मंत्रियों के विभाग बंटवारें में संशय जारी,बड़े कद के नेता बना रहे मलाईदार विभाग का दबाव
मप्र में तीन दिसंबर को मतगणना हुई और 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) ने दो सहियोगियों के साथ शपथ ली। उसके बाद 25 दिसंबर को 29 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। पांच दिन बीतने के बाद भी डॉ. मोहन यादव अब तक मंत्रियों को विभागों का बंटवारा नहीं कर पाए हैं (mp cabinet)। शपथ लेने के दौराना माना जा रहा था कि अगले ही दिन मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा लेकिन वो दिन अब तक नसीब नहीं हुआ। यहां तक कि दो डिप्टी सीएम बनाए गए हैं उन्हे भी कोई विभाग नहीं दिया गया है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अचानक दिल्ली बुलाया गया है तो कयासों का दौर फिर तेज हो गया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक अन औपचारिक कैबिनेट की बैठक बुलाई थी जिसमें उन्होने मंत्रियों से उनके इंट्रेष्ट वाले विभाग पूछे थे। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय,और प्रहलाद पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने अपनी पसंद के विभाग बताए तो सीएम मोहन यादव हैरत में पड़ गए और आखिर में उन्होने गेंद केन्द्रीय नेत्रृत्व के पाले में डाल दी। यानि मतलब साफ है कि मंत्रियों के विभाग बंटवारों में भी केन्द्र की ही महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। लिहाजा अब मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली जाने के कारम लोग कयास जरुर लगा रहे हैं कि विभागों का बंटवारा हो जाएगा लेकिन स्थितियों को देखते हुए साफ नजर आ रहा है कि अब अगले साल ही मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो पाएगा।

📷 MP Cabinet
मप्र में तीन दिसंबर को मतगणना हुई और 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) ने दो सहियोगियों के साथ शपथ ली। उसके बाद 25 दिसंबर को 29 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। पांच दिन बीतने के बाद भी डॉ. मोहन यादव अब तक मंत्रियों को विभागों का बंटवारा नहीं कर पाए हैं (mp cabinet)। शपथ लेने के दौराना माना जा रहा था कि अगले ही दिन मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा लेकिन वो दिन अब तक नसीब नहीं हुआ। यहां तक कि दो डिप्टी सीएम बनाए गए हैं उन्हे भी कोई विभाग नहीं दिया गया है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अचानक दिल्ली बुलाया गया है तो कयासों का दौर फिर तेज हो गया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक अन औपचारिक कैबिनेट की बैठक बुलाई थी जिसमें उन्होने मंत्रियों से उनके इंट्रेष्ट वाले विभाग पूछे थे। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय,और प्रहलाद पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने अपनी पसंद के विभाग बताए तो सीएम मोहन यादव हैरत में पड़ गए और आखिर में उन्होने गेंद केन्द्रीय नेत्रृत्व के पाले में डाल दी। यानि मतलब साफ है कि मंत्रियों के विभाग बंटवारों में भी केन्द्र की ही महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। लिहाजा अब मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली जाने के कारम लोग कयास जरुर लगा रहे हैं कि विभागों का बंटवारा हो जाएगा लेकिन स्थितियों को देखते हुए साफ नजर आ रहा है कि अब अगले साल ही मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो पाएगा।
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