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मध्य प्रदेश

रावण का दहन करने वाले क्या श्रीराम के आदर्शों पर चलते हैं और नहीं तो उन्हें रावण दहन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि रावण का दहन करने के लिए राम चाहिए

दशहरे के मौके पर रावण दहन की चली आ रही परंपरा आज एक त्योहार बन कर रह गई है। बुराई पर अच्छाई का प्रतीक दशहरा सिर्फ इस लिए नहीं मनाया जाता कि रावण के पु...

• Oct 19, 2026• 3 min read
रावण का दहन करने वाले क्या श्रीराम के आदर्शों पर चलते हैं और नहीं तो उन्हें रावण दहन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि रावण का दहन करने के लिए राम चाहिए

📷 Cover Photo: रावण का दहन करने वाले क्या श्रीराम के आदर्शों पर चलते हैं और

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दशहरे के मौके पर रावण दहन की चली आ रही परंपरा आज एक त्योहार बन कर रह गई है। बुराई पर अच्छाई का प्रतीक दशहरा सिर्फ इस लिए नहीं मनाया जाता कि रावण के पुतले का दहन करेंगे तालियां बजाएंगे और ठहाके लगाते हुए घर चले आएंगे। रावण एक सीख है जो कोई लेना नहीं चाहता। दरअसल त्रेता युग में सिर्फ एक रावण था लेकिन कलयुग में तो घर-घर रावण हैं ऐसे में रावण का सर्वनाश कैसे होगा। रावण को मारना है तो प्रत्येक व्यक्ति के अंदर छिपे रावण को मारो न कि पुतला दहन कर रावण के जलने का मजा लो। भोपाल की गली-गली चौक चौराहों में बिक रहे रावण के पुतले भी यह अहसास दिलाने के लिए काफी हैं कि रावण हमारे अंदर जिंदा है। क्योंकि प्रति वर्श रावण का बढ़ता आकार इंसान के झूठे अहंकार को प्रदर्शित कर रहा है। रावण दहन का आयोजन करने वाली समितियां प्रति वर्ष रावण के आकार को बढ़ा रही हैं। यह सिर्फ आकार बढ़ाने अथवा प्रतिष्ठा बढ़ाने का विषय नहीं है। हकीकत यह है कि जाने-अनजाने में हम अपने अंदर के छिपे रावण को पुतले के माध्यम से प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहे हैं अन्यथा रावण दहन का त्योहार मनाना ही है तो एक छोटे से पुतले से भी त्योहार मनाया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं है। कलयुग और त्रेता युग में बहुत बड़ा अंतर है। त्रेता में भगवान श्रीराम अपने पिता के वचन के लिए 14 वर्ष के लिए वन-वन भटके लेकिन ऐसे पुत्र अब कहां हैं जो पिता की आज्ञा का पालन करते हों। जब ऐसे पुत्र ही नहीं हैं तो राम कहां से आएंगे। क्या रावण दहन करने वाले लोग भगवान राम बनने का प्रयास कर रहे हैं। क्योंकि रावण का दहन करने के लिए राम बनना होता है। चलिए राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे ईश्वर के अवतार थे लेकिन उन्होंने धरती में मानव जीवन के प्रत्येक मूल्यों का निर्वहन किया इसी लिए वो मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। आज जो भी तथाकथित लोग रावण का दहन कर रहे हैं क्या उन्होंने भगवान श्रीराम के किसी भी चरित्र का रत्ती भर अनुसरण किया है। रावण दहन करने वाला ऐसा कोई भी व्यक्ति क्या छाती ठोंक कर कह सकता है कि वो भगवान श्रीराम के आदर्शों पर अक्षरशह चलता है। और जब ऐसा नहीं है तो रावण का वध करने का उसको अधिकार किसने दिया। क्योंकि रावण एक अधर्मी और अत्याचारी जरुर था लेकिन वो ज्ञानी भी था। उसमें अधर्म को छोड़ कर गुणों का भंडार था। इसी लिए रावण जैसे अधर्मी राक्षस को मारने के लिए भगवान विष्णु के अंश भगवान श्रीराम ने जन्म लिया। मतलब साफ है कि रावण दहन करना है तो भगवान श्रीराम के आदर्शों का पालन भी कीजिए अन्यथा इस दहन का इतने बड़े आडंबर का क्या मतलब। लोग रावण दहन में बच्चों को ले जाते हैं रावण दहन दिखाते हैं लेकिन कभी यह नहीं बताते कि गलत काम करने वाले का एक दिन ऐसा ही हश्र होता है।

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