नरोत्तम भार्गव भदौरिया भूपेन्द्र और कमल पटेल सहित अनेकों नेताओं को सुनियोजित तरीके से साइड लाइन कर रही भाजपा

मप्र भाजपा को जिन नेताओं ने फर्ष से से अर्ष तक पहुंचाया उन्ही नेताओं को धीरे-धीरे साइड लाइन किया जा रहा है। सालों तक जो नेता भारतीय जनता पार्टी का चेहरा बने रहे वही नेता अब पार्टी के लिए बोझ लगने लगे हैं। जिस प्रकार से भाजपा में बदलाव और गुटबाजी का आलम है उसी की बानगी ये है कि वरिष्ठों को साइड कर अपनी लाइन मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। गोपाल भार्गव भाजपा के उन नेताओं में हैं जिन्होने भाजपा को बुंदेलखंड में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भूपेन्द्र सिंह भी पार्टी के बड़े नेता हैं लेकिन भाजपा ने उन्हें ऐसे साइड लाइन किया है जैसे अब पार्टी को उनकी जरुरत ही नहीं है। अरविंद भदौरिया चुनाव क्या हारे मानो पार्टी को उनकी जरुरत ही नहीं है। कमल पटेल भी उन्ही नेताओं में एक हैं जिन्होंने पार्टी के लिए अपना जीवन खपाया लेकिन चुनाव हारे तो आज पार्टी में उनकी कोई पूछ परख ही नहीं है। पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्हे सरकार और संगठन में संकट मोचक कहा जाता रहा है। सरकार में कोई संकट आए तो नरोत्तम मिश्रा आगे खड़े मिलते थे संगठन में कोई समस्या हो तो भी पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ही खड़े मिलते थे। साल 2023 से 24 की बात तो भाजपा को भूलना ही नहीं चाहिए जब लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा ने न्यू ज्वाइनिंग कमेटी का डाक्टर नरोत्तम मिश्रा को संयोजक बनाया तो उन्होंने पूरी कांग्रेस को तहस नहस कर दिया। उन्हीं के सहयोग के बल पर एमपी बीजेपी ने पहली बार भाजपा ने क्लीन स्वीप कर प्रदेश की 29 की 29 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की। इससे पहले साल 2019 में विपक्ष में बैठी भाजपा जब सत्ता में आने की कोशिश कर रही थी तब भी आपरेशन लोटस में महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर पूर्व गृह मंत्री ने सरकार बनाने में अपनी सहभागिता निभाई। आज ऐसे नेताओं को भाजपा साइड कर उन नेताओं को आगे कर रही है जो भाजपा के सिर्फ अच्छे दिनों के साथी रहे हैं। जब संघर्ष के दिन थे तब गोपाल भार्गव,अरविंद भदौरिया,भूपेन्द्र सिंह,अरविंद भदौरिया और डाक्टर नरोत्तम मिश्रा ने अपने खून पसीने से पार्टी को सींचा और जब पार्टी में सत्ता का सुख भोगने की बारी आई तो गुटीय राजनीति अपने शबाब पर आ गई। मेहनत करने वाले नेता पार्टी को बोझ लगने लगे। खबर में जिन नेताओं का उल्लेख है वो नेता बड़े चेहरों में हैं। इन्हीं नेताओं की तरह अनगिनत नेता और कार्यकर्ता हैं जो संगठन और सरकार में उपेक्षा का दंश झेल कर भी पार्टी के हित की बात करते रहते हैं।
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संतोष वर्मा विजय शाह के बयान पर चुप रहने वाली सरकार ने प्रतिमा बागरी पर भी दिखाई हठधर्मिता अब जनता की अदालत का इंतजार
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