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मध्य प्रदेश

मंत्रियों का टेस्ट तो हुआ लेकिन नतीजों का अब तक इंतजार कहीं उन पर लगाम कसने के लिए आडंबर तो नहीं रचा गया

May 20, 2026 3 min read
मंत्रियों का टेस्ट तो हुआ लेकिन नतीजों का अब तक इंतजार कहीं उन पर लगाम कसने के लिए आडंबर तो नहीं रचा गया
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मध्य प्रदेश सरकार और संगठन के आपसी समन्वय में चार दिन पहले मोहन सरकार ने मंत्रियों के विभागों की समीक्षा बैठक की। यह समीक्षा बैठक पहले की तुलना में काफी अलग और महत्वपूर्ण थी‌। क्योंकि इस समीक्षा बैठक में एक-एक करके मंत्रियों को बंद कमरे में बुलाया जा रहा था। उनसे वन टू वन किया जा रहा था। और कमरे से निकलने के बाद मंत्रियों के चेहरे में मायूसी साफ दिख रही थी। इस बैठक को विभागों की रिव्यू रिपोर्ट से जोड़ कर भी देगा जा रहा है। लेकिन इसके पीछे कुछ और जानकारी निकल कर सामने आ रही है। दरअसल मोहन सरकार अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे कर चुकी है। काफी सोच विचार कर कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका दिया गया लेकिन वो सरकार और संगठन की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। कुछ मंत्री तो ऐसे निकले जो सिर्फ पैर्टपोलियो के लिए ही मंत्री हैं बांकी उनके पास कुछ करने का अधिकार नहीं और काम भी नहीं है। पोर्टपोलियो मिलने वो मंत्री तो बन गए लिहाजा संगठन के बजाय वो सरकार के नियंत्रण में हो गए। अब संगठन माननीय को कोई आदेश नहीं देता क्योंकि वो मंत्री जी हैं और उनके मुखिया डाक्टर मोहन यादव हैं। और दूसरा पहलू ये है कि वो सरकार में होकर भी कुछ करने का अधिकार नहीं रखते। ऐसी स्थिति में वो विवादित बयान देते हैं। या फिर कुछ ऐसी हरकत करते हैं जिससे सरकार को जवाब देना मुश्किल हो जाता है। लिहाजा सरकार की तरफ से सभी विभागों की रिव्यू रिपोर्ट के नाम पर समीक्षा आयोजित की गई जिसमें बकायदा संगठन के भी वरिष्ठ पदाधिकारियों को शामिल किया गया। इस दौरान ऐसे मंत्रियों पर ज्यादा फोकस किया गया जो मंत्री तो हैं लेकिन काम के न काज के हैं। लिहाजा उन्हें पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है। साथ ही बंद कमरे में उन्हें अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया गया है। सीएम हाउस में करीब आठ घंटे तक चले मंत्रियों के वन टू वन ने मध्य प्रदेश की राजनीति को चर्चा का एक नया विषय दिया। विश्लेषक यहां तक कह रहे थे कि इस समीक्षा के बाद की मंत्रियों की छुट्टी होना तय है। फिलहाल बंद कमरे में हुआ इंटरव्यू का राज पास नहीं हुआ है। अब तो लोग यह भी कहने लगे हैं कि यह एक आडंबर था और अनियंत्रित हो रहे मंत्रियों पर लगाम कसने के लिए एक प्रयास था बांकी उसके अलावा कुछ नहीं।

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मंत्रियों का टेस्ट तो हुआ लेकिन नतीजों का अब तक इंतजार कहीं उन पर लगाम कसने के लिए आडंबर तो नहीं रचा गया | मुखबिर MP