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मध्य प्रदेश

उमा की चुनौती भाजपा के लिए बनी कसौटी,कहीं असंतुष्टों के साथ फिर दो फाड़ करने की तो नहीं हो रही तैयारी

Oct 29, 2025 3 min read
उमा की चुनौती भाजपा के लिए बनी कसौटी,कहीं असंतुष्टों के साथ फिर दो फाड़ करने की तो नहीं हो रही तैयारी
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मप्र में सत्ता के शिखर तक भाजपा को पहुंचाने वाली पूर्व सीएम उमा भारती पिछले कई साल से उपेक्षित चल रही हैं। जबकि समय-समय पर वो राजनीति में अगली पारी खेलने का इशारा करती रही हैं। लेकिन अटल और आडवाड़ी के युग का अंत होते ही उमा भारती का सियासी सूरज भी अस्त हो गया। वर्तमान भाजपा नेतृत्व ने उन्हे घर बैठने के लिए मजबूर कर दिया। किसी जमाने में अपनी राजनीति से दिग्विजय सिंह जैसे राजनीति के मझे खिलाड़ी को पानी पिलाने वाली उमा भारती आज घर बैठने के लिए मजबूर हैं। सालों तक धैर्य धारण करने वाली साध्वी के धैर्य का बांध आखिरकार फूट ही गया। और भोपाल में एक सभा आयोजित कर उन्होने फिर सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया। उमा भारती ने गाय और गंगा को अपना मुद्दा भी बनाया है। मतलब साफ है कि वो मजबूत तैयारी के साथ और कड़े होमवर्क के साथ इस बार मैदान में आने की तैयारी में हैं। उमा भारती की सभा में भाजपा के जो नेता शामिल थे वो ज्यादातर लोधी समाज के नेता ही थे। प्रदेश की 30 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां पर लोधी समाज ही जीत और हार का समीकरण तय करता रहा है। और इस बार की अपनी राजनीतिक पारी में उमा भारती जातीय समीकरण को ही हथियार बनाने की योजना बना रही हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि क्या भाजपा का नेतृत्व एक फायर ब्रांड नेत्री को फिर चुनाव मैदान में उतारने के लिए तैयार है। तो फिलहाल इस सवाल का जवाब मप्र भाजपा के नेतृत्व के पास नहीं है। जिस प्रकार से उमा भारती ने सियासी हुंकार भरी है उस मामले में भाजपा का कोई भी नेता बोलने से बचने की कोशिश कर रहा है। अभी तक भाजपा के नेतृत्व ने लाइन तय नहीं की है कि उमा भारती के ऐलान पर क्या बोलना है। इस ऐलान से ये बात तय है कि अगर उमा भारती ने फिर राजनीति में उतरने का निश्चत्र कर लिया है और अगर भाजपा का नेतृत्व उनको टिकट नहीं देता है तो अन्य किसी विकल्प के बारे में विचार करेंगी। ऐसी स्थिति में कांग्रेस की तैयारी को मजबूत बल मिलेगा क्योंकि उमा भारती का एजेंडा भी हिंदुत्व ही है लिहाजा भाजपा और उमा भारती का एजेंडा आपस में टकराएगा तो उसका लाभ तीसरे को ही होगा। अब आने वाला समय काफी मजेदार होने वाला है। उमा भारती भाजपा के नेतृत्व को झुकने पर मजबूर कर पाएंगी अथवा एक बार फिर वो अलग पार्टी बना कर चुनावी मैदान में उतरेंगी।

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