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मध्य प्रदेश

भाजपा कार्यकारिणी में नेता पुत्रों से नहीं होगा परहेज,पद में रहते नहीं मिलेगा नेताओं के रिस्तेदारों को स्थान

Sep 10, 2025 3 min read
भाजपा कार्यकारिणी में नेता पुत्रों से नहीं होगा परहेज,पद में रहते नहीं मिलेगा नेताओं के रिस्तेदारों को स्थान
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मप्र भाजपा में जिलों की कार्यकारिणी घोषित करने का दौर लगातार जारी है। लेकिन उसमें इस बार मोटी परत का छन्ना लगाया जा रहा है। मतलब इस बार एक व्यक्ति एक पद पर विशेश ध्यान दिया जा रहा है। बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी मंशा जाहिर कर कई वरिष्ठ नेताओं को संशय में डाल दिया है। कुछ नेताओं के रिस्तेदारों के खिलाफ कार्रवाई कर नजीर भी पेश कर दी गई है। हाल ही में मंडला और मऊगंज जिलों की जारी कार्यकारिणी में कुछ नेताओं के रिस्तेदारों को शामिल कर लिया गया था जिसकी जानकारी प्रदेश नेतृत्व को लगी तो बकायदा जिला अध्यक्षों को पत्र भेज पर नेताओं के रिस्तेदारों को बाहर करने के लिए आदेशित कर दिया गया। जिन नेताओं के रिस्तेदारों को जिलों की कार्यकारिणी से बाहर किया गया है उसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन और मप्र सरकार की मंत्री संपतिया उइके की बेटी को मंडला जिले की कार्यकारिणी से बाहर कर दिया गया है। वहीं मऊगंज जिले की कार्यकारिणी में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के बेटे को शामिल किया गया था जिनको मामले की भनक लगी तो खुद ही त्यागपत्र देकर अपनी इज्जत बचा ली है। इस कार्रवाई से भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी नेता के पुत्र अथवा रिस्तेदार से पार्टी के एलर्जी नहीं है लेकिन जब खुल पद पर हैं तो अपने रिस्तेदार अथवा पुत्र को पद पर नहीं रख सकते हैं। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल निर्विवाद रुप से कार्यकारिणी तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। हर वर्ग को आवादी के साथ मौका देने का प्रयास कर रहे हैं। खासकर हर जिलों का जातिवार डाटा भाजपा के पास है जिस जिले में जिस जाति की बहुतायत है उसे ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है जिससे चुनाव के दौरान किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। जिलों की कार्यकारिणी की झलक प्रदेश कार्यकारिणी में भी दिखने वाली है। जातियों के आधार पर ही प्रदेश कार्यकारिणी भी तैयार की गई है जिसमें केन्द्रीय नेतृत्व की अंतिम मुहर लगना बांकी है। एक संतुलित कार्यकारिणी के साथ हेमंत खंडेलवाल आगे बढ़ने की योजना तैयार कर रहे हैं। आगे किसी प्रकार का विवाद न हो इसी लिए वो वरिष्ठ नेताओं के निवास पर खुद जाकर रायशुमारी कर उनसे सुझाव ले रहे हैं। जिससे कोई भी बड़ा नेता बाद में विवाद की स्थिति पैदा न करे।

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