'इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के हाई-टेक कैमरे' फैंसी नंबर प्लेट वाले वाहन चालकों के लिए बने मुसीबत का सबब

भोपाल में फैंसी स्टाइलिश या अधूरे नंबरों वाली नंबर प्लेट लगाकर घूमते पाए गए तो भारी जुर्माने से गुजरना पड़ सकता है। भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने शहरभर में दोषपूर्ण और बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ एक विशेष मुहिम शुरु कर फैंसी नंबर वाले वाहनों को ट्रैक करना शुरु कर दिया है। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि शहर में पहली बार गलत नंबर प्लेटों को पकड़ने के लिए इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के हाई-टेक कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुखबिर को मिली सूचना के अनुसार यह अभियान 29 मई से लगातार जारी है। 29 मई से 9 जून के बीच महज डेढ़ हफ्ते में ही करीब 798 वाहन चालकों के चालान काटे जा चुके हैं। इनमें से 223 चालान सीधे ITMS कैमरों के जरिए ऑटोमैटिक जनरेट कर वाहन मालिकों के घर भेजे गए हैं। जबकि 575 उल्लंघनकर्ताओं को ऑन-ग्राउंड चेकिंग के दौरान पीओएस मशीनों के जरिए मौके पर ही दंडित किया गया है। वर्तमान में शहर के 28 चिन्हित चौराहों और थानों के 37 पॉइंट पर सघन चेकिंग चल रही है। ट्रैफिक पुलिस की जांच में पाया गया है कि वाहन मालिकों ने नंबरों को इस तरह से मॉडिफाई या डिस्टॉर्ट किया है कि वो किसी नाम या सजावटी पैटर्न जैसे दिखते हैं। मोटर वाहन अधिनियम के तहत ऐसी नंबर प्लेटें पूरी तरह से अवैध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं, अपराधों और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में वाहनों की सटीक पहचान के लिए स्टैंडर्ड नंबर प्लेट बेहद जरूरी हैं। गैर-मानक प्लेटों के कारण पुलिस को जांच में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मालिकों ने नंबरों को इस तरह से मॉडिफाई या डिस्टॉर्ट किया है कि वे किसी नाम या सजावटी पैटर्न जैसे दिखते हैं। मोटर वाहन अधिनियम के तहत ऐसी नंबर प्लेटें पूरी तरह से अवैध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं, अपराधों और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में वाहनों की सटीक पहचान के लिए स्टैंडर्ड नंबर प्लेट बेहद जरूरी हैं। गैर-मानक प्लेटों के कारण पुलिस को जांच में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब सवाल इस बात का उठता है कि आम नागरिकों पर तो पुलिस कार्रवाई कर देगी लेकिन जो नेता अपने वाहनों में फैंसी नंबर इस्तेमाल कर रहे हैं उनके खिलाफ पुलिस क्या ऐक्शन लेगी।
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