Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

कैलाश के 'घंटे' पर कांग्रेस के सारे 'नट' 'तांडव' करने को तैयार मीनाक्षी की बढ़ी मुस्किलें कैसे जाएंगी राज्यसभा

Jun 5, 2026 3 min read
कैलाश के 'घंटे' पर कांग्रेस के सारे 'नट' 'तांडव' करने को तैयार मीनाक्षी की बढ़ी मुस्किलें कैसे जाएंगी राज्यसभा
ADVERTISEMENT
Font Size:

मध्य प्रदेश कांग्रेस एकजुटता की बात करती है। उस एक जुटता को बनाए रखने के लिए पिछले तीन साल से कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी में एकजुटता का लगातार प्रयास भी करते रहे हैं। लेकिन राज्यसभा की एक सीट ने कांग्रेस की एकजुटता की पोल खोल कर रख दी है। कांग्रेस खाते की एक मात्र राज्यसभा सीट के लिए जैसे ही महिला नेत्री का नाम आया तो जितने भी नट थे उन्होंने तांडव करना शुरु कर दिया। दरअसल इस सीट से दिग्विजय सिंह सदस्य थे और अब उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। मीडिया में उन्होंने भी ऐलान किया था कि वो अब राज्यसभा नहीं जाना चाहते। लेकिन हकीकत इससे अलग थी। दिग्विजय सिंह चाहते थे कि केन्द्रीय नेतृत्व खुद उनसे राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए कहें लेकिन ऐसा हुआ नहीं और महिला नेत्री मीनाक्षी नटराजन के नाम पर मुहर लगा दी गई। जैसे ही नटराजन का नाम फायनल हुआ तो पार्टी के सारे नटों ने तांडव करना शुरु कर दिया। एक झटके में पार्टी अलग-अलग गुटों में बंट गई और जीतू पटवारी की सारी मेहनत पर पानी फिर गया। अब मजे की बात यह है कि राज्यसभा जाने के लिए कांग्रेस में नेताओं की एक लंबी लिस्ट है और सीट महज एक है। जिसके बाद पार्टी के अंदर ही अंदर आपसी खींचतान का दौर तेज हो गया है। अब इस आपसी खींचतान का फायदा भाजपा उठा सकती है। क्योंकि मीनाक्षी नटराजन को पार्टी के नेता नहीं चाहते क्योंकि उनके नाम को राहुल गांधी ने फायनल किया है। लिहाजा भाजपा अंत में अपने पत्ते खोलेगी। संभावना है कि भाजपा तीसरी सीट पर किसी आदिवासी नेता के नाम का चयन कर कांग्रेस के आदिवासी विधायकों से क्रास वोटिंग करवा सकती है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी तीसरी सीट पर नजर गड़ा कर बैठे हैं। घंटा कांड के बाद से वो एमपी की राजनीति छोड़ दिल्ली में अपना ठिकाना तलाश रहे हैं। और चाहते हैं कि पार्टी एक बार उन्हें राज्यसभा के बहाने दिल्ली आने का न्योता दे दे। इसी लिए अपना नाम लिए बगैर कैलाश विजयवर्गीय ने इशारा किया है कि अगर पार्टी तीसरी सीट पर प्रत्याशी तय करती है तो वो उस सीट पर भी जीत हासिल कर लेंगे। मतलब साफ है कि मीनाक्षी नटराजन के सामने सिर्फ घर के अंदर ही चुनौती नहीं घर के बाहर भी चुनौतियों का अंबार है। एक ऐसा अभेद्य चक्रव्यूह तैयार है जिसे तोड़ पाना मीनाक्षी नटराजन के लिए आसान नहीं होगा।

ADVERTISEMENT

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT
कैलाश के 'घंटे' पर कांग्रेस के सारे 'नट' 'तांडव' करने को तैयार मीनाक्षी की बढ़ी मुस्किलें कैसे जाएंगी राज्यसभा | मुखबिर MP