Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

रीवा के भाजपा नेताओं में 'महाभारत' पंजाछाप भाजपाई चाट रहे सत्ता की चासनी मूल भाजपाई बने 'फूफा'

मध्य प्रदेश भाजपा के सामने चुनौतियों का ऐसा अंबार है जिसे खत्म करने के लिए 2028 भी कम पड़ जाएगा। दरअसल साल 2023 से 24 के बीच भाजपा ने लाखों कांग्रेसिय...

• Oct 17, 2026• 2 min read
रीवा के भाजपा नेताओं में 'महाभारत' पंजाछाप भाजपाई चाट रहे सत्ता की चासनी मूल भाजपाई बने 'फूफा'

📷 Cover Photo: रीवा के भाजपा नेताओं में 'महाभारत' पंजाछाप भाजपाई चाट रहे सत

ADVERTISEMENT
Font Size:
मध्य प्रदेश भाजपा के सामने चुनौतियों का ऐसा अंबार है जिसे खत्म करने के लिए 2028 भी कम पड़ जाएगा। दरअसल साल 2023 से 24 के बीच भाजपा ने लाखों कांग्रेसियों को पार्टी में ज्वाइन तो करा लिया लेकिन उसके साइड इफेक्ट के बारे में नहीं सोचा। कुछ ऐसा ही हाल रीवा में देखने को मिला जहां श्रीनिवास तिवारी के नाती सिद्धार्त तिवारी को न सिर्फ भाजपा में ज्वाइन कराया गया बल्कि श्यामलाल द्विवेदी का टिकट काट कर उन्हें टिकट भी दिया गया और त्योंथर की जनता ने जिताया भी लेकिन चुनाव जीतते ही सिद्धार्त अपने रंग में आ गए। सालों से निर्जीव पड़े कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शरीर में उन्होंने जान डालने का काम किया। जितने भी कांग्रेस के नेता थे वो सभी हाथ में कमल का फूल लेकर सिद्धार्त तिवारी के साथ हो लिए और जो मूल भाजपा के कार्यकर्ता थे वो खुद को ठगा सा महसूस करने लगे। अब हाल ये है कि तथाकथित भाजपा कार्यकर्ता सत्ता की चासनी चाट रहे हैं और टाट दरी बिछाने वाले भाजपा के कार्यकर्ता फूफा की भूमिका में नजर आ रहे हैं। आखिर ऐसा हो भी क्यों नहीं। सिद्धार्त तिवारी को जब चुनाव जिताने की बारी आई तो भाजपा के कार्यकर्ता सामने थे और जब चासनी चाटने की बारी आई तो कांग्रेस के कार्यकर्ता सामने आ गए। विधायक सिद्धार्त तिवारी ने आंख में ऐसा चश्मा लगाया है जिन्हें सभी लोग भाजपाई दिखाई पड़ रहे हैं। हाल ही में त्योंथर के तहसील भवन के गृह प्रवेश में पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी को कुर्सी नहीं दी गई जिससे वो काफी नाराज़ नजर आए। मौके पर पहुंचे भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं ने भाजपा के विरोध में ही जमकर नारा लगाया। अब तक जो लड़ाई पर्दे के पीछे चल रही थी वहीं लड़ाई अब पर्दे के सामने आ गई। भाजपा का यह विवाद सतह पर आने के बाद भी नेतृत्व अब तक नहीं चेता है। जो विंध्य भाजपा का गढ़ माना जाता है वही विंध्य अंतर्कलह से जूझ रहा है जिसका हल प्रदेश नेतृत्व को निकालना पड़ेगा।

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT