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मध्य प्रदेश

शासकीय कर्मचारियों की सुनवाई के लिए न आयोग न समिति,किसके पास जाएं कर्मचारी,मोहन सरकार ने भंग की थी निगम,मंडल और समिति

Oct 6, 2024 2 min read
शासकीय कर्मचारियों की सुनवाई के लिए न आयोग न समिति,किसके पास जाएं कर्मचारी,मोहन सरकार ने भंग की थी निगम,मंडल और समिति
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प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के सामने एक बड़ी विडंबना यह है कि अगर उन्हे कोई समस्या है तो वो किसके पास अपनी फरियाद लेकर जाएं| क्योंकि कर्मचारियों ने लिए न आयोग है और न ही किसी प्रकार की समिति| गौरतलब है कि तत्कालीन शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की मांगो को सुनने और उसके निराकरण के लिए अनुशंसा कर्मचारी आयोग और कर्मचारी कल्याण समिति बनाई थी| डॉ. मोहन यादव ने कर्मचारी आयोग का कार्यकाल तो एक साल के लिए बढ़ा दिया लेकिन अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की| इस तरह लोकसभा चुनाव के दौरान भंग हुई कर्मचारी कल्याण समिति का भी गठन नहीं हो पाया| अब कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं का निराकण नहीं हो पा रहा है| जो मामले सामान्य प्रशासन विभाग के पास संज्ञान में लाए जा रहे हैं,वो भी लंबित पड़े हैं| कर्मचारी संगठनों से सरकार से मांग करते हुए कहा है कि उनकी सुनवाई के लिए ब्यवस्था बहाल की जाए| शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं सुनने और उनके संबंध में अनुशंसा करने के लिए कर्मचारी कल्याण समिति बनाई थी| इससे लंबे समय तक कर्मचारियों और सरकार के बीच सेतु का काम किया| कर्मचारियों की मांगों पर सहमति बनाने पर भूमिका बनाई| गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों के सम्मेलन बुलाए और कई घोषणाएं की| इसका लाभ भी भाजपा को चुनाव में मिला| लोकसभा चुनाव से पहले मोहन सरकार ने सभी बोर्ड,प्राधिकरण,समिति और परिषद में हुई नियुक्ति को निरस्त कर दिया था| तब से ही कर्मचारी कल्याण समिति नहीं है|

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