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मध्य प्रदेश

RTI की जानकारी देने में भोपाल नगर निगम सबसे फिसड्डी,दो साल के अतिक्रम की कार्रवाई का नहीं है कोई दस्तावेज

Oct 26, 2025 3 min read
RTI की जानकारी देने में भोपाल नगर निगम सबसे फिसड्डी,दो साल के अतिक्रम की कार्रवाई का नहीं है कोई दस्तावेज
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मप्र की राजधानी भोपाल के नगर निगम की हालत बद से बदतर हो चुकी है। भ्रष्टाचार का आलम ये है कि एक जनवरी से 30 मई 2025 तक नगर निगम में डीजल-पेट्रोल पर 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च कर दी गई उसके बाद भी शहर स्वच्छ नहीं बल्कि और गंदा हो गया। इसके अलावा एक बड़ा भ्रष्टाचार का खेल अतिक्रमण शाखा में चल रहा है जिसकी कार्रवाई का डाटा ही नगर निगम की अतिक्रमण शाखा विभाग के पास नहीं है। भोपाल नगर निगम की अतिक्रमण विभाग से एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने नगर निगम की ओर से की जाने वाली अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। एक बार जानकारी मांगने पर जब उसने दोबारा जानकारी मांगी तब भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई इतना ही नहीं प्रथम अपील के बाद भी मामले में संज्ञान नहीं लिया गया। इसका मतलब साफ है कि नगर निगम के पास पिछले दो साल में की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का कोई डाटा और दस्तावेज नहीं है जिसके कारण जानकारी नहीं दी जा रही है। अथवा ये भी कारण हो सकता है कि अतिक्रमण शाखा में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण सोच समझ कर जानकारी छिपाने का कार्य किया जा रहा है। भोपाल नगर निगम में सिर्फ अतिक्रमण विभाग में ही यही हालात नहीं हैं नगर निगम के जितने भी विभाग हैं सभी में जानकारी छिपाने का प्रयास किया जाता है। राजश्व विभाग के पास भी कोई जानकारी नहीं कि एक जनवरी 2025 में विकास कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है। ट्रांसपोर्ट विभाग की बात करें तो वहां का भ्रष्टाचार गले से ऊपर तक पहुंच चुका है। नगर निगम में वाहनों की बड़ी संख्या होने के बाद भी नहीं निगम में काम करने वाले कर्मचारी,एमआइसी मेंबर और यहां तक कि महापौर के रिस्तेदारों के वाहन अटैच किए गए हैं जिससे सगे संबंधियों को लाभ पहुंचाया जा सके। राज्य सरकार भी नगर निगम को विकास कार्यों के लिए सालाना मोटी रकम देती है उस रकम का नगर निगम के पास कोई रिकार्ड न होने का मतलब है कि भोपाल नगर निगम में बड़ी मात्रा में भ्रष्टाचार चल रहा है लेकिन उस पर शासन और प्रशासन की कोई जनर नहीं है। या फिर जानबूझ कर पूरे भ्रष्टाचार को आश्रय देने का कार्य किया जा रहा है। यही सारे कारण हैं जिसके कारण भोपाल नगर निगम घाटे में चल रहा है यहां तक की आउटसोर्स में काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित रुप से वेतन तक नहीं दिया जाता है।

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