए अलग-अलग तरह से रोड मैप तैयार करते रहते हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह दौरा रीवा वासियों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

रीवा जिला शिक्षा अधिकारी अनियमितता मामला,पुलिस अधीक्षक खुद करेंगे जांच
जबलपुर स्थित हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश ने रीवा जिले के पुलिस अधीक्षक को आदेशित किया है कि वह कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी रीवा (rewa district education officer) में मौजूद रिकॉर्ड की जांच करें और न्यायालय को बताएं कि, याचिका के साथ प्रस्तुत किए गए दस्तावेज, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जारी किए गए या नहीं। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है के मामले की जांच पुलिस अधीक्षक रीवा स्वयं करेंगे, अपने किसी अधीनस्थ अधिकारी को इसके लिए नियुक्त नहीं करेंगे।मामला आर्थिक अनियमित का है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (mp high court) के समक्ष एक याचिका प्रस्तुत की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी रीवा में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता हुई है। अपने पक्ष के समर्थन में याचिकाकर्ता ने कुछ दस्तावेज संलग्न किए हैं और बताया है कि यह दस्तावेज उसने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जनवरी 2010 में प्राप्त किए थे। इस मामले में वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी रीवा ने माननीय न्यायालय में प्रस्तुत होकर बताया कि, यह दस्तावेज उनके कार्यालय से कभी भी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जारी नहीं किए गए। जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से न्यायालय में हलफनामा प्रस्तुत किया गया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में इस मामले में रीवा के पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि वह, स्वयं रिकॉर्ड की जांच करें एवं बताएं कि याचिकाकर्ता और जिला शिक्षा अधिकारी में से कौन सही है। जांच के बिंदु इस प्रकार होंगे:- क्या याचिकाकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन किया था। क्या आवेदन के आधार पर मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई गई थी। दिनांक 16 अक्टूबर 2010 के पत्र में जिन शासकीय दस्तावेजों का जिक्र है, क्या वह रिकॉर्ड में उपलब्ध है। याचिकाकर्ता द्वारा जो दस्तावेज लगाए गए हैं, उसे पर किसके हस्ताक्षर हैं।

विंध्य में होगी मिली जुली सरकार,कांग्रेस,भाजपा के बाद बसपा को भी मिलेंगी सीटें
मप्र की राजनीति में विंध्य क्षेत्र किसी जमाने में विशेष स्थान रखा करता था (Vindhya Politics)। लेकिन श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) और पूर्व सीएम अर्जुन सिंह (Arjun Singh) के स्वर्गवासी होने के बाद विंध्य में एक भी ऐसा नेता तैयार नहीं हो पाया जो विंध्य को एकबार फिर सियासत के शिखर तक लेकर जाए। धीरे-धीरे भाजपा ने विंध्य में अपना वर्चश्व बनाया वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि भाजपा ने जतीय समीकरण की नब्ज टटोल कर उम्मीदवार उतारे और उसमें भाजपा को सफलता मिली। साल 2018 में तो विंध्य में कांग्रेस को 30 में से महज छह सीटें मिलीं जिसके कारण कांग्रेस जादुई आंकड़े तक पहुंचते-पहुंचे रह गई। अब इस साल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा एकबार फिर दम मार रही हैं लेकिन स्थिति दोनों के लिए ठीक नहीं है। रीवा की सीट पर भाजपा और कांग्रेस ने ब्राम्हण उम्मीदवार उतारे हैं जिसमे राजेन्द्र शुक्ला एक बार फिर चुनाव जीतते नजर आ रहे हैं। गुढ़ की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस ने ठाकुर प्रत्याशियों को मौका दिया है जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार कपिध्वज सिंह की स्थिति ठीक नजर आ रही है। देवतालाब की बात करें तो कांग्रेस भाजपा ने चाचा भतीजे को एक दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतार दिया है इसलिए माना जा रहा है कि यहां से बीएसपी उम्मीदवार जीत का पर्चम लहरा सकता है। मऊगंज से बात करें तो वहां सुखेन्द्र सिंह बन्ना और प्रदीप पटेल के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है लेकिन यह सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। सिरमौर की बात करें तो कई ब्राम्हण खड़े हैं,दो ठाकुर प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं और कांग्रेस ने रामगरीब आदिवासी पर दांव लगाया है,यह सीट कांग्रेस के पाले में जाती दिख रही है। सेमरिया की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ब्राम्हण उम्मीदवार पर दांव लगा कर बीएसपी के लिए जीत का दरवाजा खोल दिया है। त्योंथर विधानसभा सीट बीजेपी अथवा बीएसपी जीतती रही है। इस बार भाजपा ने ऐन मौके पर कांग्रेस से भाजपा में आए सिद्धार्थ तिवारी (Siddharth Tiwari) पर दांव लगाया है जो बाहरी कैंडिडेट हैं और कांग्रेस ने दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Ramashankar Patel) (कुर्मी) को चुनाव मैदान में उतार दिया है,यह सीट ब्राम्हण बाहुल मानी जाती है,और सिद्धार्थ तिवारी की स्थिति ठीक बताई जा रही है लेकिन बीएसपी यहां छुपी रुस्तम की तरह जीत का पर्चम लहरा दे तो कोई असंभव की बात नहीं होगी। यानि रीवा की राजनीति में इस बार खिचड़ी सरकार का बोलबाला देखने को मिल सकता है।

