IDA और BDA के अध्यक्षों की घोषणा न होने से बीजेपी की आंतरिक कलह सतह पर आई

मध्य प्रदेश भाजपा का संगठनात्मक ढांचा बहुत मजबूत माना जाता है। लेकिन उसके अंदर कितनी कलह है उसकी परतें बीच-बीच में खुलती रहती हैं। पिछले महीने करीब 35 निगम-मंडलों की घोषणा हुई लेकिन आईडीए और बीडीए को अब भी रिजर्व रखा गया है। दरअसल इंदौर आर्थिक राजधानी है तो भोपाल प्रदेश की राजधानी है। और इन दोनों जगहों पर दावेदारों की एक लंबी कतार है। भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग,कृष्णा गौर सहित भाजपा के अन्य विधायक अपने समर्थकों को बैठाना चाहते हैं जिसके कारण संगठन और सरकार हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वहीं इंदौर विकास प्राधिकरण की बात करें तो वहां के प्रभारी मंत्री खुद सीएम मोहन यादव हैं और बड़े नेताओं में कैलाश विजयवर्गीय हैं। सीएम और विजयवर्गीय के बीच संबंध पहले जैसे रहे नहीं। दोनों नेता अपने समर्थकों को अर्जेस्ट करना चाहते हैं। यही कारण है कि आईडीए और बीडीए में अध्यक्ष की घोषणा करने पर भाजपा में पेंच फंसा हुआ है। पार्टी के अंदर चल रही हाई लेवल की गुटबाजी अब पार्टी के कार्यकर्ता भी समझने लगे हैं। दवी जुवां प्रत्येक कार्यकर्ता यही कहता नजर आता है कि एक-एक नियुक्ति में बड़े नेता टांगें अड़ा रहे हैं जिसके कारण सरकार और संगठन की तरफ से नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं।
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