भाजपा ने सीएम बदला फिर भी संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की नहीं बदली किस्मत,प्रदर्शन के बाद भी सरकार के कान तक नहीं पहुंच रही आवाज

प्रदेश की सरकार युवाओं को रोजगार देने की बात करती है| एक ऐसा रोजगार जिसमें कर्मचारियों को दस से 12 हजार रुपये महीने की सैलिरी दी जाती है और उनसे मजदूरों से ज्यादा काम लिया जाता है| हर विभाग में पदस्थ लाखों की संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे ही सभी शासकीय विभाग संचालित हो रहे हैं| न तो उनके नौकरी की कोई सिक्योरिटी है और न ही किसी प्रकार की शासकीय सुविधाएं,किसी कर्मचारी के ऊपर अचानक कोई समस्या आ जाए तो वो इधर से उधर भटकने के लिए मजबूर होता है| इन्ही कर्मचारियों को भाजपा ने चुनाव से पहले नियमित करने का लालच दिया,शासकीय कर्मचारियों की तर्ज पर उन्हे सभी सुविधाएं और भत्ते देने का दावा किया लेकिन प्रदेश का सीएम बदलते ही वो सारे दावे और वादे भी हवा में ही तरते रह गए| आज तब आउटसोर्स कर्मचारी प्रदर्शन करते हैं तो सरकार का कोई न कोई नुमाइंदा उनके खिलाफ ऐसे बयान देता है जैसे वो प्रदेश के कर्मचारी नहीं बल्कि किसी अन्य राज्य से आए हुए लोग हों| प्रदेश के मुखिया दूसरे राज्य के चुनाव में ब्यस्त हैं उन्हे भी आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में सोचने का वक्त नहीं है| ऐसी स्थिति में आउटसोर्स कर्मचारियों का क्या होगा आज सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को इसी बात की चिंता सता रही है| आउटसोर्स में काम कर रहे कुछ कर्मचारियों का कहना है कि जिस प्रकार से हर वस्तु की कीमतें बढ़ रही हैं उससे उनका घर चलना मुस्किल हो रहा है| स्कूल की फीस से लेकर हर चीज के लिए वो हर महीने परेशान होते हैं लेकिन सरकार को किसी भी बात का फर्क नहीं पड़ता है|
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