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मध्य प्रदेश

विंध्य में कांग्रेस की 'दुर्दशा' का कारण गलत टिकट वितरण और सोशल इंजीनियरिंग

सत्ता की दहलीज पार करने के लिए कांग्रेस प्रयास तो लगातार करती है लेकिन कांग्रेस जितना सत्ता की दहलीज पार करने की कोशिश करती है उतना ही दहलीज दूर होती ...

• Oct 19, 2026• 3 min read
विंध्य में कांग्रेस की 'दुर्दशा' का कारण गलत टिकट वितरण और सोशल इंजीनियरिंग

📷 Cover Photo: विंध्य में कांग्रेस की 'दुर्दशा' का कारण गलत टिकट वितरण और स

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सत्ता की दहलीज पार करने के लिए कांग्रेस प्रयास तो लगातार करती है लेकिन कांग्रेस जितना सत्ता की दहलीज पार करने की कोशिश करती है उतना ही दहलीज दूर होती चली जाती है। खास कर कांग्रेस को जिस प्रकार से विंध्य की जनता ने नकारा है उसका कोई तोड़ ही कांग्रेस नहीं निकाल पाई है। दरअसल साल 2018 से विंध्य की जनता ने कांग्रेस से किनारा किया है। इसके पहले श्रीनिवास तिवारी और अर्जुन सिंह जैसे नेता जब तक विंध्य में थे तब तक वो कांग्रेस को जिंदा रखने में कामयाब थे लेकिन इन नेताओं के दिवंगत होते ही कांग्रेस विंध्य में अनाथ हो गई। कमलेश्वर पटेल जैसे नेता विंध्य में टिकट का बंटवारा करने लगे। खुद की सीट बचा नहीं पाए लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता बन गए। इन सभी बातों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने एक बड़ा बयान दिया जो पूरी तरह से सच्चाई बयां करता है। सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि विंध्य में कांग्रेस के पिछड़ने का कारण गलत टिकट वितरण और सोशल इंजीनियरिंग में फ़ैल होना है। दरअसल विंध्य ब्राह्मण बाहुल क्षेत्र है वहां पर सभी जातियों को एक करने के बाद भी ब्राह्मणों की संख्या ज्यादा होती है लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस ने विंध्य में सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण कांग्रेस की विंध्य में दुर्दशा हो रही है। दरअसल कमलेश्वर पटेल पूर्ण रुप से एक जातिवादी नेता हैं। और वो चाहते हैं कि प्रत्येक सीट से कुर्मी समाज के लोगों को ही टिकट मिले। पार्टी हारे चाहे जीते इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है बस टिकट कुर्मी समाज के लोगों को ही मिलना चाहिए। कांग्रेस की तुलना में बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग काफी मजबूत है। प्रत्येक सीट पर भाजपा सोशल इंजीनियरिंग के तहत ही मजबूत उम्मीदवार का चयन करती है और भाजपा की जीत का आधार भी सोशल इंजीनियरिंग ही है। साल 2018 में जब भाजपा को प्रदेश भर में 107 सीटें मिली थीं और भाजपा सत्ता की दहलीज तक पहुंचते-पहुंचते रह गई थी। उस दौरान भी विंध्य ने भाजपा को 25 विधायक दिए थे। अगर विंध्य की जनता ने भाजपा का साथ नहीं दिया होता तो सिंधिया के भाजपा में आने का कोई मतलब नहीं होता। ये बात और है कि विंध्य जिस प्रकार से भाजपा को झोली भर कर विधायक और सांसद दे रहा है उतना भाजपा की सरकार विंध्य को नहीं दे रही है। भाजपा सिर्फ विंध्य का दोहन कर रही है और बदले में राजेन्द्र शुक्ल जैसे नेता को डिप्टी सीएम बना कर विंध्य की जनता के ज़ख्म में नमक छिड़कने का काम कर रही है।

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