जब 25 साल बाद मिले दो बैचमेट चेहरे पर झुर्रियां और आंखों पर सवाल लेकिन जुवान में झिझक

कई बार जीवन में ऐसे लम्हे आते हैं जब वक्त के थपेड़ों में उम्र गुजर जाने के बाद अचानक कोई ऐसा टकरा जाता है जो बेहद करीबी होता है और उसे पहचानने में पहले दिक्कत होती है और जब पहचान हो जाती है तो आंखों में हजारों सवाल होते हैं लेकिन उनके होंठ साथ नहीं देते,होंठ किसी तरह साथ भी देते हैं तो झिझक सवालों को होंठों तक आने नहीं देती। मामला है दो डाक्टरों का। जिन्होने एक साथ पढ़ाई की और फिर नौकरी में रम गए। एक से दूसरे शहर और जीवन व्यवस्थित करने की जद्दोजहद में लगे रहे। लेकिन एक दिन ऐसा आया जब वो दोनों दोस्त 25 साल बाद आमने-सामने खड़े थे। डाक्टर साहब के सिर के बाल झड़ चुके थे और चेहरे पर झुर्रियां पड़ चुकी थीं। हथेली की चमड़ियां सिकुड़ चुकी थी। ऐसी कुछ ऐसी ही स्थिति उनकी महिला मित्र की भी थी। चेहरे से तो समझ आ रहा था लेकिन 25 वर्ष पहले चेहरे पर जो आकर्षण था वो खत्म होकर जिम्मेदारियों में तब्दील हो चुका था। उम्र के इस पड़ाव में दोनों की मुलाकात अचानक एक अस्पताल में होती है जहां दोनों की ज्वाइनिंग होती है। दो-तीन दिन तक दोनों डाक्टर सिर्फ एक दूसरे को ठहर-ठहर कर देखते और फिर अपना काम करने लगते। लेकिन दोनों ये दूरी ज्यादा बर्दास्त नहीं कर पाए आखिर में तय किया कि अब बात करेंगे और पूछेंगे कि आप तो वही हो न जो कालेज में साथ पढ़ते थे। लंच का समय हुआ तो दोनों डाक्टर एक साथ बैठ गए दोनों ने अपना टिफिन खोलना शुरु कर दिया लेकिन अब भी झिझक दोनों को आपस में बात करने से रोक रही है। होंठ बोलने के लिए तैयार नहीं हैं सिर्फ आंखे आपस में बात कर रही हैं और आंखें ही एक दूसर से सवाल कर रही हैं और आंखें ही एक दूसरे को जवाब दे रही हैं। टिफिन खुल गया खाना थाली में लग गया जब खाने की बारी आई तब डाक्टर साहब के होंठों से एक शब्द निकला आप कौन से बैच की हैं और आपने पढ़ाई कहां से की है। डाक्टर साहब के एक सवाल से महिला मित्र ने कालेज का नाम लेते हुए अपना बैच बताया। धीरे से महिला डाक्टर ने कहा कि आप तो डाक्टर बेद हो न। जैसे ही महिला मित्र की जुवां से डाक्टर ने अपना नाम सुना तो उन्होंने भी तुरंत कहा कि आप तो डाक्टर रेणुका हैं ना। फिर क्या था अब तक जो होंठ बोलने के लिए तैयार नहीं थे उन्ही होंठों पर सवाल पर सवाल और दोनों का टिफिन समाप्त हो गया लेकिन सवालों का सिलसिला जारी रहा। असल में दोनों दोस्त कम एक दूसरे के प्रेमी ज्यादा थे जो 25 साल पहले बिछड़ गए थे। मोबाइल का दौर तो था नहीं और वक्त के थपेड़ों में दोनों खो से गए थे। लेकिन उम्र के इस पड़ाव में दोनों की मुलाकात क्या हुई आंखों में एक अलग ही नूर नजर आने लगा। इसकी आगे की स्टोरी पढ़नी है तो जुड़े रहिए मुखबिर के साथ।
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