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मध्य प्रदेश

'वेंटीलेटर' पर भोपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था 'कमीशन' के लिए चिकित्सक ऐसी दवाएं लिखते हैं जो सरकारी फार्मेसी में उपलब्ध न हो

Mar 26, 2026 3 min read
'वेंटीलेटर' पर भोपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था 'कमीशन' के लिए चिकित्सक ऐसी दवाएं लिखते हैं जो सरकारी फार्मेसी में उपलब्ध न हो
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मध्य प्रदेश की राजधानी में शासकीय अस्पतालों में दवाइयों का सार्टेज देखने को मिल रहा है। चिकित्सकों द्वारा लिखी दवाइयां शासकीय अस्पतालों के काउंटरों में उपलब्ध न होने से मरीजों के परिजनों को निजी मेडिकल स्टोर जाना पड़ रहा है और वहां से मोटी रकम देकर दवाई खरीदना पड़ रहा है। भोपाल के जेपी अस्पताल में तो मरीजों को बेसिक दवाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है। गुरुवार को हालात ऐसे रहे कि अस्पताल में मल्टीविटामिन और अमोक्सिसिलिन जैसी सामान्य दवाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं अस्पताल में न मिलने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को बाहर मेडिकल स्टोर का सहारा लेना पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रबंधन स्टॉक में दवाएं होने का दावा कर रहा है, जबकि मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इससे अस्पताल की दवा वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जेपी अस्पताल में गुरुवार को कई मरीजों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब उन्हें अस्पताल की दवा खिड़की से जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। अमोक्सिसिलिन और मल्टीविटामिन जैसी दवाएं, जो सामान्य तौर पर हर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध रहती हैं, यहां खत्म बताई गईं। मरीजों को अलग-अलग काउंटर पर भेजा गया, लेकिन कहीं भी दवा उपलब्ध नहीं हो सकी। अस्पताल में रोजाना 100 से ज्यादा मरीजों को इन सामान्य दवाओं की जरूरत होती है। दवाएं नहीं मिलने के कारण मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। इससे उनका इलाज खर्च बढ़ रहा है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनका इलाज लंबे समय तक चलता है। कुछ मरीजों के परिजनों का आरोप है कि दवा होते हुए भी नहीं होने की बात कही जाती है जिससे मरीज निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेकर आएं। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार दवाइयों की कमी का हवाला इसलिए दिया जाता है क्योंकि चिकित्सकों का निजी मेडिकल स्टोरों से कमीशन बंधा रहता है। लिहाजा चिकित्सक ऐसी दवाएं भी लिखते हैं जो शासकीय अस्पताल में उपलब्ध न हो और मजबूर होकर मरीजों के परिजन निजी मेडिकल स्टोरों से दवाइयां लेकर आएं। जेपी अस्पताल के सामने ही कई मेडिकल स्टोर खुले हैं जो अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं और उसमें चिकित्सकों का पूरा कमीशन फिक्स रहता है।

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