विक्रम- बेताल की तरह घूम रही मप्र में निगम-मंडलों की सूची सरकार और संगठन पर उठ रहे सवाल

मप्र की मोहन सरकार को दो वर्ष पूर्ण हो चुके हैं लेकिन सरकार और संगठन मिल कर अब तक निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर आपसी सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं। जबकि बीतते समय के साथ पार्टी के कार्यकर्ताओं के धैर्य का बांध फूटने की कगार पर है। निगम-मंडलों की नियुक्ति को लेकर पिछले दो महीने से लगातार कवायद चल रही है। पिछली कैबिनेट बैठक में भी निगम-मंगलों की नियुक्ति का सीएम मोहन यादव ने जिक्र किया था। सरकार और संगठन में बाहर से तो सबकुछ ठीक दिख रहा है लेकिन अंदर सबकुछ ठीक नहीं है। अगर ठीक होता और स्थितियां सामान्य होती तो अब तक निगम-मंडलों की नियुक्तियों का सिलसिला शुरु हो चुका होता लेकिन बाहर से आसान दिखने वाली यह प्रक्रिया पार्टी के लिए उतनी ही कठिन है जितनी कांग्रेस के लिए प्रदेश में सरकार बनाना। दरअसल लंबे समय बाद ये देखने को मिल रहा है कि सरकार और संगठन के फैसले तीसरा व्यक्ति ले रहा है। जिसके कारण अब तक निगम-मंगलों की नियुक्ति पर सहमति नहीं बन पाई है। अब तक तीन से चार बार लिस्ट को दिल्ली भेजा जा चुका है लेकिन भोपाल से दिल्ली के बीच सूची को लेकर बढती दूरी सरकार के दिनों को बढ़ाती जा रही है नतीजा कोई नहीं निकल रहा है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार फैसले मंत्रालय और प्रदेश कार्यालय में होने के बजाय किसी तीसरी जगह से हो रहे हैं। जिसके कारण सरकार और संगठन खुद को असहाय सा महसूस कर रहे हैं। सरकार और संगठन के इस असहजता के बीच निगम मंडल में शामिल होने का सपना संजोए बैठे नेताओं का इंतजार बढ़ता जा रहा है लेकिन उनकी किस्मत का फैसला हो नहीं पा रहा है। सीएम मोहन यादव,अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा सहित अन्य नेता कई बार सूची फायनल करने के लिए बैठ चुके हैं सूची भी तैयार हुई लेकिन जिस तीसरे व्यक्ति को सूची फायनल करना है वो हर बार किसी न किसी नाम को लेकर असहमत हो जाते हैं जिसके कारण सूची को फिर ने सिरे से तैयार किया जाता है। निगम-मंडल की सूची को लेकर जिस प्रकार से स्थिति दिख रही है वो ठीक विक्रम और बेताल की कहानी को चरितार्थ करता है। हर बार विक्रम बेताल को पकड़ता है और वो एक कहानी सुना कर गायब हो जाता है। ठीक उसी प्रकार भाजपा में हर बार निगम-मंडल की सूची बनती है तीसरा व्यक्ति कैंसिल करता है और फिर उस सूची को बनाने का सिलसिला शुरु हो जाता है।
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