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मध्य प्रदेश

यूं ही कोई हेमंत खंडेलवाल नहीं बन जाता विनम्रता जिनका हथियार दृढ़ इच्छाशक्ति जिनकी पहचान वही बनते हैं चुनौतियों के सरताज ऐसे हैं हेमंत खंडेलवाल

Jul 1, 2026 4 min read
यूं ही कोई हेमंत खंडेलवाल नहीं बन जाता विनम्रता जिनका हथियार दृढ़ इच्छाशक्ति जिनकी पहचान वही बनते हैं चुनौतियों के सरताज ऐसे हैं हेमंत खंडेलवाल
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शांत स्वभाव और उतने ही कठिन फैसले लेने वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल आज अपने कार्यकाल का सफलतम एक वर्ष पूर्ण करने जा रहे हैं। हेमंत खंडेलवाल जब अध्यक्ष बने तो उनके सामने चुनौतियों का अंबार था। भाजपा में पांच साल बाद नया नए अध्यक्ष के रुप में हेमंत खंडेलवाल का निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। लेकिन उसके पहले बीजेपी अध्यक्ष ने ऐसी कठिन परीक्षा दी थी जिसे शायद अब दोबारा उत्तीर्ण करना उनके लिए भी कठिन हो सकता है। लोकसभा चुनाव में हेमंत खंडेलवाल को चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने अपने कुशल प्रबंधन और सधी हुई रणनीति का ऐसा उदाहरण पेश किया जिसके कारण लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार मध्य प्रदेश में क्लीन स्वीप करने में कामयाबी हासिल की। हेमंत खंडेलवाल ने लोकसभा चुनाव से पहले भी अपनी नेतृत्व क्षमता और कुशल नेतृत्व का की मौकों में परिचय कराया था लेकिन वो केन्द्रीय नेतृत्व की नजर में उस वक्त आए जब लोकसभा चुनाव में उन्होंने क्लीन स्वीप किया। यहीं से उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने का रास्ता तय हुआ। अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खंडेलवाल के सामने चुनौतियों का अंबार था जिसमें सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं और कार्यकर्ताओं के समायोजन की थी। लेकिन बीजेपी अध्यक्ष ने एक ऐसा मिला जुला मास्टर प्लान तैयार किया जिसमें कांग्रेस नेताओं को कार्यकारिणी से लेकर प्रदेश कार्यसमिता में ऐसे समाहित कर दिया जैसे दूध में शक्कर मिल जाया करती है। बीजेपी अध्यक्ष ने कार्यभार ग्रहण करते ही प्रदेश कार्यालय में नवाचार की एक ऐसी श्रृंखला शुरु की जो एक नजीर बन कर रह गई। प्रदेश भर से आने वाले कार्यकर्ताओं से बीजेपी अध्यक्ष डायरेक्ट मिलते हैं। यहां तक कि बड़ा नेता हो अथवा टाट-दरी बिछाने वाला छोटा कार्यकर्ता सभी को प्रदेश कार्यालय में समान भाव से देखा जाने लगा। बड़े और छोटे कार्यकर्ता का भेद भाव खत्म कर हर कार्यकर्ता से सीधे मिलने की एक अनोखी परंपरा हेमंत खंडेलवाल ने शुरु कर दी। चेंबर व्यवस्था खत्म कर प्रत्येक कार्यकर्ता को अकेले बुलाना और बैठा कर उनकी बात सुनने के नए नवाचार का आगाज किया गया। अकेले बैठ कर कार्यकर्ता अपने मन की बात सीधे अध्यक्ष से कह देता है जिससे उसके मन में छिपा असंतोष खत्म हो जाता है। प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश के कोने-कोने से ढूंढ कर कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया। किसी बड़े और छोटे कार्यकर्ता में ऊंच-नींच का भेदभाव किए बगैर प्रदेश अध्यक्ष ने एक धागे में सारे मोतियों को पिरोने का प्रयास किया। बीच-बीच में कुछ विधायकों के बेतुके बोल जरुर उनके लिए समस्या का सबब बने लेकिन बीजेपी अध्यक्ष ने खुद का आपा खोए बगैर सभी को बुला कर परिवार के मुखिया की तरह समझाने का प्रयास किया और इस योजना में वो कुछ हद तक सफल भी हुए। हेमंत खंडेलवाल अब तक तीन दर्जन से अधिक जिलों का दौरा कर चुके हैं। और सभी जगहों पर पदाधिकारियों के साथ खुद बैठक कर स्थानीय संगठन को मजबूत करने पर जोर लगा चुके हैं। आने वाली चुनौतियों के लिए बीजेपी अध्यक्ष अभी से कार्यकर्ताओं को तैयार कर रहे हैं। हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष ने बड़ी चुनौती को पार किया जहां राज्यसभा की तीनों सीट पर बीजेपी का परचम लहरा दिया। जिससे एमपी में राज्यसभा की नौ सीटें हो चुकी हैं जबकि नौवीं सीट कांग्रेस के हिस्से की थी उसके बाद भी कुशल रणनीति का परिचय देते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने जीत हासिल की। आगे बड़ी चुनौतियां हैं जिनकी तैयारी बीजेपी अध्यक्ष अभी से कर रहे हैं क्योंकि उन्हे मालूम है कि खिलाड़ी बन कर खेलना और कप्तान बन कर खेलने में बड़ा अंतर होता है लिहाजा अब पार्टी को यादगार बनाने में वो लगातार लगे हैं।

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यूं ही कोई हेमंत खंडेलवाल नहीं बन जाता विनम्रता जिनका हथियार दृढ़ इच्छाशक्ति जिनकी पहचान वही बनते हैं चुनौतियों के सरताज ऐसे हैं हेमंत खंडेलवाल | मुखबिर MP