श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी ने ली बीजेपी की सदस्यता,त्योंथर से लड़ेंगे चुनाव
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) के पोते और सुंदरलाल तिवारी (Sundar Lal Tiwari) के बेटे सिद्धार्थ तिवारी (Siddharth Tiwari) ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। सिद्धार्थ तिवारी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहनकर भाजपा की सदस्यता दिलाई है। इस दौरान सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि वह भाजपा की विकास गाथा से प्रभावित होकर भाजपा में आए हैं। सिद्धार्थ तिवारी ने कहा की उन्होंने 2003 का दौर देखा है और 2023 का दौर भी देख रहे हैं। पहले सड़कों में सिर्फ गड्ढे हुआ करते थे और आज की नेशनल हाईवे सबके सामने है। हालांकि सिद्धार्थ तिवारी ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि वह कहां से चुनाव लड़ेंगे लेकिन यह बातें मानी जा रही है कि वह रीवा की त्योंथर विधानसभा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। गौरतलब है कि अभी तक भाजपा ने त्योंथर से भाजपा ने अपने प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है और कांग्रेस पार्टी त्योंथर से रमाशंकर पटेल (Ramashankar Patel) का ऐलान कर चुकी है।

रीवा की चार सीटों में भाजपा की दो में स्थिति खराब,केपी और पंचू पर फिर लगेगा दांव
भारतीय जनता पार्टी अब तक 136 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है, बांकी 94 वे नामों को लेकर भाजपा में अब भी मंथन लगातार जारी है (BJP Candidate list)। लेकिन इस खबर में बात करेंगे रीवा की उन चार सीटों की जिनमें भाजपा अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है (MP Elections)। रीवा शहर से भाजपा ने अपने मजबूत और कद्दावर नेता राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को चुनाव मैदान में उतारा है,चुनाव जीतना उनके लिए आसान नहीं है लेकिन वो अंत में चुनाव जीत लेंगे। अब बात करते हैं देवतालाव विधानसभा की जहां विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम (Girish Gautam) पिछले तीन बार से विधायक हैं साल 2018 में गिरीश गौतम चुनाव हारते-हारते बचे,उनके सियासी कद का उस वक्त और खुलासा हुआ जब जनपद पंचायत के चुनाव में उनका बेटा चुनाव हार गया,और गिरीश गौतम विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए अपने बेटे को चुनाव नहीं जिता पाए। इस बार के चुनाव में गिरीश गौतम का भारी विरोध है,यह सीट कुर्मी बाहुल सीट है माना जा रहा है कि कांग्रेस ने भी इस सीट से ब्राम्हण को उम्मीदवार बनाती है तो फिर बीएसपी इस सीट पर जीत दर्ज कर लेगी। मऊगंज की बात करें तो यहां से प्रदीप पटेल (Pradeep Patel) को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है,सिटिंग एमएलए होने के नाते भाजपा ने फिर प्रदीप पटेल पर विश्वास जताया है लेकिन उन पर कई आरोप हैं, तुलसी के पौधे पर पेशाब करना, रामायण जलाने जैसे संगीन आरोप प्रदीप पटेल पर लगाए जाते रहे हैं। दो दिन पहले प्रदीप पटेल के विरोध में सैकड़ों कार्यकर्ता मऊगंज से भोपाल बीजेपी प्रदेश कार्यालय आए थे उस दौरान उन्होने जमकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि कहा कि अगर प्रदीप पटेल को नहीं बदला जाता है तो सभी लोग कांग्रेस उम्मीदवार को वोट देंगे। अब बात करेंगे सेमरिया और मनगंवा की,Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार सेमरिया से केपी त्रिपाठी का टिकट लगभग तय है,और उनको जिताने की जिम्मेदारी राजेन्द्र शुक्ला की होगी वहीं मनगंवा से पंचूलाल (Panchu Lal Prajapati) को फिर मौका दिया जा सकता है,जिन्हे जिताने का जिम्मा गिरीश गौतम ने लिया है,फिलहाल त्योंथर और गुढ़ को लेकर बीजेपी में अब भी संशय है।